Articles by "India Vs China"

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1. उत्तरी कमान ने कहा, बातचीत से मसला हल न हुआ तो हम लंबे गतिरोध के लिए भी तैयार

2. चीन ने युद्ध छेड़ा तो मुकाबला अनुभवी, और मनोवैज्ञानिक रूप मजबूत भारतीय सैनिकों से होगा

3. शीर्ष स्तर पर सहमति के बावजूद सैन्य कमांडरों की वार्ता की तारीख तय करने में आनाकानी

विस्तार

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी तनाव के बीच भारतीय सेना ने कहा कि वह सर्दी में भी आर-पार की जंग के लिए पूरी तरह तैयार है। अगर चीन  ने युद्ध के हालात पैदा किए तो उसे उच्च प्रशिक्षित, बेहतर ढंग से तैयार और मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूत भारतीय सैनिकों का सामना करना पड़ेगा।

सेना की उत्तरी कमान ने बुधवार को कहा, अधिकतर चीनी सैनिक शहरी इलाकों से हैं। वे जमीनी दिक्कतों से वाकिफ नहीं होते और न लंबे समय तक तैनात रहने के आदी होते हैं। चीन की नीति हमेशा बिना लड़े युद्ध जीतने की रही है। ऐसे में युद्ध की स्थिति बनी तो उन्हें मुकाबला मजबूत भारतीय सैनिकों से होगा।

उत्तरी कमान के प्रवक्ता ने कहा, भारत पड़ोसियों से अच्छे संबंध चाहता है। संवाद से समाधान को तरजीह देता है। सीमा विवाद पर चीन से वार्ता जारी है। जहां तक सेना की बात है तो वह लंबे गतिरोध के लिए तैयार है। उत्तरी कमान ने यह बातें चीन की सरकारी मीडिया ‘ग्लोबल टाइम्स’ की उस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहीं जिसमें कहा गया था कि भारत सर्दियों में प्रभावी ढंग से लड़ाई नहीं लड़ पाएगा। उत्तरी कमान के प्रवक्ता ने कहा, यह दंभ का जीता जागता उदाहरण है।

भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख में आर-पार की जंग के लिए तैयार, जानें अब तक क्या कुछ हुआ


सर्दी में युद्ध का बेमिसाल अनुभव

प्रवक्ता ने कहा, लद्दाख में नवंबर के बाद 40 फु ट तक बर्फ जमती है और तापमान शून्य से 30 से 40 डिग्री नीचे गिर जाता है। हालांकि भारतीय सैनिकों के पास भीषण सर्दी में युद्ध का बेमिसाल अनुभव है। भारत के पास दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन का अनुभव है जहां चीन से लगी सीमा के मुकाबले हालत बहुत मुश्किल हैं।


भारतीय सेना ने भी बढ़ाए संसाधन

प्रवक्ता ने कहा, अग्रिम मोर्चों पर लॉजिस्टिक क्षमता, गतिशीलता, निवास, अच्छी स्वास्थ्य सेवा, विशेष राशन, उच्च गुणवत्ता के हथियार, गोला-बारूद, कपड़ों आदि का पहले अभाव था। हालांकि चीन की आक्रामकता बढ़ने के बाद इस वर्ष मई से संसाधन बढ़ा दिए गए हैं।


हवाई ठिकानों से सेना से बेहतर संपर्क संभव

पहले लद्दाख जाने के लिए दो रास्ते थे जो जोजिला और रोहतांग दर्रे से होकर जाता है। हाल ही में दारचा से लेह तक तीसरी सड़क बनी, जिसके बंद होने का खतरा कम है। रोहतांग मार्ग पर अटल सुरंग पूरी होने से क्षमता कई गुना बढ़ गई है। इसके अलावा बड़ी संख्या में हवाई ठिकानों से हम सेना के साथ अच्छी तरह से संपर्क बनाए रख सकते हैं।


गोला-बारूद और विशेष ईंधन का पर्याप्त स्टॉक

प्रवक्ता ने कहा, टैंक और बख्तरबंद कर्मियों के वाहन के लिए विशेष ईंधन का पर्याप्त स्टॉक है। सैनिकों और जानवरों के लिए जगह-जगह पर नलकूप और बैरक बनाए गए हैं जो आरामदायक और गर्म हैं। छोटे हथियारों, मिसाइलों, टैंक और तोपखाने गोला-बारूद सहित तैयार हैं। विभिन्न प्रकार के गोला बारूद का भी पर्याप्त स्टॉक किया गया है।


तनाव के बीच बोफोर्स तोप तैयार रही है भारतीय सेना

भारतीय सेना एलएसी पर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयारियों को पुख्ता करने में जुटी है। इसी क्रम में सेना ने एलएसी पर तैनाती के लिए बोफोर्स होवित्जर तोपों को तैयार करना शुरू कर दिया है। लद्दाख में सेना के इंजीनियर 155 एमएम की इन तोपों की सर्विसिंग कर रहे हैं।

80 के दशक में सेना की ऑर्टिलरी रेजिमेंट में शामिल बोफोर्स तोप लो और हाई एंगल दोनों से मार करने में सक्षम हैं। सर्विसिंग पूरी होते ही इन्हें लद्दाख में तैनात किया जाएगा। इस बीच, वायु सेना लद्दाख के अग्रिम मोर्चों तक जरूरी सामान पहुंचाने की तैयारी को अंतिम रूप दे रही है।

भारत-चीन के बीच फिर सैन्य व कूटनीतिक वार्ता होगी : सरकार

केंद्र सरकार ने कहा है कि चीन से जारी सीमा विवाद समाधान के लिए फिर सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर वार्ता शुरू होगी। बुधवार को विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया, हाल ही में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच बनी सहमति के मुताबिक वार्ता शुरू होगी। 

उन्होंने बताया, दोनों पक्षों के शीर्ष कमांडर छह जून की बैठक में इस बात पर सहमत हुए थे कि दोनों देश सीमा से सेना पीछे हटाएंगे। हालांकि चीन ने इस सहमति का उल्लंघन करते हुए एलएसी पर यथास्थिति में बदलाव की एकतरफा कोशिश की।

इसके चलते 15 जून की रात दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। इसमें दोनों पक्षों के सैनिकों की जान गई। अगर सैन्य कमांडरों की बैठक में बनी सहमति का चीन पालन करता तो इसे टाला जा सकता था। 


मॉस्को में विदेश मंत्रियों की मुलाकात के बाद चीन ने सीमा पर अलर्ट घटाया

पूर्वी लद्दाख में एलएएसी पर फायरिंग के बाद बढ़े सैन्य अलर्ट को चीन ने घटा दिया है। ऐसा हाल ही में मॉस्को में हुई भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद किया गया। करीब साढ़े चार दशक में पहली बार बीते हफ्ते एलएसी पर फायरिंग के बाद चीन ने सैन्य तैनाती बढ़ा दी थी।

इतिहास में दूसरी बार चीन ने तैनाती इतनी बढ़ाई थी। इसके तहत हथियारों, सैन्य संसाधनों तथा सैनिकों की तैनाती बढ़ाने के साथ ही युद्धाभ्यास बढ़ाया गया। यह चीनी सैनिकों, कमांडरों और अफसरों को तैयार करने के लिए किया। इससे पहले चीन ने 1987 में सेना और सैन्य संसाधनों की तैनाती इतनी बढ़ाई थी।

तब अरुणाचल प्रदेश की समदोरांग झू घाटी में भारत और चीन के सैनिकों की झड़प के बाद युद्ध के हालात बन गए थे। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में सैन्य तैयारी के चार ग्रेड हैं। पहले ग्रेड का इस्तेमाल तभी होता है जब सैन्य संघर्ष अपरिहार्य हो जाता है।


24 घंटे सक्रिय हो जाती है सेना

तैयारी का अलर्ट लेवल बढ़ने के बाद अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैन्य टुकड़ी 24 घंटे सक्रिय रहती है। प्रशिक्षण और ड्रिल बढ़ा दी जाती है। इसी क्रम ने बिगड़ते हालत से निपटने के लिए चीन ने एलएसी सैनिकों और सैन्य साजो सामान की तैनाती बढ़ा दी है। हालांकि पिछले हफ्ते मॉस्को में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी की मुलाकात के बाद पीएलए ने अलर्ट घटा दिया था।


लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर 20 दिन में तीन बार हुई फायरिंग

एलएसी पर पिछले 45 वर्ष में एक भी गोली नहीं चली लेकिन चार महीने से जारी सीमा विवाद के बीच स्थिति बदल गई है। पिछले 20 दिन में पूर्वी लद्दाख में दोनों सेनाओं के बीच कम से कम तीन बार फायरिंग हुई है।

सैन्य सूत्रों के मुताबिक पहली घटना 29 से 31 अगस्त के बीच तब हुई जब चीनी सैनिकों ने पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर पर ऊंचाई वाली जगह कब्जा करने की कोशिश की, जिसे भारत ने नाकाम कर दिया। वहीं, सात सितंबर को मुखपरी चोटी पर गोली चली। फिर आठ सितंबर को पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर फायरिंग हुई। इस दौरान, दोनों सेनाओं ने 100 राउंड से ज्यादा फायरिंग की। चीनी सेना के आक्रामक रुख के कारण यह फायरिंग हुई थी।


चीन की चालबाजी के चलते भारत ने बढ़ाई अतिरिक्त चौकसी

पूर्वी लद्दाख में चार महीने से जारी विवाद के समाधान के लिए शीर्ष स्तर पर जारी बातचीत के बावजूद चीन की चालबाजी को देखते हुए भारत पूरी तरह अलर्ट है। विवाद सुलझाने के लिए सैन्य कमांडरों की बातचीत की तारीख तय करने में चीन की आनाकानी को देखते हुए भारत ने एलएसी और पाकिस्तान सीमा पर अतिरिक्त चौकसी बढ़ा दी है।

इस बीच, पूर्वी लद्दाख में सैन्य बढ़त के लिए भारत बोफोर्स तोप तैनात करने की भी तैयारी कर रहा है। सीमा विवाद के समाधान के लिए बीते दिनों भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों तथा विदेश मंत्रियों की बातचीत के बावजूद चीन सैन्य कमांडरों की वार्ता की तारीख नहीं तय कर रहा है।

इसके चलते भारत भी सैन्य तैयारी में कसर नहीं छोड़ना चाहता। पिछले 20 दिनों में एलएसी पर कम से कम तीन बार फायरिंग हुई है। सूत्रों के मुताबिक ताजा घटनाक्रमों के बीच सबसे बड़ी चिंता यह है कि सैद्धांतिक सहमति के बावजूद चीन ने अब तक सैन्य वार्ता की तारीख नहीं तय की है।

दोनों देशों में सहमति के मुताबिक इस हफ्ते की शुरुआत में ही कमांडर स्तर की वार्ता होनी थी। इससे पहले दोनों देशों के सैन्य कमांडर आखिरी बार दो अगस्त को मिले थे। 


पहले से कमजोर हो गई चीन की स्थिति

जानकारों के मुताबिक या तो चीन अभी वार्ता का एजेंडा तय कर रहा है या 29-30 सितंबर की रात भारतीय सेना की कार्रवाई की जांच कर रहा है। उस रात चीन ने पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे भारतीय इलाके में घुसपैठ की कोशिश की थी, जिसे भारतीय सैनिकों ने नाकाम कर दिया था। तब दोनों ओर से चेतावनी फायरिंग हुई।

इसके बाद भारत ने इस इलाके की महत्वपूर्ण चोटियों पर अपनी स्थिति और मजबूत कर ली। इसके बाद चीन पहले जैसी स्थिति में नहीं रहा गया है। पैंगोंग के दक्षिणी किनारे सामरिक मजबूती के बाद यहां भारत का पलड़ा भारी हो गया है। ऐसे बातचीत से पहले चीन यह मंथन कर रहा होगा कि क्या और कैसे बात करनी है।


छह महीने में भारत-चीन सीमा पर कोई घुसपैठ नहीं: सरकार

केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में बताया, पिछले छह महीने में भारत-चीन सीमा पर कोई घुसपैठ नहीं हुई। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया, तीन महीने में भारत-पाकिस्तान सीमा पर 47 बार घुसपैठ के प्रयास हुए।

जबकि बीते तीन वर्ष में पाकिस्तानियों ने 594 बार सीमा पार करने की कोशिश की, जिसमें 312 घुसपैठ हुई। उन्होंने बताया, सरकार ने घुसपैठ रोकने के लिए कई स्तर पर प्रयास किए हैं। इसमें नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ाना भी शामिल है। एजेंसी


भारत-अमेरिका रक्षा उपकरणों के सह विकास उत्पादन पर करेंगे चर्चा

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा अधिकारियों ने बुधवार को रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन और सह-विकास सहित रक्षा औद्योगिक सहयोग पर चर्चा करने के लिए एक आभासी बैठक आयोजित की।

अमेरिकी विदेश विभाग के ब्यूरो ऑफ साउथ एंड सेंट्रल एशियन अफेयर्स ने कहा कि अमेरिका, भारत रक्षा साझेदारी अमेरिका-भारत व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की आधारशिला है। अमेरिका और भारत के वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की, इसमें रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन और सह-विकास शामिल हैं।


भारत के साथ सीमा पर शांति व स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध : चीन

एलएसी पर लगातार आक्रामक और भड़काऊ रवैया अपना रहे चीन ने दावा किया है कि वह भारत के साथ हुए समझौतों और सहमति का सम्मान करता है। साथ ही सीमा पर शांति और स्थिरता बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन मंगलवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के लोकसभा में दिए बयान पर सवाल का जवाब दे रहे थे। वांग से राजनाथ के उस बयान पर टिप्पणी मांगी गई थी जिसमें उन्होंने कहा था कि चीन एलएसी पर विवाद वाली जगहों से सेना हटाने को तैयार नहीं है।

वांग ने कहा, हम भारत से हुए समझौतों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम शांति और स्थिरता चाहते हैं लेकिन अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता भी सुनिश्चित करेंगे।

 29-30 अगस्त को पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर भारत की कार्रवाई के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। दोनों देशों के टैंक एक-दूसरे की रेंज में तैनात हैं और किसी की भी एक गलती दोनों देशों को युद्ध की ओर ढकेल सकती है।

दोनों देशों के बीच चार महीने से अधिक समय से चल रहे इस गतिरोध में किस जगह पर क्या स्थिति है, आइए जानते हैं।


इस खबर में

मई में इन चार जगहों पर घुस आए थे चीनी सैनिक

मध्य जून में देपसांग में भारतीय सीमा में दाखिल हुए चीनी सैनिक

बातचीत में सहमति के बाद चीन ने दो जगह पर पीछे हटाए सैनिक

तीन जगहों पर अभी भी भारतीय इलाकों में बने हुए हैं चीनी सैनिक

पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर भारत हावी

इसी इलाके में एक-दूसरे की रेंज में तैनात हैं भारत और चीन के टैंक

भारत-चीन सीमा विवाद: पिछले चार महीने में क्या-क्या हुआ और अभी कहां क्या स्थिति है?


शुरूआत मई में इन चार जगहों पर घुस आए थे चीनी सैनिक

मौजूदा विवाद की शुरूआत मई में चीनी सैनिकों के पूर्वी लद्दाख में LAC पर चार जगहों पर आगे आने के साथ हुई। इनमें पेंगोंग झील के पास स्थित फिंगर्स एरिया, गलवान घाटी (PP14), हॉट स्प्रिंग (PP15) और गोगरा (PP17A) शामिल थे।

फिंगर्स एरिया और गलवान में तो चीनी सैनिक भारतीय इलाके में दाखिल हो गए थे। गलवान घाटी में ही 15 जून को दोनों देशों के सैनिकों में झड़प हुई थी, जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे।


देपसांग मध्य जून में देपसांग में भारतीय सीमा में दाखिल हुए चीनी सैनिक

इसके बाद मध्य जून में चीनी सैनिकों ने एक और मोर्चा खोल दिया और देपसांग में घुसपैठ कर दी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने देपसांग की वाई-जंक्शन या बोटलनेक नामक जगह पर बड़ी संख्या में सैनिक और विशेष सैन्य उपकरण तैनात कर दिए थे।

बोटलनेक LAC पर भारतीय सीमा के लगभग 18 किलोमीटर अंदर है और दौलत बेग ओल्डी (DOB) में भारत के सैन्य हवाई अड़्डे से नजदीकी के कारण ये रणनीति तौर पर बेहद महत्वपूर्ण है।


बातचीत बातचीत में सहमति के बाद चीन ने दो जगह पर पीछे हटाए सैनिक

5 जुलाई को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री की बातचीत में सेनाओं को पीछे हटाने पर सहमति बनने के बाद चीन ने इन पांच में दो जगहों- गलवान घाटी और हॉट स्प्रिंग- में अपने सैनिक पीछे हटा लिए।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच चार किलोमीटर का फासला है, वहीं हॉट स्प्रिंग में ये आंकड़ा लगभग 10 किलोमीटर है।


अन्य जगहें तीन जगहों पर अभी भी भारतीय इलाकों में बने हुए हैं चीनी सैनिक

हालांकि, चीन ने अन्य तीन जगहों पर अपने सैनिक पीछे हटाने से इनकार कर दिया। गोगरा में पहले चरण में थोड़ा पीछे हटने के बाद चीनी सैनिक वहीं जम गए हैं और दोनों देशों के सैनिकों के बीच एक किलोमीटर से भी कम का फासला है।

वहीं फिंगर्स एरिया में चीनी सैनिकों ने फिंगर चार पर अपने सैनिकों की संख्या कम जरूरी की, लेकिन चोटियों पर अभी भी उसका कब्जा है।

देपसांग में भी चीनी सैनिक जस-के-तस बने हुए हैं।


दक्षिणी किनारा पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर भारत हावी

अब बात करते हैं पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे की।

29-30 अगस्त की रात चीनी सैनिकों ने यहां भी घुसपैठ कर चोटियों पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन उसके इन नापाक मंसूबों की भनक भारतीय सैनिकों को लग गई और उन्होंने चीनी सैनिकों से पहले ही इन चोटियों पर कब्जा कर लिया।

अभी गुरूंग हिल, मुखपरी, मगर हिल, रेजांग ला और रेचिन ला भारत के नियंत्रण में है, वहीं ब्लैक टॉप और हेलमेट टॉप पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।


जानकारी इसी इलाके में एक-दूसरे की रेंज में तैनात हैं भारत और चीन के टैंक

पैंगोंग झील का दक्षिणी किनारा ही वह जगह है जहां दोनों देशों के टैंक एक-दूसरे की रेंज में तैनात हैं। चीन यहां भारतीय सैनिकों को चोटियों से उतारने की कोशिश में लगा हुआ है और यहीं पर 7 अगस्त को फायरिंग हुई थी।

 चीन ने दावा किया है कि भारतीय सेना ने सोमवार को पैंगोग झील के दक्षिणी किनारे पर एक बार फिर से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पार की और चेतावनी के तौर पर गोलियां भी चलाईं।

चीन ने ये घटना शेनपाओ पर्वत के आसपास होने की बात कही है। चीनी सेना ने अपने बयान में ये भी कहा कि उसने भी भारतीय सेना को जबाव देने के लिए कुछ कदम उठाए। ये कदम क्या थे, ये अभी स्पष्ट नहीं है।


इस खबर में

चीनी सेना ने कहा- भारतीय सेना ने अवैध तरीके से पार की LAC

चीन ने कहा- भारत की कार्रवाई बेहद बुरी प्रकृति का उकसावा

10 दिन में पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर दूसरी झड़प

दोनों देशों ने एक-दूसरे की रेंज में तैनात किए हुए हैं टैंक

अन्य जगहों पर क्या स्थिति है?

चीन का दावा- LAC पार कर भारतीय सेना ने फायर किए वॉर्निंग शॉट्स


बयान चीनी सेना ने कहा- भारतीय सेना ने अवैध तरीके से पार की LAC

चीनी सेना के प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा है कि सोमवार को भारतीय सेना ने अवैध तरीके से LAC पार की और पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे और शेनपाओ पर्वत के इलाके में घुस आई।

बयान में कहा गया है, "ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने वहां पहुंचे चीनी बॉर्डर गार्ड्स के गश्ती जवानों पर खुलेआम गोलियां चलाईं, जिसके बाद चीनी बॉर्डर गार्ड्स को जमीनी स्थिति को स्थिर करने के लिए जबावी कार्रवाई की।"


बयान चीन ने कहा- भारत की कार्रवाई बेहद बुरी प्रकृति का उकसावा

भारत की इस कार्रवाई को एक बेहद बुरी प्रकृति का गंभीर उकसावा बताते हुए चीन ने भारतीय सेना से तत्काल खतरनाक कार्रवाईयां बंद करने को कहा है। भारत की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं है, हालांकि सूत्रों के हवाले से गोलियां चलने की खबरें आ रही हैं।

भारत सरकार के सूत्रों के अनुसार, स्थिति को अभी काबू में कर लिया गया है। मामले में आधिकारिक बयान का इंतजार है जिससे स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।


अन्य मामला 10 दिन में पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर दूसरी झड़प

पिछले 10 दिन में पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर झड़प का ये दूसरा मामला है। इससे पहले 29-30 अगस्त की रात चीनी सैनिकों ने पैंगोंग झील के किनारे पर भारतीय इलाके में घुसपैठ करने की कोशिश की थी।

हालांकि भारतीय सैनिकों को पहले ही चीन के इन मंसूबों की भनक लग गई और उन्होंने चीनी सैनिकों से पहले ही चोटियों पर कब्जा कर भारतीय जमीन पर कब्जे के उसके प्रयासों को नाकाम कर दिया।


तनाव दोनों देशों ने एक-दूसरे की रेंज में तैनात किए हुए हैं टैंक

भारतीय सेना की इस शहमात से चीन बौखला गया है और उसके सैनिक कई बार इन चोटियों पर फिर से कब्जा करने की कोशिश कर चुके हैं। हालांकि भारतीय सैनिकों ने हर बार उन्हें दूर से ही वापस लौटा दिया है।

चीन ने इलाके में अपने टैंक भी तैनात कर दिए हैं और इसके जबाव में भारत ने भी टैंक तैनात किए हैं। दोनों देशों के टैंक एक-दूसरे की रेंज में हैं और स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।


अन्य जगहें अन्य जगहों पर क्या स्थिति है?

अन्य जगहों की बात करें तो चीन ने मई-जून में LAC पर जिन पांच जगहों पर अतिक्रमण और घुसपैठ की थी, उनमें से तीन- देपसांग, गोगरा और पैंगोंग झील के फिंगर्स एरिया- में चीनी सैनिक अभी भी बने हुए हैं।

पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर स्थित फिंगर्स एरिया में चीनी सैनिक अभी भी फिंगर चार की चोटी पर बने हुए हैं, वहीं भारतीय सैनिकों पिछले तीन-चार दिन में इसके सामने वाली चोटियों पर आकर बैठ गए हैं।

 पूरा देश आज 74वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। यह उनका सातवां संबोधन था।

लाल किले पर पहुंचने से पहले उन्होंने पूरे देश को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी थी।

इस बार कोरोना संकट के कारण स्वतंत्रता दिवस आयोजन काफी बदला-बदला नजर आया।

आइये, जानते हैं कि देश के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने क्या-क्या बड़ी बातें कहीं।


इस खबर में

लाल किले पर फहराया झंडा

कोरोना योद्धाओं का किया अभिवादन

130 करोड़ भारतीयों ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प किया- मोदी

आत्मनिर्भर भारत के सामने लाख चुनौतियां, लेकिन देश के पास करोड़ों समाधान- मोदी

"आजाद भारत की मानसिकता 'वोकल फॉर लोकल' होनी चाहिए"

जल जीवन मिशन का किया जिक्र

आत्मनिर्भर कृषि और आत्मनिर्भर किसान हमारी प्राथमिकता- प्रधानमंत्री मोदी

महिलाओं को बराबर मौके देने के लिए देश प्रतिबद्ध- मोदी

नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन का ऐलान

कोरोना वायरस की तीन संभावित वैक्सीन्स पर चल रहा काम- मोदी

देश की तरफ आंख उठाने वालों को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया- मोदी

भारत ने असाधारण समय में असंभव को संभव किया है- मोदी

राम मंदिर का भी किया जिक्र

यहां सुनिये प्रधानमंत्री का संबोधन

'आत्मनिर्भर भारत' से कोरोना की वैक्सीन तक, जानिये प्रधानमंत्री के संबोधन की अहम बातें
'आत्मनिर्भर भारत' से कोरोना की वैक्सीन तक, जानिये प्रधानमंत्री के संबोधन की अहम बातें

जानकारी लाल किले पर फहराया झंडा

संबोधन से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले पर तिरंगा झंडा फहराया। इसमें उनकी मदद मेजर श्वेता पांडे ने की। वह इस साल जून में रूस के मॉस्को में विजय दिवस परेड में शामिल हुई एक भारतीय सैन्य टुकड़ी का हिस्सा थीं।


संबोधन कोरोना योद्धाओं का किया अभिवादन

प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के इस मुश्किल समय में डॉक्टर, नर्से, पैरामेडिकल स्टाफ, एंबुलेंस कर्मी, सफाई कर्मचारी, पुलिसकर्मी, सेवाकर्मी और अनेकों लोग चौबीसों घंटे अपने जीवन की परवाह किए बिना सेवा परमो धर्म: की भावना के साथ काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "हम अगले वर्ष अपनी आजादी के 75वें साल में प्रवेश कर जाएंगे। यह हमारे सामने एक बहुत बड़ा पर्व है।"

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भर भारत का भी प्रमुखता से जिक्र किया।

उन्होंने कहा, "कोरोना संकट के बीच 130 करोड़ भारतीयों ने आत्मनिर्भर भारत बनाने का संकल्प लिया है। हमें पूरा भरोसा है कि भारत इस सपने को पूरा करके रहेगा। मुझे अपने देश के सामर्थ्य पर भरोसा है।"

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "आखिर कब तक हमारे ही देश से गया कच्चा माल तैयार होकर उत्पाद के रूप में भारत में लौटता रहेगा।"


देश के नाम संबोधन आत्मनिर्भर भारत के सामने लाख चुनौतियां, लेकिन देश के पास करोड़ों समाधान- मोदी

देश के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "मैं मानता हूं कि आत्मनिर्भर भारत के सामने लाखों चुनौतिया हैं और वैश्विक मुकाबले के बीच वो और बढ़ती जाएंगी।, लेकिन अगर लाखों चुनौतियां हैं तो देश के पास करोड़ों समाधान देने की शक्ति है। मेरे देशवासियों के पास इनका समाधान है।"

उन्होंने कहा कि पहले भारत में N95 मास्क और PPE किट नहीं बनते थे, लेकिन अब यहां से दूसरे देशों में भी ये भेजे जा रहे हैं।


प्रधानमंत्री का संबोधन "आजाद भारत की मानसिकता 'वोकल फॉर लोकल' होनी चाहिए"

प्रधानमंत्री मोदी ने देश के नाम संबोधन में कहा, "आजाद भारत की मानसिकता 'वोकल फॉर लोकल' होनी चाहिए। हमें हमारे स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देना चाहिए। अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो उन्हें बेहतर करने का मौका नहीं मिलेगा।"

उन्होंने कहा कि आज दुनिया की बहुत बड़ी-बड़ी कंपनियां भारत का रुख कर रही हैं। हमें 'मेक इन इंडिया' के साथ-साथ 'मेक फॉर वर्ल्ड' के मंत्र के साथ आगे बढ़ना है।


जानकारी जल जीवन मिशन का किया जिक्र

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले साल जल जीवन मिशन की घोषणा की गई थी। पिछले एक साल से दो करोड़ परिवारों तक हम जल पहुंचाने में सफल हुए हैं। जंगलों में दूर-दूर तक रहने वाले आदिवासियों तक यह अभियान चल रहा है।


देश के नाम संबोधन आत्मनिर्भर कृषि और आत्मनिर्भर किसान हमारी प्राथमिकता- प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की अहम प्राथमिकता आत्मनिर्भर कृषि और आत्मनिर्भर किसान है। देश के किसानों को आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर देने के लिए कुछ दिन पहले ही एक लाख करोड़ रुपए का 'एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड' बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि भारत के किसान सिर्फ देश के लोगों का पेट नहीं भरते बल्कि दुनिया में जहां लोगों को जरूरत होती है, वहां के लोगों का भी पेट भरते हैं।


देश के नाम संबोधन महिलाओं को बराबर मौके देने के लिए देश प्रतिबद्ध- मोदी

देश के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब भी महिलाओं को मौका मिला है, उन्होंने भारत को मजबूत और गौरान्वित किया है। आज देश उन्हें बराबर मौके देने के लिए प्रतिबद्ध है। आज महिलाएं कोयले की खदानों में काम कर रही है। देश की बेटियां लड़ाकू विमानों में आसमान को छू रही है।

मोदी ने कहा कि सरकार ने महिला की शादी की न्यूनतम आयु पर फिर से विचार करने के लिए समिति बनाई है।


घोषणा नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन का ऐलान

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश के नाम संबोधन में नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में नई क्रांति लेकर आएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इसके तहत नागरिकों को एक हेल्थ आईडी दी जाएगी, जिसमें नागरिकों के हर टेस्ट, हर बीमारी, डॉक्टर ने कब कौन सी दवा दी, उनके टेस्ट की रिपोर्ट्स क्या थीं समेत सभी जानकारियां शामिल होंगी।


जानकारी कोरोना वायरस की तीन संभावित वैक्सीन्स पर चल रहा काम- मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश में कोरोना वायरस की तीन संभावित वैक्सीन पर काम चल रहा है। वैज्ञानिकों की हरी झंडी मिलते ही इनका उत्पादन शुरू हो जाएगा। हर जरूरतमंद तक कम से कम समय वैक्सीन पहुंचाने की रूपरेखा तैयार कर ली है।


देश के नाम संबोधन देश की तरफ आंख उठाने वालों को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया- मोदी

देश के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने नाम लिए बिना पाकिस्तान और चीन पर निशाना साधते हुए कहा कि LOC से लेकर LAC तक, जिसने भी भारत की संप्रुभता पर आंख उठाई है, देश ने और देश की सेना ने उसका उसी भाषा में जवाब दिया है।

उन्होंने कहा, "भारत की संप्रुभता का सम्मान हमारे लिए सर्वोच्च है। इस संकल्प के लिए हमारे वीर जवान क्या कर सकते हैं, ये पूरी दुनिया ने लद्दाख में देखा है।"


देश के नाम संबोधन भारत ने असाधारण समय में असंभव को संभव किया है- मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि NCC का विस्तार देश के 173 बॉर्डर और कोस्टल इलाकों तक किया जाएगा। इस अभियान के तहत लगभग एक लाख नए कैडेट्स को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें लगभग एक तिहाई लड़कियां होंगी।

उन्होंने कहा भारत ने असाधारण समय में असंभव को संभव किया है। इसी इच्छाशक्ति के साथ प्रत्येक भारतीय को आगे बढ़ना है।

उन्होंने कहा, "हमारी नीतियां, हमारे उत्पाद सब कुछ सर्वश्रेष्ठ होना चाहिए। तभी हम एक भारत-श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना साकार होगी।"


जानकारी राम मंदिर का भी किया जिक्र

अपने संबोधन में राम मंदिर का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राम जन्मभूमि के सदियों पुराने विषय का शांतिपूर्ण समाधान हो चुका है। देशवासियों ने जिस संयम और समझदारी के साथ आचरण और व्यवहार किया है, वह अभूतपूर्व है।

15 जून को पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीनी सेना के साथ टकराव हिंसक हो गया था। भारतीय सेना के बहादुरों ने चीनी सेना को मुंहतोड़ जवाब दिया। 16 बिहार रेजीमेंट के 20 सैनिक शहीद हो गए जिनमें कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) कर्नल संतोष बाबू भी शामिल थे। इन 20 बहादुरों में एक नाम 23 साल के सिपाही गुरतेज सिंह का भी है। पंजाब ने अपने चार नौजवानों को देश के नाम कुर्बान कर दिया है। जब आपको यह पता लगेगा कि किस तरह से गुरतेज सिंह ने किस तरह से चीनी सैनिकों धूल चटाई तो आप अपने आप ही उन्‍हें सैल्‍युट करेंगे।

Video सिर्फ 23 साल के सिपाही गुरतेज सिंह ने शहीद होने से पहले कैसे ढेर किया एक दर्जन चीनी जवानों को



15 जून को ही थी भाई की शादी
15 जून की घटना में 16 बिहार, 3 पंजाब रेजीमेंट, दो आर्टिलरी यूनिट और तीन मीडियम रेजीमेंट के अलावा 81 फील्‍ड रेजीमेंट चीन को जवाब देने में शामिल थी। गुरतेज 3 पंजाब घातक प्‍लाटून के सिपाही थी। पंजाब के मानसा गांव के वीरे वाला डोकरा के रहने वाले गुरतेज जिस दिन शहीद हुए उसी दिन गांव में उनके बड़े भाई गुरप्रीत की शादी का जश्‍न चल रहा था। भाई को सेना अधिकारियों की तरफ से जश्‍न के दौरान ही लाडले छोटे भाई की शहादत की सूचना दी गई थी। गुरतेज बॉर्डर पर टेंशन और कोरोना वायरस महामारी के चलते वह शादी में शामिल नहीं हो सके।

'बोले सो निहाल' के साथ टूट पड़े दुश्‍मन पर
3 पंजाब घातक प्‍लाटून को रिइनफोर्समेंट के लिए बुलाया गया था। सैनिकों के पास उनके धर्म से जुड़ी कृपाण और डंडे, छड़ें और तेज चाकू ही थीं। सिपाही गुरतेज पर पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के चार सैनिकों ने हमला बोला। गुरतेज जरा भी डरे नहीं बल्कि रेजीमेंट का युद्धघोष 'बोले सो निहाल, सत श्री अकाल,' चिल्‍लाते हुए उनकी तरफ बढ़े। गुरतेज ने दो को वहीं ढेर कर दिया जबकि दो ने उन्‍हें जान से मारने की कोशिश। गुरतेज चारों को पहाड़ी पर खींच कर ले गए और यहां से उन्‍हें नीचे गिरा दिया। गुरतेज भी अपना नियंत्रण खो दिया था और फिसल गए थे। लेकिन वह एक बड़े पत्‍थर की वजह से अटक गए और उनकी जान बच गई।

एक अकेले गुरतेज सवा लाख के बराबर!
सिपाही गुरतेज की गर्दन और सिर पर गहरी चोटें आ गई थीं। उन्‍होंने अपनी पगड़ी को दोबारा बांधा और फिर से लड़ाई के लिए आगे बढ़ चले। उन्‍होंने चीनी जवानों का मुकाबला अपनी कृपाण से किया और एक चीनी सैनिक से उसका तेज हथियार भी छीन लिया। इसके बाद गुरतेज ने सात और चीनी जवानों को ढेर किया। अब तक गुरतेज 11 चीनी जवानों को ढेर कर चुके है। शहादत से पहले गुरतेज ने अपनी कृपाण से 12वें चीनी सैनिक को भी ढेर किया। गुरतेज अकेले लड़े लेकिन कहते हैं न कि एक-एक अकाली सिख सवा लाख के बराबर होते हैं, गुरतेज ने इसी बात को सही साबित कर दिया।

दिसंबर 2018 में शामिल हुए थे आर्मी में
19 जून 2020 को पंजाब घातक प्‍लाटून उनके शव के साथ गांव पहुंची और यहां पर पूरे सैनिक सम्‍मान के साथ उनका अंतिम संस्‍कार किया गया। गुरतेज अपने तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उन्‍होंने अपनी आखिरी कॉल में कहा था, 'मैं जल्‍द घर आऊंगा।' वह अपने घर तो लौटे मगर तिरंगे में लिपटे हुए। गुरतेज ने दिसंबर 2018 में आर्मी ज्‍वॉइन किया था। वह हमेशा से आर्मी में जाना चाहते थे और उनका वह सपना तब पूरा हुआ जब वह सिख रेजीमेंट का हिस्‍सा बने।

जंग का मैदान हो या सुदूर आपदा प्रभावित इलाकों में सहायता पहुंचानी हो इंडियन एयरफोर्स का यह विमान हर जगह अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारतीय वायुसेना का बोइंग C-17 ग्लोबमास्टर विश्व के सबसे बड़े मालवाहक विमानों में से एक है। इसने भारतीय वायुसेना की ताकत काफी बढ़ा दी है। आज हम बता रहे हैं इस विशाल विमान की खास बातें-
Video : ऐसा विमान जो सेना के टैंक-बख्तरबंद गाड़ियों को चीन की सीमा पर ले जाने में सक्षम, जानें 9 रोचक बातें


1,500 फीट की पट्टी पर भी उतर सकता है
लंबाई-174 फीट, चौड़ाई-170 फीट, ऊंचाई- 55 फीट, 3500 फीट लंबी हवाई पट्टी पर उतरने की क्षमता। इमर्जेंसी में यह 1,500 फीट की पट्टी पर भी उतर सकता है।

तीन हेलिकॉप्टरों को ले जाने की रखता है ताकत
एक बार में 42 हजार किमी तक की उड़ान भर सकता है। 150 से अधिक जवानों को एक साथ ले जाने की क्षमता। तीन हेलिकॉप्टरों या दो ट्रकों को एयरलिफ्ट करने की भी है इसकी ताकत। करीब 80 टन वजन ढो सकता है।

उड़ान के दौरान ही ईंधन भरने की क्षमता
इसमें उड़ान के दौरान ही ईंधन भरने की क्षमता है। यह विमान चार इंजनों से लैस है। इसमें एक मिसाइल चेतावनी प्रणाली, एक काउंटर मेजर डिस्पेंसिंग सिस्टम आदि शामिल हैं। इसके अलावा लैंडिंग में परेशानी होने की स्थिति में इसमें रिवर्स गियर भी दिया गया है।

वर्ष 1991 में भरी पहली उड़ान
अमेरिका में निर्मित इस विमान को अमेरिकी वायुसेना के लिए मैकडोनेल डगलस ने अस्सी-नब्बे के दशक में विकसित किया। 15 सितंबर 1991 को इसने पहली उड़ान भरी। जनवरी 1995 में इसे पेश किया गया। अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कतर, सयुंक्त अरब अमीरात आदि देश भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत ने वर्ष 2011 में किया सौदा
भारतीय वायुसेना ने वर्ष 2011 में अमेरिका से हुए समझौते के तहत बोइंग सी-17 ग्लोबमास्टर के दस विमान खरीदने का करार किया। वर्ष 2013 में जून महीने में पहला विमान मिला।

रूसी विमान की ली जगह
ग्लोबमास्टर सी-17 ने रूस के आइएल-76 की जगह ली है। आइएल-76 अभी तक वायुसेना के बेड़े में शामिल रहा था। आईएल-76 की क्षमता करीब 40 टन वजन ढोने की क्षमता थी।

ऊंचे स्थान पर भी हो सकता है लैंड
यह विमान सेना के टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों को चीन की सीमा से लगी लद्दाख जैसी ऊंची जगहों पर भी ले जाने की ताकत रखता है। ग्लोबमास्टर C-17 प्लेन में इतनी क्षमता है कि जंग के लिए पूरी तरह से तैयार 150 सैनिकों को अंडमान निकोबार से लेकर लेह तक पहुंचा सकता है।

साबित कर चुका है काबिलियत
पिछले वर्ष इस विमान ने चीन-सीमा से महज 29 किलोमीटर पहले अरुणाचल प्रदेश के मेचुका एडवांस लैंडिंग ग्राउंड पर उतरकर अपनी काबिलियत साबित की थी। 6,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस एयरपोर्ट का लैंडिंग सरफेस सिर्फ 4,200 फीट लंबा है।

नेपाल के भूकंपग्रस्त इलाकों में पहुंचाई राहत सामग्री
जंग हो या आपदा C-17 ग्लोबमास्टर प्लेन हमेशा देश की सेवा के लिए तैयार रहता है। 25 अप्रैल 2015 को नेपाल में आए भूकंप के समय इस विमान से राहत सामग्री पहुंचाई गई थी। प्राकृतिक आपदा के अलावा जंग के समय भी यह विमान बहुत महत्वपूर्ण रोल निभाता है।

युद्ध के तौर-तरीके कितने ही आधुनिक हो जाएं, लेकिन दुश्मन की सुरक्षा घेरे में सेंध लगाने के लिए छाताधारी सैनिकों की बात ही निराली है। इतिहास गवाह है कि छाताधारी सैनिकों ने दुश्मन की जमीन पर उतारकर लड़ाइयों के नतीजे बदल दिए। आज हम आपको छाताधारी सैनिकों के बारे में कुछ रोचक तथ्य बताने जा रहे हैं।

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भारत ने टंगैल में पाकिस्तान को दी मात
यह सही है कि भारत में छाताधारी सैनिकों की ट्रेनिंग का काम देर से शुरू हुआ लेकिन वर्ष 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में भारत के छाताधारी सैनिकों ने पाकिस्तान के होश फाख्ता कर दिये। भारतीय सेना की पैराशूट रेजीमेंट और भारतीय वायु सेना ने 11 दिसंबर, 1971 की रात को टंगैल में छाताधारी सैनिकों को पोंगली पुल पर उतारा गया। भारतीय सैनिकों को देख पाकिस्तानी सेना में खलबली मच गई। सिर्फ 748 भारतीय सैनिकों ने ढाका जाने वाला रास्ता काट दिया। पाकिस्तानी सेना को इकट्ठे होने का मौका नहीं मिला और उसे घुटने टेकने पड़े। भारतीय सेना के इस अभियान ने एक नए राष्ट्र बांग्लादेश को जन्म दिया।

दुश्मन को भौंचक्का कर देते हैं छाताधारी सैनिक
जैसा कि नाम से जाहिर है छाताधारी सैनिक पैराशूट के जरिए दुश्मन की जमीन पर उतरकर उसे भौंचक्का कर देते हैं। जब तक दुश्मन संभले तक तक तो छाताधारी सैनिक अपना काम तमाम कर चुका होता है। हालांकि सैनिकों का पैराशूट के जरिए ऊंचाई से हवा में उतरने का सिलसिला विमानों के अस्तित्व में आने के बाद शुरू हुआ लेकिन सच यह है कि ऊंचाई से छतरियों के सहारे छलांग लगाना एक खेल के रूप में बहुत पहले शुरू हो चुका था। माना जाता है कि ग्यारहवीं सदी में चीन में ऊंचाई से हवा में छलांग लगाने का खेल खेला जाता था।

पैराशूट का पहला डिजाइन
दस्तावेजों में पैराशूट का पहला प्रमाण पन्द्रहवीं सदी में मिलता है। माना जाता है कि वर्ष 1485 में leonardo da vinci ने पहली बार पैराशूट का डिजाइन स्केच किया था। पांच सौ से ज्यादा वर्ष के बाद 26 जून 2,000 को ब्रिटिश स्काईडाइवर एड्रियन निकोल्स leonardo da vinci के डिजाइन के आधार पर तैयार पैराशूट से छलांग लगाकर यह साबित किया कि da vinci वक्त से कितने आगे और कितने सही थे। अठाहरवीं सदी में पैराशूट बनाने की दिशा में कई लोगों ने काम किया। इन्हीं में से एक थे फ्रेंच नागरिक Louis-Sebastien Lenormand जिन्होंने एक पैराशूट बनाया और 1783 में इसका पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन किया।

कुत्ते ने लगाई थी पहली छलांग
वैसे मानव निर्मित पैराशूट के जरिए ऊंचाई से पहली छलांग एक कुत्ते ने लगाई। वर्ष 1785 में फ्रेंच नागरिक Jean Pierre Blanchard ने अपने पैराशूट के परीक्षण के लिए अनूठा प्रयोग किया। अपने कुत्ते के साथ एक गुब्बारे के सहारे ऊंचाई पर गए। वहां उन्होंने अपने कुत्ते को एक पैराशूट के सहारे हवा में छोड़ दिया। कुत्ते का क्या हुआ इसका वर्णन नहीं मिलता लेकिन Blanchard के पैराशूट ने सही ढंग से काम किया, इसलिए माना जा सकता है कि कुत्ता जमीन पर सुरक्षित ही उतरा होगा। Blanchard ने पैराशूट को हल्का बनाने के लिए सिल्क का इस्तेमाल किया। वर्ष 1797 में André Garnerin ने पैराशूट में कंपन कम करने के लिए कुछ और सुधार किए। अठाहरवीं और उन्नीसवीं सदी में पैराशूट में कई तरह के सुधार हुए।

हवाई जहाज से पहली छलांग
बीसवीं सदी के शुरू में हवाई जहाज के आविष्कार के बाद इस बात की जरूरत महसूस हुई कि ऊंचाई पर अगर हवाई जहाज में खराबी आ जाए तो पायलट की जान कैसे बचाई जाए। पैराशूट को आधुनिक बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ा। उड़ान के दौरान आपात स्थिति में पैराशूट का इस्तेमाल कैसे किया जाए इसकी बाकायदा ट्रेनिंग शुरू हुई। वैसे हवाई जहाज से पहली छलांग सेंट लुइस (अमेरिका) में कैप्टन अल्बर्ट बेरी ने 1 मार्च 1912 को लगाई।

बिली मिशेल ने दिया था दुश्मन के इलाके में सैनिक उतारने का सुझाव
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका के ब्रिगेडियर जनरल बिली मिशेल ने दुश्मन के इलाके में पैराशूट के जरिए अपने सैनिक उतारने का सुझाव दिया। बिली के सुझावों पर कई कारणों से अमल नहीं हो पाया। कहा जाता है कि इस दिशा में इटली आगे बढ़ा और वह 1918 में छाताधारी सैनिक उतारने में सफल रहा। कुछ ही महीनों में पहला विश्वयुद्ध समाप्त हो गया। पर युद्ध में छाताधारी सैनिकों का विचार सामने आ चुका था। 1920 के दशक में कई देशों की सेनाओं ने इस दिशा में विचार करना शुरू कर दिया कि कैसे पैराशूट के जरिए ज्यादा से ज्यादा सैनिकों को उतारा जाए।

सोवियत संघ ने इसे खेल के रूप में अपनाया
सोवियत संघ ने इस दिशा में तेजी से काम करना शुरू किया। पैराशूटिंग को सोवियत संघ ने एक खेल के रूप में अपनाया। लोगों के लिए यह खेल नया भी था और रोमांचक भी। जब लोग इससे जुड़ने लगे तो सोवियत संघ ने उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे एयरबोर्न कोर में शामिल होकर किस तरह देश सेवा कर सकते हैं। वर्ष 1928 आते-आते पहली पैराशूट यूनिट तैयार कर ली थी। इतना ही नहीं 1933 में उसने सैनिकों को पैराड्रॉप करके दिखा भी दिया। वर्ष 1935 में कीव वर्ष 1936 में मिंस्क और मास्को में सैकड़ों छाताधारी सैनिकों के उतरने की घटनाओं ने अन्य देशों का ध्यान भी इस ओर खींचा। इधर जर्मनी और इटली भी एयरबोर्न फोर्स को विकसित करने में लगी हुई थीं। वर्ष 1936 में ही ब्रिटेन ने छाताधारी सेना का गठन किया। जल्द ही अमेरिका ने पैराशूट यनिट का गठन कर लिया।

दूसरे विश्वयुद्ध में छाताधारी सैनिकों का जलवा
दूसरे विश्वयुद्ध में छाताधारी सैनिकों का कौशल देखने को मिला। जर्मनी ने आकाश के रास्ते से क्रीट (1941) में अपने सैनिक उतारे। कंबाइंड एंग्लो-अमेरिकी सेना ने जुलाई 1943 में सिसली में, जून 1944 में नॉर्मेंडी, मार्च 1945 में राइन में सैनिक उतारे। इसके अलावा भी कई जगह छाताधारी सैनिक उतारे गए।

चीन के साथ सीमा पर चल रहे तनाव के बीच वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया बुधवार को लेह दौरे पर गए थे।

उनका यह दौरा पहले से निर्धारित नहीं था। उन्होंने बुधवार शाम को श्रीनगर से लेह के लिए उड़ान भरी थी।

इस दौरे से पहले उन्होंने सीमा के हालात को लेकर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के साथ बैठक की थी।

आइये, पूरी खबर जानते हैं।


इस खबर में
1. अलर्ट पर रखे गए हैं वायुसेना के विमान
2. लद्दाख के पास तैनात हुए मिराज और सुखोई विमान
3. वायुसेना ने नहीं की आधिकारिक पुष्टि
4. लेह के आसमान में दिखे वायुसेना के विमान और हेलिकॉप्टर
5. पूर्वोत्तर राज्यों में भी विमान अलर्ट पर
6. चीन सीमा पर लंबे समय से जारी है तनाव

अलर्ट पर रखे गए हैं वायुसेना के विमान
भदौरिया का लेह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब सीमा पर तनाव के चलते वायुसेना के विमानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

इंडिया टुडे ने सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया, "वायुसेना प्रमुख दो दिन के दौरे पर श्रीनगर और लेह गए थे। इन दोनों स्टेशनों पर मध्य और दक्षिण भारत से लड़ाकू विमानों को बुलाकर तैनात किया है।"

बता दें, चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर हुई झड़प में 20 जवान शहीद हुए थे।

लद्दाख के पास तैनात हुए मिराज और सुखोई विमान
रिपोर्ट के मुताबिक, वायुसेना ने लद्दाख के पास बालाकोट एयरस्ट्राइक को अंजाम देने वाले लड़ाकू विमानों मिराज 200 को तैनात किया है, जहां से कुछ ही मिनटों में पेंगोग त्सो और चीनी सीमा के पास लगते इलाकों में जा सकते हैं।

इसके अलावा सुखोई-30 विमानों को भी अग्रिम मोर्चों पर भेजा गया है, जहां से वो सीमा किसी भी स्थिति का मुहंतोड़ जवाब देने में सक्षम होंगे।

शुक्रवार को लेह के आसमान में इन विमानों की गतिविधि भी देखी गई।

वायुसेना ने नहीं की आधिकारिक पुष्टि
वायुसेना ने लद्दाख में चिनूक और अपाचे हेलिकॉप्टर को भी तैनात किया है ताकि सीमा पर बन रहे हालातों के बीच सेना तक हर जरूरी सामान की समय पर आपूर्ति की जा सके।

अपाचे हेलिकॉप्टर आसमान से जमीन पर हमला करने में भी सक्षम है।

आपको बता दें कि भारतीय वायुसेना की तरफ से भदौरिया के लेह दौरे और विमानों की तैनाती को लेकर किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।



पूर्वोत्तर राज्यों में भी विमान अलर्ट पर
पिछले कुछ दिनों में श्रीनगर, अंबाला, आदमपुर और हलवाड़ा एयरबेस पर तैनात लड़ाकू विमानों में लंबी दूरी की मारक क्षमताओं वाले हथियार लगाए गए हैं।

वहीं तिब्बत क्षेत्र के आसपास होने वाले दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वायुसेना के बरेली एयरफोर्स को अलर्ट पर रखा गया है।

साथ ही वायुसेना ने पूर्वोत्तर राज्यों में स्थित अपने एयरबेस को अलर्ट कर दिया है ताकि चीन की किसी भी हरकत का तुरंत जवाब दिया जा सके।

चीन सीमा पर लंबे समय से जारी है तनाव
लद्दाख की गलवान घाटी में सीमा को लेकर भारत और चीन के बीच पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से विवाद चल रहा है।

इसे सुलझाने के लिए कई स्तर की बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला है। 6 जून की बैठक में सैनिकों के पीछे हटने पर सहमति बनी थी।

जब भारतीय सैनिक यह देखने गए तो चीनी सैनिकों ने उन्हें घेरकर उन पर हमला कर दिया। इसमें 20 जवान शहीद हुए थे।

चीन का रक्षा बजट सन 2020 में 179 अरब डॉलर था जबकि भारत का रक्षा बजट केवल 70 अरब डॉलर का है. इसके अलावा चीन के पास भारत से अधिक बड़ी सेना भी है. लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि भारत की सेना को पृथ्वी पर दुनिया की सबसे खतरनाक सेना माना जाता है. आइये इस Tech DNA video में भारत और चीन के बीच डिफेन्स ताकत की तुलना करते हैं.

भारत और चीन एशिया की दो महाशक्तियां मानी जातीं हैं. डोकलाम विवाद के कारण इन देशों के सम्बन्ध और भी कड़वे हो गए हैं. भारत, CPEC (China–Pakistan Economic Corridor) को लेकर पहले ही अपना ऐतराज जता  चुका है. चीन “स्ट्रिंग्स ऑफ़ पर्ल्स प्रोजेक्ट” के जरिये भारत को उसकी सीमा के भीतर चारों ओर से घेरने की कोशिश कर रहा है.

अब सवाल यह उठता है कि आखिर इन दोनों देशों में ज्यादा शक्तिशाली कौन है? 
आइये इस Tech DNA ke Video में यही जानने की कोशिश करते हैं कि इन दोनों देशों की सैन्य ताकत में किसका पलड़ा भारी है?

थल सेना में किसका पलड़ा भारी है?


इतना तो आप जानते हैं कि लड़ाई में क्रूरता और लड़ाई की कला आना बहुत ही जरूरी है. सब को पता  है कि चीन का सैनिक मौका पड़ने पर कुंगफू का इस्तेमाल कर सकता है, और बिना बन्दूक के लड़ सकता है, और किसी भी वस्तु को हथियार की तरह प्रयोग कर सकता है.
इसके अलावा चीनी सैनिक खाने के लिए अंडे मांस या अन्य पौष्टिक आहारों का इंतजार न करके जानवर, पशु-पक्षी, सांप-बिच्छू को खाकर अपना पेट भर सकते हैं और तो और वे मरे हुए सैनिकों को भी कच्चा खा सकते हैं. चीन के सैनिक ठन्डे इलाकों में भी आसानी से रह सकते है. चीनी सेना में मंगोल सैनिक हैं, जो दुनिया के सबसे क्रूर और खूंखार सैनिक हैं. भारत के ऊपर जब नादिरशाह और चंगेश खान ने आक्रमण किया था तो उनकी मुख्य ताकत उनकी सेना के मंगोल सैनिक ही थे.
दूसरी ओर यह बात भी किसी से नही छुपी है कि भारत के सैनिकों को पृथ्वी पर लड़ी जाने वाली लडाइयों के लिए दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में गिना जाता है. “यह कहना गलत नही होगा कि यदि किसी सेना में अगर अंग्रेज अफसर हो, अमेरिकी हथियार हों और हिंदुस्तानी सैनिक हों तो उस सेना को युद्ध के मैदान में हराना नामुमिकन होगा.”
अब यह सवाल उठता है कि क्या भारत के सैनिक इतने क्रूर हैं और इतने अधिक तैयार हैं कि वे कुछ भी खाकर युद्ध में डटे रहेंगे. इसका उत्तर होगा नही. लेकन फिर भी भारत से जीतना चीन के लिए आसान नही होगा जानिए क्यों ?
INS विक्रमादित्य युद्धपोत
INS विक्रमादित्य युद्धपोत, पूर्व सोवियत विमान वाहक एडमिरल गोर्शकोव का नया नाम है. इस विमान वाहक पोत को 2013 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था. इसकी लंबाई लगभग तीन फुटबॉल मैदानों तथा ऊंचाई लगभग 22 मंजिली इमारत के बराबर है.
इस पर कामोव-31, कामोव-28, हेलीकॉप्टर, मिग-29-K लड़ाकू विमान, ध्रुव और चेतक हेलिकॉप्टरों सहित तीस विमान और एंटी मिसाइल प्रणालियां तैनात होंगी, जिसके परिणामस्वरूप इसके एक हजार किलोमीटर के दायरे में दुश्मन के लड़ाकू विमान और युद्धपोत नहीं फटक सकेंगे. 

विक्रमादित्य में 1,600 लोगों को ले जाने की क्षमता है और यह 32 नॉट (59 किमी/घंटा) की रफ्तार से गश्त करता है और 100 दिन तक लगातार समुद्र में रह सकता है.

INS चक्र-2
आईएनएस चक्र-2, भारतीय नौसेना की नाभिकीय ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी है. भारत ने इसे रूस से एक अरब डॉलर के सौदे पर लिया है. इसे 4 अप्रैल 2012 को विशाखापत्तनम में भारतीय सेना को सुपुर्द किया गया था. भारतीय नौसेना में शामिल यह पनडुब्बी परमाणु अटैक करने में सक्षम एक मात्र पनडुब्बी है.
यह पलक झपकते ही चीन और पाकिस्तान पर परमाणु हमला कर सकती है. यह पनडुब्बी 600 मीटर तक पानी के अंदर रह सकती है. यह तीन महीने लगातार समुद्र के भीतर रह सकती है. समुद्र में इसकी रफ्तार 43 किमी प्रति घंटा है.

भारत के सामने क्या चुनौतियाँ होंगी?
चीन के साथ की लड़ाई मैंदान की लड़ाई नहीं होगी, यह पहाड़ों की लड़ाई होगी, और पहाड़ों की लड़ाई में तोप और गोलों की जगह पैदल सेना का ज्यादा महत्त्व होता है. यहाँ पर चीन की सेना के पास एडवांटेज होगा क्योंकि वे हमसे ज्यादा ऊंचे स्थान पर बैठे होंगे.
भारत की लड़ाई चीन की सेना से कई मोर्चों पर होगी. यह लड़ाई पाकिस्तानी कश्मीर से फिर लद्दाख फिर तिब्बत, नेपाल, सिक्किम, भूटान, से होती हुई अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा, मणिपुर और बर्मा तक फैली होगी. यहाँ पर यह बात ध्यान में रखनी है कि बर्मा और म्यांमार दोनों ही चीन की गोद में बैठे हैं और भारत के खिलाफ लड़ाई में चीन का साथ देंगे.
तो क्या भारत के पास इतनी पैदल सेना (infantry) है की वह पूरे हिमालय क्षेत्र में उसे लगा सके और उसके पास गोला बारूद, तोपें, बंदूकें और खाने पीने का सामान इत्यादि पहुंचा सके. ध्यान रहे कि भारत के पास कुल एक्टिव सेना 13.25 लाख है. इसके विपरीत चीन की कुल आर्मी 23.35 लाख है और उसने पूरे हिमालय में अपनी सेना को लगा रखा है, और अपने सैनिकों को पूरी तरह तैयार कर रखा है.

इतना ही नही यदि चीन से लड़ाई शुरू होती है तो पाकिस्तान, भारत के खिलाफ एक अलग मोर्चा खोल देगा. सबसे खतरनाक हालात भारत के लिए तब पैदा होंगे जब नक्सली इस मौके का फायदा उठाकर लाल गलियारा स्थापित करने की कोशिश करेंगे. चीन और पाकिस्तान दोनों ही भारत के नक्सलियों को हथियार उपलब्ध कराते हैं. हाल में लातेहार में हुए नक्सली हमले में पाक निर्मित हथियार मिले थे जिससे नक्सली को पाकिस्तानी मदद की पुष्टि होती है.

भारतीय वायुसेना का आकलन  (Indian Air force Analysis)

अब अगर भारत की वायुसेना की ताकत की बात की जाये तो फिलहाल हमें चीन पर भी बढ़त हासिल है. चीन के विमान ऊंचाई वाले एयरबेस से उड़ान भरेंगे, वो कम ईंधन और हथियार लेकर ही उड़ सकेंगे. चीन के पास हवा में ईंधन भरने वाले विमान भी नहीं हैं, इसलिए चीन की वायुसेना के मुकाबले भारत की स्थिति बेहतर है.
हालाँकि इस समय भारतीय वायुसेना जिन लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर रही है, उनमें से आधे अगले 9 सालों में रिटायर हो जाएंगे. इस समय वायुसेना के पास 35 फाइटर स्क्वाड्रन हैं. जबकि भारत सरकार ने 42 स्क्वाड्रन की मंजूरी दी हुई है जबकि जरूरत 45 स्क्वाड्रन की है.

भारत की वायुसेना चीन से बेहतर कैसे है? (How Indian Air force is better than China)
मिराज-2000, मिग-29, C-17 ग्लोबमास्टर मालवाहक विमान और लॉकहीड मार्टिन कंपनी का बनाया C-130J सुपर हरक्यूलिस मालवाहक विमानों के अलावा हिंदुस्तान पास सुखोई-30 जैसे लड़ाकू विमान हैं, जो तीन हजार किलोमीटर दूर तक मार कर सकते हैं और लगातार पौने चार घंटे तक हवा में रह सकते हैं.

इसके अलावा अब भारत के पास फ़्रांस का राफेल जेट विमान भी आने ही वाला है जो कि दक्षिण एशिया में युद्ध का नक्शा ही बदल देगा.
भारत को अमेरिका से 4 चिनूक हेलिकॉप्टर पहले ही मिल चुके हैं. चिनूक हेलीकॉप्टर से भारतीय सेना को हथियार आसानी से मुहैया करवाए जा सकेंगे और भारतीय सेना अपनी टुकड़ियों को दुर्गम और ऊंचे इलाकों में जल्दी पहुंचा सकेगी. यह हेलीकॉप्टर बहुत तेजी से उड़ान भरने में सक्षम है, यही वजह है कि यह बेहद घनी पहाड़ियों में भी सफ़लतापूर्वक काम कर सकता है.
भारत के पास ब्रह्मोस जैसी जबरदस्त मिसाइल भी है. इसकी रफ्तार 952 मीटर प्रति सेकेंड की है. इसके आगे दुश्मन के रडार भी फेल हो जाते हैं और अगर 30 किलोमीटर के दायरे में दुश्मन का रडार इनका पता भी लगा लेता है तो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें रोकने के लिए 30 सेकेंड से कम का ही समय होता है.
इस प्रकार सभी आकलन करने के बाद यह कहा जा सकता है कि यदि कुछ मोर्चों पर चीन का पलड़ा भारी है तो कुछ पर भारत का.
एक कडवी सच्चाई यह है कि ये दोनों देश पूरे विश्व के 2 चमकते हुए सितारे हैं इन दोनों की अर्थव्यवस्था पर ही विश्व की अर्थव्यवस्था टिकी हुई है. इसलिए विश्व के अन्य विकसित देश इन दोनों देशों के बीच युद्ध की किसी भी संभावना को ख़त्म करने में कोई कसर नही छोड़ेंगे जो कि विश्व में शांति और विकास के लिए सबसे जरूरी है. हमें उम्मीद है कि इन दोनों देशों के लीडर आपसी मुद्दों को बुलेट की नोक से नही बल्कि कलम की नोक से सुलझा लेंगे.

दोस्तों भारत और चीन की लड़ाई अगर होती है तो आप हमे कमेंट्स बॉक्स मे बताए की आप की राय मे किस का पलड़ा भारी रहेगा |
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Satish Kumar

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