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June 17, 2020
दस्तावेज के रूप में कोई सबूत न होने पर भी आप आधार में अपने पते को अपडेट कर सकते हैं. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने इसे बारे में एलान किया है. उसने कहा है कि अगर आपके के नाम पर पते का कोई डॉक्यूमेंट्री प्रूफ नहीं है तो भी आप अपने मौजूदा पते को अपडेट कर सकते हैं. यूआईडीएआई ने बताया है कि इस काम को 'आधार वेरिफायर' की मदद से कर सकते हैं. साथ ही 'एड्रेस वे‍ल‍िडेशन लेटर' के ल‍िए ऑनलाइन अनुरोध करना होगा.

आधार कार्ड मे एड्रेस अपडेट काने के लिए इस वीडियो को धयान से देखे


कौन आपके पते को वेरिफाई कर सकता है?

परिवार का सदस्य, रिश्तेदार, दोस्त, मकान मालिक जो आपको प्रूफ के तौर पर अपने पते का इस्तेमाल करने की इजाजत दें, वे एड्रेस वेरिफायर हो सकते हैं. पता केवल तभी अपडेट होगा, अगर आप इन शर्तों को पूरा करेंगे:

-आधार में रेजिडेंट (जिसे पता अपडेट करना है) और एड्रेस वेरिफायर दोनों का मोबाइल नंबर रजिस्टर हो.

-रेजिटेंड और एड्रेस वेरिफायर दोनों को वन-टाइम-पासवर्ड के जरिए पुष्टि करनी होगी.

-रेजिडेंट को एड्रेस वेरिफायर का पता इस्तेमाल करने के लिए उनकी इजाजत लेनी होगी.

UIDAI की वेबसाइट पर जाएं और नीचे बताएं गए स्टेप को फॉलों करें. 'माई आधार' टैब में 'रिक्वेस्ट आधार वेलिडेशन लेटर' को सेलेक्ट करें.

यहां हम आपको आधार में अपना पता अपडेट करने का तरीका बता रहे हैं. डॉक्यूमेंटरी प्रूफ न होने पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

Step 1: सबसे पहले UIDAI की वेबसाइट https://uidai.gov.in/ पर जाएं. 'माई आधार' मेनू में 'एड्रेस वेलिडेशन लेटर' पर क्लिक करें.

Step 2: आपको 'रिक्वेस्ट फॉर एड्रेस वेलिडेशन लेटर' पेज पर भेजा जाएगा. यहां आपको अपने 12 अंकों का आधार नंबर या 16 अंकों की वर्चुअल आईडी को दर्ज करना होगा. फिर कैप्चा के विवरण दर्ज करने होंगे. इसके बाद 'सेंड ओटीपी' पर क्लिक करें.

Step 3: पंजीकृत नंबर पर आए 6 अंक/8 अंक के ओटीपी को दर्ज करें. फिर 'लॉग-इन' पर क्लिक करें.

Step 4: अब आप 'वेरिफायर डिटेल्स' को साझा करें. अपने 'एड्रेस वेरिफायर आधार नंबर' को दर्ज करें.

Step 5: वेरिफायर को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर अपडेट की मंजूरी देने के लिए लिंक के साथ एसएमएस भेजा जाएगा. लिंक पर क्लिक करने पर वेरिफायर को वेरिफिकेशन के लिए ओटीपी के साथ दूसरा एसएमएस भेजा जाता है. ओटीपी, कैप्चा दर्ज करने के बाद वेरिफिकेशन हो जाता है.

June 16, 2020
भारतीय सेना के सिपाही दिन-रात देश की सुरक्षा में खड़े रहते हैं. इनके लिए धूप क्या, छांव क्या… देश में आई आपदा हो या फिर दुश्मन की नापाक हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने की बात हो, किसी भी पथ पर इनके पैर नहीं डगमगाते. इनका सिर्फ एक ही उद्देश्य होता है. किसी भी कीमत पर देश के नागिरकों की सुरक्षा करना. आमतौर पर आप सेना के नाम पर आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को ही जानते हैं. पर भारत के पास कुछ ऐसी भी स्पेशल फोर्सेस हैं, जो सबकी नज़र में आये बिना दुश्मनों के दांत खट्टे करने का हुनर जानती हैं. तो आइये जानते है इस Tech DNA की Video मे कुछ ऐसी ही फोर्सेस के बारे में:

एन.एस.जी/ब्लैक कैट कमांडो
एन.एस.जी या ब्लैक कैट कमांडो देश में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध स्पेशल कमांडो फ़ोर्स में से एक है. यह फ़ोर्स अपने काम को करने में बिल्कुल भी नहीं हिचकिचाती. फिर चाहे वह दुश्मन को ढूंढकर निकालना हो या फिर देश में घुसे आतंकवादियों को मारना हो. 1984 में इस फोर्स का गठन किया गया था. यह फ़ोर्स ‘सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा’ के मोटो पर काम करती है. 26/11 के मुंबई हमले में बिना किसी मुसीबत के सफलतापूर्वक आतंकियों से निपटने में इन कमांडो का बहुत बड़ा हाथ था. ‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ जैसे बड़े मिशन को भी इस फोर्स ने बड़ी समझदारी से संभाला था.

एन.एस.जी कमांडो न सिर्फ भारत बल्कि, विश्व की सबसे बेहतर फोर्स में शुमार है. इसके कमांडो हर दम ट्रेनिंग पर रहते हैं. ताकि, आपातकालीन स्थिति में यह देश को बचाने के लिए तैयार रहें. सिर्फ चुनिन्दा लोग ही इस फोर्स का हिस्सा बन पाते हैं. इसमें शामिल होने के लिए कड़ी परीक्षाओं से होकर गुजरना होता है.

गरुड़ फ़ोर्स
आसमानी रक्षक गरुड़ फोर्स का गठन 2004 में किया गया था. गरुड़ फोर्स हवाई युद्ध में माहिर मानी जाती है. अपने हुनर से इनको पता होता है कि कैसे दुश्मन की सीमाओं में घुसकर अपने साथियों को सफलतापूर्वक बाहर लाना है. गरुड़ फोर्स की ट्रेनिंग भारत की कुछ सबसे सफल फ़ोर्स के द्वारा हुई है. गरुड़ फोर्स को दुनिया के सामने 2004 में एयरफोर्स डे के दिन लाया गया था. मौजूदा समय में 1000 सैनिक गरुड़ फोर्स में काम कर रहे हैं. बाकी फ़ोर्स से अलग गरुड़ फ़ोर्स सिर्फ एयरफोर्स के सैनिकों को ही गरुड़ बनने का मौका देती है. इनकी ट्रेनिंग सबसे लम्बी होती है, जोकि 72 हफ़्तों की है. जबकि पूरी तरह से गरुड़ फोर्स में शामिल होने में लगभग 3 साल तक का समय लग जाता है. इनका मोटो है ‘प्रहार से सुरक्षा’. यह हर तरह के प्रहार से देश की सुरक्षा करने के लिए तैयार रहते हैं.

मार्कोस
मार्कोस भारतीय नौसेना की सर्वोत्तम स्पेशल फ़ोर्स है. यह हर तरह के कामों में माहिर है. फिर चाहे वह दुश्मन से आमने-सामने की लड़ाई हो, बंधकों को बचाना हो, या फिर डायरेक्ट एक्शन. जल सम्बन्धी कार्यों में तो इन्हें महारत हासिल है. इस फ़ोर्स को ‘दाढ़ी वाली फ़ौज’ के नाम से भी जाना जाता है. क्योंकि यह नागरिकों वाली जगह में दाढ़ी बढ़ा कर आते हैं, ताकि अलग से इन्हें पहचाना न जा सके. मार्कोस कमांडो हमेशा अत्याधुनिक हथियारों से लैस रहते हैं, ताकि यह हर दम दुश्मन से आगे रह सकें. कारगिल युद्ध और मुबई 26/11 हमले में मार्कोस कमांडो ने भी साथ दिया था.

मार्कोस बनने की ट्रेनिंग दो साल की होती है. इसकी खास बात यह है कि इसमें 20-24 साल के युवाओं का ही चयन किया जाता है. अपनी ट्रेनिंग के दौरान इन्हें अमेरिका व ब्रिटिश स्पेशल फोर्स के साथ काम करने व सीखने का मौका भी मिलता है, जिससे यह हर तरह से लड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं.

कोबरा फ़ोर्स
कोबरा फोर्स को ‘कमांडो बटालियन फॉर रेसोलूट एक्शन’ के नाम से भी जाना जाता है. यह सी.आर.पी.एफ की स्पेशल फ़ोर्स है. इनका काम है जंगल की लड़ाईयां लड़ना, इनकी लड़ाई लड़ने के तरीके को गुरिल्ला टैकटिक्स भी कहते हैं. इस फोर्स का गठन नक्सलवाद का खात्मा करने के लिए किया गया था. बताते चलें कि नक्सली जंगलों में अन्दर तक छुपे रहते हैं, इसलिए उन्हें ढूंढकर निकालने का काम इन्हें दिया जाता है.

इस फ़ोर्स का मोटो ‘यश या मृत्यु’ है. जंगल में होने वाली लड़ाई में कोबरा फोर्स को भारत की सबसे अनुभवी फोर्स कहा जाता है. कोबरा फोर्स के सैनिकों को गुरिल्ला लड़ाई, बम को ढूंढना, जंगल में जिंदा रहने की तरकीबें जैसे हुनर सिखाये जाते हैं.

…ताकि मुश्किल समय में भी सिपाही को पता हो कि उसे क्या करना है. यह फ़ोर्स अब तक दो ‘शौर्य चक्र’ से नवाजी जा चुकी है. इन्हें तीन महीने की कड़ी ट्रेनिंग से होकर गुजरना पड़ता है. ट्रेनिंग के दौरान इन्हें जंगल से जुड़ी हर बात के बारे में बताया जाता है, ताकि वह हर हाल में दुश्मन को मात दे सकें.

घातक फ़ोर्स
घातक फ़ोर्स का काम है भारतीय थल सेना के साथ काम करना. यह एक 20 लोगों की पलटन होती है, जिसका काम है दुश्मन को चौकाना और फिर उस पर हमला करना है. यह थल सेना से आगे चलकर काम करते हैं, ताकि सेना को आने वाले खतरों का पहले ही पता चल जाए. यह दुश्मन के इलाके में छापा मारते हुए जाते हैं. यही नहीं, बड़े-बड़े जंगी हथियारों से यह दुश्मन पर दूर बैठे हुए भी वार कर सकते हैं. कारगिल की जंग में भी इनका सहयोग रहा था. इनकी ट्रेनिंग बहुत ही कठिन व खतरनाक होती है. इन्हें पर्वतारोहण और 50-60 किलोमीटर तेजी से चलने की ट्रेनिंग दी जाती है. इन्हें ट्रेनिग के दौरान हाथों में बन्दूक पकड़कर और पीठ पर 20 किलो वजन रखकर मीलों चलाया जाता है. इस प्रकार यह शारीरिक रुप से बहुत मजबूत होते हैं.

पैरा कमांडो
पैरा कमांडो भारत की सफल फोर्सेस में से एक है. यह सिर्फ ज़मीन नहीं, हवा में भी लड़ सकती है. पैरा कमांडो ने 1971 और 1999 में हुई जंग में बहुत अहम भूमिका निभाई थी. पैरा कमांडो को पैराशूट से कूदकर दुश्मन के इलाकों में अंदर तक घुसने में महारत हासिल होती है. पैरा कमांडो का नाम अभी बीते वर्ष में बहुत सुना गया. हाल ही में हुए सर्जिकल स्ट्राइक में इसने पाकिस्तान के कश्मीर में घुसकर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था. यह आतंकियों से निपटने, बंधकों को बचाने के लिए खासा मशहूर हैं. पैरा कमांडो फ़ोर्स भारत की पहली और सबसे पुरानी पैराशूट रेजिमेंट है. लगभग 3 साल तक चलने वाली इसकी ट्रेनिंग बहुत ही कठिन मानी जाती है.

फ़ोर्स वन
मुंबई हमलों के बाद महराष्ट्र सरकार ने यह फैसला किया कि वह अब अपने महानगर की सुरक्षा के लिए एक खुद की फ़ोर्स बनाएंगी. इसी कड़ी में उन्होंने फोर्स वन का गठन किया. इस फोर्स की सबसे बड़ी ताकत इसकी तेजी है. यह महज़ 15 मिनट में अपने सभी सामानों के साथ तैयार हो जाती है. इनकी ट्रेनिंग में डी.आर.डी.ओ, एन.एस.जी और इज़राइल की स्पेशल फ़ोर्स की कड़ी मेहनत लगती है. विस्फोटक का ज्ञान, अचूकता से दुश्मन पर गोली बरसाने की इनकी कला इनको अलग बनाती है. कहा जाता है कि मुबंई में किसी भी प्रकार के आतंकी हमले को रोकने में यह सक्षम है. इनकी भर्ती के समय 3000 आवेदन आये थे, जिनमें से बस 216 का ही चयन किया गया.

स्पेशल फ्रंटियर फोर्स
भारत-चीन युद्ध के बाद इस फ़ोर्स का गठन हुआ था. इससे कहा गया था कि अगर चीन की ओर से कोई भी अनचाहा कदम उठाया जाए, तो यह फ़ोर्स छिपकर दुश्मन की सीमा में घुसकर उसे खदेड़ दे. वो बात और है कि भारत को कभी इस फोर्स की इसके असली काम की जरूरत नहीं पड़ी. यह ‘रॉ’ के सानिध्य में काम करता है, जो कि एक भारतीय खुफिया संगठन है. इस फोर्स को किसी भी मिशन से पहले प्रधानमंत्री को सूचना देनी पड़ती है.

तो यह थी भारत की सबसे खतरनाक स्पेशल फ़ोर्सेस. इनके कमांडो हर सुरक्षा के लिए तैयार खड़े रहते हैं. इन्हीं के कारण हम और आप चैन से जिंदगी जी पाते हैं. वैसे भी एक कमांडो बनना कोई आसान काम नहीं है, कड़ी मेहनत में शरीर टूट जाने तक की ट्रेनिंग और मानसिक दबाव को झेलना पड़ता है. हंसते-हंसते देश पर अपना सबकुछ न्यौछावर कर देने वाले ऐसे जाबांजों को शत-शत नमन.

June 07, 2020
ये वो मिसाइल है जिसे भारत ने काफी मेहनत के बाद बनाया है और ये भारत के उन सबसे ताकतवर शस्त्रों में से है जिससे न सिर्फ दुश्मन खेमे में हलचल मचाई जा सकती है बल्कि इससे उस पूरे क्षेत्र का विनाश भी तय है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्यों इस ताकतवर मिसाइल को ब्रह्मोस ही नाम दिया गया। क्यों इसके नाम को ब्रह्मा जी ब्रह्मास्त्र से जोड़ा गया।

रक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक ब्रह्मोस मिसाइल का नाम भगवान ब्रह्मा के ताकतवर शस्त्र ब्रह्मास्त्र के नाम पर दिया गया। ऐसा माना जाता है कि यदि एक ब्रह्मास्त्र भी शत्रू खेमें में छोड़ा जाए तो ना केवल वह उस खेमे को नष्ट करता है बल्कि उस पूरे क्षेत्र में 12 से भी अधिक वर्षों तक अकाल पड़ता है 


और यदि दो ब्रह्मास्त्र आपस में टकरा दिए जाएं तब तो मानो प्रलय भी ही आ जाती है। जिस प्रकार भगवान ब्रह्मा के इस शस्त्र को हासिल करने के लिए काफी तप करना पड़ता था। ऐसे ही लंबे तप के बाद ही ब्रह्मोस मिसाइल भारत को हासिल हुई। कुछ समय पहले ही भारत ने इसे हासिल किया और अब ये भारत की शक्ति को दर्शाने के लिए काफी है।

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल की रफ्तार 952 मीटर प्रति सेकेंड की है. इसके आगे दुश्मन के रडार भी फेल हो जाते हैं और अगर 30 किलोमीटर के दायरे में दुश्मन का रडार इनका पता भी लगा लेता है तो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें रोकने के लिए 30 सेकेंड से कम का ही समय होता है.

ब्रह्मोस की विशेषताएँ
1. ब्रह्मोस मिसाइल हवा में ही मार्ग बदल सकती है और चलते फिरते लक्ष्य को भी भेद सकती है।

2. ब्रह्मोस मिसाइल तकनीक थलसेना, जलसेना और वायुसेना तीनों के काम आ सकती है।

3. ब्रह्मोस मिसाइल 10 मीटर की ऊँचाई पर उड़ान भर सकती है और रडार की पकड में नहीं आती।

4. ब्रह्मोस मिसाइल आवाज की गति से करीब 3 गुना अधिक रफ्तार से हमले में सक्षम

5. ब्रह्मोस मिसाइल को लड़ाकू विमान से दागे जाने पर 400 कि.मी. दूर तक मार करने में सक्षम

6. कोई दूसरी मिसाइल तेज गति से हमले के मामले में ब्रह्मोस मिसाइल की  बराबरी में नहीं ब्रह्मोस परमाणु तकनीक से लैस है

7. ब्रह्मोस मिसाइल को रडार ही नहीं किसी भी अन्य मिसाइल पहचान प्रणाली को धोखा देने में सक्षम है। ब्रह्मोस मिसाइल को मार गिराना लगभग असम्भव है।

8. ब्रह्मोस मिसाइल अमरीका की टॉम हॉक से लगभग दुगनी अधिक तेजी से वार कर सकती है, इसकी प्रहार क्षमता भी टॉम हॉक से अधिक है।

9. आम मिसाइलों के विपरित यह मिसाइल हवा को खींच कर रेमजेट तकनीक से ऊर्जा प्राप्त करती है।
ब्रह्मोस मिसाइल 1200 यूनिट ऊर्जा पैदा कर अपने लक्ष्य को तहस नहस कर सकती है।

ब्रह्मोस मिसाइल को मेनुवरेबल तकनीक यानी कि दागे जाने के बाद अपने लक्ष्य तक पहुँचने से पहले मार्ग को बदलने की क्षमता। उदाहरण के लिए टैंक से छोड़े जाने वाले गोलों तथा अन्य मिसाइलों का लक्ष्य पहले से निश्चित होता है और वे वहीं जाकर गिरते हैं। 

परंतु यदि कोई लक्ष्य इन सब से दूर हो और लगातार गतिशील हो तो उसे निशाना बनाना कठीन हो सकता है। यहीं यह तकनीक काम आती है। ब्रह्मोस मेनुवरेबल मिसाइल है। दागे जाने के बाद लक्ष्य तक पहुँचते पहुँचते यदि उसका लक्ष्य मार्ग बदल ले तो यह मिसाइल भी अपना मार्ग बदल लेती है और ब्रह्मोस मिसाइल उसे निशाना बनाकर लक्ष्य को नीसतोंनाबूत कर देती है।

दागो और भूल जाओ
ब्रह्मोस का निशाना अचूक है। इसलिए कहते हैं, ‘दागो और भूल जाओ’ इसे पनडुब्बी, एयरक्राफ्ट, हवा और जमीन से दागा जा सकता है।

ब्रह्मोस कोर्प। अगले 10 साल में करीब 2000 ब्रह्मोस मिसाइल बनाएगा। इन मिसाइलों को रूस से लिए गए सुखोई लड़ाकू जहाजों में लगाया जाएगा।

और तेज होगा ब्रह्मोस
चीन ने अपना ऐंटी शिप मैक 3 सुपरसोनिक मिसाइल CM-302 डिवेलप कर लिया है। चीन कहता है कि यह सबसे बेहतर है। माना जाता है कि पाकिस्तान की इसमें दिलचस्पी है। भारत इसके जवाब में 'ब्रह्मोस-II' डिवेलप कर रहा है, जिसे जिरकॉन कहा जाता है। यह मैक 7 की स्पीड हासिल कर सकता है, यानी आवाज की गति से 7 गुणा तेज।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल है, परंतु भविष्य में ब्रह्मोस-२ नाम से हाइपर सोनिक मिसाइल भी बनाई जाएगी जो 7 मैक की गति से वार करेगी। भारत अपनी स्वदेशी सबसोनिक मिसाइल निर्भय भी बना रहा है। ब्रह्मोस-२ करीब 6,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के साथ 290 किलोमीटर दूरी तक लक्ष्य भेद सकेगी।

प्राचीन भारत में कहीं-कहीं ब्रह्मास्त्र के प्रयोग किए जाने का वर्णन मिलता है। रामायण में भी मेघनाद से युद्ध हेतु लक्ष्मण ने जब ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करना चाहा तब श्रीराम ने उन्हें यह कहकर रोक दिया क‍ि अभी इसका प्रयोग उचित नहीं, क्योंकि इससे पूरी लंका साफ हो जाएगी।

एक कडवी सच्चाई यह है कि विश्व के सभी देश अगर मिल जुल कर और शांति से रहे तो एसे खतरनाक हथीयारो की जरूरत ही नया पड़े इन और विकास के लिए सबसे जरूरी है. हमें उम्मीद है कि सभी देशों के लीडर आपसी मुद्दों को बुलेट की नोक से नही बल्कि कलम की नोक से सुलझा कारेगे.

दोस्तों भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के बारे मे जान कर केसा लगा आप हमे कमेंट्स बॉक्स मे बताए की आप की राय और अगर आप भारत के रहने वाले है तो कमेंट्स मे जयहिंद लिखना ना भूले |

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धन्यवाद 

चीन का रक्षा बजट सन 2020 में 179 अरब डॉलर था जबकि भारत का रक्षा बजट केवल 70 अरब डॉलर का है. इसके अलावा चीन के पास भारत से अधिक बड़ी सेना भी है. लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि भारत की सेना को पृथ्वी पर दुनिया की सबसे खतरनाक सेना माना जाता है. आइये इस Tech DNA video में भारत और चीन के बीच डिफेन्स ताकत की तुलना करते हैं.

भारत और चीन एशिया की दो महाशक्तियां मानी जातीं हैं. डोकलाम विवाद के कारण इन देशों के सम्बन्ध और भी कड़वे हो गए हैं. भारत, CPEC (China–Pakistan Economic Corridor) को लेकर पहले ही अपना ऐतराज जता  चुका है. चीन “स्ट्रिंग्स ऑफ़ पर्ल्स प्रोजेक्ट” के जरिये भारत को उसकी सीमा के भीतर चारों ओर से घेरने की कोशिश कर रहा है.

अब सवाल यह उठता है कि आखिर इन दोनों देशों में ज्यादा शक्तिशाली कौन है? 
आइये इस Tech DNA ke Video में यही जानने की कोशिश करते हैं कि इन दोनों देशों की सैन्य ताकत में किसका पलड़ा भारी है?

थल सेना में किसका पलड़ा भारी है?


इतना तो आप जानते हैं कि लड़ाई में क्रूरता और लड़ाई की कला आना बहुत ही जरूरी है. सब को पता  है कि चीन का सैनिक मौका पड़ने पर कुंगफू का इस्तेमाल कर सकता है, और बिना बन्दूक के लड़ सकता है, और किसी भी वस्तु को हथियार की तरह प्रयोग कर सकता है.
इसके अलावा चीनी सैनिक खाने के लिए अंडे मांस या अन्य पौष्टिक आहारों का इंतजार न करके जानवर, पशु-पक्षी, सांप-बिच्छू को खाकर अपना पेट भर सकते हैं और तो और वे मरे हुए सैनिकों को भी कच्चा खा सकते हैं. चीन के सैनिक ठन्डे इलाकों में भी आसानी से रह सकते है. चीनी सेना में मंगोल सैनिक हैं, जो दुनिया के सबसे क्रूर और खूंखार सैनिक हैं. भारत के ऊपर जब नादिरशाह और चंगेश खान ने आक्रमण किया था तो उनकी मुख्य ताकत उनकी सेना के मंगोल सैनिक ही थे.
दूसरी ओर यह बात भी किसी से नही छुपी है कि भारत के सैनिकों को पृथ्वी पर लड़ी जाने वाली लडाइयों के लिए दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में गिना जाता है. “यह कहना गलत नही होगा कि यदि किसी सेना में अगर अंग्रेज अफसर हो, अमेरिकी हथियार हों और हिंदुस्तानी सैनिक हों तो उस सेना को युद्ध के मैदान में हराना नामुमिकन होगा.”
अब यह सवाल उठता है कि क्या भारत के सैनिक इतने क्रूर हैं और इतने अधिक तैयार हैं कि वे कुछ भी खाकर युद्ध में डटे रहेंगे. इसका उत्तर होगा नही. लेकन फिर भी भारत से जीतना चीन के लिए आसान नही होगा जानिए क्यों ?
INS विक्रमादित्य युद्धपोत
INS विक्रमादित्य युद्धपोत, पूर्व सोवियत विमान वाहक एडमिरल गोर्शकोव का नया नाम है. इस विमान वाहक पोत को 2013 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था. इसकी लंबाई लगभग तीन फुटबॉल मैदानों तथा ऊंचाई लगभग 22 मंजिली इमारत के बराबर है.
इस पर कामोव-31, कामोव-28, हेलीकॉप्टर, मिग-29-K लड़ाकू विमान, ध्रुव और चेतक हेलिकॉप्टरों सहित तीस विमान और एंटी मिसाइल प्रणालियां तैनात होंगी, जिसके परिणामस्वरूप इसके एक हजार किलोमीटर के दायरे में दुश्मन के लड़ाकू विमान और युद्धपोत नहीं फटक सकेंगे. 

विक्रमादित्य में 1,600 लोगों को ले जाने की क्षमता है और यह 32 नॉट (59 किमी/घंटा) की रफ्तार से गश्त करता है और 100 दिन तक लगातार समुद्र में रह सकता है.

INS चक्र-2
आईएनएस चक्र-2, भारतीय नौसेना की नाभिकीय ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी है. भारत ने इसे रूस से एक अरब डॉलर के सौदे पर लिया है. इसे 4 अप्रैल 2012 को विशाखापत्तनम में भारतीय सेना को सुपुर्द किया गया था. भारतीय नौसेना में शामिल यह पनडुब्बी परमाणु अटैक करने में सक्षम एक मात्र पनडुब्बी है.
यह पलक झपकते ही चीन और पाकिस्तान पर परमाणु हमला कर सकती है. यह पनडुब्बी 600 मीटर तक पानी के अंदर रह सकती है. यह तीन महीने लगातार समुद्र के भीतर रह सकती है. समुद्र में इसकी रफ्तार 43 किमी प्रति घंटा है.

भारत के सामने क्या चुनौतियाँ होंगी?
चीन के साथ की लड़ाई मैंदान की लड़ाई नहीं होगी, यह पहाड़ों की लड़ाई होगी, और पहाड़ों की लड़ाई में तोप और गोलों की जगह पैदल सेना का ज्यादा महत्त्व होता है. यहाँ पर चीन की सेना के पास एडवांटेज होगा क्योंकि वे हमसे ज्यादा ऊंचे स्थान पर बैठे होंगे.
भारत की लड़ाई चीन की सेना से कई मोर्चों पर होगी. यह लड़ाई पाकिस्तानी कश्मीर से फिर लद्दाख फिर तिब्बत, नेपाल, सिक्किम, भूटान, से होती हुई अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा, मणिपुर और बर्मा तक फैली होगी. यहाँ पर यह बात ध्यान में रखनी है कि बर्मा और म्यांमार दोनों ही चीन की गोद में बैठे हैं और भारत के खिलाफ लड़ाई में चीन का साथ देंगे.
तो क्या भारत के पास इतनी पैदल सेना (infantry) है की वह पूरे हिमालय क्षेत्र में उसे लगा सके और उसके पास गोला बारूद, तोपें, बंदूकें और खाने पीने का सामान इत्यादि पहुंचा सके. ध्यान रहे कि भारत के पास कुल एक्टिव सेना 13.25 लाख है. इसके विपरीत चीन की कुल आर्मी 23.35 लाख है और उसने पूरे हिमालय में अपनी सेना को लगा रखा है, और अपने सैनिकों को पूरी तरह तैयार कर रखा है.

इतना ही नही यदि चीन से लड़ाई शुरू होती है तो पाकिस्तान, भारत के खिलाफ एक अलग मोर्चा खोल देगा. सबसे खतरनाक हालात भारत के लिए तब पैदा होंगे जब नक्सली इस मौके का फायदा उठाकर लाल गलियारा स्थापित करने की कोशिश करेंगे. चीन और पाकिस्तान दोनों ही भारत के नक्सलियों को हथियार उपलब्ध कराते हैं. हाल में लातेहार में हुए नक्सली हमले में पाक निर्मित हथियार मिले थे जिससे नक्सली को पाकिस्तानी मदद की पुष्टि होती है.

भारतीय वायुसेना का आकलन  (Indian Air force Analysis)

अब अगर भारत की वायुसेना की ताकत की बात की जाये तो फिलहाल हमें चीन पर भी बढ़त हासिल है. चीन के विमान ऊंचाई वाले एयरबेस से उड़ान भरेंगे, वो कम ईंधन और हथियार लेकर ही उड़ सकेंगे. चीन के पास हवा में ईंधन भरने वाले विमान भी नहीं हैं, इसलिए चीन की वायुसेना के मुकाबले भारत की स्थिति बेहतर है.
हालाँकि इस समय भारतीय वायुसेना जिन लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर रही है, उनमें से आधे अगले 9 सालों में रिटायर हो जाएंगे. इस समय वायुसेना के पास 35 फाइटर स्क्वाड्रन हैं. जबकि भारत सरकार ने 42 स्क्वाड्रन की मंजूरी दी हुई है जबकि जरूरत 45 स्क्वाड्रन की है.

भारत की वायुसेना चीन से बेहतर कैसे है? (How Indian Air force is better than China)
मिराज-2000, मिग-29, C-17 ग्लोबमास्टर मालवाहक विमान और लॉकहीड मार्टिन कंपनी का बनाया C-130J सुपर हरक्यूलिस मालवाहक विमानों के अलावा हिंदुस्तान पास सुखोई-30 जैसे लड़ाकू विमान हैं, जो तीन हजार किलोमीटर दूर तक मार कर सकते हैं और लगातार पौने चार घंटे तक हवा में रह सकते हैं.

इसके अलावा अब भारत के पास फ़्रांस का राफेल जेट विमान भी आने ही वाला है जो कि दक्षिण एशिया में युद्ध का नक्शा ही बदल देगा.
भारत को अमेरिका से 4 चिनूक हेलिकॉप्टर पहले ही मिल चुके हैं. चिनूक हेलीकॉप्टर से भारतीय सेना को हथियार आसानी से मुहैया करवाए जा सकेंगे और भारतीय सेना अपनी टुकड़ियों को दुर्गम और ऊंचे इलाकों में जल्दी पहुंचा सकेगी. यह हेलीकॉप्टर बहुत तेजी से उड़ान भरने में सक्षम है, यही वजह है कि यह बेहद घनी पहाड़ियों में भी सफ़लतापूर्वक काम कर सकता है.
भारत के पास ब्रह्मोस जैसी जबरदस्त मिसाइल भी है. इसकी रफ्तार 952 मीटर प्रति सेकेंड की है. इसके आगे दुश्मन के रडार भी फेल हो जाते हैं और अगर 30 किलोमीटर के दायरे में दुश्मन का रडार इनका पता भी लगा लेता है तो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें रोकने के लिए 30 सेकेंड से कम का ही समय होता है.
इस प्रकार सभी आकलन करने के बाद यह कहा जा सकता है कि यदि कुछ मोर्चों पर चीन का पलड़ा भारी है तो कुछ पर भारत का.
एक कडवी सच्चाई यह है कि ये दोनों देश पूरे विश्व के 2 चमकते हुए सितारे हैं इन दोनों की अर्थव्यवस्था पर ही विश्व की अर्थव्यवस्था टिकी हुई है. इसलिए विश्व के अन्य विकसित देश इन दोनों देशों के बीच युद्ध की किसी भी संभावना को ख़त्म करने में कोई कसर नही छोड़ेंगे जो कि विश्व में शांति और विकास के लिए सबसे जरूरी है. हमें उम्मीद है कि इन दोनों देशों के लीडर आपसी मुद्दों को बुलेट की नोक से नही बल्कि कलम की नोक से सुलझा लेंगे.

दोस्तों भारत और चीन की लड़ाई अगर होती है तो आप हमे कमेंट्स बॉक्स मे बताए की आप की राय मे किस का पलड़ा भारी रहेगा |
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Digital Locker डिजिटल लॉकर या DigiLocker डिजीलॉकर एक तरह का वर्चुअल लॉकर है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2015 में लॉन्च किया था. डिजीलॉकर को डिजिटल इंडिया अभियान के तहत शुरू किया गया था. डिजीलॉकर खाता खोलने के लिए आपके पास आधार कार्ड का होना अनिवार्य है. डिजीलॉकर में देश के नागरिक पैन कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट आदि के साथ कोई भी सरकारी प्रमाण-पत्र स्टोर कर सकते हैं.

DigiLocker पर अकाउंट कैसे बनाएं?
1. सबसे पहले digilocker.gov.in या digitallocker.gov.in पर जाएं.
2. इसके बाद दाईं ओर Sign Up पर क्लिक करें.
3. नया पेज ओपन होगा जहां अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें.
4. इसके बाद DigiLocker आपके द्वारा दर्ज मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजेगा जिसे दर्ज करें.
5. इसके बाद अपना यूजरनेम और पासवर्ड सेट करें.
6. अब आप DigiLocker का इस्तेमाल कर सकते हैं.

वीडियो देखिए.

DigiLocker ऐप आप एंड्रॉइड के गूगल प्ले स्टोर और एप्पल के ऐप स्टोर से डाउनलोड करके भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

DigiLocker वेबसाइट के मुताबिक, डिजीलॉकर के अभी तक 1 करोड़ 40 लाख रजिस्टर्ड यूजर हैं. DigiLocker पर अभी तक करीब 1 करोड़ 90 लाख डाक्यूमेंट्स अपलोड किए गए हैं और करीब 6.6 लाख डाक्यूमेंट्स eSigned भी हैं.

DigiLocker में डाक्यूमेंट्स कैसे अपलोड करें?
1. DigiLocker पर लॉग इन करें.
2. बाईं ओर Uploaded Documents पर जाएं और अपलोड पर क्लिक करें.
3. डॉक्यूमेंट के बारे में संक्षिप्त विवरण लिखें.
4. इसके बाद अपलोड बटन पर क्लिक करें.
5. DigiLocker पर आप अपनी 10वीं, 12 वीं, ग्रेजुएशन आदि के मार्कशीट के साथ ड्राइविंग लाइसेंस आदि डाक्यूमेंट्स स्टोर कर सकते हैं. ध्यान रहे आप अधिकतम 50MB की डाक्यूमेंट्स ही अपलोड कर सकते हैं और आप फोल्डर बना कर भी डाक्यूमेंट्स अपलोड कर सकते हैं.

हाल ही में केंद्रीय परिवहन विभाग ने ट्रैफिक पुलिस को निर्देश जारी करते हुए कहा कि वेरिफिकेशन के लिए DigiLocker के डाक्यूमेंट्स भी मान्य होंगे. इससे पहले भारतीय रेलवे ने भी वेरिफिकेशन के लिए DigiLocker के डाक्यूमेंट्स को मान्य माना था. आप ट्रैफिक पुलिस, रेल यात्रा के दौरान वेरिफिकेशन के वक्त DigiLocker के डाक्यूमेंट्स दिखा सकते हैं.

1. सेना भर्ती रैली हिसार, जींद, फतेहाबाद जिलों के योग्य उम्मीदवारों के लिए आयोजित की जाएगी | 

2. हरियाणा में सिरसा 30 जुलाई 2020 से 08 अगस्त 2020 तक शहीद भगत सिंह स्टेडियम, सिरसा (हरियाणा) में।

3. ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य है और 31 मई 2020 से 14 जुलाई 2020 तक खुला रहेगा। 

4. रैली के लिए एडमिट कार्ड 15 जुलाई 2020 से 29 जुलाई 2020 तक पंजीकृत ई-मेल के माध्यम से भेजा जाएगा। 

5. उम्मीदवारों को कार्यक्रम स्थल पर पहुंचना चाहिए एडमिट कार्ड में बताई गई तारीख और समय।

6. अधिक जानकारी के लिए इस विडिओ को देखे |

May 31, 2020 ,
मोबाइल बैंकिंग यकीनन काफी सुविधानजक है क्योंकि इससे एक क्लिक पर पैसे ट्रांसफर होने से लेकर कई काम घर बैठे ही हो जाते हैं।

इसलिए इस समय कोरोना के कारण लागू लॉकडाउन में लोगों को अधिकाधिक मोबाइल बैंकिंग इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है।

लेकिन इंटरनेट के जरिए अपने अकाउंट संबंधी कोई भी ट्रांजेक्शन करते समय आपको अतिरिक्त सतर्क होने की जरूरत है।

चलिए जानें कि मोबाइल बैंकिंग के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

#1 केवल बैंक की आधिकारिक ऐप का करें इस्तेमाल
मोबाइल पर पैसों से संबंधित किसी भी तरह के लेन-देन के लिए ऐसे ही किसी भी ऐप पर भरोसा न करें।

हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कई लोग कैशबैक या रिवार्ड आदि के चक्कर में तरह-तरह की मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल करने लग जाते हैं लेकिन लालच काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।

इसलिए कोशिश करें कि आप हर ट्रांसजेक्शन के लिए अपने बैंक की आधिकारिक वेबसाइट और ऐप का ही इस्तेमाल करें।

#2 मोबाइल पासवर्ड हमेशा रखें मजबूत
मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल करने का सबसे सुरक्षित विकल्प यह होता है कि फोन में हमेशा ऑटो लॉक सिस्टम रखें।

इसके अलावा मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल करते समय पासवर्ड को मजबूत रखें।

बता दें कि ज्यादातर लोग सुविधा के लिए सिर्फ मोबाइल नंबर या जन्मदिन की तारीख जैसे पासवर्ड का चुनाव करते हैं जो कि नुकसानदायक साबित हो सकता है क्योंकि इससे हैक करना आसान हो जाता है।

#3 पासवर्ड के ऑटामेटिक सेव ऑप्शन का न करें चुनाव
आधिकारिक वेबसाइट का इस्तेमाल करने का अर्थ यह नहीं है कि आप पूरी तरह सुरक्षित हैं इसलिए सुरक्षा के तौर पर आप कभी भी मोबाइल में पासवर्ड के ऑटामेटिक सेव ऑप्शन को न चुनें।

भले ही यह प्रक्रिया सुविधाजनक हो लेकिन गलती से अगर आपका फोन गलत हाथों में चला गया तो वह आसानी से आपके फोन के जरिए मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल करते हुए आपका बड़ा नुकसान कर सकता है।

#4 पब्लिक वाई-फाई या मोबाइल ब्लूटूथ का न करें इस्तेमाल
जिस समय आप मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल कर रहे हों तो उस समय पब्लिक वाई-फाई या मोबाइल ब्लूटूथ का इस्तेमाल बिल्कुल भी न करें क्योंकि इससे वायरस आने का और मोबाइल में मौजूद पर्सनल डाटा लीक होने की संभावना बढ़ जाती हैं।

आप चाहें तो वायरस जैसे खतरों से बचने के लिए फोन में एंटी वायरस फायरबॉल और सेफ्टी सॉफ्टवेयर जैसी चीजों को समय-समय पर अपडेट करते रहे।

इसके अलावा मोबाइल बैंकिंग इस्तेमाल करने के बाद तुरंत लॉगआउट कर दें।

#5 किसी भी तरह के लिंक पर क्लिक करने से बचें
कई बार आपके फोन के मैसेज बॉक्स या ई-मेल पर कई तरह के मैसेज आते हैं जिनमें तरह-तरह के लिंक दिए हुए होते हैं।

इस तरह के लिंक्स पर क्लिक करने से बचें और अपने बैंक की वेबसाइट तक पहुंचने के लिए हमेशा वेब एड्रेस और URL ही टाइप करें।

साथ ही किसी भी मेल के जवाब में अपनी बैंकिंग यूजर आईडी, पासवर्ड, क्रेडिट और डेबिट कार्ड नंबर देने की भूल कतई न करें।

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Satish Kumar

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