बड़ा खुलासा! सीमांचल में बन रहे फर्जी आधार कार्ड, यूपी-बंगाल से जुड़ा खेल, लाखों का गैंग सक्रिय!
बड़ा खुलासा! सीमांचल में बन रहे फर्जी आधार कार्ड, यूपी-बंगाल से जुड़ा खेल, लाखों का गैंग सक्रिय!
- ✅किशनगंज में यूपी-बंगाल से जुड़े फर्जी आधार कार्ड रैकेट का खुलासा! लाखों का खेल, जानें कैसे बन रहे हैं जाली कार्ड और क्या है सजा।
- 📌Category: Crime
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किशनगंज, बिहार: सीमांचल इलाके में इन दिनों फर्जी आधार कार्ड बनाने का एक बड़ा खेल चल रहा है। उत्तर प्रदेश (UP) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) से मिले एक्सेस और क्लोन की मदद से एक शातिर गिरोह ग्रामीण इलाकों में लोगों के लिए जाली आधार कार्ड तैयार कर रहा है। इन फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल लोग न सिर्फ बैंक खाते खोलने, बल्कि विभिन्न सरकारी कामों में भी कर रहे हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद, गिरोह के तार राज्य के बाहर जुड़े होने के कारण यह गोरखधंधा थमने का नाम नहीं ले रहा है।
सीमांचल में यूपी-बंगाल के सेंटरों से एक्सेस लेकर फर्जी आधार कार्ड बनाने का रैकेट चल रहा है। इसमें फिंगरप्रिंट क्लोन और एनीडेस्क का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे कार्डों का उपयोग बैंक खातों से लेकर सरकारी योजनाओं तक में हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल, नेपाल और बांग्लादेश की सीमा से सटे किशनगंज जिले के ग्रामीण इलाकों में किराना दुकानों, साइबर कैफे और फोटो स्टेट की दुकानों का इस्तेमाल इस धंधे के लिए किया जा रहा है। पुलिस की ओर से लगातार इस गिरोह का खुलासा किया जा रहा है, लेकिन मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
फर्जी आधार कार्ड बनाने का तरीका: गिरोह का पूरा खेल
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सरकारी अधिकृत आधार सेवा केंद्रों के संचालकों से साठगांठ करता है। इन केंद्रों के संचालकों से लॉगिन एक्सेस और पासवर्ड प्राप्त किए जाते हैं। इतना ही नहीं, कई बार फिंगरप्रिंट के क्लोन भी बनाकर इन्हें मुहैया कराए जाते हैं। इसी क्लोन और एक्सेस का इस्तेमाल करके सीमांचल में बैठे गिरोह के सदस्य नए और फर्जी आधार कार्ड बना देते हैं। कुछ मामलों में, एनीडेस्क (AnyDesk) जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर का उपयोग करके भी दूसरे सेंटरों से आधार कार्ड बनवाए जाते हैं। एक फर्जी आधार कार्ड बनाने के लिए गिरोह दो हजार से दस हजार रुपये तक की वसूली करता है। इस रैकेट में शामिल एक्सेस देने वाले सेंटर को प्रति आधार कार्ड 20 से 40 प्रतिशत तक का कमीशन भी दिया जाता है।
निवास और जन्म प्रमाण पत्र में छेड़छाड़
फर्जी आधार कार्ड बनाने के लिए निवास और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। गिरोह के सदस्य विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर लोगों से उनके असली प्रमाण पत्र जमा करते हैं। बाद में, इन प्रमाण पत्रों में विभिन्न ऐप और सॉफ्टवेयर की मदद से छेड़छाड़ की जाती है। नाम-पता बदलकर और स्कैन करके इन जाली दस्तावेजों का उपयोग आधार कार्ड बनाने में किया जाता है। सत्यापन के लिए अक्सर स्कूल प्रधानाध्यापक, सरपंच आदि की मुहर और फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया जाता है। जानकारों का मानना है कि जिन लोगों के फर्जी आधार कार्ड बनाए जाते हैं, उनके फिंगरप्रिंट भी लिए जाते हैं, जिससे ऐसे आधार कार्ड आसानी से सरकारी और गैर-सरकारी कामों में चल जाते हैं।
लगातार हो रही कार्रवाई, फिर भी जारी है खेल
इस इलाके में फर्जी प्रमाण पत्र और आधार कार्ड बनाने के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है और कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं। लेकिन, चूंकि इस गिरोह के तार उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से जुड़े हैं, इसलिए सभी सदस्य पुलिस की पकड़ में नहीं आ पाते। यही वजह है कि फर्जीवाड़े का यह खेल अब भी जारी है।
कुछ हालिया गिरफ्तारियां:
- 7 जून 2025 को जियापोखर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक गिरोह का खुलासा कर अशराफुल नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, जो बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी आधार कार्ड मुहैया करा रहा था।
- 22 अगस्त 2025 को गर्बनडांगा थाना क्षेत्र में पुलिस ने फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह का खुलासा कर अजय कुमार साह को गिरफ्तार किया।
- इस वर्ष 14 जनवरी को ठाकुरगंज थाना क्षेत्र में यूपी एटीएस ने फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह के सदस्य अरमान को गिरफ्तार किया, जो मुंशीभीट्टा का निवासी था।
📍 मुख्य अपडेट्स
- सीमांचल में फर्जी आधार कार्ड बनाने का बड़ा रैकेट सक्रिय।
- यूपी और बंगाल के आधार सेंटरों से जुड़े तार, लॉगिन एक्सेस और क्लोन का हो रहा है इस्तेमाल।
- जाली निवास और जन्म प्रमाण पत्रों से तैयार हो रहे हैं फर्जी आधार कार्ड।
- गिरफ्तारियां हो रही हैं, लेकिन गिरोह के सदस्य अभी भी फरार।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- सवाल 1: क्या मेरे असली आधार कार्ड का दुरुपयोग हो सकता है?
- जवाब: यदि आपका आधार कार्ड किसी फर्जीवाड़े में इस्तेमाल होता है, तो इसकी पूरी संभावना है। इसलिए अपने आधार की जानकारी सुरक्षित रखें।
- सवाल 2: मैं कैसे पता कर सकता हूँ कि मेरा आधार कार्ड असली है या फर्जी?
- जवाब: आप UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट या MyAadhaar ऐप के माध्यम से अपने आधार नंबर को सत्यापित (Verify) कर सकते हैं।
- सवाल 3: अगर मुझे फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह की जानकारी मिलती है तो क्या करूं?
- जवाब: आप तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम सेल में इसकी सूचना दें। आप UIDAI को भी इसकी शिकायत कर सकते हैं।
- सवाल 4: क्या फर्जी आधार कार्ड बनवाने या इस्तेमाल करने पर कोई सजा है?
- जवाब: हां, भारतीय कानून के तहत फर्जी आधार कार्ड बनवाना, उसका इस्तेमाल करना या किसी को बनवाने में मदद करना एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।
यह पूरा मामला सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन पर भी सवालिया निशान खड़े करता है। ऐसे फर्जीवाड़े पर नकेल कसने के लिए सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों को और भी कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।
💬 विचार और टिप्पणियाँ (Comments)
यह तो बहुत ही गंभीर मामला है। सरकार को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
क्या मेरा आधार कार्ड सुरक्षित है? मुझे कैसे पता चलेगा?
जानकारी के लिए धन्यवाद, ऐसी खबरें बहुत ज़रूरी हैं ताकि लोग सतर्क रहें।
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