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October 24, 2018 , ,
ये हैं धौनी के जीवन से जुड़ी 36 खास बातें, फिल्म में भी नहीं थी कुछ चीजें
1. महेंद्र सिंह धौनी का जन्म पान सिंह और देवकी देवी के घर हुआ था। वो मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के हैं, लेकिन पिता पान सिंह की नौकरी के चलते उनका परिवार उत्तराखंड से रांची पलायन कर गया था। उनका एक भाई (नरेंद्र) और एक बहन (जयंती) हैं।

2. धौनी की खेल में दिलचस्पी फुटबॉल व बैडमिंटन से शुरू हुई थी। फुटबॉल में वो स्कूल टीम के गोलकीपर भी थे, लेकिन कम उम्र में स्कूल के स्पोर्ट्स टीचर केशव रंजन बेनर्जी ने उनकी प्रतिभा को पहचान लिया। क्रिकेट टीम में विकेटकीपर की गैरमौजूदगी में बेनर्जी ने धौनी को इसके लिए तैयार किया और उसके बाद माही ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

3. 1997-98 में वीनू मांकड़ ट्रॉफी अंडर-16 चैंपियनशिप धौनी के क्रिकेट करियर का पहला बड़ा पल था। उस टूर्नामेंट में अच्छे प्रदर्शन ने उन्हें स्थानीय क्रिकेट सर्किट में एक चर्चित नाम बना दिया था। दसवीं कक्षा पास करने के बाद धौनी ने पूरी तरह से क्रिकेट पर ध्यान देना शुरू कर दिया था।

4. धौनी के करियर में 1999-2000 की कूच बिहार ट्रॉफी की काफी चर्चा होती है। उस टूर्नामेंट के फाइनल में धौनी और युवराज सिंह पहली बार आमने-सामने आए थे। बिहार अंडर-19 टीम की तरफ से खेलते हुए धौनी ने पहली पारी में 84 रन बनाए थे, जबकि उनकी टीम 357 रन बनाकर ऑलआउट हो गई थी। जवाब में पंजाब टीम के कप्तान युवराज सिंह ने अकेले ही बिहार की पूरी टीम से ज्यादा रन बना दिए थे। युवी ने 404 गेंदों पर 358 रन बनाए थे। पंजाब की टीम ने 5 विकेट पर 839 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया था।

5. धौनी ने रणजी ट्रॉफी के जरिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट करियर की शुरुआत भी 1999-2000 के सत्र में की थी। अपने पहले ही मैच में असम के खिलाफ 18 वर्षीय धौनी ने नाबाद 68 रनों की पारी खेलकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा था।

6. उनके क्रिकेट करियर के दौरान एक ऐसा मोड़ भी आया था जब वो असमंजस में पड़ गए थे। 2001 से 2003 के बीच उन कुछ सालों में धौनी ने खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर टीटी की नौकरी भी की।

7. धौनी ने इस बीच अपने क्रिकेट करियर को खड़ा करने के लिए टेनिस बॉल क्रिकेट तक खेला, जिस दौरान अपने दोस्त से सीखा हुआ उनका चर्चित हेलीकॉप्टर शॉट पहली बार फैंस ने देखा।

8. 2003-04 के देवधर ट्रॉफी में धौनी ने ऐसा धमाल मचाया था कि वो छा गए। उन्होंने 4 मैचों में 244 रन बनाकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था।

9. बीसीसीआइ द्वारा छोटे शहरों में प्रतिभा ढूंढने वाली टीआरडब्ल्यू नाम की एक यूनिट गठित की गई थी। इस यूनिट के प्रकाश पोद्दार ने 2003 में धौनी को झारखंड के लिए खेलते देखा और वो उनके कायल हो गए। उन्होंने इसकी जानकारी राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) में दे दी।
10. 2003-04 के घरेलू वनडे टूर्नामेंट में धौनी ने इतना धमाल मचाया कि उन्हें सीधे इंडिया-ए टीम में चुन लिया गया। वो उस टीम के साथ जिंबाब्वे और केन्या के दौरे पर गए। 

11. जिंबाब्वे में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद जब इंडिया-ए टीम केन्या पहुंची तो वहां त्रिकोणीय वनडे सीरीज में केन्या के अलावा पाकिस्तान की जूनियर टीम भी मौजूद थी। धौनी ने इस टूर्नामेंट की छह पारियों में 362 रन बनाकर भारतीय कप्तान सौरव गांगुली का ध्यान पहली बार अपनी तरफ खींचा था।

12. 2000 की शुरुआत से लेकर विश्व कप 2007 के बीच भारतीय क्रिकेट टीम ने दिग्गज बल्लेबाज राहुल द्रविड़ को विकेटकीपर के रूप में आजमाया था और कई सालों तक उन्हीं से काम चलाया गया। इसी दौरान जब एक विशेषज्ञ विकेटकीपर-बल्लेबाज की जरूरत महसूस हुई तो धौनी के लिए रास्ता खुला।

13. धौनी को पहली बार 2004-05 के बांग्लादेश दौरे के लिए वनडे टीम में शामिल किया गया। यहां बेहद खराब शुरुआत हुई। वो पहले ही मैच में शून्य पर आउट हो गए।

14. खराब शुरुआत के बावजूद भारतीय कप्तान ने उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए चुनने की इच्छा जताई। धौनी ने इस टूर्नामेंट के दूसरे ही मैच में विशाखापट्टनम के मैदान पर पाक के खिलाफ 123 गेंदों पर 148 रनों की धुआंधार पारी खेल डाली। ये किसी भी भारतीय विकेटकीपर द्वारा सबसे बड़ा स्कोर था।

15. श्रीलंका के खिलाफ 2005 की वनडे सीरीज में धौनी का आक्रामक रूप एक बार फिर दिखा जब जयपुर में उन्होंने 145 गेंदों पर नाबाद 183 रनों की धुआंधार पारी खेलकर टीम इंडिया को जीत दिलाई। ये उनका वनडे का सर्वश्रेष्ठ स्कोर है। उसी साल वनडे क्रिकेट में दिनेश कार्तिक के खराब प्रदर्शन के बाद टेस्ट टीम में भी उनको जगह मिल गई।

16. लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले धौनी अप्रैल 2006 में तब एक बार फिर सुर्खियों में छा गए जब बल्लेबाजों की आइसीसी वनडे रैंकिंग्स में उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज रिकी पोंटिंग को पीछे छोड़कर शीर्ष स्थान हासिल किया। हालांकि ये स्थान एडम गिलक्रिस्ट ने एक हफ्ते बाद उनसे छीन लिया था।

17. माही को लगातार अच्छे प्रदर्शन के आधार पर पहली बार विश्व कप टीम में शामिल किया गया। ये मौका था वेस्टइंडीज में 2007 विश्व कप का।

18. टीम इंडिया 2007 विश्व कप में बांग्लादेश के खिलाफ हार गई थी। बाद में भारतीय टीम को पहले ही राउंड में बाहर का रास्ता देखना पड़ा था। इसका गुस्सा भारत में दिखा और फैंस ने रांची में उनके घर को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया।

19. धौनी को 2007 में पहली बार वनडे टीम का उपकप्तान बनाया गया और उसी साल जून में उन्हें पहली बार बीसीसीआइ ने ग्रेड-ए का अनुबंध दिया।

20. धौनी को 2007 में पहले टी20 विश्व कप के लिए भारत का कप्तान बनाया गया। सचिन, गांगुली और द्रविड़ जैसे दिग्गजों ने टी20 न खेलने का फैसला लिया था और युवराज ने कप्तान बनने से इनकार कर दिया था। भारत ने ये विश्व कप जीतकर इतिहास रचा और लंबे बालों वाले धौनी दुनिया में छा गए।

21. सितंबर 2007 में ही उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान वनडे टीम का कप्तान बनाया गया जबकि अगले साल नवंबर में कुंबले के संन्यास के बाद उन्हें पूर्ण रूप से तीनों फॉर्मेट में भारत का कप्तान घोषित कर दिया गया। इसके अगले साल यानी 2009 में भारत ने उन्हीं की कप्तानी में आइसीसी टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया।

22. 2011 में भारतीय टीम ने उन्हीं की कप्तानी में वनडे विश्व कप जीता। धौनी ने फाइनल में मैच जिताऊ पारी खेली और छक्के के साथ देश का 28 साल का इंतजार खत्म किया।

23. साल 2013 में धौनी की कप्तानी में भारत ने वो खिताब भी जीत लिया जिसकी कसर बाकी थी। ये खिताब था आइसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का।

24. मार्च 2013 में धौनी ने सौरव गांगुली के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए सबसे सफल भारतीय टेस्ट कप्तान बनने का गौरव हासिल किया। गांगुली की कप्तानी में भारत ने 49 टेस्ट में से 21 में जीत दर्ज की थी। यही नहीं, 2016 में रिकी पोंटिंग को पीछे छोड़ते हुए वो सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैचों में कप्तानी करने वाले खिलाड़ी भी बन गए। 

25. दिसंबर 2014 में धौनी ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अपने व टीम के ढलते प्रदर्शन को देखते हुए अचानक सीरीज के बीच में टेस्ट से संन्यास की घोषणा कर दी। ये जिम्मेदारी उसी समय विराट को सौंप दी गई थी।

26. जनवरी 2017 में धौनी ने अचानक वनडे व टी20 टीम की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया। इसके साथ ही विराट कोहली तीनों फॉर्मेट के कप्तान बन गए।

27. आइपीएल में धौनी शुरुआत (2008) से ही चेन्नई सुपरकिंग्स टीम के कप्तान रहे और उनकी कप्तानी में चेन्नई ने 2010 और 2011 में आइपीएल का खिताब, जबकि 2010 और 2014 में चैंपियंस लीग टी20 के खिताब जीते। चेन्नई की टीम दो सालों के लिए निलंबित होने के बाद वो पुणे की टीम के कप्तान बने। फिर 2017 सीजन में अचानक उन्हें कप्तानी से हटा दिया गया। हालांकि इस टीम के साथ भी वो आइपीएल खिताब जीतने में सफल रहे।

28. 2011 विश्व कप जीत के बाद फोर्ब्स पत्रिका ने धौनी को दुनिया के सबसे अमीर खिलाड़ियों की सूची में 28वें पायदान पर रखा था। वो 28 मिलियन डॉलर की सालाना कमाई के साथ उस समय क्रिकेट इतिहास के सबसे अमीर खिलाड़ी बने थे। फिलहाल ताजा आंकड़ों के मुताबिक विराट कोहली ने उन्हें पीछे छोड़ दिया है और अब तकरीबन 20 मिलियन डॉलर की कमाई के साथ दुनिया के दूसरे सबसे अमीर क्रिकेटर हैं।

29. धौनी ने 2010 में अपने जन्मदिन से ठीक तीन दिन पहले अचानक देहरादून की साक्षी रावत से शादी कर ली। सबको इन दोनों की नजदीकियों की खबर तो थी लेकिन धौनी ने 3 जुलाई को सगाई की जबकि फटाफट अगले दिन ही शादी करके सबको चौंका दिया था। उन्होंने अपनी शादी में सिर्फ कुछ करीबी लोगों को बुलाया जिसमें क्रिकेटर आरपी सिंह और बॉलीवुड स्टार जॉन अब्राहम भी शामिल थे।

30. धौनी शुरुआत से जॉन अब्राहम के फैन थे और यही वजह थी कि उन्होंने शुरुआत में लंबे बाल रखे हुए थे। बाद में धौनी और जॉन अच्छे दोस्त बन गए और देखते-देखते दोनों ने लंबे बालों से तौबा कर ली। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने एक क्रिकेट मैच के अंत में धौनी के बालों की तारीफ भी की थी और उन्हें अपने बाल न कटाने की सलाह तक दे डाली थी।

31. अपने दोस्त जॉन अब्राहम की तरह धौनी को भी बाइकों का शौक रहा है। जैसे-जैसे कमाई बढ़ती गई, धौनी का बाइक कलेक्शन भी बढ़ता गया। कुछ खबरों के मुताबिक आज धौनी तकरीबन दो दर्जन बाइकों के मालिक हैं। जिसमें हेलकैट, हार्ले डेविडसन जैसे महंगी बाइकों के साथ-साथ उनकी सबसे पुरानी व पहली बाइक भी उनके साथ है।

32. धौनी 6 फरवरी 2015 को पिता बने। साक्षी ने एक बेटी को जन्म दिया जिसका नाम उन्होंने जीवा रखा है।

33. क्रिकेट के अलावा धौनी व्यापार की दुनिया में भी सक्रिय रहे हैं। धौनी हॉकी इंडिया लीग में खेलने वाली टीम रांची रेज के सह-मालिक हैं। इंडियन सुपर लीग में वो चेन्नईयिन फुटबॉल क्लब के सह-मालिक हैं। इसके अलावा बाइक रेसिंग की दुनिया में भी उन्होंने कदम रखा और अभिनेता नागार्जुन के साथ सुपस्पोर्ट विश्व चैंपियनशिप में टीम खरीदी जिसका नाम माही रेसिंग टीम इंडिया रखा गया। 

34. धौनी अपने इस पूरे सफर के दौरान कई अवॉर्ड भी जीतते आए हैं। उन्हें 2007-08 में सरकार ने राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं, क्रिकेट की दुनिया में उन्होंने 2008 और 2009 में आइसीसी वनडे प्लेयर ऑफ द इयर और 2013 में एलजी पीपल्स चॉइस अवॉर्ड भी जीता। इसके अलावा 2008 से 2014 तक लगातार सात सालों तक वो आइसीसी वनडे टीम में शामिल रहे, जबकि 2009, 2010 और 2013 में आइसीसी वर्ल्ड टेस्ट इलेवन में शामिल रहे। अगस्त 2011 में इंग्लैंड के लेस्टर में स्थित प्रतिष्ठित डी मोंटफोर्ट यूनिवर्सिटी उन्हें मानद उपाधि से सम्मानित कर चुकी है। वहीं, उसी साल नवंबर में उन्हें भारतीय प्रादेशिक सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल बनाया गया।

35. सातवें महीने की सातवीं तारीख में जन्म लेने वाले धौनी का 7 नंबर से जुड़ाव हमेशा से रहा है। वो इसे अपना लकी नंबर मानते आए हैं। भारतीय टीम हो या आइपीएल की टीम, हर जगह उनका जर्सी नंबर.7 ही रहा है। उनके बल्ले और हेल्मेट से लेकर कीपिंग ग्लव्स तक हर जगह ये नंबर लिखा देखा जा सकता है। उनकी ज्यादातर गाड़ियों व बाइकों में भी यही नंबर छाया हुआ है। 

36. अपने इस स्वर्णिम सफर के दौरान धौनी कई बार विवादों और आलोचनाओं के बीच भी नजर आए। 2013 में उन पर हितों के टकराव का आरोप लगा, दावों के मुताबिक रिति स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में धौनी की हिस्सेदारी थी। सीनियर खिलाड़ियों के टीम से बाहर होने को लेकर भी उन्हें घेरा गया। इसके अलावा युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने धौनी को उनके बेटे के ढलते करियर का जिम्मेदार बताया और काफी आलोचना की। वहीं, 2013 के आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग कांड में जब उनकी टीम चेन्नई सुपरकिंग्स और टीम के मालिक एन.श्रीनिवासन विवादों में घिरे तो धौनी का नाम भी इसमें घसीटा गया। वहीं, एक मैगजीन के कवर पेज पर भगवान विष्णु के रूप में धौनी का दिखना भी विवादों का कारण बना और मामला अदालत तक जा पहुंचा था। 

October 24, 2018 , ,
कैप्टन कूल कहे जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी टीम इंडिया के सबसे सफलतम कप्तान माने जाते हैं। एम एस धोनी का ये 36वां जन्मदिन है। इस हफ्ते धोनी की शादी की सालगिरह भी थी।

Birthday Special journey from Mahendra Singh Dhoni Ticket Collector2004 से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले माही आज किकेट की बुलंदियों पर है। 7 जुलाई 1981 को जन्मे धोनी के लिए यह जन्मदिन इसलिए भी बहुत खास है, क्योंकि इस बार उनके साथ उनकी बेटी जीवा भी हैं।

कुछ सालों पहले महज 300 रुपए के लिए काम करने वाले धोनी पर आज करोड़ों की बरसात होती है। हर बड़ा ब्रांड उनके लिए लाइन लगाए खड़ा रहता है, लेकिन आसमान की इस ऊंचाई पर पहुंचने के लिए धोनी को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

एक छोटे शहर की गलियों में क्रिकेट खेलने वाले धोनी कैसे आज इस मुकाम पर पहुंचे इसकी कहानी बेहद दिलचस्प है।

महेंद्र सिंह धोनी का बचपन

महेंद्र सिंह धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 को झारखंड के रांची में हुआ था, उनके पिता का नाम पान सिंह और मां का नाम देवकी देवी है, धोनी की एक बहन जयंती और एक भाई नरेंद्र भी है।

धोनी के परिजनों ने कभी सोचा भी नहीं था, कि उनका बेटा एक दिन पूरी दुनिया में उनका और अपने देश का नाम रौशन करेगा। धोनी की पढ़ाई रांची के जवाहर विद्यालय में हुई, इसी स्कूल में सबसे पहले धोनी ने क्रिकेट का बल्ला भी थामा था।

टिकट कलेक्टर की नौकरी

धोनी ने पहली बार 18 साल की उम्र में रणजी मैच खेला था, धोनी बिहार रणजी टीम की तरफ से खेलते थे, इसी दौरान रेलवे में बतौर टिकट कलेक्टर धोनी की नौकरी भी लग गई और उनकी पहली पोस्टिंग पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में हुई थी।

2001 से 2003 तक धोनी खड़गपुर के स्टेडियम में क्रिकेट खेला करते थे, 22 साल की उम्र में धोनी रेलवे की नौकरी करने खड़गपुर पहुंचे, लेकिन धोनी को ये नौकरी रास नहीं आई।

धोनी को तो कुछ और ही करना था, यही वजह थी कि खड़गपुर में धोनी ने क्रिकेट की अपनी एक नई दुनिया बसा ली, धोनी वहां रेलवे की टीम के लिए खेला करते थे।

धोनी के बारे में कुछ दिलचस्प बातें

* अपने स्कूली दिनों में धोनी स्कूल की फुटबॉल टीम में बतौर गोलकीपर खेला करते थे।

* 1998 में महेंद्र सिंह धोनी को सेंट्रल कोल लिमिटेड (सीसीएल) ने अपनी टीम में शामिल किया।

* सीसीएल की ओर से तब उन्हें 2200 रुपए महीने स्टाइपेंड दिया जाता था।

* उनकी यह सैलरी दूसरे प्‍लयर्स से 200 रुपए ज्यादा थी, क्योंकि उन्हें मैचविनर प्लेयर माना जाता था।

* महेंद्र सिंह धोनी मोटर साइकल/बाइक्स के दीवाने/शौकीन हैं।

* टीम इंडिया को आईसीसी के तीनों बड़े खिताब दिलाने वाले अकेले कप्‍तान हैं।

* महेंद्र सिंह धौनी के पसंदीदा अभिनेता अमिताभ बच्चन हैं। वे उनकी एक्टिंग के प्रशंसक रहे हैं और उनकी लगभग सभी हिट फिल्में देखीं हैं. वहीं उन्हें लता मंगेशसकर के गाने बहुत पसंद है।

* महेंद्र सिंह धौनी का जन्म वर्ष 1981 में सात जुलाई को हुआ था। विशेष बात यह है कि उनकी जन्मतिथि तो सात है ही, जुलाई का महीना भी वर्ष का सातवां महीना है। वहीं उनकी जर्सी भी नंबर सात ही है।

July 21, 2017 , ,
हरमनप्रीत ने सेमीफाइनल में छुड़ाए कंगारुओं के छक्के, बनाए ये 8 रिकॉर्ड...भारतीय महिला क्रिकेट टीम का हरफनमौला खिलाड़ी हरमनप्रीत कौर ने गुरुवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नाबाद 171 रन की पारी खेलकर सबका मन मोह लिया। हरमनप्रीत ने 115 गेंदों में 171 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 20 चौके और 7 गगनचुंबी छक्के भी जड़े। पारी के दौरान हरमनप्रीत का स्ट्राइक रेट 148.69 का रहा। उनकी इस धमाकेदार पारी की बदौलत ही टीम इंडिया डिफेंडिंग चैंपियन के सामने जीत के लिए 282 रन का लक्ष्य रख सकी। अपनी इस पारी के दौरान हरमन ने न केवल महिला क्रिकेट के बल्कि पुरुषों की क्रिकेट के कुछ रिकॉर्ड्स को चुनौती दे डाली। आईए उन रिकॉर्ड्स पर नजर डालें जिन्हें हरमनप्रीत ने अपने नाम किए।

महिला क्रिकेट की पांचवीं सबसे बड़ी पारी
हरमनप्रीत का 171 रन की नाबाद पारी महिला वनडे क्रिकेट की पांचवीं सबसे बड़ी पारी है। महिला क्रिकेट की सबसे बड़ी बड़ी पारी ऑस्ट्रेलिया की बेलिंडा क्लार्क के नाम दर्ज है। उन्होंने साल 1997 में नाबाद 229 रन बनाए थे। इसके बाद दूसरी सबसे बड़ी पारी भारत की दीप्ति शर्मा(188), तीसरी श्रीलंका की चमारी अटापट्टू(178) और चौथी इंग्लैंड की चार्लोट एडवर्ड्स(188) के नाम दर्ज है। 

मौजूदा विश्वकप की दूसरी बड़ी पारी 
हरमनप्रीत की पारी मौजूदा विश्वकप की रनों के लिहाज से दूसरी सबसे बड़ी पारी है। इसी विश्वकप के दौरान श्रीलंका की चमारी अटापट्टू ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लीग मैच के दौरान नाबाद 178 रन बनाए थे। वह इस रिकॉर्ड की बराबरी करने से 7 रन से चूक गईं।   

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरी बड़ी पारी 
ऑस्ट्रेलियाई महिला टीम के खिलाफ सबसे ज्यादा रन बनाने वाली दुनिया की दूसरी खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड भी हरमन ने अपने नाम किया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हरमन से ज्यादा रन श्रीलंका की चमारी अटापट्टू(178) ने बनाए हैं। इस सूची में तीसरे नंबर पर न्यूजीलैंड की कप्तान सूजी बेट्स हैं। बेट्स ने साल 2012 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नाबाद 122 रन बनाए थे। 

नॉकआउट इंटरनेश्नल में  सबसे बड़ी पारी(मेल और फीमेल)   
अपनी इस धुआंधार पारी के साथ ही हरमनप्रीत ने किसी भी नॉक आउट इंटरनेशनल मैच में सर्वाधिक व्यकितगत स्कोर बनाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। हरमनप्रीत से पहले ऐसा कारनामा करने वाले खिलाड़ियों में पुरुष क्रिकेट के तीन खिलाड़ी हैं। इनमें मार्टिन गप्टिल(237), सनथ जयसूर्या(189) और मार्क वा(173) का नाम शामिल है।

नॉक ऑउट में 150+ पारी खेलने वाली पहली भारतीय 
किसी वनडे नॉकआउट में 150 रन से ज्यादा की पारी खेलने वाली हरमनप्रीत पहली भारतीय बल्लेबाज है। पुरुष खिलाड़ी भी आज तक इस मुकाम पर नहीं पहुंच पाए हैं। विश्व में अबतक केवल 6 खिलाड़ी यह कारनामा कर पाए हैं।

नॉकऑउट दौर में किसी भारतीय की सबसे बड़ी पारी 
इस पारी से पहले नॉकआउट मैच में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड कप्तान मिताली राज के नाम दर्ज था। मिताली ने साल 2006 में एशिया कप के फाइनल में नाबाद 108 रन बनाए थे। 

महिला विश्वकप में भारतीय की सबसे बड़ी पारी 
महिला विश्वकप में किसी भारतीय द्वारा खेली गई सबसे लंबी पारी का रिकॉर्ड अब हरमन के नाम दर्ज हो गया है। इससे पहले महिला विश्वकप में भारतीय द्वारा खेली गई सबसे बड़ी पारी का रिकॉर्ड मिताली राज के नाम दर्ज था। मिताली ने इसी विश्वकप में आखिरी लीग मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ 109 रन की पारी खेली थी। 

नॉक आउट दौर में शतक बनाने वाली दूसरी दुनिया की दूसरी खिलाड़ी 
हरमनप्रीत महिला विश्वकप के नॉकआउट दौर में शतक बनाने वाली दूसरी खिलाड़ी हैं। उनसे पहले साल 2005 के विश्वकप के फाइनल में केरन राल्टन ने नाबाद 107 रन बनाए थे। 

July 17, 2017 ,
Woah! Sports Betting May Finally Become Legal In India; Sports Ministry Exploring Possibilities!In one of the biggest sports reform ever introduced, India Govt. is right now framing guidelines, which can make sports betting as a legal activity in the country.

If that happens, then approximately Rs 9.6 lakh crore worth of sports betting would be legalised, which can bring in lakhs of crores in tax revenues.

But can Govt. of India ignore the social stigma which comes with sports betting? What is the main reason behind Govt.’s push for legalising sports betting?

Legalized Sports Betting in India: The Process Is On!

As per Doha-based International Centre for Sports Security, sports betting in India is a massive market to the tune of $150 billion or Rs 9.6 lakh crore, and now, Govt. wants to legalise it.

In fact, right now, Sports Ministry officials are preparing a Memorandum of Understanding or MoU between Indian Govt. and UK Govt. which will explore the possibilities of sports betting in India, and derive the pros and cons.

As per reports coming in, Sports Ministry has taken the initiative and is right now consulting with countries such as the UK, where sports betting is legal and generates a substantial amount of tax income for the Govt.

An official said, “The department is preparing a MoU with the UK and the aspect of betting will be included therein in order to understand the mechanism and evolve a view on the possibility of its introduction in India,”

Sports Secretary Injeti Srinivas is right now in London, inking the final touches to the MoU, which can basically open the floodgates for legal betting in India, using the UK model.

Another official said, “The UK has one of the most effective gambling laws. We hope to understand their system and see if it is possible to introduce it in India,”

Why the UK For Understanding Sports Betting?

At present, only horse race betting is allowed in India, which attracts 28% GST.

Although other forms of betting, for example, IPL betting is banned, people are anyways betting, and betting huge.

And the UK has emerged as the hub of betting experts from India.

In 2015, it was found that one UK based betting portal is so popular among Indians that it received Rs 1.9 lakh crore as betting amounts. Over one crore IDs are discovered from India, on an average, $3000 was the average amount spent on each bet. 
One of the officials said, “There are cases where bookies or their men sit abroad and conduct transactions. They accept money (bets) in rupees in India and pay the website in dollars. In the process, huge amounts of money are remitted outside the country..” 
Apps like BET365 and Betfair have more than 10 lakh active users, who are regularly betting on various sports events, including cricket.

Hence, it makes sense to partner with UK Govt., for clearly understanding how betting works, and how it can be controlled for generating tax earnings.

Chief Justice RM Lodha Commission has already suggested to the BCCI to make betting legal, as this is booming as an unorganized sector, and Govt. is losing out on the earning from tax.

Besides, revenue generated via betting can be used to fund economically backwards section of the society, and empower them to play sports professionally, and skillfully.

July 17, 2017 , ,
WWE के वो सीन जो आपने कभी नहीं देखें होंगे, इन कारणों से नहीं किया गया था इनका प्रसारणस्टेडियम के अंदर मौजूद फैंस के साथ ही घर बैठकर देख रहे दर्शक भी खेल को देखकर रोमांचित हो रहे होते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि सभी सीन हमें टीवी पर नहीं दिखाए जाते हैं। जी हां। इस खेल के इतिहास में कई बगार ऐसा भी हुआ जब कुछ सीन केवल इसलिए दिखाए नहीं गए क्योंकि वो बहुत ही ज्यादा विवादित थे।

कभी किसी को किस करना हो या फिर किसी से शादी। किसी के साथ मारपीट करना हो या फिर किसी के साथ बुरा व्यवहार। ऐसी तमाम बातें इस लिस्ट में शामिल हैं। एक वेबसाइट के मुताबिक तो कई बार ऐसे सीन करने के लिए रेसलर्स ने ही इनकार कर दिया था।

आज हम आपके लिए लेकर आए हैं ऐसी ही कुछ स्टोरीज।

रेप केस
डब्ल्यू.डब्ल्यू.ई. की प्रमोशन टीम ने बटिस्टा और उनकी गर्लफ्रैंड के रिलेशनशिप को भुनाने की कोशिश की थी। इस पर उन्होंने एक स्टोरी भी लिखी थी। इसके मुताबिक बटिस्टा की गर्लफ्रेंड मलिना को ये दिखाना था कि उनका रेप हुआ है। इसका आरोप बटिस्टा पर लगना था। हालांकि यह सबकुछ महज विवाद के लिए किया गया था। चूंकि बाद में बटिस्टा चोट लगने की वजह से खेल से ही बाहर हो गए थे। ऐसे में यह टीवी पर नहीं दिखाया गया।

विंस मैकमेहन की कार में ब्लास्ट
11 जून 2007 के एपिसोड को एक कार धमाके साथ खत्म किया जाता है, जिसमें मैकमेहन लिमोजीन कार में बैठते हैं और धमाका हो जाता है। स्टोरी लाइन के मुताबकि दूसरे सीन में यह दिखाया जाना था कि विंस अब मर चुके हैं। अगला एपिसोड दिखाया जाता, इसके पहले ही 24 जून को रेसलर क्रिस बेनोइट की मौत हो गई। इसके बाद विंस अपनी स्टोरीलाइन छोड़कर बेनोइट की स्टोरी पर लग जाते हैं।


वुमन फाइटर को मारना
रेसलर डड्ली ने एक बार WWE में वुमन रेसलर को छेड़ते हुए मारपीट कर दी थी। ये सीन टेलीकास्ट नहीं किया गया था। हालांकि रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया था कि ये घटना स्टोरी का हिस्सा नहीं थी। इसके बाद वुमन रेसलर्स की सुरक्षा के लिए सख्त नियम बनाए गए थे।

लेस्बियन सीन
फाइट्स में रोचकता बनाने के लिए टीम ने प्लान बनाया था कि जो हारने वाली टीम होगी उसके लीडर को सजा के तौर पर कई चीजें करनी होंगी। इसी कड़ी में यह प्लान बनाया गया कि अगर स्टेफनी मैकमेहन की टीम हार जाती है तो उन्हें एक महिला रेसलर के साथ लेस्बियन एक्ट परफॉर्म करना होगा। शूट की तैयारी पूरी कर ली गई, लेकिन बाद में स्टेफनी ने ये सीन करने से मना कर दिया था।

करना था लेस्बियन एक्ट
रेसलर मैरिसी पर एक भी एक सीन लिखा गया था। इसमें उन्हें प्रतिद्वन्दी रेसलर के साथ लेस्बियन की तरह बर्ताव करना था। बाद में डब्ल्यू.डब्ल्यू.ई. ने फैमिली ऑडियंस को ध्यान में रखते हुए इस सीन को टेलीकास्ट नहीं किया।

फैमली अॉडियंस का रखा ध्यान 
इन सीन्स को टेलीकास्ट ना करने की एक वजह फैमली अडियंस भी है। कारण कि कुछ सीन लेस्बियन एक्ट, रेप केस, भाई-बहन की शादी, मौत आदि के थे। ऐसे में कभी रेसलर्स ने इन्हें करने से इनकार कर दिया तो कभी डब्ल्यू.डब्ल्यू.ई. ने ही इसका टेलीकास्ट नहीं किया।

भाई के साथ शादी
इसे डब्ल्यू.डब्ल्यू.ई. का सबसे विवादित सीन कहा जा सकता है। कारण कि इसके मुताबिक टीम का प्लान था कि कि स्टेफनी मैकमेहन को अपने ही भाई शेन मैकमेहन के बच्चे की मां बताया जाए। मैकमेहन इसके लिए बकायदा तैयार भी थे। मगर स्टेफनी ने इस सीन को करने से इनकार कर दिया था।

आतंकवादी की तरह पेश करना
9/11 हमले जैसी घटना को भुनाने के लिए WWE में मोहम्मद हसन नाम के कैरेक्टर को लाया गया। इस कैरेक्टर से जल्द ही दर्शक चिढ़ने लगे। बाद में हसन को एक आतंकवादी के तौर पर दिखाने की कोशिश की गई, पर बाद में इस सीन को बैन कर दिया गया। 

कौन है बच्चे का पिता
वर्ल्ड चैम्पियनशिप रेसलिंग (WCW) और WWE की रेसलर डीवा स्टेसी कैलिबर पर सन 2000 में एक स्टोरी बनाई गई थी, जिसमें वो प्रेग्नेंट होने का अनाउंसमेंट करती हैं। वो बच्चे के पिता के नाम का खुलासा नहीं करती। बाद में उनके बॉयफ्रेंड डेविड फ्लेयर और रेसलर बफ बैगवैल की फाइट कराई जाती है। इसमें प्लान रहता है कि फाइट में स्टेसी के बॉयफ्रेंड फ्लेयर दूसरे रेसलर बैगवैल का खून निकालकर डीएनए टेस्ट के लिए लेकर जाएंगे ताकि पता चल सके कि बच्चा किसका है। बाद में प्रमोशनल टीम ने इस सीन को टेलीकास्ट नहीं किया।

July 16, 2017 ,
Venus Williams sends message to Serena Williams after losing Wimbledon finalWhen Garbine Muguruza lost to Serena Williams two years ago in the Wimbledon final, Williams predicted her opponent would one day hold the trophy. Little did she know the Spaniard would make that come true by beating her sister Venus.

The Williams sisters have an unbreakable bond. Venus Williams sent a sweet message to Serena Williams on Saturday, July 15, after being defeated by Garbiñe Muguruza in the 2017 Wimbledon finals.

Famous Star Families
"I miss you," Venus, 37, told Serena, 35, after the match in a video posted by BBC Tennis. "I tried my best to do the same things you do, but I think there will be other opportunities. I do."

Full nameSerena Jameka Williams
Country (sports)United States
ResidencePalm Beach Gardens, Florida, U.S.[1]
BornSeptember 26, 1981 (age 35)
Saginaw, Michigan, U.S.
Height5 ft 9 in (1.75 m)[1]
Turned proSeptember 24, 1995 (age 13)
PlaysRight-handed (two-handed backhand)
Coach(es)Richard Williams (1994–)
Oracene Price
Patrick Mouratoglou (2012–)[2]
Prize money
US$84,463,131 (As of February 27, 2017)[3]
  • 1st in all-time rankings

Singles
Career record783–130 (85.76%)
Career titles72 WTA (5th in overall rankings), 0 ITF
Highest rankingNo. 1 (July 8, 2002)
Current rankingNo. 4 (June 12, 2017)
Grand Slam Singles results
Australian OpenW (2003200520072009201020152017)
French OpenW (200220132015)
WimbledonW (2002200320092010201220152016)
US OpenW (199920022008201220132014)
Other tournaments
Tour FinalsW (20012009201220132014)
Doubles
Career record184–30 (85.98%)
Career titles23 WTA, 0 ITF
Highest rankingNo. 1 (June 21, 2010)
Current rankingNo. 39 (June 12, 2017)
Grand Slam Doubles results
Australian OpenW (2001200320092010)
French OpenW (19992010)
WimbledonW (200020022008200920122016)
US OpenW (19992009)
Other doubles tournaments
Tour FinalsSF (2009)
Mixed doubles
Career record27–4 (87.1%)
Grand Slam Mixed Doubles results
Australian OpenF (1999)
French OpenF (1998)
WimbledonW (1998)
US OpenW (1998)
Team competitions
Fed CupW (1999), record 16–1
Hopman CupW (20032008)
Serena did not compete in this year's Wimbledon championship as she is pregnant with her first child. Venus and Serena's mother, tennis coach Oracene Price, attended Saturday's match to support Venus.

Venus was bidding to become the eldest woman in the Open era to win a Grand Slam title on Saturday, though she was defeated by Muguruza in a 7-5, 6-0 victory. The Spaniard, 23, previously lost to Serena in the 2015 Wimbledon finals.
And the American was quick to pay tribute to her opponent, adding: "Congratulations Garbine, amazing.  
"I know how hard you work and how much this means to you and your family. Well done today, beautiful. 
"Thank you to my team who have been here day in day out, we've had a lot of beautiful moments in the last few weeks."

July 15, 2017 , ,
Hunger for scoring runs never dies, says Mithali RajThe Indian eves, courtesy of a brilliant hundred by skipper Mithali Raj and a brilliant bowling performance by Rajeshwari Gaekwad, won the match by 186 runs.

The Indian women’s team delivered a comprehensive performance against New Zealand in the group stage to secure a much-needed win on Saturday. The Indian eves, courtesy of a brilliant hundred by skipper Mithali Raj and a brilliant bowling performance by Rajeshwari Gaekwad, won the match by 186 runs.

ICC Women's World Cup 2017: Mithali Raj Hits Fine Century vs New Zealand
There seems to be no stopping India captain Mithali Raj. On Saturday against New Zealand in the ICC Women's World Cup 2017 match at Derby, Mithali smashed her sixth ODI century. She also brought up her 50th half-century, the first woman to register the 50th score in the fifties in women's ODI history. She had created history to become the leading run-scorer in women's One Day International cricket during the last match against Australia. Mithali had gone past Englishwoman Charlotte Edwards' record of 5992 runs and also became the first woman cricketer to touch the 6000-run mark.
There are too many records against her name. Earlier she achieved the feat of scoring seven consecutive fifties in ODIs after she played a terrific knock against England in the World Cup. Before her 50th half-ton on Saturday, she had notched the maximum number of ODI half-centuries (49) by any woman cricketer.
An elated Mithali Raj spoke after the match and said, “I’m extremely happy because, for a couple of us, this is going to be the last World Cup. So, our first aim was to qualify for the semis. I have always been happy to score runs for the country. I’ve always dreamed getting more and more runs because the hunger never dies. I think there were two important and crucial partnerships. One with Harmanpreet and the other with Veda. Her contribution was really very crucial. When you’re chasing 250 plus there is always pressure.”

Virat Kohli Congratulates Mithali Raj With An Image Of Punam Raut
Virat Kohli is a known admirer of the Indian women's cricket team. He had even wished the team before the start of the ICC Women's World Cup, being held in England. So it came as a massive surprise when Kohli committed a major blunder while congratulating women's captain Mithali Raj for becoming the highest run-getter in ODI cricket. Mithali created history when she shattered the record of most runs by an individual player in women's ODIs on Wednesday. Wishes came pouring in for the Indian star and among the well-wishers was a certain Virat Kohli, who posted a message for Mithali on Facebook. However, the Men in Blue captain mistakenly used Punam Raut's picture in the post. Kohli, though, was quick to realise his mistake and deleted the post soon after.
Lauding the efforts of the bowlers, she added, “I think the bowlers did a great job. If you’re aiming to be in the top 4 teams in the world, it is very important that you come back strong after a couple of defeats. It was important for the girls to come back strong, all firing.”

Meanwhile, Rajeshwari Gaekwad also expressed happiness over her performance and said, “I was happy that the team is winning. Not upset because I didn’t get a game so far. Got my chance today and happy that I delivered. I have been doing normal stuff, just trying to stick to my strengths. It was fun carrying drinks all along thus far. This is the best performance of my career. I always got four-fers, but never a fifer. So I would rate this as my best.”

July 15, 2017 ,
Wimbledon Final Preview: Federer vs. CilicFive years after his last Wimbledon triumph, Roger Federer can capture a record eighth All England Club title Sunday and become the tournament's oldest men's champion of the modern era.

With his 36th birthday fast approaching, the evergreen Swiss will comfortably succeed Arthur Ashe, who was almost 32 when he won in 1975, as Wimbledon's most senior champion.

Victory over Croatian giant Marin Cilic will also give him a 19th career Grand Slam title and second in three majors this year after sweeping to a fifth Australian Open in January following a six-month absence.
Cilic, the lean and sinewy 6-foot-6 power server is the last man standing between Wimbledon No. 3 seed Federer and an Open era record eighth Wimbledon title. 
If you haven't been following too closely, you might be tempted to cede the title to Federer now that his Big Four peers -- Andy Murray, Novak Djokovic and Rafael Nadal -- have been driven from the utopian confines of the All England Club. The august quartet has won the past 14 singles titles contested at Wimbledon. 
But the reality is that Cilic has stayed atop Federer to the buzzer in one Grand Slam encounter, and he wasn't bucked off until the absolute final moment in another. Those are the past two matches the men have played, so you can throw that 6-1 series lead Federer enjoys right out the window. This Croatian cowboy has clung to Federer like a bad memory. 
Cilic's lone win over Federer was a resonant one. His Bunyan-esque serve won the battle against the Swiss icon's generally effective return in a high-visibility US Open semifinal in 2014. It's a theme that might resurface on Sunday. Then just last year in the Wimbledon quarterfinals, Cilic held three match points before Federer gored him.
"I was hoping to be in good shape when the grass court season came around," said Federer who, for good measure, also pocketed back-to-back Masters at Indian Wells and Miami as well as a ninth Halle grass court crown.

"The first three, four months were just like a dream really. So this is something I was working towards, you know, Wimbledon, to be in good shape. I'm happy it's paying off here now."
Federer admits his form in 2017 has surprised even himself after he shut down his 2016 season to rest a knee injury in the aftermath of his brutal five-set semi-final loss at Wimbledon to Milos Raonic. 
He has 30 wins and just two losses this year and he has reached his 11th Wimbledon final without dropping a set.
Sunday's match will be his 102nd at the tournament and his 29th final at the majors.

"It makes me really happy, making history here at Wimbledon. It's a big deal. I love this tournament," said Federer, who has been tied with Pete Sampras on seven Wimbledon titles since beating Andy Murray in the 2012 final.

"All my dreams came true here as a player. To have another chance to go for number eight now, be kind of so close now at this stage, is a great feeling.

"Yeah, unbelievably excited. I hope I can play one more good match. 11 finals here, all these records, it's great. I'm so close now."

While 'Big Four' rivals Murray, Novak Djokovic and Rafael Nadal failed to even make the semi-finals, Federer has been reborn.

He came into Wimbledon having radically pruned his playing schedule, skipping the entire clay court season.
When the 2017 season began, few would have foreseen Roger Federer standing on the doorstep of a second Grand Slam crown and tour-leading fifth title of the year. As Federer continues to etch his name in the history books, the Swiss isn’t just sending a loud and resounding message to the rest of the ATP World Tour, but making the case for one of the greatest seasons of all time.
On Sunday, Federer will look to solidify his standing as the most successful man to ever grace the lawns of the All England Club, when he bids for a record eighth title at The Championships. He carries a 30-2 win-loss mark in 2017 into the final, which will be a record-tying 102nd Wimbledon match (w/Jimmy Connors). Having not dropped a set all fortnight, the 35 year old is not merely turning back the clock with his ruthless run to the final, but proving that he is more dominant than ever.
Employing the same aggressive and authoritative gameplan that saw him lift his 18th major trophy at the Australian Open, seal the Sunshine Double in Indian Wells and Miami, and notch a staggering ninth Gerry Weber Open title, Federer enters the final having dropped just four service games. But another triumph at SW19 won’t be a simple task for the Swiss maestro, with Marin Cilic the last remaining obstacle to Wimbledon immortality. 
"I don't want to say it's more relaxed going into it because I have a good head-to-head record against Marin, even though the matches were extremely close," Federer said. "But it's not like we've played against each other 30 times."
Wimbledon is just his seventh event of the year; 28-year-old Cilic is in his 15th.

Federer, revelling in the spotlight of having played all his matches on Centre Court, has hardly been troubled on his way to the final.

He has lost serve just four times and spent four and a half hours less on court than Cilic.

Federer also boasts a 6-1 career record over Cilic, the 2014 US Open champion who has made his first Wimbledon final at the 11th attempt.

However, Cilic's game is made for grass and 12 months ago he led Federer by two sets to love and held three match points in an epic quarter-final which the Swiss superstar eventually claimed.

When Cilic won his only Slam in New York three years ago, he demolished Federer in straight sets in the semi-finals.
"I don't want to say it's more relaxed going into it because I have a good head-to-head record against Marin, even though the matches were extremely close," said Federer. 
"But it's not like we've played against each other 30 times. You feel like you have to reinvent the wheel. 
"It's more straightforward, in my opinion. I think that's nice in some ways. It's a nice change, but it doesn't make things easier."
Cilic is only the second Croatian man to reach the Wimbledon final after Goran Ivanisevic, his former coach, who swept to a memorable title victory in 2001.

A win on Sunday would also make him the first Wimbledon champion outside of Federer, Murray, Djokovic and Nadal since Lleyton Hewitt triumphed in 2002.

July 15, 2017 ,
Garbiñe Muguruza crowned Wimbledon champion after beating Venus WilliamsTennis is a game where you can see the end coming from a long way off. Unlike most other major sports, you can’t turn defeat into victory on a single play. But tennis is a sport of momentum, where one point can kick loose an avalanche.

Two years after losing in the final here to Serena Williams, Garbiñe Muguruza broke through for her first Wimbledon title with an ultimately commanding and one-sided win over her sister Venus. It was a strange contest – the first women’s final under the roof – which was rich with fight and vim in a long first set, although beset by a mixture of grinding rallies and elementary errors from both finalists, and virtual surrender in the second as the Spaniard drove on to win 7-5, 6-0 in an hour and 17 minutes.

If the 37-year-old Williams had been struck by the debilitating Sjogren’s syndrome that first hit her six years ago, she had every excuse, because she had put up stout resistance in the first frame. It has been a tough time for her, all round. Twelve days after she broke down in tears when confronted by questions about a fatal car accident that still hang over her, Williams could not find consolation in victory. Her collapse was dramatic, although she took defeat stoically, knowing she had been beaten out of sight by a young opponent who found all her weapons working perfectly at just the time when the energy vanished from the American’s tennis.
When the 23-year-old’s challenge revealed Williams’ last forehand to have landed long, she crouched down in disbelief with her face planted in her hands. 
Muguruza earns £2.2million for this win at the All England Club and also makes up for finishing runner-up to Venus’ sister Serena in the final of two years ago. 
When Muguruza landed her first major title at Roland Garros last year, she had been circled as the natural successor to Serena as the queen of women’s tennis. 
Results, however, had largely failed to meet expectations until this year, when she has rediscovered the sort of form to suggest this will not be her last grand slam success. 
It was Williams’s turn to suffer in the next game. She saved one break point for deuce but overcooked a cross‑court drive and Muguruza sensed an almost indiscernible weakening in the American as she stepped up to serve. There was just one point between them – and then a whole set. 

Muguruza produced the shot of the match, a perfectly judged lob that outfoxed Williams and gave her two set points. Williams found the ad corner to save the first but the net with a backhand to lose the second. 

If age had wearied her limbs it had not invaded her spirit and, knowing she would have to win two sets in a row to lift the title, she settled down to the chore, but the mistakes mounted, worryingly. When she double-faulted after a successful Spanish challenge of a called ace on a first effort, the break gave Muguruza a noticeable lift at the start of the second set.  
Muguruza showed guts to sneak a nerve-shredding opening set, saving two set points before hitting Williams decisively one game later. 
She then showed ruthlessness in the second as she blew Williams away in six games that lasted just 26 minutes. 
“I had I think the hardest match today against Venus,” Muguruza said.

“She is such an incredible player, I grew up watching her play. It is incredible to play her in the final. She was definitely an inspiration and it’s incredible to play her here.” 
On losing to one Williams and then beating another, Muguruza said: “Two years ago I lost in the final here to Serena. She said maybe one day I will win. So here I am.”

Muguruza had not yet turned four when Williams played her first match in the main draw at SW19 and the American may never have a better chance to win her eighth grand slam title. 
“Congratulations Garbine, amazing,” Williams said.

“I know how hard you work and I’m sure this means so much to you and your family. Well done today, beautiful.” 
Spitting rain meant the contest started with the roof closed on Centre Court and under it Virginia Wade, Martina Navratilova and the King of Spain no less, Juan Carlos de Borbon, were all watching on from the Royal Box. 
Williams started with an 109-mile-per-hour ace and if anyone was nervous it was one of the line judges, who let go a serve which on review was shown to have been half a yard out. 
Muguruza, with her left thigh strapped, opened with a double fault, the first of five in the opening seven games alone as each invited early pressure onto their serve. 
Neither took advantage but Williams came again at 5-4, this time with two set points when Muguruza missed a pair of routine forehands. 
A breathtaking 19-shot battle from the baseline might have turned the match a different way but Williams hit the net before a booming Muguruza serve averted danger. 
Now, at 5-5, it was Muguruza’s turn to crank up the pressure. She missed one break point but grabbed the second as Williams finally caved with a floating forehand long. 
The crowd held its breath as Muguruza emerged to serve it out and then opened up two set points when a brilliant backhand defence looped over Williams and onto the line. 
Williams slapped into the net again and Muguruza moved one set to the good. 
Williams had come within a whisker of winning the opening frame but you would not have known it in the second as Muguruza snatched an early break and then two more to lead 5-0. 
All the momentum and belief seemed to have vanished from Williams’ game and the only disappointment for Muguruza was that her celebration had to wait for the result of her review. When it arrived she could barely hold back the tears.
  • Spaniard wins 7-5, 6-0 to earn second grand slam title 
  • Venus Williams could not match 23-year-old’s high-energy performance
Country (sports)Spain
ResidenceGenevaSwitzerland
Born8 October 1993 (age 23)
CaracasVenezuela
Height1.82 m (6 ft 0 in)
Turned pro2011
PlaysRight-handed (two-handed backhand)
Coach(es)Alejo Mancisidor (2010–2015)
Sam Sumyk (since 2015)
Prize money$11,128,219
Singles
Career record293–149 (66.29%)
Career titles4 WTA, 7 ITF
Highest rankingNo. 2 (6 June 2016)
Current rankingNo. 15 (3 July 2017)
Grand Slam Singles results
Australian OpenQF (2017)
French OpenW (2016)
WimbledonW (2017)
US Open2R (20152016)
Other tournaments
Tour FinalsSF (2015)
Olympic Games3R (2016)
Doubles
Career record72–43
Career titles5 WTA, 1 ITF
Highest rankingNo. 10 (23 February 2015)
Current rankingNo. 30 (6 June 2016)
Grand Slam Doubles results
Australian Open2R (20142015)
French OpenSF (2014)
Wimbledon3R (2014)
US Open3R (2014)
Other doubles tournaments
Tour FinalsF (2015)
Olympic GamesQF (2016)
Team competitions
Fed Cup7–2
Looking down from the stands was her coach, Conchita Martínez, who took part in the last Spanish-American final, beating Martina Navratilova in 1994. History is never far from any racket in tennis. Just half an hour into the final, the match looked as if it would be one of the longer ones – which the game badly needs. There have been some terrific contests the past fortnight – Johanna Konta’s matches against Donna Vekic and Simona Halep and Muguruza’s three-setter against Angelique Kerber in the fourth round. 

She had lost her serve only four times to get here. But, even though the rallies remained long, the bruises mounted quickly. If she was going to stay in the fight, she needed a quick hurtful counter to stop her lively opponent’s momentum. 

Muguruza still had to play flat out to hold for two-love but the power suddenly drained from the Williams serve, down to 80 miles an hour, allowing the Spaniard to dictate the points. There were no cheap points on offer and even when the ball did sit up for her, Williams could not put it away, butchering a forehand volley at the net that handed Muguruza another break. The first set had lasted 41 minutes; a quarter of an hour into the second, the contest was dissolving with bewildering speed.

MsnTarGet.com

Satish Kumar

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