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करवा चौथ 2017: जानिए क्या है भारत में करवाचौथ मनाने का महत्तव, कई हैं पौराणिक कथाएं festival karwa chauth 2017 puja vidhi history importance and significance of karva chauth festival in india
Karwa Chauth 2017 Puja Vidhi: करवाचौथ की शुरुआत किसी एक कथा के कारण नहीं हुई थी इसलिए इस त्योहार की बहुत अधिक महत्वता है। इस दिन के लिए कई सारी कथाओं का प्रचलन है।
करवा चौथ 2017: जानिए क्या है भारत में करवाचौथ मनाने का महत्तव, कई हैं पौराणिक कथाएं
Karwa Chauth Vidhi: क्या है करवाचौथ का महत्व।
Karwa Chauth 2017: करवाचौथ हिंदू पंचाग के अनुसार कार्तिक माह के चौथे दिन होता है। पंरपराओं के अनुसार इस दिन शादीशुदा महिलाएं या जिनकी शादी होने वाली हैं वो अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं। ये व्रत सुबह सूरज उगने से पहले से लेकर और रात्रि में चंद्रमा निकलने तक रहता है। ये एकदिवसीय त्योहार अधिकतर उत्तरी भारत के राज्यों में मनाया जाता है। हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, पंजाब, राज्यस्थान और उत्तर प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन सिर्फ पति की लंबी आयु की ही नहीं उसके काम-धंधे, धन आदि इच्छाओं की पूर्ति की प्रार्थना करती हैं। करवाचौथ की शुरुआत किसी एक कथा के कारण नहीं हुई थी इसलिए इस त्योहार की बहुत अधिक महत्वता है। इस दिन के लिए कई सारी कथाओं का प्रचलन है।

करवाचौथ शादीशुदा महिलाओं का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। इस त्योहार की महत्वता एक समय में बहुत हुआ करती थी, इस दिन सभी शादीशुदा महिलाएं इकठ्ठा होकर पूजा करती थी और पंरपराओं के अनुसार मां गौरी का पूजन करती थीं। मां गौरी भगवान शिव की पत्नी हैं इस दिन उनकी कथा सुनना शुभ माना जाता है। महाभारत के वर्ण पर्व के अनुसार करवाचौथ इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस दिन देवी सावित्रि ने अपने पति के प्राण वापस लाने के लिए यमदूत से प्रार्थना की थी और उसके लिए व्रत किया था। एक अन्य कहानी के अनुसार महिलाएं अपने पति की रक्षा के लिए व्रत करती थी, जब उनके पति कई दिनों के लिए युद्ध पर जाते थे। इस दिन वो भूखी रहती थी और अपने सबसे सुंदर वस्त्र पहनती थीं।

एक समय की बात है कि एक गांव में करवा नाम की पतिव्रता स्त्री रहती थी। एक दिन करवा के पति नदी में स्नान करने गए। स्नान करते समय एक मगरमच्छ ने करवा के पति के पांव पकड़ लिए और नदी के अंदर खींचने लगा। प्राण पर आये संकट को देखकर करवा के पति ने करवा को पुकारना शुरू किया। करवा दौड़कर नदी के तट पर पहुंची जहां मगरमच्छ उसके पति के प्राण लेने पर तुला था। करवा ने झट से एक कच्चे धागे से मगर को बांध दिया व भागकर यमराज के पास पहुंची। यमराज से कहा कि- मगरमच्छ ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है इसलिए उसे मेरे पति के पैर पकड़ने के अपराध में आप अपने बल से नरक में भेज दो। यमराज ने कहा कि- मैं ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि मगरमच्‍छ की आयु अभी शेष है। इस पर करवा बोली- अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो मैं आप को श्राप देकर नष्ट कर दूंगी। करवा के ऐसे वचन सुनकर यमराज डर गए और करवा के साथ आकर मगरमच्छ को यमपुरी भेज दिया, जिससे करवा के पति को दीर्घायु का आशीर्वाद मिला। कथा पूरी होने के बाद महिलाएं प्रार्थना करती हैं कि हे करवा माता! जैसे तुमने अपने पति की रक्षा की, वैसे सबके पतियों की रक्षा करना।

करवा चौथ: व्हॉट्सएप समेत सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले लतीफे viral karva chauth jokes on whatsapp and facebook
यहां व्हॉट्सएप समेत सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले लतीफे हैं, जो आपको ठहाका लगाने के लिए मजबूर कर देंगे। तो फिर देर किस बात की... हो जाइए शुरू...


पति करवा चौथ की रात पत्नी से-



पूरा साल लड़ती रहती हो...


जब मैं इतना ही खराब हूं तो भगवान से अगले जन्म के लिए क्यो मांग रही हो?

पत्नी तुनक कर.. अच्छा बड़े सयाने हो, इतना सुधारने के बाद, किसी और को दे दूं?

😜😝😂
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बेचारे पति

मैंने भी तुम्हारे लिए व्रत रखा है...


ऐसा बोल कर ऑफिस में समोसे ठूंसने वाले पतियों...


इस बार करवाचौथ रविवार को है..!!


😝😝😝😝😝😝

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हॉस्पिटल में बुरी तरह जख्मी पंडित जी से मिलने गए


मैंने पूछा - क्या हुआ था ? 

कैसे लगी?

यार करवाचौथ की शाम को छत पर तेरी भाभी से अपनी आदत के अनुसार हड़बड़ी में बोल दिया - 


जल्दी पूजा करो ......दो, तीन जगह और जाना है ।


#फेकदियेगयेछतसे

😱😱😂😝😜😁

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Congratulations..

To All Husbands..

For Renewal Of Their Annual Life Insurance


करवाचौथ की बधाई

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एंजल प्रिया को बधाई

उन पुरुषों को भी करवा चौथ की बधाई, 

जिन्होंनें महिलाओं के नाम से फेसबुक पर 'फेक आईडी' बना रखी है।


सदा सुहागन रहो।

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फेकिंग न्यूज- 


पूरे इंडिया में मोबाइल कंपनी

को 2000 करोड़ रूपये का घाटा! 

करवा चौथ की मेहंदी लगी होने के कारण
सभी औरतों ने 4 घण्टे व्हॉट्सएप का त्याग किया।
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गालिब की नजर में करवा चौथ


रात का मंजर कुछ ऐसा था गालिब

महिलाएं आसमान मे चांद देख रही थी

और पुरूष अगल बगल की छत पर!
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करवा चौथ स्पेशल
जो अमृत पीते हैं उन्हें देव...
और जो विष पीते हैं उन्हें 'महादेव' कहते है...
लेकिन विष पीकर भी जो अमृत जैसा मुंह बनाए उसे
'पतिदेव' कहते हैं...
😂😂😜😂😜


सोनपापड़ी


इस दीवाली को सोनपापड़ी पर रोक लगा देना चाहिए।

खाता कोई नहीं, एक ही डिब्बा एक घर से दूसरे घर घूमता रहता है।

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ब्लू व्हेल गेम


ब्लू व्हेल का खौफ इतना है कि


दीवाली की तैयारी में साला पंखा साफ करने चढ़ा 


तो बच्चे शोर मचाने लगे कि

मम्मी, जल्दी आओ।


पापा आखरी स्टेप तक पहुंच गए हैं..

😜😍😆😡😡😡😳😳😳😝😝😝😝😝😝😝

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मां ने लगाए थप्पड़

लड़का - मैं ऐसी लड़की से शादी करूंगा जो मेरी बूढ़ी मां की सेवा करे....

मां ने दो-तीन थप्पड़ जमा दिए 


मां- बूढ़ी किसको बोला रे


😂😂😂😂🤒😡😡😡👊👊😹😹😹💥💥

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किसकी गलती?
अगर आपकी बीवी को भूत पकड़ ले, तो आप क्या करोगे..? 😥
Santa:- मैंने क्या करना है ?😏... .. गलती भूत की है, खुद भुगतेगा.😝😝😝

करवा चौथ 2017: जानें क्यों मनाया जाता है करवा चौथ, क्या है इसके पीछे की कहानी story know why karva chauth is celebrated and story behind it
करवा चौथ के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना कर व्रत रखती हैं। इस व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश तथा चंद्रमा का पूजन किया जाता है। 'करवा चौथ' की भी अपनी एक कहानी है, जिसे स्त्रियां कथा के रूप में व्रत के दिन सुनती है। कहा जाता है की करवा चौथ के दिन व्रत कथा का पढ़ा जाना काफी महत्व होता है। आइए जानते है करवा चौथ व्रत कथा:

करवा चौथ व्रत कथा
एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। सेठानी के सहित उसकी बहुओं और बेटी ने करवा चौथ का व्रत रखा था। रात्रि को साहकार के लड़के भोजन करने लगे तो उन्होंने अपनी बहन से भोजन के लिए कहा। इस पर बहन ने बताया कि उसका आज उसका व्रत है और वह खाना चंद्रमा को अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है।
सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। जो ऐसा प्रतीत होता है जैसे चतुर्थी का चांद हो। उसे देख कर करवा उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है। जैसे ही वह पहला टुकड़ा मुंह में डालती है उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और तीसरा टुकड़ा मुंह में डालती है तभी उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बेहद दुखी हो जाती है।
उसकी भाभी सच्चाई बताती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं। इस पर करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं करेगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है। एक साल बाद फिर चौथ का दिन आता है, तो वह व्रत रखती है और शाम को सुहागिनों से अनुरोध करती है कि 'यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो' लेकिन हर कोई मना कर देती है। आखिर में एक सुहागिन उसकी बात मान लेती है। इस तरह से उसका व्रत पूरा होता है और उसके सुहाग को नये जीवन का आर्शिवाद मिलता है। इसी कथा को कुछ अलग तरह से सभी व्रत करने वाली महिलाएं पढ़ती और सुनती हैं।

करवा चौथ 2017: इस समय होगा चांद का दीदार और ये है पूजा का शुभ मुहूर्त karva chauth 2017 know about muhurat or timing and when moon will rise
8 अक्टूबर रविवार को करवा चौथ का त्योहार मनाया जाएगा। करवा चौथ का व्रत महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए करती हैं। करवा चौथ में चांद का विशेष महत्व होता है। शादी शुदा महिलाएं इस दिन शाम को चांद के दर्शन करने के बाद जल देकर उनका पूजन करती हैं फिर अपना व्रत तोड़ती हैं।

इस दिन चांद के निकलने का व्रत महिलाएं बेसब्री से इंतजार करती हैं। ज्योतिष के अनुसार इस बार करवा चौथ का चांद शाम को 8 बजकर 10 मिनट पर निकलेगा वहीं कुछ दूसरे पंडितो के अनुसार चांद के दीदार 8 बजकर 40 मिनट पर होने की संभावना है।

करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि में रखा जाता है। चतुर्थी तिथि का प्रारंभ आठ अक्तूबर को शाम 4.58 मिनट पर होगा। इस तिथि का समापन नौ अक्तूबर को मध्याह्न 2.16 मिनट पर होगा। इस बार चंद्रोदय 8 अक्तूबर को रात्रि 8.10 मिनट पर हो रहा है। करवा चौथ पर पूजा का मुहूर्त शाम 5.54 मिनट से शाम 7.10 मिनट तक शुभ रहेगा।

रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर इस व्रत का समापन किया जाता है। चतुर्थी के देवता भगवान गणेश हैं। इस व्रत में गणेश जी के आलावा शिव-पार्वती, कार्तिकेय और चंद्रमा की भी पूजा की जाती है।

करवा चौथ व्रत में सरगी खाने के महत्व होता है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं सुबह सूरज निकलने से पहले मिठाई, हलवा और ड्राई फ्रूटस खाती है। इसके बाद पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को चांद के दर्शन करने के बाद अपने पति के हाथो से जल ग्रहण करने के बाद व्रत तोड़ती हैं।

करवा चौथ द्वितीय कथा Karva Chauth Chothi Katha
एक बार पांडु पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी नामक पर्वत पर गए। इधर द्रोपदी बहुत परेशान थीं। उनकी कोई खबर न मिलने पर उन्होंने कृष्ण भगवान का ध्यान किया और अपनी चिंता व्यक्त की। कृष्ण भगवान ने कहा- बहना, इसी तरह का प्रश्न एक बार माता पार्वती ने शंकरजी से किया था।

पूजन कर चंद्रमा को अर्घ्‍य देकर फिर भोजन ग्रहण किया जाता है। सोने, चाँदी या मिट्टी के करवे का आपस में आदान-प्रदान किया जाता है, जो आपसी प्रेम-भाव को बढ़ाता है। पूजन करने के बाद महिलाएँ अपने सास-ससुर एवं बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लेती हैं।

तब शंकरजी ने माता पार्वती को करवा चौथ का व्रत बतलाया। इस व्रत को करने से स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षा हर आने वाले संकट से वैसे ही कर सकती हैं जैसे एक ब्राह्मण ने की थी। प्राचीनकाल में एक ब्राह्मण था। उसके चार लड़के एवं एक गुणवती लड़की थी।

एक बार लड़की मायके में थी, तब करवा चौथ का व्रत पड़ा। उसने व्रत को विधिपूर्वक किया। पूरे दिन निर्जला रही। कुछ खाया-पीया नहीं, पर उसके चारों भाई परेशान थे कि बहन को प्यास लगी होगी, भूख लगी होगी, पर बहन चंद्रोदय के बाद ही जल ग्रहण करेगी।

भाइयों से न रहा गया, उन्होंने शाम होते ही बहन को बनावटी चंद्रोदय दिखा दिया। एक भाई पीपल की पेड़ पर छलनी लेकर चढ़ गया और दीपक जलाकर छलनी से रोशनी उत्पन्न कर दी। तभी दूसरे भाई ने नीचे से बहन को आवाज दी- देखो बहन, चंद्रमा निकल आया है, पूजन कर भोजन ग्रहण करो। बहन ने भोजन ग्रहण किया।

भोजन ग्रहण करते ही उसके पति की मृत्यु हो गई। अब वह दुःखी हो विलाप करने लगी, तभी वहाँ से रानी इंद्राणी निकल रही थीं। उनसे उसका दुःख न देखा गया। ब्राह्मण कन्या ने उनके पैर पकड़ लिए और अपने दुःख का कारण पूछा, तब इंद्राणी ने बताया- तूने बिना चंद्र दर्शन किए करवा चौथ का व्रत तोड़ दिया इसलिए यह कष्ट मिला।

अब तू वर्ष भर की चौथ का व्रत नियमपूर्वक करना तो तेरा पति जीवित हो जाएगा। उसने इंद्राणी के कहे अनुसार चौथ व्रत किया तो पुनः सौभाग्यवती हो गई। इसलिए प्रत्येक स्त्री को अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करना चाहिए। द्रोपदी ने यह व्रत किया और अर्जुन सकुशल मनोवांछित फल प्राप्त कर वापस लौट आए। तभी से हिन्दू महिलाएँ अपने अखंड सुहाग के लिए करवा चौथ व्रत करती हैं।

करवा चौथ द्वितीय कथा Karva Chauth Dusari Katha
एक समय की बात है कि एक करवा नाम की पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी के किनारे के गाँव में रहती थी। एक दिन उसका पति नदी में स्नान करने गया। स्नान करते समय वहाँ एक मगर ने उसका पैर पकड़ लिया। वह मनुष्य करवा-करवा कह के अपनी पत्नी को पुकारने लगा।

उसकी आवाज सुनकर उसकी पत्नी करवा भागी चली आई और आकर मगर को कच्चे धागे से बाँध दिया। मगर को बाँधकर यमराज के यहाँ पहुँची और यमराज से कहने लगी- हे भगवन! मगर ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है। उस मगर को पैर पकड़ने के अपराध में आप अपने बल से नरक में ले जाओ।

यमराज बोले- अभी मगर की आयु शेष है, अतः मैं उसे नहीं मार सकता। इस पर करवा बोली, अगर आप ऐसा नहीं करोगे तो मैं आप को श्राप देकर नष्ट कर दूँगी। सुनकर यमराज डर गए और उस पतिव्रता करवा के साथ आकर मगर को यमपुरी भेज दिया और करवा के पति को दीर्घायु दी। हे करवा माता! जैसे तुमने अपने पति की रक्षा की, वैसे सबके पतियों की रक्षा करना।

करवा चौथ प्रथम कथा Karva Chauth Pratham Katha
बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहाँ तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी।

शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। चूँकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है।

सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चाँद उदित हो रहा हो।

इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चाँद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चाँद को देखती है, उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है।

वह पहला टुकड़ा मुँह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुँह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बौखला जाती है।

उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है।

सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है।

एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियाँ करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जब भाभियाँ उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से 'यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो' ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है।

इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है। यह भाभी उसे बताती है कि चूँकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह के वह चली जाती है।

सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है।

अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अँगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुँह में डाल देती है। करवा का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है। हे श्री गणेश माँ गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन का वरदान आपसे मिला है, वैसा ही सब सुहागिनों को मिले।

इस कथा का सार यह है कि शाकप्रस्थपुर वेदधर्मा ब्राह्मण की विवाहिता पुत्री वीरवती ने करवा चौथ का व्रत किया था। नियमानुसार उसे चंद्रोदय के बाद भोजन करना था, परंतु उससे भूख नहीं सही गई और वह व्याकुल हो उठी। उसके भाइयों से अपनी बहन की व्याकुलता देखी नहीं गई और उन्होंने पीपल की आड़ में आतिशबाजी का सुंदर प्रकाश फैलाकर चंद्रोदय दिखा दिया और वीरवती को भोजन करा दिया।


परिणाम यह हुआ कि उसका पति तत्काल अदृश्य हो गया। अधीर वीरवती ने बारह महीने तक प्रत्येक चतुर्थी को व्रत रखा और करवा चौथ के दिन उसकी तपस्या से उसका पति पुनः प्राप्त हो गया।

करवा चौथ व्रत की विधि karwa chauth Vrat Vidhi
व्रत की विधि
उपवास सहित एक समूह में बैठ महिलाएं चौथ पूजा के दौरान, गीत गाते हुए थालियों की फेरी करती हुई

चौथ पूजा के उपरांत महिलाएं समूह मे सूर्य को जल का अर्क देती हुई
कार्तिक कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी अर्थात उस चतुर्थी की रात्रि को जिसमें चंद्रमा दिखाई देने वाला है, उस दिन प्रातः स्नान करके अपने सुहाग (पति) की आयु, आरोग्य, सौभाग्य का संकल्प लेकर दिनभर निराहार रहें।
पूजन
उस दिन भगवान शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा का पूजन करें। पूजन करने के लिए बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी बनाकर उपरोक्त वर्णित सभी देवों को स्थापित करें।

नैवेद्य
शुद्ध घी में आटे को सेंककर उसमें शक्कर अथवा खांड मिलाकर मोदक (लड्डू) नैवेद्य हेतु बनाएँ।

करवा
काली मिट्टी में शक्कर की चासनी मिलाकर उस मिट्टी से तैयार किए गए मिट्टी के करवे अथवा तांबे के बने हुए करवे।

संख्‍या
10 अथवा 13 करवे अपनी सामर्थ्य अनुसार रखें।
कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करकचतुर्थी (करवा-चौथ) व्रत करने का विधान है। इस व्रत की विशेषता यह है कि केवल सौभाग्यवती स्त्रियों को ही यह व्रत करने का अधिकार है। स्त्री किसी भी आयु, जाति, वर्ण, संप्रदाय की हो, सबको इस व्रत को करने का अधिकार है। जो सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ अपने पति की आयु, स्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना करती हैं वे यह व्रत रखती हैं।
पूजन विधि
बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी पर शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा की स्थापना करें। मूर्ति के अभाव में सुपारी पर नाड़ा बाँधकर देवता की भावना करके स्थापित करें। पश्चात यथाशक्ति देवों का पूजन करें।

पूजन हेतु निम्न मंत्र बोलें 
-
'ॐ शिवायै नमः' से पार्वती का, 'ॐ नमः शिवाय' से शिव का, 'ॐ षण्मुखाय नमः' से स्वामी कार्तिकेय का, 'ॐ गणेशाय नमः' से गणेश का तथा 'ॐ सोमाय नमः' से चंद्रमा का पूजन करें।
करवों में लड्डू का नैवेद्य रखकर नैवेद्य अर्पित करें। एक लोटा, एक वस्त्र व एक विशेष करवा दक्षिणा के रूप में अर्पित कर पूजन समापन करें। करवा चौथ व्रत की कथा पढ़ें अथवा सुनें।
सायंकाल चंद्रमा के उदित हो जाने पर चंद्रमा का पूजन कर अर्घ्य प्रदान करें। इसके पश्चात ब्राह्मण, सुहागिन स्त्रियों व पति के माता-पिता को भोजन कराएँ। भोजन के पश्चात ब्राह्मणों को यथाशक्ति दक्षिणा दें।

पति की माता (अर्थात अपनी सासूजी) को उपरोक्त रूप से अर्पित एक लोटा, वस्त्र व विशेष करवा भेंट कर आशीर्वाद लें। यदि वे जीवित न हों तो उनके तुल्य किसी अन्य स्त्री को भेंट करें। इसके पश्चात स्वयं व परिवार के अन्य सदस्य भोजन करें।

करवा चौथ : Karva Chauth
करवा चौथ हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भारत के पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान का पर्व है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह पर्व सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ मनाती हैं। यह व्रत सुबह सूर्योदय से पहले करीब ४ बजे के बाद शुरू होकर रात में चंद्रमा दर्शन के बाद संपूर्ण होता है।

ग्रामीण स्त्रियों से लेकर आधुनिक महिलाओं तक सभी नारियाँ करवाचौथ का व्रत बडी़ श्रद्धा एवं उत्साह के साथ रखती हैं। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन करना चाहिए। पति की दीर्घायु एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन भालचन्द्र गणेश जी की अर्चना की जाती है। करवाचौथ में भी संकष्टीगणेश चतुर्थी की तरह दिन भर उपवास रखकर रात में चन्द्रमा को अ‌र्घ्य देने के उपरांत ही भोजन करने का विधान है। वर्तमान समय में करवाचौथ व्रतोत्सव ज्यादातर महिलाएं अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही मनाती हैं लेकिन अधिकतर स्त्रियां निराहार रहकर चन्द्रोदय की प्रतीक्षा करती हैं।

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करकचतुर्थी (करवा-चौथ) व्रत करने का विधान है। इस व्रत की विशेषता यह है कि केवल सौभाग्यवती स्त्रियों को ही यह व्रत करने का अधिकार है। स्त्री किसी भी आयु, जाति, वर्ण, संप्रदाय की हो, सबको इस व्रत को करने का अधिकार है। जो सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ अपने पति की आयु, स्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना करती हैं वे यह व्रत रखती हैं।
यह व्रत 12 वर्ष तक अथवा 16 वर्ष तक लगातार हर वर्ष किया जाता है। अवधि पूरी होने के पश्चात इस व्रत का उद्यापन (उपसंहार) किया जाता है। जो सुहागिन स्त्रियाँ आजीवन रखना चाहें वे जीवनभर इस व्रत को कर सकती हैं। इस व्रत के समान सौभाग्यदायक व्रत अन्य कोई दूसरा नहीं है। अतः सुहागिन स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षार्थ इस व्रत का सतत पालन करें।
भारत देश में वैसे तो चौथ माता जी के कही मंदिर स्थित है, लेकिन सबसे प्राचीन एवं सबसे अधिक ख्याति प्राप्त मंदिर राजस्थान राज्य के सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा गाँव में स्थित है । चौथ माता के नाम पर इस गाँव का नाम बरवाड़ा से चौथ का बरवाड़ा पड़ गया । चौथ माता मंदिर की स्थापना महाराजा भीमसिंह चौहान ने की थी ।

करवा चौथ: जानें महत्‍व और व्रत की विधि Karva cchauth vrat vidhi
इस बार करवा चौथे रविवार 8 अक्‍टूबर को है. अपने पति की लंबी आयु के लिए महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और अपने चंद्रमा की पूजा करती हैं. यह नीरजल व्रत होता है, जिसमें चांद देखने और पूजने के बाद ही अन्‍न व जल ग्रहण किया जाता है.

करवा चौथ का व्रत कार्तिक हिन्दू माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दौरान किया जाता है.

महत्‍व
करवा चौथ का दिन और संकष्टी चतुर्थी एक ही दिन होता है. संकष्‍टी पर भगवान गणेश की पूजा की जाती है और उनके लिए उपवास रखा जाता है. करवा चौथ के दिन मां पारवती की पूजा करने से अखंड सौभाग्‍य का वरदान प्राप्‍त होता है. मां के साथ-साथ उनके दोनों पुत्र कार्तिक और गणेश जी कि भी पूजा की जाती है. वैसे इसे करक चतुर्थी भी कहा जाता है. इस पूजा में पूजा के दौरान करवा बहुत महत्वपूर्ण होता है और इसे ब्राह्मण या किसी योग्य सुहागन महिला को दान में भी दिया जाता है.
करवा चौथ के चार दिन बाद महिलाएं अपने पुत्रों के लिए व्रत रखती हैं, जिसे अहोई अष्‍टमी कहा जाता है.
करवाचौथ व्रत की उत्तम विधि

आइए जानें, करवाचौथ के व्रत और पूजन की उत्तम विधि के बारे जिसे करने से आपको इस व्रत का 100 गुना फल मिलेगा...
  1. - सूर्योदय से पहले स्नान कर के व्रत रखने का संकल्पत लें.
  2. - फिर मिठाई, फल, सेंवई और पूड़ी वगैरह ग्रहण करके व्रत शुरू करें.
  3. - फिर संपूर्ण शिव परिवार और श्रीकृष्ण की स्थापना करें.
  4. - गणेश जी को पीले फूलों की माला , लड्डू और केले चढ़ाएं.
  5. - भगवान शिव और पार्वती को बेलपत्र और श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें.
  6. - श्री कृष्ण को माखन-मिश्री और पेड़े का भोग लगाएं.
  7. - उनके सामने मोगरा या चन्दन की अगरबत्ती और घी का दीपक जलाएं.
  8. - मिटटी के कर्वे पर रोली से स्वस्तिक बनाएं.
  9. - कर्वे में दूध, जल और गुलाबजल मिलाकर रखें और रात को छलनी के प्रयोग से चंद्र दर्शन करें और चन्द्रमा को अर्घ्य दें.
  10. - इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार जरूर करें, इससे सौंदर्य बढ़ता है.
  11. - इस दिन करवा चौथ की कथा कहनी या फिर सुननी चाहिए.
  12. - कथा सुनने के बाद अपने घर के सभी बड़ों का चरण स्पर्श करना चाहिए.
  13. - फिर पति के पैरों को छूते हुए उनका आशीर्वाद लें .
  14. - पति को प्रसाद देकर भोजन कराएं और बाद में खुद भी भोजन करें.

करवा चौथ Festival Karva Chauth
हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत (Karwa Chauth Vrat) किया जाता है। यह पर्व सुहागिन स्त्रियों के लिए बेहद विशिष्ट माना जाता है। इस दिन विवाहित स्त्रियां पति की लम्बी उम्र और सुखमय दांपत्य जीवन के लिए निर्जला यानि बिना अन्न और जल का व्रत रखती हैं। करवा चौथ को कई जगह करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। वामन पुराण मे करवा चौथ व्रत का वर्णन किया गया है।
करवा चौथ का त्यौहार पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान आदि जगहों पर विशेष धूमधाम से मनाया जाता है। साल 2017 (Karwa Chauth 2017) में करवा चौथ का व्रत 08 अक्टूबर, रविवार के दिन रखा जाएगा।
क्या करते हैं करवा चौथ व्रत में (About Karwa Chauth)
करवा चौथ व्रत के दिन विवाहित और सौभाग्यवती स्त्रियां अपने अटल सुहाग, पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएं बिना अन्न तथा जल के दिनभर उपवास रखा जाता है।

इसके बाद शाम के समय स्त्रियां चन्द्रमा को अर्घ्य देती है और फिर उसे छलनी से देखती हैं। उसके बाद वे अपने पति के हाथ से पानी ग्रहण कर इस उपवास को पूर्ण करती है।

करवा चौथ के चाँद का महत्व 
ज्यादातर महिलाओं अपने उपवास को खोलने के लिए पहले एक छलनी के माध्यम से चाँद को देखती है और फिर तुरंत अपने पति को देखती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन चंद्रमा को भगवान शिव या भगवान गणेश के प्रतिनिधि माना जाता है हिन्दू धर्म में इन दोनों देवताओं को बहुत सम्मान दिया जाता है। इसलिए, चूंकि औरतें दुल्हन के रूप में सजी होती हैं, और नए दुल्हनों को सीधे परिवार के बड़ों की तरफ देखने पर पबन्धी होती है, इसलिए छलनी का उपयोग किया जाता है छलनी घूंघट के तौर पर देखा जाता है जिससे परम्परा नहीं टूटती।

करवा चौथ में कर्वे का महत्व
'करवा' का अर्थ मिटटी से बना बर्तन जिसमे गेहूं रखी जाती है और 'चौथ' का अर्थ होता है चौथा दिन। करवा चौथ को कृष्णा पक्ष के चौथे दिन (चतुर्थी) को मनाया जाता है। करवा चौथ से कुछ दिन पहले औरतें गोला-अकार मिटटी के बर्तनों को खरीदती है और उनके विभिन्न प्रकार के रंगों से सजाती हैं। इसके इलावा औरतें इन बर्तनों में चूड़िया, परांदे, मिठाई, कपडा, और सजावट का सामान रखती हैं। इसके बाद औरतें एक दुसरे से मिलती हैं और अपने करवों को एक दुसरे को देतीं हैं​।​

करवा चौथ में क्या करें और क्या ना करें 

क्या करें 
व्रत के एक दिन पहले यह सुनिश्चित करें की आपने अच्छे तरीके से पानी पिया है । पानी हमारे जीवन का अमृत है । चूंकि आप अगले पूरे दिन पानी नहीं पियेंगी इसीलिए एक दिन पहले अच्छे से पानी पीले जैसे निम्बू पानी या जों का पानी इत्यादि । इस तरह के पानी में ना सिर्फ विटामिन C होता है जो आपकी प्यास भूजाएगा  बल्कि यह पानी अन्तिओक्षिदेन्त के तौर पर भी काम करता है । ऐसे पानी से व्रत के कारण  रक्त वाहिकाओं में पैदा होने वाले तनाव से भी आराम मिलता है । चीनी का कम से कम प्रयोग करें क्यूंकि इससे न सिर्फ आपके शरीर में शुगर की मात्रा बढेगी, बल्कि इससे आपको भूक भी बहुत लगेगी जिससे व्रत करने में तकलीफ हो सकती है ।                
व्रत से एक रात पहले अच्छा सा खाना खा लें  यह सुनिश्चित करें की खाने में  कार्बोहाइड्रेट की अच्छी मात्रा है क्योंकि कार्बोहाइड्रेट ऊर्जे प्रदान करतें हैं। इसके अलावा, कार्बोहाइड्रेट निरंतर उर्जा को बढाता है क्यूंकि वेह शरीर में ग्लूकोस के रूप में संग्रहीत होता। कार्बोहाइड्रेट का चुनाव ध्यानपूर्वक करें - ज्वार, राई, जई, बाजरा, अम्लान्टह गेहूं जैसे बहुत जटिल कार्बोहाइड्रेट चुनें। इन अनाजों में बहुत सारा फाइबर होते हैं, जिससे यह लंबी अवधि के लिए आपको तृप्त रख सकते है।              
उपवास के दिन सूर्योदय से पहले अच्छे से खाना खा लें यह ध्यान रखे की खाने में फल जैसे की केला संतरा अनार पपीता इत्यादि हों सेब संतरे इत्यादि में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है । सरगी के समय होममेड पनीर खाएं और साथ में रोटी भी खा सकते हैं। ओअट्स में घुलनशील फाइबर होता है। घुलनशील फाइबर पानी के साथ एक जेल बनाता है  जिससे  पेट के खाली होने में देरी लगती है जिससे एक लंबी अवधि के लिए आपको भूक नहीं लगेगी। यह सही इंसुलिन गतिविधि को प्रभावित करेगा और रक्त ग्लूकोज को धीमी गति से जारी करने में मदद करेगा  जिससे लीवर में कार्बोहाइड्रेट का जमा हो सकेगा। लीवर में जमा कार्बोहाइड्रेट मस्तिष्क को ऊर्जा की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करता है, जो हमारे शरीर की कार्य प्रणाली के लिए ज़िम्मेदार है। पनीर एक प्रोटीन स्रोत हैजिसमे कैसिइन की मात्रा अच्छी होती है  जिससे धीरे-धीरे मांसपेशियों में अमीनो एसिड को प्रवाहित होती है । यह कम से कम कुछ घंटों के लिए मांसपेशियों का ध्यान रखेगी। सरगी खाने के बाद ताज़ा निम्बू पानी पियें और ताजे फल और ड्राई फ्रूट्स जैसे खजूर और अंजीर खाएं।            

सरगी के समय खाया गया खाना आपको 4-5 घंटे तक भूक नहीं लगने देगा। व्रत के समय अपने आप को व्यस्त रखे ताकि आपको भूक या प्यास न लगे। हमारा शरीर 48 घंटों के लिए भोजन के बिना कार्य कर सकता है लेकिन गर्म तापमान में पानी के बिना डिहाइड्रेशन बहुत तेजी से हो सकता है।              

व्रत के खोलने के समय तक कुछ महिलाएं ऐसा महसूस कर सकती है की उन्हें भूक नहीं है इसका कारण भूके पेट रहने से मस्तिष्क की गतिविधि में कमी होती है जो की ग्लूकोस की कमी की वजह से होता है। कुछ महिलाओं को बहुत प्यास और भूख लग सकती है जिससे उनके गुर्दों और आँतों पर तनाव पड़ सकता है। बहुत शांत रहें और आप अपने शरीर की खाने और पीने की इच्छा को पढ़ सकेंगे। यहां पानी सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। एक निर्जलित आंत अधिक एसिड का उत्पादन करेगा, जिससे आप सुस्त करने लगे गे। पानी पि कर व्रत खोलने की प्रक्रिया का प्रारंभ करें          

व्रत समाप्त होते-होते आपके शरीर में थकावट आ जाएगी क्यूंकि आपके रक्त में ग्लूकोस की मात्रा कम हो चुकी होगी । कुछ सूखे फल खाएं, बादाम का मिश्रण, अखरोट और कुछ बीज जैसे सूरजमुखी के बीज, फ्लेक्ससेड्स, कद्दू के बीज इस समय सही होंगे क्यूंकि इनमे प्रोटीन और मामूली कार्बोहाइड्रेट का अच्छा  संतुलन होता है। भोजन करने से पहले पानी पिलें ताकि आपके शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा बनी रहे। अच्छा यह रहेगा की आप ऐसा भोजन करें जिसमे कार्बोहाइड्रेट हो क्यूंकि यह रक्त प्रवाह में आसानी से और तेज़ी से टूट मिल जाता है।                                      

क्या ना करें
क्यूंकि टनीन और कैफीन से शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा कम हो जाती है इसीलिए अच्छा रहेगा की आप सरगी का खाना खाने के बाद चाय या कॉफ़ी न ले। क्यूंकि आपको सारे दिन पानी नहीं पीना है इसीलिए पेट में पानी की कमी के कारण आपको घबराहट और पेट में जलन हो सकती है। 
करवा चौथ वाले दिन ज्यादा मेहनत वाला काम ना करें क्यूंकि आपका शरीर जमा की गयी उर्जा से चल रहा है और सारा दिन आपको अपने शरीर में उर्जा लाने के लिए भोजन नहीं मिलेगा। ज्यादा शारीरिक गतिविधियों के करने से आपको भूक लगेगी।                          
करवा चौथ वाले दिन ज्यादा तेल वाला खाना सुबह न खाएं क्यूंकि ऐसे खाने से आपको थकावट महसूस हो सकती है।                          

करवा चौथ के व्रत को खोलते समय यह ध्यान रखें की आपका पाचन तंत्र सुबह से विश्राम की स्थिति में है। इसीलिए व्रत खोलते समय ज्यादा भारी भोजन करना सही नहीं रहेगा। भरी भोजन आपके पाचन तंत्र को नुक्सान ही पहुंचाएगा। ऐसा हो सकता है की आपको मीठा खाने की तीव्र इक्च्छा हो। यह इस बात का संकेत है की आपके शरीर में ग्लूकोस की मात्रा कम हो गयी है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है की आप मीठा खाना शुरू कर दें। क्यूंकि हो सकता है की आपको इससे शुरुआत में अच्छा महसूस हो किन्तु बाद में आपको तकलीफ हो सकती है।

करवा चौथ व्रत कथा Vrat-katha Karva Chauth
करवा चौथ के दिन व्रत कथा पढ़ना अनिवार्य माना गया है। करवा चौथ की कई कथाएं है लेकिन सबका मूल एक ही है। करवा चौथ का व्रत अक्टूबर को रखा जाएगा। करवा चौथ की एक प्रचलित कथा (Karwa Chauth Katha) निम्न है:

महिलाओं के अखंड सौभाग्य का प्रतीक करवा चौथ व्रत की कथा (Karwa Chautha Vrat Katha) कुछ इस प्रकार है- एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा। इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही मैं आज भोजन करूंगी।

साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुख हुआ। साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।

साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग करने के कारण विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया। 

साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया।

इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।

कहते हैं इस प्रकार यदि कोई मनुष्य छल-कपट, अहंकार, लोभ, लालच को त्याग कर श्रद्धा और भक्तिभाव पूर्वक चतुर्थी का व्रत को पूर्ण करता है, तो वह जीवन में सभी प्रकार के दुखों और क्लेशों से मुक्त होता है और सुखमय जीवन व्यतीत करता है। 

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Satish Kumar

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