जंतर-मंतर पर गालियां सुनकर भावुक हुए पीएम मोदी, दिया ये बड़ा बयान!
नई दिल्ली, 31 जुलाई 2026: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुआ छात्रों का आंदोलन हाल ही में समाप्त हुआ है। लेकिन इस प्रदर्शन के दौरान हुई कुछ अभद्र घटनाओं ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार देर रात अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक भावुक वीडियो संदेश जारी कर इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
💡 इस लेख में (Table of Contents) 🔻
- ➡️ १. जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन: पीएम मोदी और उनकी स्वर्गीय मां को दी गई भद्दी गालियां, प्रधानमंत्री ने जताया दुख
- ➡️ सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का देर रात भावुक संदेश
- ➡️ 'गालियां कभी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकतीं'
- ➡️ २. 'बेटियों के मुंह से ऐसी भाषा सुनना चिंताजनक': अभद्रता को पीएम मोदी ने बताया 'कल्चर शॉक'
- ➡️ सांस्कृतिक मूल्यों और संस्कारों पर जताई चिंता
- ➡️ 'संस्कृतिक दृष्टि से यह देश के लिए एक कल्चर शॉक'
- ➡️ ३. 'दांत जीभ को काटे तो हम दांत नहीं तोड़ते': प्रधानमंत्री ने गालियां देने वाले 'गुमराह बच्चों' को किया माफ
- ➡️ एक अनूठे उदाहरण से समझाया अपना मर्म
- ➡️ 'इन गुमराह बच्चों को माफ किए जाने की जरूरत है'
- ➡️ ४. 'सजा देना या अदालत ले जाना समाधान नहीं': पीएम मोदी ने की भटके युवाओं को गले लगाने की अपील
- ➡️ कठोर कानूनी कार्रवाई की जगह सहानुभूति का मार्ग
- ➡️ 'यह समय बच्चों को गले लगाकर सही राह दिखाने का है'
- ➡️ ५. युवा प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री का खास संदेश: 'अपनी गलतियों से सीखें और भारत के विकास के लिए आगे आएं'
- ➡️ 'मैं आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए ही जीता और काम करता हूं'
- ➡️ 'आइए मिलकर विकसित भारत का निर्माण करें'
- ➡️ ६. नीट पेपर लीक विवाद: ३६ दिनों तक चला था जंतर-मंतर पर छात्रों का उग्र आंदोलन
- ➡️ २० जून से शुरू हुआ था देशव्यापी छात्र आंदोलन
- ➡️ आंदोलन की प्रमुख मांगें और सरकार का रुख
- ➡️ ७. कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) का नेतृत्व और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: जानें कैसे खत्म हुआ था यह विरोध-प्रदर्शन
- ➡️ कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) का नेतृत्व और राजनीतिक घटनाक्रम
- ➡️ २५ जुलाई को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और आंदोलन की समाप्ति
- ➡️ जनता के सवाल (FAQs)
प्रधानमंत्री ने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन के दौरान न सिर्फ उनके खिलाफ, बल्कि उनकी स्वर्गीय मां के लिए भी अत्यंत भद्दी और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया। पीएम मोदी ने कहा कि समाज में व्याप्त आक्रोश को वह भली-भांति समझते हैं, लेकिन युवाओं को सही राह दिखाना ही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
१. जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन: पीएम मोदी और उनकी स्वर्गीय मां को दी गई भद्दी गालियां, प्रधानमंत्री ने जताया दुख
सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का देर रात भावुक संदेश
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक विशेष वीडियो शेयर किया। इस वीडियो के जरिए उन्होंने नीट परीक्षा विवाद को लेकर जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में अभद्र टिप्पणियों का सामना करने पर अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन व्यक्तिगत हमले और स्वर्गीय मां को गालियां देना दुखद है।
'गालियां कभी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकतीं'
पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा, "कुछ शरारती बच्चों ने मेरे और मेरी स्वर्गीय माता के खिलाफ गंदी गालियों का इस्तेमाल किया। सभ्य समाज में इस तरह की भाषा का प्रयोग बिल्कुल ठीक नहीं है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि आक्रोश कितना भी बड़ा क्यों न हो, अभद्र भाषा और गालियां किसी भी समस्या या सवाल का हल नहीं निकाल सकती हैं।
- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन: नीट पेपर लीक विवाद को लेकर छात्रों का बड़ा जमावड़ा हुआ था।
- अमर्यादित टिप्पणी: प्रदर्शन के दौरान पीएम और उनकी दिवंगत माताजी पर अभद्र कमेंट्स किए गए।
- पीएम का रुख: प्रधानमंत्री ने आक्रोश व्यक्त करने की जगह शांति और सुधार का संदेश दिया।
२. 'बेटियों के मुंह से ऐसी भाषा सुनना चिंताजनक': अभद्रता को पीएम मोदी ने बताया 'कल्चर शॉक'
सांस्कृतिक मूल्यों और संस्कारों पर जताई चिंता
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदर्शनकारी छात्रों में शामिल युवतियों द्वारा इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर विशेष रूप से गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में, जहां नारियों को सम्मान और संस्कारों का प्रतीक माना जाता है, वहां हमारी बेटियों के मुंह से ऐसी भाषा निकलना बेहद चिंताजनक विषय है।
'संस्कृतिक दृष्टि से यह देश के लिए एक कल्चर शॉक'
पीएम मोदी ने कहा, "यह हमारे लिए एक 'कल्चर शॉक' है। हमारी सांस्कृतिक परंपराओं के लिहाज से यह बेहद चिंता का विषय है कि हमारी बेटियां इस प्रकार की अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रही हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि समाज को इस दिशा में मंथन करना होगा कि हमारे बच्चे किस ओर जा रहे हैं और उन्हें सही संस्कार देना किसकी जिम्मेदारी है।
इससे पहले भी देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों का आक्रोश देखने को मिला था। आप इस संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए पेपर लीक पर बवाल: BHU में छात्रों का उग्र प्रदर्शन, मांगा इस्तीफा भी पढ़ सकते हैं।
३. 'दांत जीभ को काटे तो हम दांत नहीं तोड़ते': प्रधानमंत्री ने गालियां देने वाले 'गुमराह बच्चों' को किया माफ
एक अनूठे उदाहरण से समझाया अपना मर्म
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने एक व्यावहारिक और पारिवारिक उदाहरण देते हुए देशवासियों को समझाया। उन्होंने कहा, "यदि कभी खाना खाते समय गलती से हमारा दांत हमारी जीभ को काट लेता है, तो हम अपने दांत को तोड़ नहीं देते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि दांत और जीभ दोनों ही हमारे शरीर का हिस्सा हैं। ठीक उसी प्रकार, ये प्रदर्शनकारी बच्चे भी हमारे अपने ही बच्चे हैं।"
'इन गुमराह बच्चों को माफ किए जाने की जरूरत है'
पीएम मोदी ने दरियादिली दिखाते हुए कहा कि वह इन युवाओं को माफ करना चाहते हैं। उन्होंने कहा:
- गलतियों से सुधार: कम उम्र और बचपन में गलतियों को सुधारने की हमेशा गुंजाइश रहती है।
- अपनापन: भले ही बच्चे भटक जाएं, लेकिन वे समाज और देश का ही हिस्सा हैं।
- सहानुभूति: गुस्सा करने या दंड देने के बजाय बच्चों को सही दिशा देना ज्यादा आवश्यक है।
४. 'सजा देना या अदालत ले जाना समाधान नहीं': पीएम मोदी ने की भटके युवाओं को गले लगाने की अपील
कठोर कानूनी कार्रवाई की जगह सहानुभूति का मार्ग
प्रधानमंत्री ने समाज, प्रशासन और देश के प्रबुद्ध नागरिकों से अपील की कि इन प्रदर्शनकारी छात्रों को अदालतों के चक्कर कटवाने या कानूनी दंड देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलने वाला है। कानूनी उलझनों में फंसकर युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो सकता है।
'यह समय बच्चों को गले लगाकर सही राह दिखाने का है'
पीएम मोदी ने भावुक होते हुए कहा, "समाज को भी मेरी बात स्वीकार करनी चाहिए। कई बार युवा जोश या बहकावे में आकर रास्ता भटक जाते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उन्हें जीवनभर के लिए दंडित किया जाए। यह समय इन बच्चों को गले लगाने और उन्हें सही मार्ग पर वापस लाने का है।" उन्होंने स्वीकार किया कि यह एक कठिन काम है, लेकिन देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए हमें यह करना ही होगा।
५. युवा प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री का खास संदेश: 'अपनी गलतियों से सीखें और भारत के विकास के लिए आगे आएं'
'मैं आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए ही जीता और काम करता हूं'
देश के युवाओं को सीधा संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं अपने इन युवा साथियों से कहना चाहता हूं कि वे देश के निर्माण के लिए आगे आएं। नई-नई बातें सीखें, अपने ज्ञान का विस्तार करें और अतीत में हुई गलतियों से सबक लें। देश निरंतर आगे बढ़ रहा है और आपको भी इसी गति के साथ आगे बढ़ना होगा।"
'आइए मिलकर विकसित भारत का निर्माण करें'
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के अंत में युवाओं के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने अपने संदेश को कुछ प्रमुख पंक्तियों के साथ विराम दिया:
- गालियां समाधान नहीं: Abuses never solve anything.
- सही राह दिखाना: Let’s guide the misguided.
- एकजुटता: Let’s work together.
- राष्ट्र सेवा: Let’s work for Bharat.
६. नीट पेपर लीक विवाद: ३६ दिनों तक चला था जंतर-मंतर पर छात्रों का उग्र आंदोलन
२० जून से शुरू हुआ था देशव्यापी छात्र आंदोलन
उल्लेखनीय है कि नीट (NEET) परीक्षा 2026 में हुए कथित प्रश्नपत्र लीक और धांधली के दावों को लेकर देशभर के छात्रों में भारी आक्रोश था। 20 जून 2026 से राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों की संख्या में छात्र और प्रतियोगी परीक्षार्थी जमा हुए थे। यह आंदोलन लगातार 36 दिनों तक चला, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं।
आंदोलन की प्रमुख मांगें और सरकार का रुख
छात्रों की मुख्य मांगों में नीट परीक्षा को रद्द करना, पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराना और जवाबदेही तय करना शामिल था। इस आंदोलन को देश के विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्र संघों और प्रमुख विपक्षी दलों का भी पूरा समर्थन प्राप्त हुआ था। इसके कारण सरकार पर प्रशासनिक और नैतिक रूप से काफी दबाव बन गया था।
इस बड़े आंदोलन के कारण राजनीतिक हलचल भी काफी बढ़ गई थी। इस मुद्दे पर अन्य वरिष्ठ नेताओं के बयानों के लिए आप शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर मायावती भड़कीं, छात्रों से कही बड़ी बात रिपोर्ट देख सकते हैं।
७. कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) का नेतृत्व और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: जानें कैसे खत्म हुआ था यह विरोध-प्रदर्शन
कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) का नेतृत्व और राजनीतिक घटनाक्रम
जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के इस ऐतिहासिक विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व मुख्य रूप से छात्र संगठन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) द्वारा किया जा रहा था। कॉजपा के बैनर तले युवाओं ने अनुशासित लेकिन बेहद आक्रामक तरीके से अपनी मांगों को सरकार के सामने रखा। आंदोलन के दौरान कई दौर की बातचीत भी हुई।
२५ जुलाई को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और आंदोलन की समाप्ति
36 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सरकार द्वारा छात्रों की अधिकांश मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद कॉजपा और प्रदर्शनकारी छात्रों ने आधिकारिक तौर पर अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट और घटनाक्रम का Latest Update देखने के लिए पढ़ें: छात्रों की जीत! शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा।
निष्कर्ष
जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा विवाद को लेकर हुआ छात्र आंदोलन भले ही 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के साथ समाप्त हो गया हो, लेकिन इसके दौरान पीएम मोदी और उनकी स्वर्गीय मां के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा ने देश में एक नई बहस छेड़ दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी दूरदर्शिता और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए युवाओं को दंडित करने के बजाय उन्हें माफ करने और सही राह दिखाने का आह्वान किया है।
पीएम मोदी का यह संदेश साफ करता है कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन मर्यादा और संस्कारों की सीमा नहीं लांघी जानी चाहिए। अब समय आ गया है कि देश का युवा वर्ग अपनी गलतियों से सीख लेते हुए सकारात्मक दिशा में आगे बढ़े और भारत के उज्ज्वल भविष्य तथा विकास में अपना अमूल्य योगदान दे।
जनता के सवाल (FAQs)
👉 पीएम मोदी ने जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर अपने वीडियो में क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर जारी वीडियो में कहा कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी स्वर्गीय माताजी के लिए अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया। उन्होंने इसे चिंताजनक बताते हुए गुमराह बच्चों को माफ करने और सही राह दिखाने की बात कही।
👉 जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन किस मुद्दे को लेकर हो रहा था?
यह आंदोलन नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक विवाद और परीक्षा में हुई कथित धांधली के विरोध में आयोजित किया गया था, जिसमें हजारों छात्रों ने भाग लिया था।
👉 जंतर-मंतर पर यह विरोध-प्रदर्शन कितने दिनों तक चला और कब समाप्त हुआ?
यह प्रदर्शन 20 जून 2026 को शुरू हुआ था और 36 दिनों तक चलने के बाद 25 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और मांगें स्वीकार होने के बाद समाप्त हुआ।
👉 जंतर-मंतर आंदोलन का नेतृत्व किस संगठन द्वारा किया जा रहा था?
इस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) नाम के छात्र संगठन द्वारा किया जा रहा था, जिसे विभिन्न विपक्षी दलों का भी समर्थन प्राप्त था।
👉 अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर पीएम मोदी ने क्या उदाहरण दिया?
पीएम मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि गलती से दांत जीभ को काट ले तो हम दांत नहीं तोड़ते, क्योंकि दोनों हमारे अपने हैं। इसी तरह भटके हुए बच्चे भी हमारे अपने हैं और उन्हें सजा देने के बजाय सुधारना चाहिए।
👉 नीट परीक्षा विवाद की Latest Update और आगे की प्रक्रिया क्या है?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और जांच समिति गठित करने की घोषणा की है। छात्र आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपने Status, Notice List और PDF अपडेट समय-समय पर Check कर सकते हैं।