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 29-30 अगस्त को पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर भारत की कार्रवाई के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। दोनों देशों के टैंक एक-दूसरे की रेंज में तैनात हैं और किसी की भी एक गलती दोनों देशों को युद्ध की ओर ढकेल सकती है।

दोनों देशों के बीच चार महीने से अधिक समय से चल रहे इस गतिरोध में किस जगह पर क्या स्थिति है, आइए जानते हैं।


इस खबर में

मई में इन चार जगहों पर घुस आए थे चीनी सैनिक

मध्य जून में देपसांग में भारतीय सीमा में दाखिल हुए चीनी सैनिक

बातचीत में सहमति के बाद चीन ने दो जगह पर पीछे हटाए सैनिक

तीन जगहों पर अभी भी भारतीय इलाकों में बने हुए हैं चीनी सैनिक

पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर भारत हावी

इसी इलाके में एक-दूसरे की रेंज में तैनात हैं भारत और चीन के टैंक

भारत-चीन सीमा विवाद: पिछले चार महीने में क्या-क्या हुआ और अभी कहां क्या स्थिति है?


शुरूआत मई में इन चार जगहों पर घुस आए थे चीनी सैनिक

मौजूदा विवाद की शुरूआत मई में चीनी सैनिकों के पूर्वी लद्दाख में LAC पर चार जगहों पर आगे आने के साथ हुई। इनमें पेंगोंग झील के पास स्थित फिंगर्स एरिया, गलवान घाटी (PP14), हॉट स्प्रिंग (PP15) और गोगरा (PP17A) शामिल थे।

फिंगर्स एरिया और गलवान में तो चीनी सैनिक भारतीय इलाके में दाखिल हो गए थे। गलवान घाटी में ही 15 जून को दोनों देशों के सैनिकों में झड़प हुई थी, जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे।


देपसांग मध्य जून में देपसांग में भारतीय सीमा में दाखिल हुए चीनी सैनिक

इसके बाद मध्य जून में चीनी सैनिकों ने एक और मोर्चा खोल दिया और देपसांग में घुसपैठ कर दी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने देपसांग की वाई-जंक्शन या बोटलनेक नामक जगह पर बड़ी संख्या में सैनिक और विशेष सैन्य उपकरण तैनात कर दिए थे।

बोटलनेक LAC पर भारतीय सीमा के लगभग 18 किलोमीटर अंदर है और दौलत बेग ओल्डी (DOB) में भारत के सैन्य हवाई अड़्डे से नजदीकी के कारण ये रणनीति तौर पर बेहद महत्वपूर्ण है।


बातचीत बातचीत में सहमति के बाद चीन ने दो जगह पर पीछे हटाए सैनिक

5 जुलाई को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री की बातचीत में सेनाओं को पीछे हटाने पर सहमति बनने के बाद चीन ने इन पांच में दो जगहों- गलवान घाटी और हॉट स्प्रिंग- में अपने सैनिक पीछे हटा लिए।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच चार किलोमीटर का फासला है, वहीं हॉट स्प्रिंग में ये आंकड़ा लगभग 10 किलोमीटर है।


अन्य जगहें तीन जगहों पर अभी भी भारतीय इलाकों में बने हुए हैं चीनी सैनिक

हालांकि, चीन ने अन्य तीन जगहों पर अपने सैनिक पीछे हटाने से इनकार कर दिया। गोगरा में पहले चरण में थोड़ा पीछे हटने के बाद चीनी सैनिक वहीं जम गए हैं और दोनों देशों के सैनिकों के बीच एक किलोमीटर से भी कम का फासला है।

वहीं फिंगर्स एरिया में चीनी सैनिकों ने फिंगर चार पर अपने सैनिकों की संख्या कम जरूरी की, लेकिन चोटियों पर अभी भी उसका कब्जा है।

देपसांग में भी चीनी सैनिक जस-के-तस बने हुए हैं।


दक्षिणी किनारा पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर भारत हावी

अब बात करते हैं पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे की।

29-30 अगस्त की रात चीनी सैनिकों ने यहां भी घुसपैठ कर चोटियों पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन उसके इन नापाक मंसूबों की भनक भारतीय सैनिकों को लग गई और उन्होंने चीनी सैनिकों से पहले ही इन चोटियों पर कब्जा कर लिया।

अभी गुरूंग हिल, मुखपरी, मगर हिल, रेजांग ला और रेचिन ला भारत के नियंत्रण में है, वहीं ब्लैक टॉप और हेलमेट टॉप पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।


जानकारी इसी इलाके में एक-दूसरे की रेंज में तैनात हैं भारत और चीन के टैंक

पैंगोंग झील का दक्षिणी किनारा ही वह जगह है जहां दोनों देशों के टैंक एक-दूसरे की रेंज में तैनात हैं। चीन यहां भारतीय सैनिकों को चोटियों से उतारने की कोशिश में लगा हुआ है और यहीं पर 7 अगस्त को फायरिंग हुई थी।

 भारत ने स्‍वदेशी हथियार विकसित करने की दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया है। भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक विकसित कर ली है और सोमवार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के बालासोर में एपीजे अब्दुल कलाम परीक्षण रेंज (व्हीलर द्वीप) से इसका सफल परीक्षण किया।

इसके साथ ही भारत हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक विकसित करने वाला अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बन गया है।


इस खबर में

निर्धारित पैरामीटर्स पर किया सफलतापूर्वक प्रदर्शन

यहां देखें परीक्षण का वीडियो

देश की एक प्रमुख तकनीकी सफलता

दुश्‍मन के एयर‍ डिफेंस सिस्‍टम को नहीं लगेगी भनक

सफल परीक्षण के क्या है मायने?

रक्षा मंत्री ने DRDO को दी बधाई

क्‍या होती है हाइपरसोनिक मिसाइल?

भारत ने विकसित की हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक, ऐसा करने वाला मात्र चौथा देश


परीक्षण निर्धारित पैरामीटर्स पर किया सफलतापूर्वक प्रदर्शन

'हिंदुस्तान टाइम्स' के अनुसार DRDO द्वारा विकसित हाइपरसोनिक टेक्‍नोलॉजी डिमॉन्‍स्‍ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) का परीक्षण सुबह 11.03 बजे किया गया।

एक अधिकारी ने बताया, "अग्नि मिसाइल बूस्टर HSTDV को 30 किमी की ऊंचाई पर ले गया और फिर अलग हो गया। इसके बाद व्हीकल का एयर इनटेक खुला और स्क्रैमजेट इंजन बाहर निकल आया। व्हीकल ने सभी पूर्व-निर्धारित पैरामीटर्स पर सफल प्रदर्शन किया है। यह देश के लिए बड़ा दिन है।"


बयान देश की एक प्रमुख तकनीकी सफलता

DRDO चेयरमैन डॉ जी सतीश रेड्डी ने कहा, "यह देश की एक प्रमुख तकनीकी सफलता है। यह परीक्षण अधिक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, सामग्रियों और हाइपरसोनिक वाहनों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। इसने भारत को यह तकनीक रखने वाले चुनिंदा देशों में शामिल करा दिया है।"


ताकत दुश्‍मन के एयर‍ डिफेंस सिस्‍टम को नहीं लगेगी भनक

HSTDV हवा में आवाज की गति से छह गुना ज्‍यादा रफ्तार से दूरी तय करता है। दुश्‍मन देश के एयर डिफेंस सिस्‍टम को इसकी भनक नहीं लगेगी।

यह अपने साथ लॉन्‍ग रेंज और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें ले जा सकती है। इससे दुनिया के किसी भी कोने को घंटे भर में निशाना बनाया जा सकता है।

हाइपरसोनिक वेपन सिस्‍टम निर्धारित रास्‍ते पर नहीं चलता। दुश्‍मन को कभी अंदाजा नहीं लगेगा कि उसका रास्‍ता क्‍या है। रफ्तार इसकी सबसे बड़ी ताकत है।


मायने सफल परीक्षण के क्या है मायने?

HSTDV के सफल परीक्षण का मतलब है कि अब भारत के पास हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित करने की क्षमता है।

DRDO अगले पांच साल में स्‍क्रैमजेट इंजन के साथ हाइपरसोनिक मिसाइलें तैयार कर सकता है। इनकी रफ्तार दो किलोमीटर प्रति सेकेंड से ज्‍यादा होगी। सबसे बड़ी बात ये है कि इससे अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स भी कम लागत पर लॉन्‍च किया जा सकता हैं।

इसके अलावा भारत को अगली जेनरेशन की हाइपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस-II तैयार करने में भी मदद मिलेगी।


बधाई रक्षा मंत्री ने DRDO को दी बधाई

इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर DRDO और इसके वैज्ञानिकों को बधाई दी और कहा कि संस्थान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में जुटा है।

उन्होंने ट्वीट किया, 'DRDO ने आज स्वदेशी रूप से विकसित स्क्रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम का उपयोग कर हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इस सफलता के साथ अब सभी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां अगले चरण की प्रगति के लिए तैयार हो गई हैं।'


हाइपरसोनिक क्‍या होती है हाइपरसोनिक मिसाइल?

हाइपरसोनिक मिसाइल की रफ्तार आवाज से छह गुना अधिक होती है। यह दो प्रकार की होती हैं।

पहली हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें और दूसरी हाइपरसोनिक ग्‍लाइड व्‍हीकल। फिलहाल अमेरिका, चीन और रूस के पास ही ऐसी मिसाइलें हैं। अमेरिका जहां परंपरागत पेलोड्स पर फोकस कर रहा है, वहीं चीन और रूस परंपरागत के अलावा न्‍यूक्लियर डिलीवरी पर भी काम कर रहे हैं।

दुनिया के किसी देश के पास फिलहाल इसका डिफेंस सिस्‍टम नहीं है। पेंटागन इस पर रिसर्च कर रहा है।

June 28, 2020
अभी पूरी दुनिया में टेंशन का माहौल है। कोरोन के कारण पूरी दुनिया पहले से तबाह है, लेकिन चीन लगातार जिस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहा है उससे जंग जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। एक तरफ वह भारत के सैनिकों पर हमला करता है तो दूसरी तरफ साउथ चाइना सी में अमेरिकी फौज को उकसा रहा है।

Video : रक्षा बजट के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर, कहां है चीन?



चीन ने गलवान घाटी (India-China tension) में धोखे से रात के समय भारतीय सैनिकों पर हमला किया, जिसमें देश के 20 जांबाज शहीद हो गए। इस घटना के बाद वह वापस बातचीत की राह पर आगे बढ़ता है और LAC पर नई जगह अपने सैनिकों को भारतीय सीमा की ओर बढ़ने का आदेश देता है। इसके अलावा वह पाकिस्तान और नेपाल को मदद कर भारत को उकसाने में लगा हुआ है।

चीन की दादागीरी रोकने अमेरिका ने भेजी अपनी सेना
युद्ध के हालात इसलिए पैदा हो रहे हैं कि चीन की एशिया में बढ़ती दादागीरी के खिलाफ अमेरिका ने कड़ा रूख अख्तियार कर लिया है। अमेरिका ने यूरोप से अपनी सेना हटाकर एशिया में तैनात करने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि अमेरिका जर्मनी में तैनात 52 हजार अमेरिकी सैनिकों में से 9,500 सैनिकों को एशिया में तैनात करेगा। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि चीन, अमेरिका, भारत जैसे विशालकाय देशों का रक्षा बजट कितना है।

पूरे विश्व का रक्षा बजट 1917 अरब डॉलर
SIPRI (Stockholm International Peace Research Institute) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में पूरी दुनिया का रक्षा बजट 1917 अरब डॉलर था। 2018 के मुकाबले इसमें 3.6 फीसदी की तेजी आई है। इनमें से टॉप-5 देशों ने रक्षा बजट पर कुल (1.917 ट्रिल्यन डॉलर) का 62 फीसदी के करीब खर्च किया।

71.1 अरब डॉलर रक्षा बजट
भारत का रक्षा बजट (71.1 अरब डॉलर) दुनिया में तीसरे नंबर पर है। टॉप-5 देशों की लिस्ट में पहले नंबर पर अमेरिका आता है। दूसरे नंबर पर चीन, उसके बाद भारत, रूस और सऊदी अरब का नंबर आता है। यह पहली दफा है जब एशिया के दो देश टॉप-3 लिस्ट में शामिल हुए हैं।

अमेरिका पहले नंबर पर
रक्षा बजट के मामले में अमेरिका विश्व में पहले स्थान पर हैं। 2019 में उसका रक्षा बजट 732 अरब डॉलर का था। विश्व के कुल रक्षा बजट में उसकी हिस्सेदारी 38 फीसदी होगी। अमेरिका हथियार का बहुत बड़ा उत्पादक भी है। वहां की इकॉनमी में इसका बहुत बड़ा हिस्सा है।

चीन दूसरे नंबर पर
चीन इस मामले में दूसरे नंबर पर है। 2019 में उसका कुल रक्षा बजट 261 अरब डॉलर था। विश्व के कुल बजट में उसकी हिस्सेदारी 14 फीसदी है। पिछले कुछ सालों में चीन मॉडर्न वारफेयर पर फोकस किया है। उसने ग्राउंड आर्मी में कटौती की और अपना फोकस नेवी और एयरफोर्स पर किया।

इंडियन आर्मी संख्या में पहले नंबर पर
भारत इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर है। 2019 में उसका रक्षा बजट 71.1 अरब डॉलर है। कुल बजट में उसकी हिस्सेदारी 3.7 फीसदी है। इंडियन आर्मी में 14 लाख जवान है जो विश्व में सबसे ज्यादा है। चीन ने ग्राउंड आर्मी को पिछले दिनों आधा कर दिया था। उससे पहले पहले नंबर पर वह था। कई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के बाद ग्राउंड आर्मी के मामले में नॉर्थ कोरिया दूसरे नंबर पर है। चीन अब तीसरे नंबर पर आता है

चौथे नंबर पर रूस
चौथे नंबर पर रूस है और उसका रक्षा बजट 65.1 अरब डॉलर है और कुल बजट में उसकी हिस्सेदारी 3.4 फीसदी है। उसके बाद सऊदी अरब का नंबर आता है। वह पांचवें नंबर पर है। उसका रक्षा बजट 61.9 अरब डॉलर है। उसकी हिस्सेदारी 3.2 फीसदी है।

October 25, 2018 , , ,
दरअस फ्रांस की सरकार और वहां की एयरफोर्स अथारिटि ने इसके लिए भारत सरकार को पूरी मदद का भरोसा दिया है इसके चलते फ्रांस ने सैन्य प्रशिक्षण का आयोजन कर सभी भारतीय प्रशिक्षुओं को पूरी मदद करने का ऐलान कर दिया है इसी कारण वश भारतीय एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ 20 जुलाई तक फ्रांस दौरे पर है इस दौरे का मुख्य उद्देश्य इंडियन एयर फोर्स को फ्रांस की मदद से और मजबूत और बेहतर बनाना है 

  • देश के दुश्मनों अब तक तुमने बहुत आंख दिखा ली अब हो जाओ सावधान 
  • अब अपनी खैर मनाओ क्यों कि अब भारत की तरफ अब आंख भी उठाया तो आसमान से बरसेगी आफत
  • और सारे अगले पिछले हिसाब भी हो जायेंगे चुकता
  • हम आप को बता दें कि अब इंडियन एयर फोर्स की ताकत बेहद बढने वाली है 

अपने इस दौरे के बारे में जानकारी देते हुए उन्होने कहा कि उनके इस दौरे से दोनो देशों के रक्षा सहयोग में मजबूती आयेगी और इंडियन एयरफोर्स को भी एडवांस अपग्रेड करने में भी फ्रांस की मदद मिलेगी

इस दौरे के दौरान एयर चीफ मार्शल ने फ्रांस में दोनों देशों के संयुक्त वायु अभ्यास के चलते एक घंटा राफेल जेट की उड़ान भी भरी। उल्लेखनीय है कि भारत ने फ्रांस से करीब 59 हजार करोड़ की लागत से 36 राफेल जेट खरीदे जाने हैं। पिछले साल सितंबर में दोनों देशों के बीच ये डील फाइनल हुई थी और आने वाले तीन से पांच सालों के बीच फ्रांस इसकी डिलीवरी इंडिया को करेगा।

राफेल विमान दुनिया का सबसे ईकलौता और घातक लड़ाकू जहाज है इसकी एडवांस टैक्नोलाजी इसे सबसे अलग और एन्टीक बनाती है 

यह परमाणु हथियार और एडवांस मिसाईलों से लैस है

इसके भारतीय वायुसेना में शामिल होते ही दुश्मन देशों की रातों की नींद जरूर हराम होने वाली है यही नही एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ जी फ्रांस जा कर अपने आप को इसका ट्रायल लेने से रोक नहीं पाये तो उन्होंने इसका एक घंटे तक इसे उड़ाया भी और इसकी एडवांस टैक्नोलाजी को बेहतर तरीके से समझा

October 25, 2018 , , ,
सेना चीफ बिपिन रावत ने आखिरकार ले ही लिया वो फैसला, जिसे सुन हर आतंकवादी की रूह काँप उठती है special marcos force will eliminate terroristश्रीनगर : एक तरफ भारतीय सेना को मोदी सरकार ने ऑपरेशन कासो चलने की खुली छूट दे दी है. आपको बता दें 18 साल बाद किसी सरकार ने इतने बड़े ऑपरेशन की इजाज़त दी है. इस ऑपरेशन का मतलब है “ढूंढो और ख़त्म करो”. वही दूसरी तरफ सेना ने 250 टॉप के आतंकवादियों की हिट लिस्ट बना रखी. तो वहीँ अब बेहद चौंकाने वाला फैसला ले लिया है जिससे आतंकवादियों की रूह तक काँप उठेगी.

जम्मू कश्मीर से अब आतंकियों का मिट जायेगा नामोनिशान
आपको बता दें ऑपरेशन कासो में ही 4000 से ज़्यादा जवान चप्पे चप्पे पर आतंकियों को ढूंढ रहे हैं. सिर्फ जून तक ही 100 से ऊपर आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा जा चुका है. ऐसे में अब आतंकियों का नामोनिशान मिटाने के लिए सेना ने नौसेना के साथ हाथ मिलकर सबसे खास और खतरनाक मरीन कमांडो “मार्कोस” को बुला लिया है. ये इतने खतरनाक कमांडो होते हैं कि इनका नाम सुनकर ही आतंकवादियों कि रूह कांपने लगते हैं. भारत के मरीन कमांडो दुनिया के बेहतरीन कमांडो दस्‍ते में से गिने जाते हैं.

खात्मे के लिए आ गए ‘मार्कोस’
आपको बता दें ये वही मार्कोस मरीन कमांडो हैं जिन्हे मुंबई हमले के दौरान ताज होटल पर हुए आतंकी हमले में मदद करते हुए आगे बढ़कर आतंकियों को मारा गिराया था. इन कमांडो को बेहद कड़ी ट्रेनिंग से होकर गुजरना होता है. मार्कोस जल, थल और वायु सभी जगह ऑपरेशन को अंजाम देने में महारत हासिल रखते हैं. यह कमांडो यूनिट दुश्‍मन को बिना भनक लगे उनको ख़त्म करने में माहिर होती है. इनके पास हाइटेक वैपंस के साथ कई अन्‍य खतरनाक उपकरण भी होते हैं.
इन्‍हें बेहद मुश्किल मिशन जैसे समुद्री लुटेरों को खत्‍म करने में लगाया जाता है. यही वजह है कि सेना का साथ देने के लिए अब मार्कोस का इस्‍तेमाल करने का मन बना लिया है. आतंकियों की धर-पकड़ और उन्‍हें खत्‍म करने में अब इनका सहयोग लिया जाएगा. लिहाजा अब आतंकियों का खात्मा होने से कोई नहीं बचा सकता.
आतंकवादी भी इनका नाम सुन कर खाते हैं खौफ’
कुछ वक़्त पहले सेना से बचने के लिए कुछ आतंकवादी झेलम नदी में जा छुपे थे. जिसके बाद आतंकियों के खिलाफ चलाए गए अपने हालिया ‘ढूंढ़ो और खत्म करो’ (सर्च एंड डिस्ट्रॉय) अभियान के दौरान सेना ने विशेष मरीन कमांडो दस्ते मार्कोस ने मदद करी थी.
यही नहीं आतकियों में भी मार्कोस की तैनाती को लेकर काफी खौफ है. साल 1995 में भी मार्कोस को वुलर लेक के 250 कि. मि तक के इलाके को आतंकवादियों का सफाया कर दिया था. मार्कोस को दुनिया की बेहतरीन यूएस नेवी सील्स की तर्ज पर विकसित किया जाता है. इनका चेहरा हर वक्‍त ढका रहता है. इन्हे -40 डिग्री के जमा देने वाले तापमान पर भी अपने आपको हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहते हैं. निश्चित ही अब आतंकवादियों का सफाया घाटी से हो ही जाएगा.
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October 24, 2018 , , ,
ब्रेकिंग : सेना के DGMO ने कहा, "न गोली गिनेंगे न लाशें, पूरी छूट है, और उसका फायदा उठाएंगे" Indian Army DGMOभारत ने लगातार सीजफायर के उल्लंघन करने पर पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी है। डीजीएमओ स्तर की बातचीत में भारत ने साफ कहा है कि अगर पाकिस्तान की सेना आतंकियों का घुसपैठ में साथ देती है तो मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।

जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर के ठीक सामने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, पीओके में अथमुगम सेक्टर है जहां नीलम नदी बहती है।

भारत की इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में कई जगहों पर युद्ध विराम का उल्लंघन करना शुरु कर दिया। इसी फायरिंग में जवान मुदस्सर और पुंछ में एक नौ साल की बच्ची सजदा की मौत हो गई।
पाकिस्तानी सेना के जवान उसी नीलम नदी के किनारे गाड़ी में पेट्रोलिंग कर रहे थे। भारत की तरफ से हुई फायरिंग में पाकिस्तान के जवानों की गाड़ी नदी में गिर गई और उसमें सवार चार पाकिस्तानी जवान नदी में डूबकर मर गए।
पाकिस्तान की फायरिंग का भारत ने भी लगातार मुंहतोड़ जवाब दिया, जिसके बाद पाकिस्तान को बैकफुट पर आना पड़ा और कल सुबह पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन मेजर जनरल साहिर शमशाद मिर्जा ने भारत के डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस लेफ्टिनेंट जनरल ए के भट्ट को फोन किया।

पाकिस्तान के डीजीएमओ ने कहा, ‘’आपके जवानों ने पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाया जिससे पाकिस्तान के चार जवानों की मौत हो गई।’’ पाकिस्तान के इस नापाक उलाहने पर भारतीय डीजीएमओ ने कहा, ‘’बॉर्डर पर जो भी युद्ध विराम का उल्लंघन हो रहा है वो आप लोग (पाकिस्तान) कर रहे हैं।
भारतीय सेना सिर्फ उसका माकूल जवाब दे रही है। भारत ने फायरिंग तब की जब आपकी तरफ (पाकिस्तान) से हथियारबंद घुसपैठिए एलओसी पर पाकिस्तानी पोस्ट से भारत में घुसने की कोशिश कर रहे थे। आपको पहले भी बताया जा चुका है कि घुसपैठ को पाकिस्तान से समर्थन दिया जा रहा है। इससे लाइन ऑफ कंट्रोल पर शांति में खलल पड़ रहा है। पाकिस्तानी सेना के समर्थन से स्नाइपर्स भारतीय जवानों को निशाना बना रहे हैं। अपनी सुरक्षा के लिए भारतीय सेना माकूल जवाब देने के लिए स्वतंत्र है।’’
 हैरानी की बात ये है कि पाकिस्तानी डीजीएमओ जब भारतीय डीजीएमओ से शांति के लिए बात कर रहे थे तब भी पाकिस्तान की ओर से फायरिंग बंद नहीं हुई थी।

राजौरी में पाकिस्तानी फायरिंग का असर इतना ज्यादा था कि स्कूलों को बंद करना पड़ा। फायरिंग में जख्मी 2 लोगों को अस्पताल ले जाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। लोग दहशत में हैं। नहीं जानते कि दहशत की ये जिंदगी कब तक चलेगी।

July 22, 2017 , , ,
अभी-अभी : अमेरिका का धमाका – पाकिस्तान के खिलाफ अबतक का सबसे हाहाकारी एक्शन ! us stops pakistan military reimbursementsनई दिल्ली : पीएम मोदी द्वारा पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कोशिशें रंग लाना शुरू हो गयी हैं. पाकिस्तान को अमेरिका की और से इस बार ऐसा जोरदार तमाचा लगा है, जिसने पाकिस्तान की आँखें खोल दी हैं कि आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया अब और चुप नहीं बैठेगी.

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान की ओर से कुख्यात हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ ‘पर्याप्त कदम’ नहीं उठाये गए, जबकि इसी नाम पर पाकिस्तान सालों से अमेरिका से पैसे ऐंठता आया है. ऐसे में अमेरिका ने पाकिस्तान को गठबंधन समर्थन कोष में 35 करोड़ डॉलर की सहायता ना करने का फैसला किया है.
ये खबर सामने आते ही पाकिस्तान मीडिया में रोना-धोना शुरू हो गया है और इसे पाकिस्तान की एक कूटनीतिक नाकामी बताया जा रहा है. दरअसल पेंटागन ने ये फैसला ट्रंप प्रशासन द्वारा अफगानिस्तान और पाकिस्तान के संबंध में अमेरिकी नीति की समीक्षा के पहले लिया है. रक्षा विभाग के प्रवक्ता एडम स्टंप ने बताया कि रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस की ओर से अमेरिकी कांग्रेस को जानकारी दी जाने के फलस्वरूप रक्षा विभाग ने बाकी गठबंधन मदद कोष में 35 करोड़ डॉलर को दूसरे खाते में समायोजित किया है.
60 सालों से देश पर पाकिस्तान का एक छत्र राज रहा. इस दौरान देश पर आतंकी हमले होते रहे, कश्मीर से पंडितों का नर-संहार करके उन्हें भगा दिया गया. यहाँ तक कि पाकिस्तान ने कई बार भारत पर हमला तक कर दिया लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए. वहीँ पीएम मोदी ने 3 सालों में ही पाकिस्तान के आतंकवाद का सच दुनिया के सामने रख दिया.

पाकिस्तान को दुनिया से अलग-थलग करने की मुहीम ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है. दुनियाभर के देशों ने पाकिस्तान के साथ कन्नी काटनी शुरू कर दी है. दक्षिण कोरिया की डायलिम इंडस्ट्रियल कंपनी लिमिटेड ने पीओके में निवेश करने से मना कर दिया है. डायलिम पीओके में झेलम के तट पर मुजफ्फराबाद में 500 मेगावॉट का चकोती हट्टियन हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट विकसित करने वाली कंपनियों के संघ की प्रमुख कंपनी है. डायलिम के साथ-साथ एशियन डेवलपमेंट बैंक, इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन और एक्जिम बैंक ऑफ कोरिया ने भी पीओके में निवेश करने से इंकार कर दिया है.
पीओके के सूचना मंत्री मुश्ताक अहमद मिन्हास ने इस खबर की पुष्टि की है. जिसके बाद पाक मीडिया में मातम मनाया जाना शुरू हो गया है. पाकिस्तान में इसे मोदी की ताकत माना जा रहा है. पाक मीडिया के मुताबिक़ पीएम मोदी का जादू दुनिया के सर चढ़कर बोल रहा है और चीन हो या पाकिस्तान, दोनों देश अकेले पड़ गए हैं. जिसके बाद अमेरिकी सहायता बंद हो जाने से पाकिस्तान में तो भुखमरी की नौबत आ जाएगी. पाक आईएसआई आतंकियों को आर्थिक सहायता नहीं दे पाएगी तो आतंकवाद भी जड़ से ख़त्म हो जाएगा.
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July 22, 2017 , , ,
चीन को लेकर हुआ बेहद सनसनीखेज खुलासा, खुफिया एजेंसियों समेत पीएम मोदी के भी उड़े होश ! china using pakistan against kashmir indiaनई दिल्ली : सिक्किम बॉर्डर पर चीन के तेवर भले ही कम नहीं हो रहे हैं लेकिन चीन की साजिश केवल डोकलाम में घुसपैठ तक ही सीमित नहीं है. हिंदी न्यूज़ चैनल आजतक ने चीन को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जिसे देख खुफिया एजेंसियों समेत भारत सरकार के भी होश उड़े हुए हैं.

चीन की खौफनाक साजिश का खुलासा
दरअसल अब तक भारत कश्मीर में घुसपैठ के लिए पाकिस्तान को ही जिम्मेदार मानता आया है लेकिन आजतक के हाथ चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी सिपेक के जो दस्तावेज लगे हैं, उनसे साफ़ होता है कि कश्मीर को आज पाकिस्तान से ज्यादा बड़ा ख़तरा चीन से है.
आज कश्मीर के मामले में पाकिस्तान चीन के मोहरे से ज्यादा कुछ नहीं. अभी हाल ही में जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी अपने बयान में कश्मीर में घुसपैठ के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया था. दस्तावेजों से पता चला है कि महबूबा सच बोल रही थी. चीन एक साजिश के तहत कश्मीर पर कब्जा जमाने की कोशिशों में लगा हुआ है और इसके लिए वो पाकिस्तान को एक मोहरे की तरह इस्तमाल कर रहा है.
पाकिस्तान को गुलाम बनाकर भारत के खिलाफ साजिश
भारत के साथ नफरत पाल रहा पाकिस्तान चीन के हाथों की कठपुतली बन चुका है और इसी का फायदा उठाकर चीन पीओके में अंधाधुंध निवेश कर रहा है. चीन की वन बेल्ट वन रोड नीति का भारत पहले भी विरोध कर चुका है जो पीओके से होकर गुजरती है. दरअसल ओआरओपी के जरिये भी चीन का मकसद कश्मीर में अपनी पैठ बढ़ाने का है.
अब तक भारत को लगता था कि चीन की नज़र केवल अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और भूटान पर ही है लेकिन अब सामने आया है कि चीन से तो दोस्ती की कोई भी उम्मीद करना ही बेमानी है. चीन ने कश्मीर पर कब्जे के लिए बाकायदा 20 साल का एक ब्लूप्रिंट तैयार किया है. इन 20 सालों में चीन की योजना है कि वो पहले पाकिस्तान में भारी निवेश कर के उसकी कृषि पर कब्जा कर लेगा. उसके ऊर्जा संयंत्रों को, कपड़ा उद्योग को और राष्ट्रीय राजमार्गों को भी अपने हाथ में ले लेगा. यहाँ तक कि पाकिस्तान के स्टॉक एक्सचेंज को भी चीन ही नियंत्रित करने लगेगा.
पाकिस्तान पर आर्थिक पकड़ बनाने के बाद पीओके में उसका दखल जायज हो जाएगा क्योंकि वहां उसका खरबों रुपयों का निवेश जो होगा. अपने इन्ही नापाक मंसूबों को पूरा करने के लिए चीन ने पीओके में हर साल अरबों डॉलर का निवेश करना शुरू कर दिया है. भारत पाकिस्तान के साथ ही उलझा रहे, इसके लिए चीन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के भारत के अभियान पर संयुक्त राष्ट्र में वीटो करता रहता है.

भारत पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में व्यस्त है और पीछे-पीछे चीन के राष्ट्रीय विकास एवं सुधार आयोग ने भारत को घेरने के लिए ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है. यहाँ तक कि मूर्ख पाकिस्तान के योजना आयोग ने चीन के इस ब्लू प्रिंट को मंजूरी भी दे दी है. बीजिंग की रेनमिन यूनिवर्सिटी ने इस ब्लू प्रिंट का आकलन किया है.

इस सबकी शुरआत अमेरिका के नौ ग्यारह के ट्विन टावर हमले के बाद हुई, जब अमेरिका ने पाकिस्तान को लेकर अपने तेवर सख्त कर लिए. अमेरिका के साथ पाकिस्तान की बढ़ती दूरी का चीन ने फायदा उठाया और उसकी कंगाली का फायदा उठाकर उसकी सीमा में घुसता चला गया. इसी घुसपैठ का आलम ये है कि 2007 में पाकिस्तान के साथ चीन का जो कारोबार 4 अरब डॉलर का था वो 2016 में तीन गुना से भी ज्यादा बढ़कर 14 अरब डॉलर का हो गया.

पाकिस्तान में कुल एफडीआई में से 40 फीसदी हिस्सा आज अकेले चीन का हो चुका है. वहीँ पीछे से चोरी-छिपे चीन पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रमों को भी मदद दे रहा है. पीएम मोदी की अगुवाई में भारत की बढ़ती ताकत से चीन की बेचैनी इतनी बढ़ चुकी है कि वो अब पूरी ताकत से पाकिस्तान को अपना उपनिवेश बनाने पर आमादा है और पाकिस्तान भारत से अपनी नफरत की सनक में अपनी बर्बादी का स्वागत कर रहा है.

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July 21, 2017 , , ,
चीन के मंसूबों पर फिरा पानी, डोकलाम विवाद पर चीन को अमेरिका ने दिया झटका...setback for china s hopes for support on doklam stand offडोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं आमने सामने हैं। इस मामले में चीन लगातार दूसरे देशों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है, ताकि वो भारत को आक्रामक बताते हुए खुद को डिफेंडर की भूमिका में ला सके। चीनी अधिकारियों की कोशिश है कि वो भारत पर दुनिया के दूसरे देशों का दबाव बढ़वाए और भारत डोकलम से अपनी सेना को वापस बुला ले, पर उसकी हर चाल नाकामयाब होती दिख रही है। इसी कड़ी में चीनी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की बातचीत भी हुई पर अमेरिका की ओर से चीन को झटका दे दिया गया।
अमेरिका ने चीन को ये झटका भारतीय हितों को देखते हुए दिया, ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है। दरअसल, अमेरिका और चीन के बीच व्यापार में भारी असमानता है। अमेरिका चाहता है कि चीन अपनी ओर से अमेरिका को इस्पात और अन्य निर्यातों में कमी करे, और इसके साथ चीन अमेरिकी सामानों को खरीदे, तभी बात आगे बढ़ सकती है। यही वजह है कि अमेरिका और चीन के अधिकारियों के बीच अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर हुई बातचीत फेल हो गई।
अमेरिका-चीन स्ट्रेटजिक इकनॉमिक डायलॉग के पीछे चीन की चाल थी कि वो पर्दे के पीछे भारत विरोधी जमीन तैयार कर ले, पर अमेरिका ने उसे झटका दे दिया। अमेरिका-चीन स्ट्रेटजिक इकनॉमिक डायलॉग सालाना तौर पर आयोजित होता रहा है। लेकिन इस बार चीन इस सालाना बातचीत के पीछे डोकलम मुद्दे पर अमेरिका को मनाने की कोशिश कर रहा था। खास बात ये है कि अमेरिका-चीन स्ट्रेटजिक इकनॉमिक डायलॉग बेहद बुरी तरह से फ्लॉप हो चुका है।

July 20, 2017 , , ,
चीन की चाल का भारत के वैज्ञानिकों ने लगा लिया पता भारत को हराने के लिए कर सकता है एक ऐसे बम का इस्तेमालचाइना और भारत के बीच सीमा विवाद एक तरफ थमने का नाम नहीं ले रहा तो दूसरी तरफ चीन की तरफ से एक के बाद एक पैंतरे सामने आकर चीन के घटिया मंसूबों की पोल खोल देते हैं. कभी सीमा पर चीन की तरफ़ से तैनात मानव श्रंखला तो कभी चीन की सीमा पर सैन्य अभ्यास के नाम पर चीन आयेदिन नीचता दिखाता ही रहता है. ऐसे में इसी के बीच वैज्ञानिकों ने चीन की नीच मंशा को ज़ाहिर करते हुए एक बड़ा खुलासा किया है. वैज्ञानिकों की इस रिसर्च में भारत के खिलाफ चीन की दिल-दहलाने वाली मंशा इस तरह से सामने लायी है जिसके बारे में जानकर आपको भी हैरानी होगी.

क्या खुलासा किया है साइंटिस्ट्स ने?
देहरादून वाडिया इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने चीन की नीच मंशा वाले इस प्लान का खुलासा करते हुए कहा है कि “चीन की शक्ति को भारत इस वक़्त कम नहीं आंक सकता है. साइंटिस्टों ने माना है कि चीन की इन्ही शक्तियों में  से एक है चीन के पास पानी की शक्ति. बताया जा रहा है कि चीन के पास पानी की इतनी शक्ति है कि अगर भारत ने उस पर नज़र नहीं रखी तो भारत को इसका बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है.
एक हिंदी वेबसाइट में छपी एक ख़बर के मुताबिक वाडिया इंस्टिट्यूट के साइंटिस्ट्स संतोष राय का कहना है कि “उन्होंने साल 2007 में एक रिसर्च की थी जिसमे ये बात सामने आई थी कि चीन अगर घाघरा गंडक और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों का पानी रोकता है और फिर उसे अचानक छोड़ देता है तो भारत के लिए हालात बेहद ही खतरनाक हो सकते हैं. बता दें ये पहली बार नहीं हुआ है. इससे पहले भी जब चीन ने इस तरह की हरकत की थी तब भी मामले की गंभीरता को देखते हुए ना केवल भारत बल्कि तिब्बत के कई प्रमुख समाचार पत्रों ने इस खतरे की संभावना जताई थी.
क्यों है चीन की इस चाल से भारत को इतना खतरा
अब सवाल ये भी उठता है कि आखिर भारत को इतना खतरा क्यों हैं? तो चलिए आपको समझाते हैं. दरअसल इस मुद्दे पर जुटे  वैज्ञानिक मानते है कि चीन भारत से काफी ऊँचाई पर स्थित है और ऐसे में यहाँ से निकल रही नदियों का पानी बड़े ही वेग से निकलता है. इस वक़्त सीमा पर जिस तरह का तनाव बना हुआ है ऐसे में भारत के हित में यही उचित होगा कि वो हर वक़्त चौकन्ना रहे क्योंकि अगर गलती से भी चीन ये कदम उठता है तो ये भारत के लिए हर मायने में गंभीर परिणाम लेकर आएगा.
वैज्ञानिक संतोष बताते हैं कि चीन के बीते दिनों की हरकत पर गौर किया जाये तो वो कुछ भी कर सकता है. चीन जिस तरह से अपनी नदियों पर बाँध बनवा रहा है हो सकता है वो भारत को कोई बड़ा झटका देने की फ़िराक में हो. संतोष राय मानते हैं कि जिस तरह से डोकलाम में चीनी सेना हमारे सैनिकों से आयेदिन भिड़ रही है ऐसे में वो कुछ भी कर सकते हैं इसलिए हमें अलर्ट रहने की जरूरत है.
संतोष राय आगे बताते हैं कि चीन के पास इस वक्त बहुत ज्यादा मात्रा में पानी है और वो अगर अपनी इस ताकत को लगातार स्टोर करने में लगा हुआ है तो ऐसे में स्वाभाविक है कि भारत को हर हाल में इस बात पर ध्यान देना होगा. संतोष राय कहते हैं कि उन्होंने जो रिसर्च की है वो बेहद चौंकाने वाली है। बता दें वैज्ञानिकों की रिसर्च में पता चला है कि चीन अगर पानी रोक कर छोड़ता है तो ऐसे में असम-बंगाल बांग्लादेश और मेघालय डूब सकते हैं.

July 19, 2017 , , ,
भारत के बचाव में अब अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने चीन को दिखाई उसकी औकात, जिंगपिंग के उड़े होश america and australia warns china stricktly
भारत-चीन सीमा विवाद दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है. जहाँ एक तरह भारत अमेरिका और जापान बड़े तर्ज़ पर मालाबार एक्सरसाइज कर रहे हैं. तो वहीँ अब चीन भी हज़ारो टन सैन्य साजो सामान के साथ सीमा पर सैन्य अभियान करने आ गया है. चीन अकेला नहीं है जिसका भारत के साथ विवाद है, चीन के अड़ियल रवैये के कारण उसका 21 देशों के साथ विवाद चल रहा है. नौबत यहाँ तक पहुंच चुकी है कि दोनों देशों की सेनाएं तक आमने-सामने खड़ी हो गयी हैं. ऐसे में अब अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया देश भी भारत के बचाव में कूद पड़े हैं.

भारत के बचाव में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने भी चीन पर बोला हमला
मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक अभी बड़ी खबर आ रही है जिसमें भारत के साथ चीन के विवाद और दक्षिण चीन सागर में अपना कब्ज़ा ज़माने के अड़ियल रवैये को लेकर अब भारत के बचाव में मित्र राष्ट्र अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी कूद पड़े हैं. चीन की बढ़ती राजनीतिक और सैन्य महत्वकांक्षाओं को लेकर कड़े लहजे में अमेरिकाओर ऑस्ट्रेलिया ने चीन को अंतिम चेतावनी दे दी है.
जहाँ एक तरफ शीर्ष पेंटागन कमांडर ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में चीन के हज़ारों टन सैन्य जमावड़े को लेकर चीन को चेतावनी दी है तो वहीँ ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण चीन सागर पर चीन के कब्ज़ा करने की चीनी तिकड़म का विरोध किया है. यह है पीएम मोदी की विदेश कूटनीति जहाँ एक मित्र देश पर मुसीबत आती है तो वहां दूसरे देश बचाव में आ जाते हैं.
भारत के साथ कुछ हुआ तो चुप नहीं बैठेंगे
अमेरिकी वायुसेना के जनरल पॉल सेल्वा ने कहा कि चीनी सेना का आधुनिकीकरण एशिया प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तकीनीकी बढ़त के लिए विश्व के लिए एक चुनौती बन सकता है. सेल्वा ने आगे कहा, ‘चीनियों ने अपने क्षेत्रिय राजनीतिक लक्ष्यों को बढ़ाने के मकसद से अपने आर्थिक लाभ का दोहन की तत्परता दिखाई है. चीन का सैन्य आधुनिकीकरण जारी रहने से अमेरिका और उनके मित्र व सहयोगियों के लिए चीनी प्रभाव को संतुलित करना चुनौती बना रहेगा”.
तो वहीँ ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आई जूली बिशप ने भी कुछ इसी तरह चीन की सैन्य महत्वकांक्षाओं का कड़े लहजे में विरोध किया है. बिशप ने विवादित दक्षिण चीन सागर में जहाज़ों का बेरोक परिचालन सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि चीन द्वारा ज़बरदस्ती कृत्रम द्वीप बनाने और वहां सैन्यकरण का उनका देश पूरी तरह विरोध करता है.
इसी बीच डोकलाम क्षेत्र को लेकर भारत और चीन में जारी तनातनी के बीच अमेरिका के एक पूर्व शीर्ष राजनयिक ने भारत का पक्ष लेते हुए भारत को इस क्षेत्र की मजबूत शक्ति बताया है. अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री (दक्षिण और सेंट्रल एशिया) निशा देसाई विस्वाल ने कहा है कि विस्वाल ने कहा कि चीन को एक अहम ताकत के रूप में भारत का सम्मान करना चाहिए. आगे उन्होंने कहा, ‘चीन को यह बताने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए कि पूरे एशिया में रणनीतिक और सुरक्षा की क्षमता बढ़ती जा रही है. भारत इस क्षेत्र की मजबूत शक्ति है.’

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July 19, 2017 , ,
जाकिर नायक को लेकर हुए सबसे बड़े खुलासे से दहला पूरा देश, मुस्लिम समुदाय भी रह गया हक्का-बक्का zakir naik isis link exposedविवादित इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक पिछले साल सुर्ख़ियों में तब आया था, जब बांग्लादेश की राजधानी ढाका में बड़ा आतंकवादी हमला हुआ था. उस हमले में 22 लोगों की जान गयी थी. जाँच अधिकारीयों ने बताया कि आतंकवादी जाकिर नाइक से बहुत प्रभावित थे और उसकी वीडियो देखा करते थे. अभी अभी गृहमंत्रालय की रिपोर्ट आयी है जिसमें ज़ाकिर नाइक को लेकर बड़े ही चौकाने वाले खुलासे सामने आये हैं.

जाकिर ISIS के लिए काम करता था
गृह मंत्रालय की जाँच रिपोर्ट में सामने आया है कि धर्म कट्टरता की प्रचार की आड़ में ज़ाकिर नाइक बगदादी ब्रिगेड को हिंदुस्तान से आतंकी सप्लाई करने वाला मैनेजर बन गया था. ज़ाकिर नाइक के खिलाफ पिछले एक साल से अनेकों जांच एजेंसियां पड़ताल कर रही हैं. जिसमें टेरर फंडिंग से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग तक के मामले शामिल हैं. इस जांच के घेरे में ज़ाकिर नाइक और उसकी संस्था है. गृह मंत्रालय ने एक साल की जांच के बाद पूरी रिपोर्ट तैयार की है. जिसमें ज़ाकिर नाइक के आतंकी कनेक्शन बगदादी ब्रिगेड के साथ जुड़ते दिख रहे हैं.
अभी अभी NIA, इनफोर्समेंट डायरेक्टरेट और दूसरी तमाम बड़ी एजेंसियों और पुलिस की जांच को मिलाकर एक साल में केंद्रीय गृहमंत्रालय ने ज़ाकिर नाइक के खिलाफ 115 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है. जिसे पिछले महीने 11 मई को आधिकारिक पर दाखिल किया गया. ये 115 पेज की रिपोर्ट के अनुसार पहली बार आधिकारिक तौर पर ये माना गया है कि ज़ाकिर नाइक के कनेक्शन आईएसआईएस से जुड़े दिख रहे हैं.
ISIS के लिए ज़ाकिर नाइक भेजता था युवा
गृह मंत्रालय की इस रिपोर्ट के मुताबिक ज़ाकिर नाइक और उसकी आर्गेनाईजेशन ने केरल में युवाओं का जबरन धर्म परिवर्तन कराया, उनमें 24 युवा आईएसआईएस के आतंकवादी बनाए गए हैं. इन 24 युवाओं का ज़ाकिर नाइक की संस्था से जुड़े लोगों ने धर्म परिवर्तन करवाया था, फिर ये आईएसआईएस ज्वाइन करने के लिए केरल से अफगानिस्तान गए. अफगानिस्तान में आईएसआईएस के लिए लड़ने के लिए ये आतंकवादी मुंबई में ज़ाकिर नाइक की संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के दफ्तर में लगातार आना जाना लगा रहता था.धर्म के नाम पर और धर्म प्रचारक के सफेदपोश चेहरे के पीछे कट्टरपंथ और आतंकवाद का खूनी खेल खेला जा रहा था. जिसका मास्टर माइंड कोई और नहीं बल्कि ज़ाकिर नाइक था. बेस्टिन विंसेंट फ्रांसिस नाम के युवा का 12 सितंबर 2014 को धर्म परिवर्तन करवाया गया. बेस्टिन को याहिया नाम दिया गया, अगले कुछ महीनों ने बेस्टिन के तीन और साथियों का धर्म परिवर्तन करवाया गया. जिसमें बेस्टिन की गर्लफ्रेंड निमिशा भी शामिल थी, जिसे धर्म परिवर्तन के बाद फातिमा नाम दिया गया

मोदी सरकार ने जाकिर की संस्था पर लगाया था 5 साल का प्रतिबंध
आतंकवादी घटनाओं और गतिविधियों की जांच करने वाली भारतीय जाँच एजेंसी नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी एनआईए ने ज़ाकिर नाइक और उसकी संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) के खिलाफ पिछले साल नवंबर में एफआईआर दर्ज की गयी थी. इस एफआईआर में ज़ाकिर नाइक और उसकी संस्था पर गैरकानूनी और अवैध गतिविधियों में शामिल होने और धार्मिक समुदायों के बीच नफरत पैदा करने और कट्टर धार्मिकता का लोगों के मन में ज़हर घोलने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोपों पर पुख्ता सबूतों के बीच मोदी सरकार ने ज़ाकिर नाइक की संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन पर पांच साल का प्रतिबंध भी लगा दिया था. यही नहीं देश में आर्थिक अपराधों की जांच करने वाली एजेंसी ED ज़ाकिर नाइक की संस्था पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रही है, इसी के साथ मुंबई में नाइक की संस्था के दफ्तरों को बंद करवा दिया गया है.

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July 18, 2017 , , ,
बॉर्डर विवाद के बीच भारत को चीन की चेतावनी! तिब्बत रवाना किया हथियारों से लैस सैन्य दस्ता china moving tonnes of military equipment to tibet is it any signal-for india
डोकलाम सीमा पर चल रहे भारत चीन विवाद के बीच चीन ने दसों हजार टन हथियारों के साथ अपनी सेना के ट्रकों को तिब्बत सीमा के लिए रवाना किया है। इससे पहले चीन, सीमा पर विवाद बढ़ने के बाद से दो बार सैन्य अभ्यास कर चुका है। रिपोर्ट की माने तो चीन यह सब भारत पर डोकलाम सीमा विवाद को लेकर दबाव बनाने के लिए कर रहा है।

साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार यह प्रोजेक्टस अगले महीने के अंत तक शुरू होगा। इस प्रोजेक्ट के तहत चीन रोड और रेल के माध्यम से हार्डवेयर लगातार पहुंचाएगा।
चीन सैन्य अभ्यास सिक्किम बॉर्डर के बजाय उत्तरी तिब्बत में कर रहा है। लेकिन वह अपने सभी हथियार बड़ी की आसानी से सीमा पर भेज सकता है। इसके लिए चीन ने काफी बड़ा रेल और रोड नेटवर्क बिछा रखा है। लहासा से लेकर याडोंग तक फैले इस एक्सप्रेस वे के कारण, चीनी सेना 700 किमी का सफर महज 6 से 7 घंटे में तय कर सकती है। 
गौरतलब है कि चीन और भारत के बीच तनातनी बीते एक महीने से ज्यादा समय से चल रही है। डोकलाम को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद दोनों ही देश अपने अपने रुख पर अड़े हुए हैं। जहां भारत इस समस्या का राजनयिक समाधान निकालने की बात कर रहा है, वहीं चीन लगातार भारत से अपनी सेना वापस बुलाने की बात कर रहा है।

वहीं मंगलवार को सरकार ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा। विदेश सचिव एस जयशंकर ने मीडिया से बातचीन में कहा कि दोनों देश इस मुद्दे का राजनयिक हल निकलने का प्रयास कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इससे कुछ समय पहले ही बीजिंग की ओर से भारत को एक बार और चेतावनी जारी की गई थी। 

July 18, 2017 , , ,
अमेरिका ने कहा, सीमा विवाद पर आपस में बात करें भारत-चीन america wants direct dialogue between india and china to defuse doklam tensionsसिक्किम सीमा पर भारत और चीन के बीच विवाद पर अमेरिका ने चिंता जाहिर की है. अमेरिका ने भारत और चीन को बात करके मसला सुलझाने के लिए उत्साहित किया है. राज्य विभाग के प्रवक्ता हीथ नौट ने कहा, अमेरिका ने विवाद पर चिंता जताई है.

दोनों देशों को साथ काम करना चाहिए
नौट ने कहा, हम विश्वास करते हैं कि शांति के लिए दोनों तरफ के लोगों को साथ काम करना चाहिए. इसके लिए कुछ बेहतर व्यवस्था करनी चाहिए. इस प्रांत का भारतीय नाम डोका ला है, जिसे भूटान डोकालाम कहता है. वहीं चीन दावा करता है कि वह उसका अपना क्षेत्र डोंगलांग प्रांत है.
जम्मू-कश्मीर से अरुणांचल प्रदेश के बीच 3488 किमी लंबा भारत चीन बॉर्डर सिक्किम में 220 किमी पड़ता है.
पूर्व राजनयिक ने भारत को बताया था एक शक्ति
इससे पहले अमेरिका की एक पूर्व राजनयिक ने कहा है कि भारत 'एक शक्ति है, जिसे चीन को मानना होगा'. साथ ही उन्होंने कहा कि चीन के व्यवहार तथा एकतरफा कार्रवाइयों के कारण क्षेत्र के देश प्रभावित हो रहे हैं. सहायक विदेश मंत्री, दक्षिण एवं मध्य एशिया रह चुकीं भारतीय मूल की अमेरिकी निशा देसाई बिस्वाल ने कहा, 'मुझे लगता है कि चीन को ये मान लेना चाहिए कि एशिया में रणनीतिक एवं सुरक्षात्मक क्षमता बढ़ रही है और निश्चित तौर पर भारत को एक शक्ति के रूप में मानना होगा.'

आक्रामक हरकतों के संदेश
बिस्वाल, ओबामा प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों के लिए एक अहम व्यक्ति रही हैं. उन्होंने कहा कि चीन की ओर से विभिन्न सीमावर्ती बिंदुओं पर समुद्र में एवं ज़मीन दोनों पर आक्रामक हरकतें की जा रही हैं और ऐसे संकेत भेजे जा रहे हैं.

July 18, 2017 , , ,
जब पाकिस्तानी गोलाबारी के बीच 10 घंटे फंसे रहे दो स्कूलों के 217 बच्चे more than two hundred children were stucked in pak shelling in schoolपाक फायरिंग में जिले की नौशेरा सब डिवीजन में एलओसी से सटे दो स्कूलों के 217 बच्चे 10 घंटे तक फंसे रहे। 15 शिक्षक भी स्कूल में ही बंद रहे। पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार को भारी गोलाबारी कर स्कूल के बच्चों को निशाना बनाया।
डीसी राजोरी डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी के अनुसार भवानी स्कूल में 150 बच्चे व सैर स्कूल में 55 बच्चे करीब दस घंटे तक पाक गोलाबारी के चलते स्कूल के बंद कमरों में ही बंदी बने रहे। घंटों बाद जब फायरिंग थोड़ी कम हुई तो बच्चों को स्कूलों से निकालना शुरू किया गया।
रेसक्यू टीम ने सभी 217 बच्चों व 15 शिक्षकों को सुरक्षित निकाला। डीसी के अनुसार 150 बच्चों को नौश्ेारा स्थित बनाए गए राहत शिविरों में भेजा गया है, जबकि अन्य बच्चों को उनके परिवार के हवाले कर दिया है।

July 18, 2017 , , ,
डोकलाम सीमा तनाव : चीन ने भारत से फिर सेना बुलाने को कहाबीजिंग। डोकलाम में सीमा पर जारी तनाव के बीच चीन ने एक बार फिर भारत से अपनी सेना वापस बुलाने को कहा है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने मंगलवार को कहा कि भारत को अपने राजनीतिक लक्ष्यों की पूर्ति के लिए अतिक्रमण को एक नीति के तौर पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
इस बीच, मीडिया इस मुद्दे को ज्यादा ही उछाल रहा है। सरकारी समाचार पत्र 'ग्लोबल टाइम्स' ने मंगलवार को फिर से भारत को चेतावनी देते हुए लिखा कि चीन किसी भी तरीके के टकराव के लिए तैयार है। डोकलाम मुद्दे पर चीन युद्ध से पीछे नहीं हटेगा।
डोकलाम इलाके में भारतीय सेना के प्रवेश को अवैध बताते हुए उन्होंने कहा कि इसने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। लू के अनुसार, कई देशों के राजनयिक भारत के इस कदम से हैरान हैं।

अगर ऐसा हुआ तो भारत को इस टकराव का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अखबार ने कहा कि भविष्य में होने वाले सभी तरह के टकरावों के लिए तैयार रहना चाहिए।

भारत अगर कई जगहों से मुश्किलों का सामना कर रहा है तो उसे वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भी टकराव का सामना करना होगा।
उल्लेखनीय है कि 16 जून से बढ़े तनाव के बाद से ही चीनी मीडिया लगातार इस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहा है। हाल ही में चीनी मीडिया की ओर से सेना द्वारा गोलीबारी का अभ्यास करते हुए वीडियो भी जारी किया गया था।
अखबार ने लिखा है कि भारत की इस तरह की कार्रवाई चीन की संप्रभुता को चुनौती है। जिस तरह से लगातार तनाव बढ़ रहा है, चीन को उसके लिए बिल्कुल तैयार रहना चाहिए।

हालांकि, इसके साथ ही समझदारी का भी उपयोग करना चाहिए। अखबार के अनुसार, अगर भारत सीमा पर अपनी सेना को मजबूत करता है तो चीन भी ऐसा ही करेगा।

July 18, 2017 , , , ,
नौशेराः पाकिस्तानी गोलाबारी के बीच स्कूलों में फंसे बच्चों को सुरक्षित निकाला गया heavy shelling pakistan nowshera many school children trapped two schoolsजम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले से लगी LoC पर पाकिस्तान ने एक बार फिर सीजफायर तोड़ा है। पाकिस्तान की तरफ से राजौरी के नौशेरा सेक्टर में हैवी फायरिंग की जा रही है। इस बार पाकिस्तानी सेना ने नौशेरा के स्कूलों को भी निशाना बनाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फायरिंग में दो स्कूलों के बच्चे फंस गए हैं। फायरिंग के बीच स्कूलों से बच्चों को निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अबतक 12 बच्चों का बचाव कर लिया गया है। सोमवार को पाकिस्तान की फायरिंग में भारतीय सेना का एक जवान शहीद हो गया था। त्राल के रहने वाले शहीद मुद्दसर अहमद राजौरी सेक्टर में ड्यूटी पर तैनात थे। इसके अलावा सिविलियन इलाके को निशाना बनाकर की गई फायरिंग ने पुंछ में एक बच्ची की भी जान ले ली।
मंगलवार को लगातार दूसरे दिन पाकिस्तानी सेना ने सीजफायर तोड़ा है। नौशेरा से पहले आज बालाकोट में भी पाकिस्तानी सेना ने फायरिंग की। इसके बाद दोपहर से नौशेरा में गोलीबारी शुरू है। भारतीय सेना भी पाकिस्तानी गोलीबारी का माकूल जवाब दे रही है। इस बीच स्कूलों से बच्चों को निकालने की कोशिश जारी है।



सीमा पर जारी तनाव के मद्देनजर दोनों देशों के DGMO के बीच फोन पर बातचीत भी हुई। इसके बावजूद मंगलवार को एक बार फिर पाकिस्तानी सेना ने सीजफायर तोड़ दिया। बातचीत के दौरान पाकिस्तानी सेना के DGMO ने भारतीय सेना द्वारा की गई कार्रवाई में मारे गए 4 पाक सैनिकों की मौत का मसला भी उठाया था। भारतीय सेना के DGMO ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष को जवाब देते हुए कहा कि हर बार पाकिस्तानी सेना संघर्षविराम का उल्लंघन करती है और भारत जवाबी कार्रवाई करता है।

July 18, 2017 , , , ,
भारत में अपाचे और F-16 बनाएंगे टाटा, बोले "अपने सैनिको को सबसे बेस्ट हथियार देना चाहता हूँ"भारत में रक्षा प्रौद्योगिकी के विकास में देश के दो बड़े बिजनेस टायकून्स उतर चुके हैं।

जहां एक ओर मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस डिफेंस मिसाइल निर्माण में इजराइली कंपनी राफेल के साथ मिलकर मिसाइलों के निर्माण में जुटे हैं, वहीं रक्षा क्षेत्र में पुरानी कंपनी टाटा अब हेलीकॉप्टर और विमान बनाने में जुटी हुई है। हाल ही में अमेरिका के साथ एफ-16 फाइटर प्लेन के भारत में निर्माण को लेकर डील हुई थी। एफ-16 बनाने वाली कंपनी भारत में टाटा के साथ मिलकर इस महाविनाशक फाइटर जेट का निर्माण करेगी।
पिछले दिनों बोइंग ने चिनूक हेलीकॉप्टर के पार्ट्स सप्लाई किए थे, जिसके बाद इन दिनों टाटा की फैक्ट्री में इस विशालकाय हेलीकॉप्टर की असेंबलिंग की जा रही है। वहीं अपाचे हेलीकॉप्टर के पार्ट्स भी भारत आने शुरू हो गए हैं। टाटा की फैक्ट्री में अपाचे हेलीकॉप्टर का ढांचा तैयार किया जा रहा है। 
आपको बता दें कि बिजनेस टाइकून रतन टाटा के चेयरमैन रहते हुए टाटा ने भारतीय सेना के लिए मजबूत और टिकाऊ वाहनों के अलावा एंटी लैंडमाइन व्हीकल भी तैयार किए हैं, जो सालों से सेना में कार्यरत हैं। अमेरिका की कंपनी बोइंग के साथ चिनूक हेलीकॉप्टर और अपाचे हेलीकॉप्टर की जो डील साइन हुई थी, टाटा उसको मूर्त रूप दे रही है।
टाटा ने इसके लिए अपनी फैक्ट्रियों में बदलाव शुरू कर दिए हैं। आने वाले कुछ महीनों में एफ-16 का निर्माण करने वाली कंपनी लॉकहिड मार्टिन के अधिकारी फैक्ट्री का जायजा लेंगे। उसके बाद भारत में एफ-16 विमानों का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले कुछ सालों में भारतीय वायुसेना को ये दोनों विनाशकारी हेलीकॉप्टर मिल जाएंगे। वहीं हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान भारत में एफ-16 फाइटर प्लेन को लेकर जो डील हुई थी, उसे भी टाटा ही पूरा करेगी।

आपको बता दें कि टाटा कंपनी भारत के रक्षा क्षेत्र में बहुत पहले से कार्यरत है। टाटा इस वक्त सेना के लिए उन्नत श्रेणी की तोप का निर्माण भी कर रहा है। साथ ही सेना के काफिले के लिए तेज और मजबूत ट्रक के अलावा एंटी लैंडमाइन व्हीकल भी तैयार कर रहा है। बोइंग के साथ हुए सौदे के बाद से हैदराबाद के पास टाटा की एक फैक्ट्री में उन्नत श्रेणी का युद्धक लड़ाकू हेलीकॉप्टर अपाचे का निर्माण किया जा रहा है।

July 18, 2017 , , ,
नेपाली PM बोले, "चीन युद्ध नहीं चाहता क्यूंकि वो जानता, अब वो जीत नहीं सकता" War Ind Vs Chainaभारत और चीन विवाद पर नेपाल के PM शेर बहादुर का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा है कि वो जंग की स्थिति में भारत के साथ है। लेकिन चीन भारत से लड़ने का जोखिम नहीं लेगा क्योंकि वो जीत नहीं सकता।
 वहीं, नेपाल के उप राष्ट्रपति व राजनीतिक संस्कृति सलाहकार श्री महावीर प्रसाद टोरड़ी ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि भारत के साथ नेपाल की रोटी-बेटी की सांझ है और इसको दुनिया की कोई भी शक्ति जुदा नहीं कर सकती। कश्मीर में आज हालात जरूर खराब है लेकिन नेपाल हर कीमत पर भारत के साथ है।
नेपाल के PM शेर बहादुर देउबा ने कहा है कि चीन का ये पागलपन अब नहीं सहा जाएगा।  देउबा ने छोटा देश होने की बात को नकारते हुए कहा कि हमारे सैनिक कम नहीं है। हमारा एक गोरखा सैनिक चीन के 100 सैनिकों के बराबर है। 

उन्होंने बताया कि भारत व नेपाल एक-दूसरे से जुड़े हैं, अभिन्न मित्र हैं और यहां तक कि भारत की गोरखा बटालियन में नेपाल के युवक भर्ती होकर भारत की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने नेपाल के दुख-दर्द में सब से पहले साथ दिया है। 

July 18, 2017 , , ,
भारत को डराने के लिए युद्धाभ्यास कर रहा था चीन, फुस्स होकर गिर गया चाइनीज लड़ाकू हेलीकॉप्टर War Ind Vs Chianaभारत को युद्ध की धमकी दे रहे चीन को बड़ा झटका लगा है। युद्धाभास करते हुए उसका लड़ाकू हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है।

कल चीन की सेना ने तिब्बत में युद्धाभास किया। चीनी मीडिया ने कहा कि भारत को डराने के लिए ये युद्धाभास किया जा रहा है। युद्धाभास करते हुए उसका एक लड़ाकू हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया। हेलीकॉप्टर क्रैश होने के बाद नीन नदी में जा गिरा। इस हादसे में नदी में तैर रहा एक व्यक्ति जख्मी हो गया।
इससे पहले सिक्किम से लगी भारतीय सीमा पर पैदा हुए तनाव के माहौल में चीन तिब्बत के पर्वतीय इलाके में सैन्य अभ्यास कर रहा है। इस दौरान चीन की सेना ने हथियारों से असली कारतूस और गोले दागकर अभ्यास किया। आमतौर पर इस तरह का अभ्यास नकली या मामूली असर वाले गोला-बारूद से होता है।
हेलीकॉप्टर में आग लगने के बाद पायलट उसपर से नियंत्रण खो बैठा और वह नदी में जा गिरा। जहां पर यह हेलीकॉप्टर गिरा, वहां पर लोग बोटिंग और तैराकी करने बड़ी ही संख्या में आते हैं। 
सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में भारतीय सेना ने चीन को सड़क बनाने से रोक दिया है और बाकायदा तंबू लगाकर इलाके की निगरानी कर रही है। बौखलाए चीन ने तीखी बयानबाजी के बाद अब तिब्बत के पर्वतीय इलाके में सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है।
यह इलाका भौगोलिक रूप से विवादित इलाके जैसा ही है और माना जा रहा है कि इस अभ्यास का डोकलाम विवाद से सीधा संबंध है। चीन के सरकारी टेलीविजन के अनुसार चीनी सेना ने वहां पर 11 घंटे तक लगातार सैन्य अभ्यास किया।

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Satish Kumar

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