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विदेश में पढ़ाई का सपना होगा सच! सरकार दे रही 125 स्कॉलरशिप, तुरंत जानें कैसे पाएं लाभ

✍️ Satish Kumar 📅 April 19, 2026
✅ Last Verified On: 18 Apr 2026

हर साल हजारों छात्र विदेश में उच्च शिक्षा का सपना देखते हैं, लेकिन आर्थिक बाधाएं अक्सर उनके रास्ते का रोड़ा बन जाती हैं। ऐसे ही वंचित और हाशिए पर पड़े समुदायों के छात्रों के लिए भारत सरकार ने एक शानदार पहल की है। नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप (NOS) योजना के तहत, सरकार 125 मेधावी छात्रों को विदेश में मास्टर्स और पीएचडी करने का सुनहरा अवसर दे रही है। यह सिर्फ एक स्कॉलरशिप नहीं, बल्कि आपके सपनों को पंख देने और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने का एक सुनहरा मौका है। अगर आप भी विदेश में पढ़ने का ख्वाब देखते हैं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं, तो यह खबर आपके लिए ही है!

🔥 इस लेख में (Table of Contents) 🔻

विदेश में पढ़ाई का सपना होगा सच! सरकार दे रही 125 स्कॉलरशिप, तुरंत जानें कैसे पाएं लाभ - A Man And Woman Standing In Front Of A Train
📸 विदेश में पढ़ाई का सपना होगा सच! सरकार दे रही 125 स्कॉलरशिप, तुरंत जानें कैसे पाएं लाभ
📌 त्वरित जानकारी (Quick Summary)
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप (NOS) योजना के तहत, भारत सरकार अनुसूचित जाति (SC), विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों (DNTs), भूमिहीन खेतिहर मज़दूरों और पारंपरिक कारीगर परिवारों के 125 छात्रों को विदेश में मास्टर्स व पीएचडी की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। इसमें ट्यूशन फीस, भत्ता, वीज़ा और यात्रा खर्च शामिल हैं। आवेदन nosmsje.gov.in पर ऑनलाइन किए जा सकते हैं, और चयन योग्यता व संस्थान की रैंकिंग पर आधारित होता है।

यह योजना विशेष रूप से उन छात्रों के लिए डिज़ाइन की गई है जो सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग से आते हैं, और जिनके पास विदेश में पढ़ाई करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते। आइए, इस स्कॉलरशिप के बारे में विस्तार से जानते हैं ताकि कोई भी योग्य छात्र इस अवसर से वंचित न रह जाए।

📚 नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप (NOS) क्या है?

नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप (NOS) केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है जिसका उद्देश्य हाशिए पर पड़े समुदायों के मेधावी छात्रों को विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने में मदद करना है। इस योजना का संचालन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया जाता है। इसका मुख्य लक्ष्य उन छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अपने विदेशी शिक्षा के सपने को पूरा नहीं कर पाते हैं। यह स्कॉलरशिप न केवल शिक्षा का मार्ग खोलती है, बल्कि भारत के समावेशी विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।

📍 मुख्य अपडेट्स

  • 125 छात्रों को हर साल विदेश में उच्च शिक्षा के लिए मिलेगी स्कॉलरशिप।
  • यह स्कॉलरशिप मास्टर्स और पीएचडी प्रोग्राम के लिए है, अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए नहीं।
  • आवेदन करने के लिए योग्यता परीक्षा में कम से कम 60% अंक और 35 वर्ष से कम आयु होनी चाहिए।
  • पारिवारिक वार्षिक आय 8 लाख रुपये से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए।
  • कुल स्कॉलरशिप का 30% महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

🎓 कौन से छात्र उठा सकते हैं इस स्कॉलरशिप का लाभ?

यह स्कॉलरशिप सभी छात्रों के लिए नहीं है, बल्कि यह विशेष रूप से समाज के कुछ निश्चित वर्गों के लिए लक्षित है जिन्हें शिक्षा के अवसरों की अधिक आवश्यकता है। इस योजना का लाभ निम्नलिखित समुदायों के छात्र उठा सकते हैं:

  • अनुसूचित जाति (SC): यह स्कॉलरशिप एससी समुदाय के छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है।
  • विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियां (DNTs): इन समुदायों के छात्रों को अक्सर शैक्षिक अवसरों की कमी का सामना करना पड़ता है, और यह योजना उन्हें सशक्त बनाती है।
  • भूमिहीन खेतिहर मज़दूरों के परिवार: ऐसे परिवार जो अपनी आजीविका के लिए मुख्य रूप से खेती पर निर्भर हैं और जिनके पास अपनी ज़मीन नहीं है।
  • पारंपरिक कारीगरों के परिवार: ऐसे परिवार जो पारंपरिक शिल्प और कला से जुड़े हुए हैं और जिनकी आर्थिक स्थिति अक्सर कमजोर होती है।

इन वर्गों के छात्रों को विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे वे न केवल अपना बल्कि अपने समुदाय और देश का भी नाम रोशन कर सकें।

✅ योग्यता मानदंड: क्या आप हैं इस स्कॉलरशिप के हकदार?

इस महत्वपूर्ण स्कॉलरशिप का लाभ उठाने के लिए, उम्मीदवारों को कुछ अनिवार्य योग्यता मानदंडों को पूरा करना होगा। इन मानदंडों को ध्यान से समझना और उनका पालन करना आवश्यक है:

मानदंड (Criteria) विवरण (Description)
शैक्षणिक योग्यता क्वालिफाइंग एग्जाम (जैसे मास्टर कोर्स के लिए बैचलर, पीएचडी के लिए मास्टर) में कम से कम 60% अंक प्राप्त होने चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि केवल मेधावी छात्र ही इस योजना का लाभ उठाएं।
आयु सीमा चयन वर्ष की 1 अप्रैल को उम्मीदवार की उम्र 35 वर्ष से कम होनी चाहिए। यह मानदंड युवा और महत्वाकांक्षी छात्रों को लक्ष्य बनाता है।
पारिवारिक आय परिवार की कुल वार्षिक आय 8 लाख रुपये से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए है कि स्कॉलरशिप वास्तव में उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
पाठ्यक्रम यह स्कॉलरशिप केवल मास्टर और पीएचडी प्रोग्राम के लिए है। अंडरग्रेजुएट कोर्स इसमें शामिल नहीं हैं।
दाखिला उम्मीदवारों को किसी मान्यता प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालय में दाखिला लेना होगा, प्राथमिकता उन विश्वविद्यालयों को दी जाती है जो वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष 500 में शामिल हैं।

💰 कितनी स्कॉलरशिप मिलती है और कैसे होता है वितरण?

नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप (NOS) योजना के अंतर्गत हर साल 125 स्कॉलरशिप प्रदान की जाती हैं, बशर्ते फंड उपलब्ध हो। यह संख्या सुनिश्चित करती है कि बड़ी संख्या में पात्र छात्रों को लाभ मिल सके। इन स्कॉलरशिप का वितरण विभिन्न श्रेणियों में इस प्रकार होता है:

श्रेणी (Category) स्कॉलरशिप की संख्या (Number of Scholarships)
अनुसूचित जाति (SC) 115 स्कॉलरशिप
विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियां (DNTs) 6 स्कॉलरशिप
भूमिहीन खेतिहर मज़दूर और पारंपरिक कारीगर 4 स्कॉलरशिप
कुल स्कॉलरशिप 125 स्कॉलरशिप

इसके अतिरिक्त, एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि कुल स्कॉलरशिप का 30% महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है। यह महिला शिक्षा को बढ़ावा देने और उन्हें वैश्विक मंच पर अवसर प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि पर्याप्त महिला उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होती हैं, तो बचे हुए स्लॉट पुरुष उम्मीदवारों को दिए जा सकते हैं, ताकि कोई भी स्कॉलरशिप खाली न रहे।

🌍 कोर्स और यूनिवर्सिटी का चुनाव: कहाँ और क्या पढ़ें?

इस स्कॉलरशिप स्कीम के अंतर्गत केवल मास्टर और पीएचडी प्रोग्राम के लिए सहायता मिलती है। यह अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए नहीं है, क्योंकि योजना का फोकस उच्च स्तरीय शोध और विशेषज्ञता पर है। उम्मीदवारों को विदेशी विश्वविद्यालयों में दाखिला लेना होगा, और यहाँ एक महत्वपूर्ण बात यह है कि शीर्ष रैंकिंग वाले संस्थानों को प्राथमिकता दी जाती है।

  • वैश्विक रैंकिंग: उम्मीदवारों को ऐसे विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने की सलाह दी जाती है जो वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष 500 में शामिल हों। विश्व-स्तर पर मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों में पढ़ाई से छात्रों को बेहतर करियर अवसर मिलते हैं।
  • चयन प्राथमिकता: चयन के पहले राउंड में, उन उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है जिनका एडमिशन टॉप-रैंक वाले संस्थानों में पक्का हो चुका है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सबसे मेधावी छात्र सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ सकें।
  • अन्य मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय: यदि शीर्ष-रैंक वाले संस्थानों में पर्याप्त उम्मीदवार नहीं मिलते हैं, तो बाद के राउंड में अन्य मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों पर भी विचार किया जा सकता है।

💸 स्कॉलरशिप में मिलने वाली वित्तीय सहायता: क्या-क्या कवर होगा?

यह स्कॉलरशिप केवल ट्यूशन फीस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों को विदेश में रहने और पढ़ने के लिए एक व्यापक वित्तीय पैकेज प्रदान करती है। इसमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण खर्च शामिल हैं:

वित्तीय सहायता का प्रकार (Type of Financial Aid) विवरण (Description)
ट्यूशन फीस आपके चयनित विश्वविद्यालय द्वारा ली जाने वाली पूरी ट्यूशन फीस स्कॉलरशिप में कवर की जाएगी।
सालाना मेंटिनेंस अलाउंस विदेश में आपके रहने-खाने और अन्य दैनिक खर्चों के लिए एक सालाना भत्ता प्रदान किया जाएगा, जिससे आपको आर्थिक चिंता नहीं होगी।
शैक्षणिक कार्यों के लिए आकस्मिक अलाउंस किताबें, अध्ययन सामग्री, अनुसंधान और अन्य शैक्षणिक खर्चों के लिए एक निश्चित आकस्मिक भत्ता भी मिलेगा।
वीजा फीस और मेडिकल बीमा विदेश जाने के लिए आवश्यक वीजा आवेदन शुल्क और आपके स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल बीमा का खर्च भी इस योजना में शामिल है।
यात्रा खर्च भारत से विदेशी विश्वविद्यालय तक और वापसी के लिए इकोनॉमी क्लास का हवाई किराया भी कवर किया जाएगा।

वित्तीय मदद की अवधि: मास्टर प्रोग्राम के लिए यह सहायता तीन साल तक और पीएचडी के लिए चार साल तक प्रदान की जाती है। यह अवधि छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए पर्याप्त समय देती है।

📝 आवेदन प्रक्रिया और चयन के चरण

इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन है, जिससे छात्र कहीं से भी आसानी से आवेदन कर सकें।

1. ऑनलाइन आवेदन

आवेदन आधिकारिक पोर्टल nosmsje.gov.in के माध्यम से जमा किए जाते हैं। आपको पोर्टल पर जाकर पंजीकरण करना होगा और सभी आवश्यक जानकारी, दस्तावेज़ अपलोड करने होंगे। यह सुनिश्चित करें कि आप सभी विवरणों को सटीक और सही ढंग से भरें।

2. चयन प्रक्रिया

चयन प्रक्रिया हर साल दो चरणों में पूरी की जाती है:

  • पहला चरण (प्रारंभिक चयन): इस चरण में उन उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है जिनका एडमिशन पहले से ही शीर्ष-रैंक वाले विदेशी संस्थानों में पक्का हो चुका है। यह उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड और संस्थान की प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।
  • दूसरा चरण (अंतिम चयन): यदि पहले चरण में पर्याप्त उम्मीदवार नहीं मिलते हैं, तो दूसरे चरण में उन उम्मीदवारों पर विचार किया जाता है जिन्होंने अन्य मान्यता प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालयों में दाखिला लिया है। चयन का आधार योग्यता, शैक्षणिक प्रदर्शन और योजना के मानदंडों का पालन होता है।

चयन प्रक्रिया बेहद पारदर्शी होती है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि सबसे योग्य और जरूरतमंद छात्रों को ही यह अवसर मिले।

💡 महत्वपूर्ण बातें और सफलता के टिप्स

  • जल्दी आवेदन करें: जैसे ही आवेदन प्रक्रिया शुरू हो, जल्द से जल्द आवेदन करें। अंतिम समय की भीड़ से बचें।
  • दस्तावेज तैयार रखें: सभी आवश्यक दस्तावेज (शैक्षणिक प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, एडमिशन लेटर आदि) पहले से तैयार रखें।
  • सही विश्वविद्यालय चुनें: वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष 500 में आने वाले विश्वविद्यालयों को प्राथमिकता दें। यह आपके चयन की संभावनाओं को बढ़ाएगा।
  • अपने उद्देश्य स्पष्ट करें: आवेदन पत्र में अपने अध्ययन के उद्देश्यों और भविष्य की योजनाओं को स्पष्ट रूप से बताएं। आपका विजन चयन समिति को प्रभावित कर सकता है।
  • सहायता लें: यदि आपको आवेदन प्रक्रिया में कोई समस्या आती है, तो आधिकारिक हेल्पलाइन या पोर्टल पर दी गई जानकारी का सहारा लें।

यह नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप (NOS) सिर्फ एक वित्तीय सहायता नहीं है, बल्कि यह एक सीढ़ी है जो आपको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने और अपने सपनों को साकार करने का अवसर प्रदान करती है। भारत सरकार का यह प्रयास उन वंचित समुदायों के लिए एक रोशनी है, जो शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाना चाहते हैं। अगर आप पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं, तो बिना देर किए इस अद्भुत अवसर का लाभ उठाएं और अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाएं।

जनता के सवाल (FAQs)

👉 नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप (NOS) क्या है?

नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित एक केंद्रीय योजना है। यह अनुसूचित जाति (SC), विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों (DNTs), भूमिहीन खेतिहर मज़दूरों और पारंपरिक कारीगर परिवारों के छात्रों को विदेश में मास्टर और पीएचडी की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

👉 इस स्कॉलरशिप के लिए कौन से छात्र आवेदन कर सकते हैं?

इस स्कॉलरशिप के लिए SC, DNTs, भूमिहीन खेतिहर मज़दूरों और पारंपरिक कारीगर परिवारों के वे छात्र आवेदन कर सकते हैं जिनकी योग्यता परीक्षा में कम से कम 60% अंक हों, आयु 35 वर्ष से कम हो, और परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से ज़्यादा न हो। यह केवल मास्टर और पीएचडी प्रोग्राम के लिए है।

👉 विदेश में पढ़ाई के लिए कितनी वित्तीय सहायता मिलती है?

यह स्कॉलरशिप ट्यूशन फीस, सालाना मेंटिनेंस अलाउंस, शैक्षणिक कार्यों के लिए आकस्मिक अलाउंस, वीजा फीस, मेडिकल बीमा और यात्रा खर्च (इकोनॉमी क्लास का हवाई किराया) को कवर करती है। मास्टर प्रोग्राम के लिए तीन साल और पीएचडी के लिए चार साल तक वित्तीय सहायता मिलती है।

👉 आवेदन प्रक्रिया क्या है और महत्वपूर्ण तिथियां क्या हैं?

आवेदन आधिकारिक पोर्टल nosmsje.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन जमा किए जाते हैं। चयन प्रक्रिया हर साल दो चरणों में होती है, जिसमें शीर्ष-रैंक वाले संस्थानों को प्राथमिकता दी जाती है। आवेदन की सटीक तिथियों और अंतिम समय-सीमा के लिए, आपको हमेशा आधिकारिक पोर्टल पर नवीनतम जानकारी की जांच करनी चाहिए।

🔗 Reference / Official Source: nosmsje.gov.in

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