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मोरारजी देसाई: वो गांधीवादी जो कांग्रेस से दूर होकर बना देश का पीएम! | पूरी कहानी

✍️ Sumit Kumar 📅 April 11, 2026
💡 Quick Summary

मोरारजी देसाई: वो गांधीवादी जो कांग्रेस से दूर होकर बना देश का पीएम! | पूरी कहानी

  • जानें भारत के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की अनोखी कहानी! एक सख्त गांधीवादी जो आपातकाल के बाद सत्ता में आए।
  • 📌Category: Politics
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आपातकाल के अंधेरे के बाद, 1977 के आम चुनाव ने भारत को एक नया चेहरा दिया - एक गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री, जो अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा कांग्रेस के साथ बिता चुका था। मोरारजी देसाई, एक ऐसे दृढ़ निश्चयी गांधीवादी और बेमिसाल ईमानदार व्यक्ति थे, जिन्होंने आखिरकार कांग्रेस की छाया से बाहर निकलकर प्रधानमंत्री की कुर्सी हासिल की। 29 फरवरी 1896 को गुजरात के बुलसर जिले में जन्मे मोरारजी 1969 में कांग्रेस पार्टी के विभाजन के दौरान संगठन के साथ ही रहे।


मोरारजी देसाई: सख्त गांधीवादी, जो कांग्रेस से दूर होकर बने देश के पहले PM।
📸 मोरारजी देसाई: वो गांधीवादी जो कांग्रेस से दूर होकर बना देश का पीएम! | पूरी कहानी

📌 त्वरित जानकारी (Quick Summary)
मोरारजी देसाई 1977 में भारत के चौथे और पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने। वे एक सख्त गांधीवादी, ईमानदार नेता थे जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला।

महात्मा गांधी के साथ उनका जुड़ाव देश की आजादी से एक दशक पहले ही शुरू हो गया था। 1930 में, जब गांधीजी का आजादी संघर्ष अपने चरम पर था, देसाई का ब्रिटिश न्याय व्यवस्था से विश्वास उठ चुका था। उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर स्वतंत्रता की लड़ाई में कूदने का साहसिक निर्णय लिया। यह एक कठिन फैसला था, लेकिन देसाई ने राष्ट्र को सर्वोपरि माना।

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मोरारजी देसाई को तीन बार जेल जाना पड़ा। वे 1931 में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य बने और 1937 तक गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव रहे। पहली कांग्रेस सरकार में, 1937 में, वे राजस्व, कृषि, वन और सहकारिता मंत्री बने। गांधीजी के व्यक्तिगत सत्याग्रह के दौरान भी उन्हें गिरफ्तार किया गया था। अक्टूबर 1941 में रिहा होने के बाद, अगस्त 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें फिर से गिरफ्तार किया गया और 1945 में रिहा किया गया। 1946 में, मुंबई में गृह व राजस्व मंत्री के रूप में, उन्होंने 'हलवाहा के लिए भूमि' जैसे दूरगामी भू-राजस्व सुधार लागू किए।

पुलिस प्रशासन को लोगों के करीब लाने और उनकी ज़रूरतों के प्रति जवाबदेह बनाने पर भी उनका जोर रहा, ताकि वे जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें। 1952 में, वे मुंबई के मुख्यमंत्री बने। उनका मानना था कि 'जब तक गांवों और कस्बों में रहने वाले गरीब लोग सामान्य जीवन जीने में सक्षम नहीं होंगे, तब तक समाजवाद का कोई मतलब नहीं है।' उन्होंने किसानों और किराएदारों की कठिनाइयों को दूर करने के लिए प्रगतिशील कानून बनाए, जिसमें वे तत्कालीन अन्य राज्यों से काफी आगे थे। उनकी इस व्यवस्था की खूब सराहना हुई।

राज्यों के पुनर्गठन के बाद, 14 नवंबर 1956 को वे वाणिज्य और उद्योग मंत्री के रूप में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए। बाद में, 22 मार्च 1958 से उन्होंने वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाला। उन्होंने रक्षा और विकास की ज़रूरतों को पूरा करते हुए राजस्व बढ़ाया, अपव्यय कम किया और सरकारी खर्च में मितव्ययिता को बढ़ावा दिया। उन्होंने वित्तीय अनुशासन लागू कर घाटे को न्यूनतम रखा और उच्च वर्गों के फिजूलखर्च पर नियंत्रण का प्रयास किया।

1963 में कामराज योजना के तहत उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें प्रशासनिक सुधार आयोग का अध्यक्ष बनने के लिए राजी कर लिया। अपने व्यापक अनुभव का उपयोग करते हुए उन्होंने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। 1967 में, वे इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में उप-प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री बने। लेकिन नीतियों को लेकर इंदिरा गांधी से मतभेद बढ़ने के कारण, जुलाई 1969 में उनसे वित्त मंत्रालय का प्रभार वापस ले लिया गया।

देसाई ने माना कि प्रधानमंत्री के पास सहयोगियों के विभागों को बदलने का अधिकार है, लेकिन इंदिरा गांधी द्वारा उनसे परामर्श न करना उनके आत्म-सम्मान को ठेस पहुँचाने वाला था। इसलिए, उन्होंने उप-प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

प्रधानमंत्री बनने की अपनी महत्वाकांक्षा मोरारजी देसाई ने कभी नहीं छिपाई। जवाहर लाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद भी उन्होंने इस पद के लिए प्रयास किया, पर उन्हें सफलता नहीं मिली, अंततः 1977 में वे इस मुकाम तक पहुंचे।

📍 मुख्य अपडेट्स

  • मोरारजी देसाई 1977 में भारत के चौथे प्रधानमंत्री बने।
  • वे देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे।
  • उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई और कई बार जेल गए।
  • देसाई ने राजस्व, वित्त जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. मोरारजी देसाई का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
    मोरारजी देसाई का जन्म 29 फरवरी 1896 को गुजरात के बुलसर जिले में हुआ था।
  2. मोरारजी देसाई किस राजनीतिक दल से जुड़े थे?
    वे जीवन का लंबा अरसा कांग्रेस से जुड़े रहे, लेकिन 1977 में वे जनता पार्टी के नेता के तौर पर प्रधानमंत्री बने।
  3. वे कितने समय तक प्रधानमंत्री रहे?
    मोरारजी देसाई ने 24 मार्च 1977 से 28 जुलाई 1979 तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।
  4. उनके प्रधानमंत्री रहते कोई महत्वपूर्ण घटना घटी थी?
    उनके कार्यकाल में जनता पार्टी की सरकार ने पहली बार गैर-कांग्रेसी शासन का नेतृत्व किया।
  5. उन्हें किस वजह से 'सख्त गांधीवादी' कहा जाता है?
    उनकी सादगी, ईमानदारी, दृढ़ निश्चय और गांधीजी के आदर्शों के प्रति उनकी अटूट निष्ठा के कारण उन्हें सख्त गांधीवादी माना जाता है।
🔗 Reference / Official Source: Wikipedia

💬 विचार और टिप्पणियाँ (Comments)

R
Ramesh Singh 2 घंटे पहले

क्या मोरारजी देसाई के समय भी कोई ऐसी योजनाएं थीं जो आज भी चर्चा में हैं?

P
Priya Sharma 8 घंटे पहले

बहुत ही ज्ञानवर्धक लेख! मोरारजी देसाई जैसे नेताओं के बारे में जानना प्रेरणादायक है।

A
Anil Verma 4 घंटे पहले

यह जानना दिलचस्प है कि वे कांग्रेस में रहते हुए भी गैर-कांग्रेसी पीएम बने। उनकी कहानी अनूठी है।

Comments