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माखनलाल चतुर्वेदी: घड़ियों को बरस बनाते कवि का जीवन

✍️ Satish Kumar 📅 April 03, 2026

माखनलाल चतुर्वेदी: घड़ियों को बरस बनाते कवि का जीवन

काव्य डेस्क

📑 इस लेख में: (Table of Contents)

माखनलाल चतुर्वेदी
📸 माखनलाल चतुर्वेदी: घड़ियों को बरस बनाते कवि का जीवन

यह कविता माखनलाल चतुर्वेदी के जीवन के उस पहलू को दर्शाती है जहाँ वे समय को अपने कर्मों और विचारों से सार्थक बनाते हैं। पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:

किस प्रकार घड़ियाँ गिनता हूँ
दिन के बरस बनाता हूँ

खान-पान की ज्ञान-ध्यान की
धूनी यहाँ रमाता हूँ।

तुमको आया जान, वायु में
बाँहों को फैलाता हूँ

चरण समझते हुए सीखचों
पर मैं शीश झुकाता हूँ।

सुध-बुध खोने लगे, कहो
क्या पूरी नहीं सुनोगे तान?
होता हूँ क़ुरबान, बताओ—
किस क़ीमत पर लोगे जान?

इन पंक्तियों में कवि न केवल समय के बीतने का वर्णन करते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि वे हर पल को ज्ञान और ध्यान में लीन रहकर कैसे अनमोल बनाते हैं। वे मानते हैं कि जीवन का हर क्षण, चाहे वह शारीरिक हो या आत्मिक, सीखने और अनुभव करने का अवसर है।

माखनलाल चतुर्वेदी: एक परिचय

पंडित माखनलाल चतुर्वेदी (4 अप्रैल 1889 – 30 जनवरी 1968) हिंदी के एक प्रतिष्ठित कवि, पत्रकार, लेखक और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्हें 'एक भारतीय आत्मा' के उपनाम से भी जाना जाता है। उनकी रचनाएँ राष्ट्रीयता, देशभक्ति और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत हैं।

प्रमुख रचनाएँ और उनका महत्व

  • 'हिमतरंगिनी': इस काव्य संग्रह के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • 'वेणु लो गूँजे धरा': यह भी उनकी महत्वपूर्ण रचनाओं में से एक है।
  • 'कर्मवीर' पत्रिका: उन्होंने कर्मवीर पत्रिका का संपादन किया, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जन-जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चतुर्वेदी जी का जीवन समर्पण और त्याग का प्रतीक था। उन्होंने अपनी लेखनी और अपने कार्यों से देशवासियों में नवचेतना का संचार किया। उनकी कविताएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी स्वतंत्रता संग्राम के समय थीं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म कब हुआ था?

माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म 4 अप्रैल 1889 को हुआ था।

2. माखनलाल चतुर्वेदी को किस उपनाम से जाना जाता है?

उन्हें 'एक भारतीय आत्मा' के उपनाम से जाना जाता है।

3. माखनलाल चतुर्वेदी को किस रचना के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला?

उन्हें 'हिमतरंगिनी' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था।

4. चतुर्वेदी जी किस पत्रिका के संपादक थे?

वे 'कर्मवीर' पत्रिका के संपादक थे।

5. उनकी कविताओं का मुख्य विषय क्या था?

उनकी कविताओं का मुख्य विषय राष्ट्रीयता, देशभक्ति और मानवीय मूल्य थे।

6. माखनलाल चतुर्वेदी का निधन कब हुआ?

उनका निधन 30 जनवरी 1968 को हुआ।

7. क्या उनकी रचनाएँ आज भी प्रासंगिक हैं?

हाँ, उनकी रचनाएँ आज भी देशभक्ति और मानवीय मूल्यों के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक हैं।

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