बवाल! केजरीवाल की बड़ी अपील ठुकराई, जज ने दे दिया ये करारा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने शराब नीति मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को खुद को केस से हटाने की मांग की थी। जज ने इसे 'ड्यूटी से मुंह मोड़ना' बताते हुए साफ कहा कि वह किसी दबाव में नहीं आएंगी।
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📌 त्वरित जानकारी (Quick Summary)
दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल की रिक्यूज़ल याचिका खारिज कर दी। केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि जज के कुछ कार्यक्रमों में शामिल होने से पक्षपात की आशंका है, लेकिन जज ने इसे अटकलें करार देते हुए खारिज किया।
दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल की रिक्यूज़ल याचिका खारिज कर दी। केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि जज के कुछ कार्यक्रमों में शामिल होने से पक्षपात की आशंका है, लेकिन जज ने इसे अटकलें करार देते हुए खारिज किया।
📍 मुख्य अपडेट्स
- जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद पर लगे आरोपों को निराधार बताया।
- केजरीवाल की ओर से दाखिल याचिका को कोर्ट ने 'अटकलों पर आधार' करार दिया।
- जज ने कहा- 'हटना समझदारी नहीं, ड्यूटी से भागना होगा'।
- जज ने 34 साल के करियर में पहली बार ऐसा फैसला सुनाया।
- यह मामला दिल्ली की शराब नीति 2021-22 से जुड़ा है।
- केजरीवाल ने 13 अप्रैल को खुद कोर्ट में अपना पक्ष रखा था।
⚖️ जस्टिस शर्मा ने याचिका क्यों खारिज की?
जस्टिस शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि अगर वह बिना ठोस कारण के केस से हटती हैं तो इससे न्यायपालिका पर दबाव बनाने की गलत मिसाल कायम होगी। उन्होंने कहा, 'मेरी चुप्पी परीक्षा में थी, और मैंने फैसला लिया कि मैं निडर होकर इस मामले पर निर्णय दूंगी।'🔍 केजरीवाल के तर्क क्या थे?
- केजरीवाल ने दावा किया कि जस्टिस शर्मा की कुछ कार्यक्रमों में मौजूदगी से पक्षपात की आशंका है।
- उन्होंने 'रिक्यूज़ल' की मांग करते हुए केस ट्रांसफर की अपील की थी।
- हालांकि, जज ने इसे सिर्फ शक और अंदाजे पर आधारित बताया।
💼 क्या है शराब नीति मामला?
दिल्ली सरकार की शराब नीति 2021-22 में कथित अनियमितताओं को लेकर सीबीआई और ईडी ने केस दर्ज किया था। केजरीवाल और आप नेता पूरी तरह से निर्दोष होने का दावा कर रहे हैं।🔥 विशेषज्ञ की राय
हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर चंचल कुमार के अनुसार, जज का खुद को हटाना (रिक्यूज़ल) तब होता है जब निजी, आर्थिक या विचारों का टकराव हो। सिर्फ शक के आधार पर ऐसा करना अनुचित है।🔥 यह भी पढ़ें: बड़ा ऐलान! किसानों को मिलेगा सीधा ₹6000, कम ब्याज पर कर्ज और बीमा... जानें 7 सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ, कहीं छूट न जाए मौका!
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