Latest Post

2019 4G LTE 4G VoLTE 5G 7th Pay Commission Aadhaar Aarogya Setu Actor Wallpapers Actress Wallpaper Adriana Lima AdSense Ahoi Ashtami Airtel Airtel DTH Akshay Kumar Alcatel Alexa Rank Amazon Android Android Pie Android Q Anna university Antivirus Anushka Sharma apna csc online Apple Apps Army Army App Asthma Asus Atal Seva mirchpur Athletics Auto Auto Insurance Avengers Axis Bank Backlinks Badhajmi Bajaj Bang Bang Reloaded Bank Battery Bhai Dooj Katha Bhakti Bharti Bhumi Pednekar Big Bazaar Big TV Bing BlackBerry Blogger BlogSpot Bluetooth BoB Bollywood Boot Boxing Breathlessness Browser BSEH Bsnl Budget Budhvar Business buy Cable TV Camera Car Car Loan Card Less ATM Cash CBSE Celebrity CEO Chandra Grahan Channels Chest Pain Chhath chrome Clean WhatsApp Cache commandos Common Service Centres (CSC) Mirchpur Hisar Haryana - Front of Jyoti Sen Sec School Mirchpur Comparisons Computer Coolpad Corona Couples Chatting COVID 19 COVID 19 HARYANA Credit Cricket Crime CSC Cylinder Dama Dard Deepika Padukone Defence Detel Dhanteras Diamond Crypto DigiLocker App DigiPay App Digital India App Digital Indian Gov Dish TV Diwali DNS setting Domain Donate Doogee DTH DTH Activation DTH Installation DTH Plans in India Dusshera E-seva Kender mirchpur Earn Money Education Electronics Email Entertinment Ex-serviceman Extensions Facebook Fatigue Festivals FlicKr Flipkart Foldable Smartphone Food Foursquare Funny Gadgets Galaxy Galaxy S8 Game Ganesh ganesh chaturthi Gas Problems Gastric Problem Gharelu Gionee Gmail God Google Google + Google Assistant Google Drive Google Duo Google Pixel Google Tez Google Voice Google+ Govardhan Puja GroupMe GST GTA Guide GuruSatsang Guruvar Hamraaz hamraaz app hamraaz app download hamraaz army hamraaz army app hamraaz army app download Hamraaz Army App version 6 Apk Happy New Year Hariyali Teej Hartalika Teej Harvard University Haryana haryana csc online Haryana Yojana HDFC Bank Headphones Health Heart Attack Heart Fail Heart Problems Heart Stroke Heena Sidhu Hello App Help Hernia Hindi History Hockey Holi Holi Katha Hollywood Home Loan Honor HostGator Hosting Hrithik Roshan HTC Huawei humraaz app iBall IBM ICICI Bank Idea Ilaj India India Vs China Indian Army indian army app Indigestion Infinix InFocus Information Infosys Instagram Insurance Intel Internet Intex Mobile iPad iPhone iPhone 8 IPL IRCTC iVoomi Janmashtami Japanese Encephalitis Javascript JBL Jio Jio GigaFiber JioMart JioRail JioSaavn Jokes Kamjori Karbonn Kareena Kapoor Kartik Purnima Karva Chauth Karwa Chauth Kasam Tere Pyaar Ki Katrina Kaif Kendall Jenner Keywords Kimbho Kisan Kisan Panjikaran Kodak Kumkum Bhagya Kushth Rog Landline Laptop Lava Lenovo Leprosy LET Lethargy LG Library of Congress Lifestyle Linkedin Lisa Haydon Livejournal Liver Cancer Loans Lockdown LPG Gas mAadhaar Macbook Maha Shivratri Makar Sankranti Map Market Mary Kom Massachusetts Institute of Technology Meizu Messages Mi Micromax Microsoft Military Power 2020 Mobile Modi Mokshada Ekadashi Money Motorcycles Motorola Movie msn Muscle Pain Music Myspace Narendra Modi Narsingh Jayanti Nature Naukri Navratri Nemonia Netflix Network News Nexus Nia Sharma Nokia Notifications Nuskhe OBC Ocean Office Offrs Ola Cab OMG OnePlus Online Opera Oppo Oreo Android Orkut OS OxygenOS Padmavati PagalWorld Pain Pain Sensation Pakistan PAN PAN Card Panasonic Passwords Patanjali Pay Payment Paypal Paytm PC PDF Peeda Pendrive Pension Personal Loan Pet Me Gas PF Phone Photo PHP Pila Bukhar Pinterest Pixel Plan PNB Bank Pneumonia PNR Poco Poster PPC Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi Pradhanmantri Kisan Samman Nidhi Yojna Pradosh Pragya Jaiswal Prepaid Princeton University Printer Priyanka Chopra PUBG Qualcomm Quora Quotes Race 3 Railway Rambha Tritiya Vrat RBI Realme Recruitment Redmi Relationship Reliance Reliance JioMart Religious Restore Results Review Rule Sai Dharam Tej Saina Nehwal Salman Khan Samsung Sanusha Satsang Video Sawan Somvar Vrat SBI Bank Script Sell SEO Serial Server Shabd Shahid Kapoor Shanivar Sharad Poornima Sharp Shiv Shopping Shreyasi Singh Shruti Haasan Signal Sim Smart Android TV Smartphones SMS Snapchat Social Software Somvar Sonakshi Sinha Sonam Kapoor Soney Songs Sony Xperia Space Speakers Specifications Sports Sql Stanford University State Bank of India Stickers Stomach Upset Story Sun Direct Sunny Leone Surabhi Sushant Singh Rajput Swadeshi Swas Rog Tata Sky Tax tec Tech Tech DNA TechDNA Technology Tecno Telegram Telugu Thakan Tiger Shroff Tiger Zinda Hai Tips Tiredness Tollywood Tool Top Trending People Trading Trai TRAI Rules for cable TV Trailer Treatment Trends True Things Truecaller Tubelight Tulsi Vivah Tumblr Tunes App Tv Twitter Typing Uber ulta chand Umang App University of Oxford UP Board Upay Upchar Update USA USB Vacancies Valentines Day Verizon Vertu Viber Video Videocon d2h Videos Vijayadashami Viral Bukhar Viral Fever Virat Kohli Virgin Visas Vivo VLE Vodafone Voter Card VPN Vrat Katha Vrat Vidhi Wallpaper War Wayback Machine Weakness WhatsApp WhatsApp Cleaner WhatsApp Status WhatsApp stickers Wi-Fi WiFi Windows Windows 10 Wipro Wireless WordPress workstation WWE Xiaomi Xiaomi Mi 6 Yeh Hai Mohabbatein Yellow Fever Yo Yo Honey Singh Yoga YotaPhone YouTube ZTE अजब-गजब की खबरें अपच अस्थमा आलस्य इलाज उपचार उपाय उमंग ऐप कहानियाँ कुष्ठरोग कोरोना वायरस गुरुसत्संग घरेलू जनधन जापानी इन्सेफेलाइटिस डिजिटल इंडिया डिजिटल इंडिया अप्प्स डिजिपे ऐप डिजीलॉकर ऐप थकान दमा दर्द निमोनिया नुस्ख़े पीड़ा पीतज्वर पीला बुखार पेट में गैस पैन कार्ड बदहज़मी भक्ति मांसपेशियों में दर्द लीवर कैंसर वायरल बुखार वोटर कार्ड शब्द सच्ची बातें सत्संग वीडियो समचार सीने में दर्द स्कीम स्वास रोग हर्निया हिंदी

जंग का मैदान हो या सुदूर आपदा प्रभावित इलाकों में सहायता पहुंचानी हो इंडियन एयरफोर्स का यह विमान हर जगह अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारतीय वायुसेना का बोइंग C-17 ग्लोबमास्टर विश्व के सबसे बड़े मालवाहक विमानों में से एक है। इसने भारतीय वायुसेना की ताकत काफी बढ़ा दी है। आज हम बता रहे हैं इस विशाल विमान की खास बातें-
Video : ऐसा विमान जो सेना के टैंक-बख्तरबंद गाड़ियों को चीन की सीमा पर ले जाने में सक्षम, जानें 9 रोचक बातें


1,500 फीट की पट्टी पर भी उतर सकता है
लंबाई-174 फीट, चौड़ाई-170 फीट, ऊंचाई- 55 फीट, 3500 फीट लंबी हवाई पट्टी पर उतरने की क्षमता। इमर्जेंसी में यह 1,500 फीट की पट्टी पर भी उतर सकता है।

तीन हेलिकॉप्टरों को ले जाने की रखता है ताकत
एक बार में 42 हजार किमी तक की उड़ान भर सकता है। 150 से अधिक जवानों को एक साथ ले जाने की क्षमता। तीन हेलिकॉप्टरों या दो ट्रकों को एयरलिफ्ट करने की भी है इसकी ताकत। करीब 80 टन वजन ढो सकता है।

उड़ान के दौरान ही ईंधन भरने की क्षमता
इसमें उड़ान के दौरान ही ईंधन भरने की क्षमता है। यह विमान चार इंजनों से लैस है। इसमें एक मिसाइल चेतावनी प्रणाली, एक काउंटर मेजर डिस्पेंसिंग सिस्टम आदि शामिल हैं। इसके अलावा लैंडिंग में परेशानी होने की स्थिति में इसमें रिवर्स गियर भी दिया गया है।

वर्ष 1991 में भरी पहली उड़ान
अमेरिका में निर्मित इस विमान को अमेरिकी वायुसेना के लिए मैकडोनेल डगलस ने अस्सी-नब्बे के दशक में विकसित किया। 15 सितंबर 1991 को इसने पहली उड़ान भरी। जनवरी 1995 में इसे पेश किया गया। अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कतर, सयुंक्त अरब अमीरात आदि देश भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत ने वर्ष 2011 में किया सौदा
भारतीय वायुसेना ने वर्ष 2011 में अमेरिका से हुए समझौते के तहत बोइंग सी-17 ग्लोबमास्टर के दस विमान खरीदने का करार किया। वर्ष 2013 में जून महीने में पहला विमान मिला।

रूसी विमान की ली जगह
ग्लोबमास्टर सी-17 ने रूस के आइएल-76 की जगह ली है। आइएल-76 अभी तक वायुसेना के बेड़े में शामिल रहा था। आईएल-76 की क्षमता करीब 40 टन वजन ढोने की क्षमता थी।

ऊंचे स्थान पर भी हो सकता है लैंड
यह विमान सेना के टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों को चीन की सीमा से लगी लद्दाख जैसी ऊंची जगहों पर भी ले जाने की ताकत रखता है। ग्लोबमास्टर C-17 प्लेन में इतनी क्षमता है कि जंग के लिए पूरी तरह से तैयार 150 सैनिकों को अंडमान निकोबार से लेकर लेह तक पहुंचा सकता है।

साबित कर चुका है काबिलियत
पिछले वर्ष इस विमान ने चीन-सीमा से महज 29 किलोमीटर पहले अरुणाचल प्रदेश के मेचुका एडवांस लैंडिंग ग्राउंड पर उतरकर अपनी काबिलियत साबित की थी। 6,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस एयरपोर्ट का लैंडिंग सरफेस सिर्फ 4,200 फीट लंबा है।

नेपाल के भूकंपग्रस्त इलाकों में पहुंचाई राहत सामग्री
जंग हो या आपदा C-17 ग्लोबमास्टर प्लेन हमेशा देश की सेवा के लिए तैयार रहता है। 25 अप्रैल 2015 को नेपाल में आए भूकंप के समय इस विमान से राहत सामग्री पहुंचाई गई थी। प्राकृतिक आपदा के अलावा जंग के समय भी यह विमान बहुत महत्वपूर्ण रोल निभाता है।

युद्ध के तौर-तरीके कितने ही आधुनिक हो जाएं, लेकिन दुश्मन की सुरक्षा घेरे में सेंध लगाने के लिए छाताधारी सैनिकों की बात ही निराली है। इतिहास गवाह है कि छाताधारी सैनिकों ने दुश्मन की जमीन पर उतारकर लड़ाइयों के नतीजे बदल दिए। आज हम आपको छाताधारी सैनिकों के बारे में कुछ रोचक तथ्य बताने जा रहे हैं।

Video :: भारत के ‘छाताधारी फौजियों’ ने 1971 के युद्ध में पाक के उड़ा दिए थे होश, जानें 7 अहम बातें



भारत ने टंगैल में पाकिस्तान को दी मात
यह सही है कि भारत में छाताधारी सैनिकों की ट्रेनिंग का काम देर से शुरू हुआ लेकिन वर्ष 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में भारत के छाताधारी सैनिकों ने पाकिस्तान के होश फाख्ता कर दिये। भारतीय सेना की पैराशूट रेजीमेंट और भारतीय वायु सेना ने 11 दिसंबर, 1971 की रात को टंगैल में छाताधारी सैनिकों को पोंगली पुल पर उतारा गया। भारतीय सैनिकों को देख पाकिस्तानी सेना में खलबली मच गई। सिर्फ 748 भारतीय सैनिकों ने ढाका जाने वाला रास्ता काट दिया। पाकिस्तानी सेना को इकट्ठे होने का मौका नहीं मिला और उसे घुटने टेकने पड़े। भारतीय सेना के इस अभियान ने एक नए राष्ट्र बांग्लादेश को जन्म दिया।

दुश्मन को भौंचक्का कर देते हैं छाताधारी सैनिक
जैसा कि नाम से जाहिर है छाताधारी सैनिक पैराशूट के जरिए दुश्मन की जमीन पर उतरकर उसे भौंचक्का कर देते हैं। जब तक दुश्मन संभले तक तक तो छाताधारी सैनिक अपना काम तमाम कर चुका होता है। हालांकि सैनिकों का पैराशूट के जरिए ऊंचाई से हवा में उतरने का सिलसिला विमानों के अस्तित्व में आने के बाद शुरू हुआ लेकिन सच यह है कि ऊंचाई से छतरियों के सहारे छलांग लगाना एक खेल के रूप में बहुत पहले शुरू हो चुका था। माना जाता है कि ग्यारहवीं सदी में चीन में ऊंचाई से हवा में छलांग लगाने का खेल खेला जाता था।

पैराशूट का पहला डिजाइन
दस्तावेजों में पैराशूट का पहला प्रमाण पन्द्रहवीं सदी में मिलता है। माना जाता है कि वर्ष 1485 में leonardo da vinci ने पहली बार पैराशूट का डिजाइन स्केच किया था। पांच सौ से ज्यादा वर्ष के बाद 26 जून 2,000 को ब्रिटिश स्काईडाइवर एड्रियन निकोल्स leonardo da vinci के डिजाइन के आधार पर तैयार पैराशूट से छलांग लगाकर यह साबित किया कि da vinci वक्त से कितने आगे और कितने सही थे। अठाहरवीं सदी में पैराशूट बनाने की दिशा में कई लोगों ने काम किया। इन्हीं में से एक थे फ्रेंच नागरिक Louis-Sebastien Lenormand जिन्होंने एक पैराशूट बनाया और 1783 में इसका पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन किया।

कुत्ते ने लगाई थी पहली छलांग
वैसे मानव निर्मित पैराशूट के जरिए ऊंचाई से पहली छलांग एक कुत्ते ने लगाई। वर्ष 1785 में फ्रेंच नागरिक Jean Pierre Blanchard ने अपने पैराशूट के परीक्षण के लिए अनूठा प्रयोग किया। अपने कुत्ते के साथ एक गुब्बारे के सहारे ऊंचाई पर गए। वहां उन्होंने अपने कुत्ते को एक पैराशूट के सहारे हवा में छोड़ दिया। कुत्ते का क्या हुआ इसका वर्णन नहीं मिलता लेकिन Blanchard के पैराशूट ने सही ढंग से काम किया, इसलिए माना जा सकता है कि कुत्ता जमीन पर सुरक्षित ही उतरा होगा। Blanchard ने पैराशूट को हल्का बनाने के लिए सिल्क का इस्तेमाल किया। वर्ष 1797 में André Garnerin ने पैराशूट में कंपन कम करने के लिए कुछ और सुधार किए। अठाहरवीं और उन्नीसवीं सदी में पैराशूट में कई तरह के सुधार हुए।

हवाई जहाज से पहली छलांग
बीसवीं सदी के शुरू में हवाई जहाज के आविष्कार के बाद इस बात की जरूरत महसूस हुई कि ऊंचाई पर अगर हवाई जहाज में खराबी आ जाए तो पायलट की जान कैसे बचाई जाए। पैराशूट को आधुनिक बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ा। उड़ान के दौरान आपात स्थिति में पैराशूट का इस्तेमाल कैसे किया जाए इसकी बाकायदा ट्रेनिंग शुरू हुई। वैसे हवाई जहाज से पहली छलांग सेंट लुइस (अमेरिका) में कैप्टन अल्बर्ट बेरी ने 1 मार्च 1912 को लगाई।

बिली मिशेल ने दिया था दुश्मन के इलाके में सैनिक उतारने का सुझाव
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका के ब्रिगेडियर जनरल बिली मिशेल ने दुश्मन के इलाके में पैराशूट के जरिए अपने सैनिक उतारने का सुझाव दिया। बिली के सुझावों पर कई कारणों से अमल नहीं हो पाया। कहा जाता है कि इस दिशा में इटली आगे बढ़ा और वह 1918 में छाताधारी सैनिक उतारने में सफल रहा। कुछ ही महीनों में पहला विश्वयुद्ध समाप्त हो गया। पर युद्ध में छाताधारी सैनिकों का विचार सामने आ चुका था। 1920 के दशक में कई देशों की सेनाओं ने इस दिशा में विचार करना शुरू कर दिया कि कैसे पैराशूट के जरिए ज्यादा से ज्यादा सैनिकों को उतारा जाए।

सोवियत संघ ने इसे खेल के रूप में अपनाया
सोवियत संघ ने इस दिशा में तेजी से काम करना शुरू किया। पैराशूटिंग को सोवियत संघ ने एक खेल के रूप में अपनाया। लोगों के लिए यह खेल नया भी था और रोमांचक भी। जब लोग इससे जुड़ने लगे तो सोवियत संघ ने उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे एयरबोर्न कोर में शामिल होकर किस तरह देश सेवा कर सकते हैं। वर्ष 1928 आते-आते पहली पैराशूट यूनिट तैयार कर ली थी। इतना ही नहीं 1933 में उसने सैनिकों को पैराड्रॉप करके दिखा भी दिया। वर्ष 1935 में कीव वर्ष 1936 में मिंस्क और मास्को में सैकड़ों छाताधारी सैनिकों के उतरने की घटनाओं ने अन्य देशों का ध्यान भी इस ओर खींचा। इधर जर्मनी और इटली भी एयरबोर्न फोर्स को विकसित करने में लगी हुई थीं। वर्ष 1936 में ही ब्रिटेन ने छाताधारी सेना का गठन किया। जल्द ही अमेरिका ने पैराशूट यनिट का गठन कर लिया।

दूसरे विश्वयुद्ध में छाताधारी सैनिकों का जलवा
दूसरे विश्वयुद्ध में छाताधारी सैनिकों का कौशल देखने को मिला। जर्मनी ने आकाश के रास्ते से क्रीट (1941) में अपने सैनिक उतारे। कंबाइंड एंग्लो-अमेरिकी सेना ने जुलाई 1943 में सिसली में, जून 1944 में नॉर्मेंडी, मार्च 1945 में राइन में सैनिक उतारे। इसके अलावा भी कई जगह छाताधारी सैनिक उतारे गए।

भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में 15 जून को हुए खूनी संघर्ष के बाद दोनों देशों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारी संख्या में सेना की तैनाती कर दी है। इससे LAC के दोनों ओर तनाव बना हुआ है।

भारत ने 3,488 किलोमीटर लंबी LAC पर सैनिकों को तैनाती के साथ माउंटेन फोर्स को भी तैनात कर दिया है।

यह हिंसक झड़प उस समय शुरू हुई जब भारतीय सैनिक चीनी सैनिकों द्वारा लगाए टेंट को हटाने गए थे।

उस दौरान चीनी सैनिकों ने पत्थर, कंटीली रॉड और तारों से हमला कर दिया था। चट्टान टूटने से कुछ सैनिक नदी में गिर गए थे।  

हर भारतीय को यह विडिओ पूरा देखना है | Indian Army vs Chinese Army | India China Border Fight TechDNA



दोस्तों हमारे वीर सेनीक दुसमन से लोहा ले रहे है लेकेन कुछ देस के अंदर है बार बार ट्वीट करके देस की सेना को नीचा दिखने की कोसिस कर रहे है | उन लोगों से मेरा कहना है की इतनी उचाई पर हमारे सेनीक दुसमान की गर्दन और रीड की हड्डी तक को तोड़ रहे है जहा पर सास लेने की आक्सीजन भी बहुत कम है |
एसे लोगों से मेरा कहना है की एक बार उस उचाई पर चड़ कर ही देखा दे और उस के बाद ट्वीट करे उन देस के गदरों को पता चल जाएगा की सेना मे कितना दम है |
दोस्तों मेरा मानना है की एसे लोगों को नेता नहीं बनाना चाइए इनको सीदे गोली मार देनी चाहीय आप की राये काय हमे कमेन्ट बॉक्स मे बतये 

आज के इस Tech DNA की विडिओ मे हम बात करेगे 
1. चीनी सेना से हुई झड़प में शहीद हुए 20 भारतीय सैनिक के बारे मे 
2. चीन ने फिंगर-4 से लेकर आठ तक बढ़ाई सेना की मौजूदगी सैनिक के बारे मे
3. भारत ने चीन की योजना के खिलाफ क्या तैयारी की है 
4. भारतीय सैनिकों बल प्रयोग के क्या क्या आदेश दिए गए है 
5. भारत ने LAC पर तैनात की स्पेशल माउंटेन फोर्स के बारे मे 
6. भारत और चीन की बैठक में क्या होगा प्रमुख मुद्दा

15-16 जून की रात लद्दाख के गलवान घाटी में हुए खूनी संघर्ष की पूरी जानकारी अब सामने आने लगी है..मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 15 जून को गलवान घाटी में भारत औऱ चीन के जवानों के बीच 7 घंटे तक संघर्ष चला. जिसमें 3 बार खूनी झड़प हुई. India Today और Hindustan Times के मुताबिक झड़प की शुरुआत 15 जून को शाम 6 बजे हुई. उस समय कर्नल संतोष बाबू अपने 35 जवानों के साथ चीनी सैनिकों को इलाका खाली करने के लिए समझाने गए थे. जब चीनी सैनिकों से बातचीत हो रही थी तभी उन्होंने Commanding officer संतोष बाबू CO को धक्का दे दिया...इसी के बाद दोनों पक्षों में खूनी संघर्ष शुरू हो गया. भारतीय सेना चीनी PLA पर भारी पड़ी और उनके टैंट को उखाड़ फेंका और आग लगा दी । इसके बाद रात नौ बजे जब फिर से बात शुरू हुई तो चीनी सैनिकों ने पत्थर बरसाने शुरू कर दिए. इसी संघर्ष में कर्नल संतोष बाबू की सहीद हो गए. जिसके बाद कम संख्या में होने के बावजूद भारतीय सैनिकों ने जोरदार हमला बोला. इसके बाद रात 11 बजे भी चीनी सैनिकों से जोरदार खूनी संघर्ष हुआ. इस दौरान भारतीय सेना LAC पर चीनी सीमा में चली गई. चीनी सैनिकों ने 10 भारतीय जवानों को बंधक बनाया तो भारतीयों ने भी कई 01 चीनी Commander और चीनी सैनिकों को बंधक बनाया.

पूर्वी लद्दाख सीमा पर तनाव को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश के बीच अब चीन ने भारत को गीदड़भभकी दी है. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि इस बार युद्ध हुआ तो भारत का हाल 1962 से भी बुरा होगा. विश्लेषकों के हवाले से इमसें कहा गया है कि अगर भारत ने अपने यहां राष्ट्रवाद को काबू में नहीं किया और सीमा पर संघर्ष हुआ तो चीन की सेना भारतीय सेना पर हर मोर्चे पर भारी पड़ेगी. गलवान घाटी में हिंसक झड़प के दौरान 20 जवानों के शहीद होने से पूरे देश में चीन के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं, उधर पीएम मोदी ने भी सीमा पर सैनिकों को जरूरी एक्शन लेने की छूट दे दी है. जिसके बाद अब चीन ने बातचीत की अपील भी की और अब धमकी देने से भी बाज नहीं आ रहा है.

चीन ने फिंगर-4 से लेकर आठ तक बढ़ाई सेना की मौजूदगी
चीन ने पैंगोंग लेक के पास अपनी मौजूदगी को बढ़ा लिया है और फिंगर-4 से आठ तक भारी संख्या में सेना की तैनाती कर दी है और वायुसेना को भी सक्रिय रखा है।

सीमा पर चीनी विमानों को देखा जा सकता है। ऐसे में चीन की इस चाल के पीछे उसकी गलत मंशा दिखाई पड़ती है।

सूत्रों की माने तो चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) फिंगर-4 के पास आर्टिलरी और टैंक के साथ बड़ी संख्या में मौजूद हैं।

भारत ने चीन की योजना के खिलाफ यह की तैयारी
PLA की हरकत को देखते हुए भारत ने भी 3,488 किलोमीटर लंबी LAC पर सैनिकों को तैनात कर दिया है। वायुसेना के मदद से पूरी LAC की निगरानी की जा रही है।

इसी तरह नौसेना को भी पूरी तरह से तैयार रहने को कहा गया हैं। झिंगजैंग और तिब्बत क्षेत्र में भारत की सेना की स्थिति को मजबूत गकिया या है।

भारतीय सैनिकों को दिए गए बल प्रयोग के आदेश
सेना के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि भारतीय सेना के कमांडर्स को निर्देश दिए गए हैं कि यदि PLA ट्रूप गलवान घाटी पार करती है और पेट्रोल पोस्ट-14 पर हमला करती है तो वह उनका जवाब दे सकते हैं।

भारत ने LAC पर तैनात की स्पेशल माउंटेन फोर्स
भारत ने सुरक्षा के लिहाज से 3,488 किलोमीटर लंबी LAC पर स्पेशल माउंटेन फोर्स को भी तैनात कर दिया है।

यह फोर्स अधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में गश्त करने तथा किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित है।

ऐसे में चीन की ओर से यदि पश्चिमी, मध्य या पूर्वी सेक्टरों अब कोई भी कदम उठाया जाता है तो यह फोर्स उसका करारा जवाब देगी। फोर्स को आवश्यक कोई भी कदम उठाने की आजादी भी दी गई है।

भारत की माउंटेन फोर्स की अगल है पहचान
भारत की माउंटेन फोर्स की एक अलग पहचान है। इसमें शामिल जवानों को गुरिल्ला युद्ध में प्रशिक्षित किया गया है। इस सेना ने करगिल युद्ध में भी अपनी उपयोगिता साबित की थी।

यह सपाट इलाकों में तैनात रहने वाले सैनिकों से बिल्कुल अलग होते हैं। इस फोर्स के पास अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लड़ने का बेहतरीन कौशल है। यह सेना दशकों से उत्तराखंड, लद्दाख, अरुणाचल और सिक्किम के पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात रही है।

चीन के साथ सीमा पर चल रहे तनाव के बीच वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया बुधवार को लेह दौरे पर गए थे।

उनका यह दौरा पहले से निर्धारित नहीं था। उन्होंने बुधवार शाम को श्रीनगर से लेह के लिए उड़ान भरी थी।

इस दौरे से पहले उन्होंने सीमा के हालात को लेकर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के साथ बैठक की थी।

आइये, पूरी खबर जानते हैं।


इस खबर में
1. अलर्ट पर रखे गए हैं वायुसेना के विमान
2. लद्दाख के पास तैनात हुए मिराज और सुखोई विमान
3. वायुसेना ने नहीं की आधिकारिक पुष्टि
4. लेह के आसमान में दिखे वायुसेना के विमान और हेलिकॉप्टर
5. पूर्वोत्तर राज्यों में भी विमान अलर्ट पर
6. चीन सीमा पर लंबे समय से जारी है तनाव

अलर्ट पर रखे गए हैं वायुसेना के विमान
भदौरिया का लेह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब सीमा पर तनाव के चलते वायुसेना के विमानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

इंडिया टुडे ने सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया, "वायुसेना प्रमुख दो दिन के दौरे पर श्रीनगर और लेह गए थे। इन दोनों स्टेशनों पर मध्य और दक्षिण भारत से लड़ाकू विमानों को बुलाकर तैनात किया है।"

बता दें, चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर हुई झड़प में 20 जवान शहीद हुए थे।

लद्दाख के पास तैनात हुए मिराज और सुखोई विमान
रिपोर्ट के मुताबिक, वायुसेना ने लद्दाख के पास बालाकोट एयरस्ट्राइक को अंजाम देने वाले लड़ाकू विमानों मिराज 200 को तैनात किया है, जहां से कुछ ही मिनटों में पेंगोग त्सो और चीनी सीमा के पास लगते इलाकों में जा सकते हैं।

इसके अलावा सुखोई-30 विमानों को भी अग्रिम मोर्चों पर भेजा गया है, जहां से वो सीमा किसी भी स्थिति का मुहंतोड़ जवाब देने में सक्षम होंगे।

शुक्रवार को लेह के आसमान में इन विमानों की गतिविधि भी देखी गई।

वायुसेना ने नहीं की आधिकारिक पुष्टि
वायुसेना ने लद्दाख में चिनूक और अपाचे हेलिकॉप्टर को भी तैनात किया है ताकि सीमा पर बन रहे हालातों के बीच सेना तक हर जरूरी सामान की समय पर आपूर्ति की जा सके।

अपाचे हेलिकॉप्टर आसमान से जमीन पर हमला करने में भी सक्षम है।

आपको बता दें कि भारतीय वायुसेना की तरफ से भदौरिया के लेह दौरे और विमानों की तैनाती को लेकर किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।



पूर्वोत्तर राज्यों में भी विमान अलर्ट पर
पिछले कुछ दिनों में श्रीनगर, अंबाला, आदमपुर और हलवाड़ा एयरबेस पर तैनात लड़ाकू विमानों में लंबी दूरी की मारक क्षमताओं वाले हथियार लगाए गए हैं।

वहीं तिब्बत क्षेत्र के आसपास होने वाले दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वायुसेना के बरेली एयरफोर्स को अलर्ट पर रखा गया है।

साथ ही वायुसेना ने पूर्वोत्तर राज्यों में स्थित अपने एयरबेस को अलर्ट कर दिया है ताकि चीन की किसी भी हरकत का तुरंत जवाब दिया जा सके।

चीन सीमा पर लंबे समय से जारी है तनाव
लद्दाख की गलवान घाटी में सीमा को लेकर भारत और चीन के बीच पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से विवाद चल रहा है।

इसे सुलझाने के लिए कई स्तर की बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला है। 6 जून की बैठक में सैनिकों के पीछे हटने पर सहमति बनी थी।

जब भारतीय सैनिक यह देखने गए तो चीनी सैनिकों ने उन्हें घेरकर उन पर हमला कर दिया। इसमें 20 जवान शहीद हुए थे।

June 17, 2020
दस्तावेज के रूप में कोई सबूत न होने पर भी आप आधार में अपने पते को अपडेट कर सकते हैं. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने इसे बारे में एलान किया है. उसने कहा है कि अगर आपके के नाम पर पते का कोई डॉक्यूमेंट्री प्रूफ नहीं है तो भी आप अपने मौजूदा पते को अपडेट कर सकते हैं. यूआईडीएआई ने बताया है कि इस काम को 'आधार वेरिफायर' की मदद से कर सकते हैं. साथ ही 'एड्रेस वे‍ल‍िडेशन लेटर' के ल‍िए ऑनलाइन अनुरोध करना होगा.

आधार कार्ड मे एड्रेस अपडेट काने के लिए इस वीडियो को धयान से देखे


कौन आपके पते को वेरिफाई कर सकता है?

परिवार का सदस्य, रिश्तेदार, दोस्त, मकान मालिक जो आपको प्रूफ के तौर पर अपने पते का इस्तेमाल करने की इजाजत दें, वे एड्रेस वेरिफायर हो सकते हैं. पता केवल तभी अपडेट होगा, अगर आप इन शर्तों को पूरा करेंगे:

-आधार में रेजिडेंट (जिसे पता अपडेट करना है) और एड्रेस वेरिफायर दोनों का मोबाइल नंबर रजिस्टर हो.

-रेजिटेंड और एड्रेस वेरिफायर दोनों को वन-टाइम-पासवर्ड के जरिए पुष्टि करनी होगी.

-रेजिडेंट को एड्रेस वेरिफायर का पता इस्तेमाल करने के लिए उनकी इजाजत लेनी होगी.

UIDAI की वेबसाइट पर जाएं और नीचे बताएं गए स्टेप को फॉलों करें. 'माई आधार' टैब में 'रिक्वेस्ट आधार वेलिडेशन लेटर' को सेलेक्ट करें.

यहां हम आपको आधार में अपना पता अपडेट करने का तरीका बता रहे हैं. डॉक्यूमेंटरी प्रूफ न होने पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

Step 1: सबसे पहले UIDAI की वेबसाइट https://uidai.gov.in/ पर जाएं. 'माई आधार' मेनू में 'एड्रेस वेलिडेशन लेटर' पर क्लिक करें.

Step 2: आपको 'रिक्वेस्ट फॉर एड्रेस वेलिडेशन लेटर' पेज पर भेजा जाएगा. यहां आपको अपने 12 अंकों का आधार नंबर या 16 अंकों की वर्चुअल आईडी को दर्ज करना होगा. फिर कैप्चा के विवरण दर्ज करने होंगे. इसके बाद 'सेंड ओटीपी' पर क्लिक करें.

Step 3: पंजीकृत नंबर पर आए 6 अंक/8 अंक के ओटीपी को दर्ज करें. फिर 'लॉग-इन' पर क्लिक करें.

Step 4: अब आप 'वेरिफायर डिटेल्स' को साझा करें. अपने 'एड्रेस वेरिफायर आधार नंबर' को दर्ज करें.

Step 5: वेरिफायर को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर अपडेट की मंजूरी देने के लिए लिंक के साथ एसएमएस भेजा जाएगा. लिंक पर क्लिक करने पर वेरिफायर को वेरिफिकेशन के लिए ओटीपी के साथ दूसरा एसएमएस भेजा जाता है. ओटीपी, कैप्चा दर्ज करने के बाद वेरिफिकेशन हो जाता है.

June 16, 2020
भारतीय सेना के सिपाही दिन-रात देश की सुरक्षा में खड़े रहते हैं. इनके लिए धूप क्या, छांव क्या… देश में आई आपदा हो या फिर दुश्मन की नापाक हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने की बात हो, किसी भी पथ पर इनके पैर नहीं डगमगाते. इनका सिर्फ एक ही उद्देश्य होता है. किसी भी कीमत पर देश के नागिरकों की सुरक्षा करना. आमतौर पर आप सेना के नाम पर आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को ही जानते हैं. पर भारत के पास कुछ ऐसी भी स्पेशल फोर्सेस हैं, जो सबकी नज़र में आये बिना दुश्मनों के दांत खट्टे करने का हुनर जानती हैं. तो आइये जानते है इस Tech DNA की Video मे कुछ ऐसी ही फोर्सेस के बारे में:

एन.एस.जी/ब्लैक कैट कमांडो
एन.एस.जी या ब्लैक कैट कमांडो देश में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध स्पेशल कमांडो फ़ोर्स में से एक है. यह फ़ोर्स अपने काम को करने में बिल्कुल भी नहीं हिचकिचाती. फिर चाहे वह दुश्मन को ढूंढकर निकालना हो या फिर देश में घुसे आतंकवादियों को मारना हो. 1984 में इस फोर्स का गठन किया गया था. यह फ़ोर्स ‘सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा’ के मोटो पर काम करती है. 26/11 के मुंबई हमले में बिना किसी मुसीबत के सफलतापूर्वक आतंकियों से निपटने में इन कमांडो का बहुत बड़ा हाथ था. ‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ जैसे बड़े मिशन को भी इस फोर्स ने बड़ी समझदारी से संभाला था.

एन.एस.जी कमांडो न सिर्फ भारत बल्कि, विश्व की सबसे बेहतर फोर्स में शुमार है. इसके कमांडो हर दम ट्रेनिंग पर रहते हैं. ताकि, आपातकालीन स्थिति में यह देश को बचाने के लिए तैयार रहें. सिर्फ चुनिन्दा लोग ही इस फोर्स का हिस्सा बन पाते हैं. इसमें शामिल होने के लिए कड़ी परीक्षाओं से होकर गुजरना होता है.

गरुड़ फ़ोर्स
आसमानी रक्षक गरुड़ फोर्स का गठन 2004 में किया गया था. गरुड़ फोर्स हवाई युद्ध में माहिर मानी जाती है. अपने हुनर से इनको पता होता है कि कैसे दुश्मन की सीमाओं में घुसकर अपने साथियों को सफलतापूर्वक बाहर लाना है. गरुड़ फोर्स की ट्रेनिंग भारत की कुछ सबसे सफल फ़ोर्स के द्वारा हुई है. गरुड़ फोर्स को दुनिया के सामने 2004 में एयरफोर्स डे के दिन लाया गया था. मौजूदा समय में 1000 सैनिक गरुड़ फोर्स में काम कर रहे हैं. बाकी फ़ोर्स से अलग गरुड़ फ़ोर्स सिर्फ एयरफोर्स के सैनिकों को ही गरुड़ बनने का मौका देती है. इनकी ट्रेनिंग सबसे लम्बी होती है, जोकि 72 हफ़्तों की है. जबकि पूरी तरह से गरुड़ फोर्स में शामिल होने में लगभग 3 साल तक का समय लग जाता है. इनका मोटो है ‘प्रहार से सुरक्षा’. यह हर तरह के प्रहार से देश की सुरक्षा करने के लिए तैयार रहते हैं.

मार्कोस
मार्कोस भारतीय नौसेना की सर्वोत्तम स्पेशल फ़ोर्स है. यह हर तरह के कामों में माहिर है. फिर चाहे वह दुश्मन से आमने-सामने की लड़ाई हो, बंधकों को बचाना हो, या फिर डायरेक्ट एक्शन. जल सम्बन्धी कार्यों में तो इन्हें महारत हासिल है. इस फ़ोर्स को ‘दाढ़ी वाली फ़ौज’ के नाम से भी जाना जाता है. क्योंकि यह नागरिकों वाली जगह में दाढ़ी बढ़ा कर आते हैं, ताकि अलग से इन्हें पहचाना न जा सके. मार्कोस कमांडो हमेशा अत्याधुनिक हथियारों से लैस रहते हैं, ताकि यह हर दम दुश्मन से आगे रह सकें. कारगिल युद्ध और मुबई 26/11 हमले में मार्कोस कमांडो ने भी साथ दिया था.

मार्कोस बनने की ट्रेनिंग दो साल की होती है. इसकी खास बात यह है कि इसमें 20-24 साल के युवाओं का ही चयन किया जाता है. अपनी ट्रेनिंग के दौरान इन्हें अमेरिका व ब्रिटिश स्पेशल फोर्स के साथ काम करने व सीखने का मौका भी मिलता है, जिससे यह हर तरह से लड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं.

कोबरा फ़ोर्स
कोबरा फोर्स को ‘कमांडो बटालियन फॉर रेसोलूट एक्शन’ के नाम से भी जाना जाता है. यह सी.आर.पी.एफ की स्पेशल फ़ोर्स है. इनका काम है जंगल की लड़ाईयां लड़ना, इनकी लड़ाई लड़ने के तरीके को गुरिल्ला टैकटिक्स भी कहते हैं. इस फोर्स का गठन नक्सलवाद का खात्मा करने के लिए किया गया था. बताते चलें कि नक्सली जंगलों में अन्दर तक छुपे रहते हैं, इसलिए उन्हें ढूंढकर निकालने का काम इन्हें दिया जाता है.

इस फ़ोर्स का मोटो ‘यश या मृत्यु’ है. जंगल में होने वाली लड़ाई में कोबरा फोर्स को भारत की सबसे अनुभवी फोर्स कहा जाता है. कोबरा फोर्स के सैनिकों को गुरिल्ला लड़ाई, बम को ढूंढना, जंगल में जिंदा रहने की तरकीबें जैसे हुनर सिखाये जाते हैं.

…ताकि मुश्किल समय में भी सिपाही को पता हो कि उसे क्या करना है. यह फ़ोर्स अब तक दो ‘शौर्य चक्र’ से नवाजी जा चुकी है. इन्हें तीन महीने की कड़ी ट्रेनिंग से होकर गुजरना पड़ता है. ट्रेनिंग के दौरान इन्हें जंगल से जुड़ी हर बात के बारे में बताया जाता है, ताकि वह हर हाल में दुश्मन को मात दे सकें.

घातक फ़ोर्स
घातक फ़ोर्स का काम है भारतीय थल सेना के साथ काम करना. यह एक 20 लोगों की पलटन होती है, जिसका काम है दुश्मन को चौकाना और फिर उस पर हमला करना है. यह थल सेना से आगे चलकर काम करते हैं, ताकि सेना को आने वाले खतरों का पहले ही पता चल जाए. यह दुश्मन के इलाके में छापा मारते हुए जाते हैं. यही नहीं, बड़े-बड़े जंगी हथियारों से यह दुश्मन पर दूर बैठे हुए भी वार कर सकते हैं. कारगिल की जंग में भी इनका सहयोग रहा था. इनकी ट्रेनिंग बहुत ही कठिन व खतरनाक होती है. इन्हें पर्वतारोहण और 50-60 किलोमीटर तेजी से चलने की ट्रेनिंग दी जाती है. इन्हें ट्रेनिग के दौरान हाथों में बन्दूक पकड़कर और पीठ पर 20 किलो वजन रखकर मीलों चलाया जाता है. इस प्रकार यह शारीरिक रुप से बहुत मजबूत होते हैं.

पैरा कमांडो
पैरा कमांडो भारत की सफल फोर्सेस में से एक है. यह सिर्फ ज़मीन नहीं, हवा में भी लड़ सकती है. पैरा कमांडो ने 1971 और 1999 में हुई जंग में बहुत अहम भूमिका निभाई थी. पैरा कमांडो को पैराशूट से कूदकर दुश्मन के इलाकों में अंदर तक घुसने में महारत हासिल होती है. पैरा कमांडो का नाम अभी बीते वर्ष में बहुत सुना गया. हाल ही में हुए सर्जिकल स्ट्राइक में इसने पाकिस्तान के कश्मीर में घुसकर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था. यह आतंकियों से निपटने, बंधकों को बचाने के लिए खासा मशहूर हैं. पैरा कमांडो फ़ोर्स भारत की पहली और सबसे पुरानी पैराशूट रेजिमेंट है. लगभग 3 साल तक चलने वाली इसकी ट्रेनिंग बहुत ही कठिन मानी जाती है.

फ़ोर्स वन
मुंबई हमलों के बाद महराष्ट्र सरकार ने यह फैसला किया कि वह अब अपने महानगर की सुरक्षा के लिए एक खुद की फ़ोर्स बनाएंगी. इसी कड़ी में उन्होंने फोर्स वन का गठन किया. इस फोर्स की सबसे बड़ी ताकत इसकी तेजी है. यह महज़ 15 मिनट में अपने सभी सामानों के साथ तैयार हो जाती है. इनकी ट्रेनिंग में डी.आर.डी.ओ, एन.एस.जी और इज़राइल की स्पेशल फ़ोर्स की कड़ी मेहनत लगती है. विस्फोटक का ज्ञान, अचूकता से दुश्मन पर गोली बरसाने की इनकी कला इनको अलग बनाती है. कहा जाता है कि मुबंई में किसी भी प्रकार के आतंकी हमले को रोकने में यह सक्षम है. इनकी भर्ती के समय 3000 आवेदन आये थे, जिनमें से बस 216 का ही चयन किया गया.

स्पेशल फ्रंटियर फोर्स
भारत-चीन युद्ध के बाद इस फ़ोर्स का गठन हुआ था. इससे कहा गया था कि अगर चीन की ओर से कोई भी अनचाहा कदम उठाया जाए, तो यह फ़ोर्स छिपकर दुश्मन की सीमा में घुसकर उसे खदेड़ दे. वो बात और है कि भारत को कभी इस फोर्स की इसके असली काम की जरूरत नहीं पड़ी. यह ‘रॉ’ के सानिध्य में काम करता है, जो कि एक भारतीय खुफिया संगठन है. इस फोर्स को किसी भी मिशन से पहले प्रधानमंत्री को सूचना देनी पड़ती है.

तो यह थी भारत की सबसे खतरनाक स्पेशल फ़ोर्सेस. इनके कमांडो हर सुरक्षा के लिए तैयार खड़े रहते हैं. इन्हीं के कारण हम और आप चैन से जिंदगी जी पाते हैं. वैसे भी एक कमांडो बनना कोई आसान काम नहीं है, कड़ी मेहनत में शरीर टूट जाने तक की ट्रेनिंग और मानसिक दबाव को झेलना पड़ता है. हंसते-हंसते देश पर अपना सबकुछ न्यौछावर कर देने वाले ऐसे जाबांजों को शत-शत नमन.

June 07, 2020
ये वो मिसाइल है जिसे भारत ने काफी मेहनत के बाद बनाया है और ये भारत के उन सबसे ताकतवर शस्त्रों में से है जिससे न सिर्फ दुश्मन खेमे में हलचल मचाई जा सकती है बल्कि इससे उस पूरे क्षेत्र का विनाश भी तय है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्यों इस ताकतवर मिसाइल को ब्रह्मोस ही नाम दिया गया। क्यों इसके नाम को ब्रह्मा जी ब्रह्मास्त्र से जोड़ा गया।

रक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक ब्रह्मोस मिसाइल का नाम भगवान ब्रह्मा के ताकतवर शस्त्र ब्रह्मास्त्र के नाम पर दिया गया। ऐसा माना जाता है कि यदि एक ब्रह्मास्त्र भी शत्रू खेमें में छोड़ा जाए तो ना केवल वह उस खेमे को नष्ट करता है बल्कि उस पूरे क्षेत्र में 12 से भी अधिक वर्षों तक अकाल पड़ता है 


और यदि दो ब्रह्मास्त्र आपस में टकरा दिए जाएं तब तो मानो प्रलय भी ही आ जाती है। जिस प्रकार भगवान ब्रह्मा के इस शस्त्र को हासिल करने के लिए काफी तप करना पड़ता था। ऐसे ही लंबे तप के बाद ही ब्रह्मोस मिसाइल भारत को हासिल हुई। कुछ समय पहले ही भारत ने इसे हासिल किया और अब ये भारत की शक्ति को दर्शाने के लिए काफी है।

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल की रफ्तार 952 मीटर प्रति सेकेंड की है. इसके आगे दुश्मन के रडार भी फेल हो जाते हैं और अगर 30 किलोमीटर के दायरे में दुश्मन का रडार इनका पता भी लगा लेता है तो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें रोकने के लिए 30 सेकेंड से कम का ही समय होता है.

ब्रह्मोस की विशेषताएँ
1. ब्रह्मोस मिसाइल हवा में ही मार्ग बदल सकती है और चलते फिरते लक्ष्य को भी भेद सकती है।

2. ब्रह्मोस मिसाइल तकनीक थलसेना, जलसेना और वायुसेना तीनों के काम आ सकती है।

3. ब्रह्मोस मिसाइल 10 मीटर की ऊँचाई पर उड़ान भर सकती है और रडार की पकड में नहीं आती।

4. ब्रह्मोस मिसाइल आवाज की गति से करीब 3 गुना अधिक रफ्तार से हमले में सक्षम

5. ब्रह्मोस मिसाइल को लड़ाकू विमान से दागे जाने पर 400 कि.मी. दूर तक मार करने में सक्षम

6. कोई दूसरी मिसाइल तेज गति से हमले के मामले में ब्रह्मोस मिसाइल की  बराबरी में नहीं ब्रह्मोस परमाणु तकनीक से लैस है

7. ब्रह्मोस मिसाइल को रडार ही नहीं किसी भी अन्य मिसाइल पहचान प्रणाली को धोखा देने में सक्षम है। ब्रह्मोस मिसाइल को मार गिराना लगभग असम्भव है।

8. ब्रह्मोस मिसाइल अमरीका की टॉम हॉक से लगभग दुगनी अधिक तेजी से वार कर सकती है, इसकी प्रहार क्षमता भी टॉम हॉक से अधिक है।

9. आम मिसाइलों के विपरित यह मिसाइल हवा को खींच कर रेमजेट तकनीक से ऊर्जा प्राप्त करती है।
ब्रह्मोस मिसाइल 1200 यूनिट ऊर्जा पैदा कर अपने लक्ष्य को तहस नहस कर सकती है।

ब्रह्मोस मिसाइल को मेनुवरेबल तकनीक यानी कि दागे जाने के बाद अपने लक्ष्य तक पहुँचने से पहले मार्ग को बदलने की क्षमता। उदाहरण के लिए टैंक से छोड़े जाने वाले गोलों तथा अन्य मिसाइलों का लक्ष्य पहले से निश्चित होता है और वे वहीं जाकर गिरते हैं। 

परंतु यदि कोई लक्ष्य इन सब से दूर हो और लगातार गतिशील हो तो उसे निशाना बनाना कठीन हो सकता है। यहीं यह तकनीक काम आती है। ब्रह्मोस मेनुवरेबल मिसाइल है। दागे जाने के बाद लक्ष्य तक पहुँचते पहुँचते यदि उसका लक्ष्य मार्ग बदल ले तो यह मिसाइल भी अपना मार्ग बदल लेती है और ब्रह्मोस मिसाइल उसे निशाना बनाकर लक्ष्य को नीसतोंनाबूत कर देती है।

दागो और भूल जाओ
ब्रह्मोस का निशाना अचूक है। इसलिए कहते हैं, ‘दागो और भूल जाओ’ इसे पनडुब्बी, एयरक्राफ्ट, हवा और जमीन से दागा जा सकता है।

ब्रह्मोस कोर्प। अगले 10 साल में करीब 2000 ब्रह्मोस मिसाइल बनाएगा। इन मिसाइलों को रूस से लिए गए सुखोई लड़ाकू जहाजों में लगाया जाएगा।

और तेज होगा ब्रह्मोस
चीन ने अपना ऐंटी शिप मैक 3 सुपरसोनिक मिसाइल CM-302 डिवेलप कर लिया है। चीन कहता है कि यह सबसे बेहतर है। माना जाता है कि पाकिस्तान की इसमें दिलचस्पी है। भारत इसके जवाब में 'ब्रह्मोस-II' डिवेलप कर रहा है, जिसे जिरकॉन कहा जाता है। यह मैक 7 की स्पीड हासिल कर सकता है, यानी आवाज की गति से 7 गुणा तेज।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल है, परंतु भविष्य में ब्रह्मोस-२ नाम से हाइपर सोनिक मिसाइल भी बनाई जाएगी जो 7 मैक की गति से वार करेगी। भारत अपनी स्वदेशी सबसोनिक मिसाइल निर्भय भी बना रहा है। ब्रह्मोस-२ करीब 6,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के साथ 290 किलोमीटर दूरी तक लक्ष्य भेद सकेगी।

प्राचीन भारत में कहीं-कहीं ब्रह्मास्त्र के प्रयोग किए जाने का वर्णन मिलता है। रामायण में भी मेघनाद से युद्ध हेतु लक्ष्मण ने जब ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करना चाहा तब श्रीराम ने उन्हें यह कहकर रोक दिया क‍ि अभी इसका प्रयोग उचित नहीं, क्योंकि इससे पूरी लंका साफ हो जाएगी।

एक कडवी सच्चाई यह है कि विश्व के सभी देश अगर मिल जुल कर और शांति से रहे तो एसे खतरनाक हथीयारो की जरूरत ही नया पड़े इन और विकास के लिए सबसे जरूरी है. हमें उम्मीद है कि सभी देशों के लीडर आपसी मुद्दों को बुलेट की नोक से नही बल्कि कलम की नोक से सुलझा कारेगे.

दोस्तों भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के बारे मे जान कर केसा लगा आप हमे कमेंट्स बॉक्स मे बताए की आप की राय और अगर आप भारत के रहने वाले है तो कमेंट्स मे जयहिंद लिखना ना भूले |

अगर आप हमारे चैनल मे नए है तो चैनल को सुबसक्रीब कर ले और सात मे घंटी को दबाय और विडिओ को लाइक करना मत भूले 

धन्यवाद 

MsnTarGet.com

Satish Kumar

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.