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मांसपेशियों में दर्द (Muscle Pain)
मांसपेशियों में दर्द (Muscle Pain)
आज की व्यस्त और भाग-दौड़ भरी जिंदगी में मांसपेशियों में दर्द (Muscle Pain) एक आम समस्या है। युवाओं में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह दर्द कुछ लोगों को कभी-कभी सताता है, जबकि ज्यादातर लोग इससे स्थायी रूप से परेशान रहते हैं। मांसपेशियों का दर्द किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है।

मांसपेशियों का दर्द (About Muscle Pain in Hindi)

मांसपेशियों में खिंचाव या झटका लगने से वो सिकुड़ जाती हैं, जिससे उनमें रक्त प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता और दर्द महसूस होता है। सही तरीके से दर्द वाली जगह पर मसाज करने से रक्त प्रवाह में सुधार होता है और दर्द से राहत मिलती है। कोई चीज पकड़ते या उठाते हुए, सीढ़ियां चढ़ते हुए या फिर तेज भागने से मांसपेशियां खिंच सकती हैं जो दर्द का कारण बनती हैं। मांसपेशियों का ये खिंचाव हाथ, पैर, जोड़ों या पीठ में कभी भी हो सकता है। 

इस उम्र में रहें सावधान (Risk of Muscle Pain)

वैसे तो मांसपेशियों का दर्द किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन तीस से चालीस वर्ष की आयुवर्ग के युवा इसकी चपेट में तेजी से आ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है कि काम की वजह से उन्हें बार-बार उठना, बैठना, झुकना या सामान उतारना और रखना होता है। 

मांसपेशियों में दर्द के लक्षण

शारीरिक कमजोरी खास कर मांसपेशियों की, नींद न आना

मांसपेशियों में दर्द का कारण (Causes of Muscle Pain)

अनियमित जीवन शैली और गलत खान-पान इस समस्या का सबसे बड़ा कारण है।
शारीरिक परिश्रम या कठोर श्रम के कारण तनाव, थकान या मांसपेशियों में चोट, इन्फ्लूएंजा, लाइम डिसीज, मलेरिया, डेंगू, मांसपेशी का फोड़ा तथा संक्रमण की वजह से भी दर्द हो सकता है।
इलेक्ट्रोलाइट का असंतुलन जैसे-पोटैशियम या कैल्शियम की मात्रा बहुत कम होना भी इसका कारण हो सकता है।

सामान्य उपचार

मांसपेशियों में दर्द होने पर सेंक और मालिश से आराम मिलता है। अगर इससे भी आराम ना मिले तो निम्न उपाय अपनाने चाहिए: 

मांसपेशियों में दर्द का इलाज (Treatment of Muscle Pain)

  • मांसपेशियों में दर्द हो तो थोड़ी चहलकदमी करें ।
  • गहरी सांस लें और दोनों हाथों को सीधा ऊपर उठाएं। यह प्रक्रिया कई बार दोहराएं। ऐसा करने से मांसपेशियों में रक्त प्रवाह में सुधार होता है, जिससे आप रिलैक्स महसूस करेंगे।
  • भोजन में दूध, ताज़ा फल, सब्जियां आदि पौष्टिक भोजन लेना चाहिए।
  • एक-दो घंटे तक कार्य करने के बाद थोड़ा आराम करें तथा टहलें।
  • एक ही स्थिति में लंबे समय तक बैठकर काम न करें।
  • मोटापे को नियंत्रित करें।
  • दिनचर्या सुधारें और दवाओं के उपयोग की जगह व्यायाम करें।
  • शराब तथा सिगरेट के सेवन से बचें। 
  • अत्यधिक तनाव और मांसपेशियों पर अधिक जोर डालने वाले कार्य न करें। 
  • फास्ट फूड का सेवन कम से कम करें।
  • जिम में प्रशिक्षित ट्रेनर की देख रेख में ही व्यायाम करें।
  • कोल्ड ड्रिंक का कम से कम सेवन करें, यह आपके शरीर के कैल्शियम को ठीक से पचने नहीं देता है।
  • खूब पानी पिएं, कैफीन उत्पादों और अल्कोहल के सेवन से बचें, क्योंकि इससे डिहाइड्रेशन (Dehydration) हो सकता है।
  • भारी-भरकम शारीरिक गतिविधियों के बाद मांसपेशियों को प्रोटीन की जरूरत होती है, ताकि शरीर में एनर्जी का स्तर बना रहे। ऐसे में प्रोटीनयुक्त नेचुरल खाद्य उत्पादों का सेवन करना चाहिए।

मांसपेशियों के दर्द को दूर करने के घरेलू उपाय (Home Remedies For Muscle Pain)

जब कभी भी हम क्षमता से अधिक काम करते हैं या ज्यादा आलस करते हैं, दोनों ही परिस्थितियों में मांसपेशियों में दर्द (muscle pain) हो सकता है। इसके अलावा व्यायाम गलत तरीके से करने या व्यायाम के शुरूआत में, ब्लड फ्लो से संबंधित समस्या होने, कैल्शियम (Calcium), मैग्नीशियम (Magnesium) और पोटेशियम (Potassium) की कमी होने, डिहाइड्रेशन आदि के कारण भी मांसपेशियों में तनाव और खिंचाव संभव है।

मसलपेन लिगमेन्ट (Ligament, ऊतक जो कि दो या दो से ज्यादा हड्डियों को आपस में जोड़ते हैं) की चोट है। मांसपेशियों में दर्द तब होता है जब इन ऊतकों पर ज्यादा जोर पड़ता है। यहां हम आपको कुछ घरेलू नुस्खों से मांसपेशियों के दर्द का इलाज बताएंगे लेकिन असहनीय हो और ज्यादा पीड़ा हो रही हो तो डॉक्टर के पास जाना ही बेहतर उपाय है। कुछ घरेलू नुस्खे निम्न हैं- 

1. एप्सम सॉल्ट (Epsom salt)

गर्म पानी की एक बाल्टी में या टब में एक कप एप्सम नमक डाल कर प्रभावित स्थान को इस पानी में तकरीबन 15 मिनट के लिए डुबा कर रखें। एक हफ्ते में इस प्रक्रिया को दो से तीन बार कर सकते हैं। लेकिन हृदय से संबंधित, शुगर या उच्च रक्तचाप (high blood pressure) की समस्या से पीड़ित व्यक्ति इस विधि को न करें।

2. गर्म और ठंडा सेक (Hot and cold fomentation)

गर्म पानी से नहाने से मांसपेशियों की सिकाई होती है और उन्हें आराम भी मिलता है। इस तरह से मांसपेशियों की अकड़न भी दूर होती है। लेकिन इसके उलट यदि सूजन महसूस हो रही हो तो बर्फ के टुकड़ों को पतले कपड़े में लपेटकर उससे सिकाई करनी चाहिए। 

3. मैग्नीशियम युक्त खाना (Magnesium rich food)

मैग्नीशियम की कम मात्रा से भी मांसपेशियों में दर्द और खिंचाव हो सकता है। इसके लिए खाने में कद्दू के बीज (pumpkin seeds), काली बीन्स (black beans), सूरजमुखी के बीज (sunflower seeds), बादाम और काजू को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। जिससे शरीर को प्रचुर मात्रा में मैग्नीशियम मिल सके।

4. सेब का सिरका (Apple cider vinegar)

सेब के सिरके की कुछ मात्रा एक गिलास पानी में मिलाकर पीने से मसल्स के दर्द से राहत मिलती है। इसके अलावा यदि इस तरह पीना कठिन लगे तो एक गिलास पानी में दो चम्मच सिरका, एक चम्मच शहद और कुछ पत्तियां पुदीने की मिलाकर भी पी जा सकती हैं।

5. ऑयल (Oil)

मसल पेन में राहत के लिए कैमोमाइल, पेपरमिंट, लेवेंडर आदि तेल में एक या दो चम्मच, नारियल या ऑलिव ऑयल मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाना चाहिए।

6. चेरी जूस (Cherry juice)

मसल पेन से राहत के लिए चेरी जूस भी पीना चाहिए। चेरी जूस पीने से मसल्स का खिंचाव कम होता है साथ ही यह मांसपेशियों को राहत भी देता है।

7. मसाज (Massage)

मसाज करने से शरीर का रक्तसंचार बेहतर होता है जो कि दर्द को तेजी से ठीक करने में मदद करता है। यदि मसाज करने के लिए अच्छे तेलों का प्रयोग किया जाए तो असर दोगुना हो जाता है।

8. मिर्च (Chilli)

मिर्च में मौजूद कैप्सेसिन (capsaicin) भी दर्द की खास दवा है। बाजार में मिर्च से तैयार कई तरह की दर्द निवारक क्रीम मिलती हैं, लेकिन इन्हें आप घर भी तैयार कर सकते हैं। इसके लिए नारियल या जैतून के तेल को गरम करके इसमें एक बड़ा चम्मच लाल मिर्च मिलाकर इसे ठंडा करें। इसके बाद इसमें एलोवेरा जेल मिलाएं। इस तरह से तैयार उत्पाद को यदि प्रभावित स्थान पर लगाकर हल्के हाथ से मालिश की जाए तो बेहद आराम मिलता है।

9. आराम (Rest)

कई बार कुछ न करके सिर्फ आराम करना भी शरीर को बहुत लाभ दे सकता है। यदि शरीर में अकड़न महसूस हो तो कम से कम दो दिन आपको शरीर को पूरी तरह आराम देना चाहिए। इससे शरीर हल्का महसूस करता है और तनाव कम होता है जिसका सीधा असर मांसपेशियों पर भी पड़ता है।

थकान (Fatigue)
थकान (Fatigue)
थकान एक सामान्य अवस्था है, अधिक शारीरिक या मानसिक परिश्रम करने से शरीर में थकान आ जाती है और शरीर सुस्त हो जाता है। थकान, कमजोरी से अलग है। आराम करने पर थकान चली जाती है जबकि कमजोरी बनी रह सकती है।

क्या है थकान (About Fatigue in Hindi)

थकान की वजह सिर्फ कमजोरी हो ऐसा जरूरी नहीं है। हमेशा होने वाली थकान (Thakan) गलत जीवनशैली से लेकर कई रोगों का संकेत हो सकती है।

अगर आप पूरे दिन थकान महसूस करते हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। इसका बुनियादी अर्थ है कि शारीरिक या मानसिक स्तर पर कहीं कुछ ठीक नहीं है।

थकान के लक्षण (Fatigue Symptoms)

  • कमजोरी महसूस होना
  • किसी काम में मन न लगना
  • नकरात्मक सोच का बढ़ना
  • हर समय नींद आना
अधिक शारीरिक परीश्रम करने पर तो थकान हो सकती है लेकिन अगर थकान लगातार हो तो यह एक गंभीर मुद्दा हो सकता है। जानिएं किन हालातों में अधिक थकान होती है। 

थकान के कारण (Causes of Fatigue in Hindi) 

  • शारीरिक स्तर पर इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे एनीमिया, थाइराइड, शुगर और कोलेस्ट्रॉल का बड़ा हुआ स्तर।
  • शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cell) की कमी से एनीमिया की दिक्कत होती है, जिसका एक प्रमुख लक्षण है थकान। आजकल महिलाओं में यह समस्या अधिक पाई जाती है जिससे बचाव के लिए आयरन (Iron) से भरपूर डाइट फायदेमंद होती है।
  • हाइपोथायराइड और मधुमेह (Diabetes) की स्थिति में शरीर में मेटाबॉलिज्म (Metabolism) सही तरीके से काम नहीं करता जिसके कारण कोशिकाओं को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता है, इसलिए शरीर की ऊर्जा तेजी से खत्म हो जाती है और आप जल्दी थक जाते हैं।
  • यह हल्के बुखार की वजह से भी हो सकता है जो इंफेक्शन का नतीजा होता है।
  • बहुत ज्यादा शुगर या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स जैसे चावल, मैदा आदि खाना, लम्बे अंतराल पर खाना खाना और सही तरह का भोजन न खाने से भी आदमी थकान महसूस करता है।
  • मानसिक स्तर पर होने वाली थकान का अर्थ है कि आप तनावग्रस्त हैं।
  • अवसाद (Depression) की स्थिति में भी बहुत अधिक थकान, सिरदर्द और कमजोरी महसूस होती है। अवसाद की वजह से थकावट होना आज की जीवनशैली में बहुत सामान्य है।
  • अगर आप दो-तीन हफ्तों तक हर समय थकान महसूस करते हैं तो मनोचिकित्सक से परामर्श उचित होगा।
  • दिन में कई बार चाय-कॉफी का सेवन करने वाले लोगों को थकान जल्दी होती है। कैफीन वाली चीजों के अधिक सेवन से ब्लड प्रेशर और धड़कन की गति तेज होती है जिससे थकान जल्दी होती है।
  • गर्मियों में शरीर में पानी की कमी यानि डिहाइड्रेशन भी आपको जल्दी थका सकती है। इसलिए शरीर में पानी की कमी न होने दें।
  • आजकल कंपनियों में रात की शिफ्ट या अलग-अलग शिफ्ट में काम करने का चलन बढ़ गया है। कई बार इससे बॉडी क्लॉक पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और हर समय थकावट महसूस होती है। इससे बचाव के लिए दिन में सोने का एक नियत समय तय करें जिससे आपका शरीर अभ्यस्त हो सके और सोकर उठने के बाद आप तरोताजा महसूस करें।
  • खान-पान और अपनी जीवनशैली पर ध्यान देने की खास जरूरत है। जरूरी नहीं कि हर बार थकान का कारण कोई शारीरिक समस्या हो, कई बार थकान का कारण मानसिक भी होता है।

सामान्य उपचार

थकान दूर भगाने का सबसे बेहतर उपाय होता है आराम करना। इसके साथ कुछ अन्य उपाय अपना कर भी आप थकान को दूर भगा सकते हैं। यह उपाय निम्न हैं: 

थकान को कैसे भगाएं दूर (Treatment of Fatigue in Hindi)

  • रात में अच्छी व भरपूर नींद लेना, थकान को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है। 7-8 घंटे की नींद जरूर लें ताकि अगले दिन के लिए आपको पर्याप्त ऊर्जा मिले।
  • जब भी थकान महसूस हो तो 15-20 मिनट की झपकी जरूर लें। नींद पूरी न होने से वजन भी बढ़ता है और थकान भी जल्दी होती है। 
  • थकान अधिक होने पर हाथ पांव ढीले छोड़कर, आंखें बंद कर पलंग पर लेट जाइए। ऐसे में मांसपेशियों का तनाव दूर होता है।
  • हँसी वास्तव में सबसे अच्छी दवा है। पुराने दोस्तों से मुलाकात करें, हास्य फिल्में देखें...कोई भी चीज़- जिससे आप खुलकर हँस सकें। जिन लोगों को प्यार करते हैं उनके साथ वक्त गुजारें।
  • मन को अच्छा लगने वाला संगीत सुनें, इससे तनाव दूर होता है।
  • दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी या कोई भी तरल पदार्थ पीते रहें। पानी शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालकर शारीरिक प्रणाली में नई ऊर्जा भरता है। शर्बत, फलों का रस, छाछ व नारियल पानी आदि पीना चाहिए।  
  • दिन भर के सतत ऊर्जा प्रवाह के लिए बहुत सारी हरी सब्जियाँ खायें। खाने में फल, नट्स, अंडा और फिश भी शामिल करें। 
  • ज्यादा कॉफी और चाय न पियें, भले ही आपको उनसे राहत मिलती है। यह सिर्फ अस्थायी राहत होती है। 
  • सक्रिय रहें, आलस छोड़ें।
  • नियमित कसरत करें। 

थकावट के लिए घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies For Fatigue)

थकावट-आलस्य से आप जिंदगी से निराश महसूस करते हैं। हमेशा गुस्से में हारे हुए इंसान की तरह व्यवहार करते है। आप भी चाहते हैं कि एक अच्छे नस्ल के घोड़े की तरह रेस लगाएं, लेकिन आपको महसूस होता है कि आपके पांव कीचड़ में  फंसे हुए हैं। आप इच्छाशक्ति भी करते हैं लेकिन वो काम नहीं करता। मानसिक और शारीरिक थकावट वैसे तो सामान्य बीमारी है , मगर कुछ गंभीर बीमारी में भी ऐसे लक्षण दिखाई पड़ते हैं।

थकावट कई कारणों से होती है। मुख्य तौर पर खराब जीवनशैली, नींद में कमी, कुपोषण, फ्लू, मोटापा, एलर्जी, एनीमिया, अल्कोहल का सेवन, थायराइड, हार्ट की बीमारी समेत कैंसर, डायबिटीज और एडस जैसी गंभीर बीमारी में भी थकावट का अनुभव होता है। 

थकावट का कोई खास चिकित्सकीय इलाज नहीं है बस आपको अपने जीवनशैली में थोड़ा बदलाव लाना होगा। खाने की आदत, पीने की आदत में बदलाव के साथ व्यायाम-योग और ध्यान को अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा। हमेशा सकारात्मक सोचना होगा।

थकावट को भगाने के क्विक घरेलू इलाज (Quick Home remedies for fatigue) 

पिपरमिंट तेल के कुछ बूंदों को टिसू पेपर या रुमाल पर डालकर नाक के पास रखें और तेज सांस ले। काफी तरोताजा महसूस करेंगे। अगर आपके पास थोड़ा समय है तो नहाने के टब में कुछ बुंदे पिपरमिंट तेल के और कुछ बूंदे मेंहदी के तेल के डाल कर स्नान करें। काफी स्फूर्ति मिलेगी।

सुबह-शाम नियमित योग करें। खासकर पीठ के बल लेट कर पैर को सिर से उंचा करना और फिर उसे धीरे-धीरे नीचे करना। घुटनों को नाक में सटाना। ये कुछ ऐसे व्यायाम हैं जिससे आप तरोताजा महसूस करते हैं। योग में भ्रामरी भी काफी फायदेमंद रहता है।

सुबह बेहतर और पोषण से भरा नाश्ता करें और दिन भर में हल्का भोजन और शाम को हेल्दी स्नैक्स लेते रहें।  यह दिन में दो टाइम भरपेट और भारी भोजन खाने से ज्यादा बेहतर है। प्रयास करें कि आप अपने भोजन के साइज को 300 कैलोरी पर लिमिट कर इसका रुटीन बना लें। इससे आपका ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रहेगा और थकावट भी नहीं होगी।

भोजन में हमेशा हाइ-फाइबर वाले फूड्स ही खाएं। क्योंकि इसमें कंपलेक्स कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा पाई जाती है। जैसे कि समूचे-साबुत अनाज चावल और साबूत गेंहू की रोटी, दाल- दलिया और सब्जी-सलाद। इससे ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रहता है और थकावट नहीं होती है।
अधिक वसा वाले भोजन खाना कम करें। इससे मोटापा बढ़ती है और शरीर में हमेशा थकावट महसूस होती है।

बिना छीले हुए आलू के स्लाइस काट कर इसे रात भर पानी में भींगने छोड़ दें। सुबह इस जूस को पी लें। इसमें काफी मात्रा में पोटाशियम रहती है जो शरीर में मिनरल्स की कमी को दूर करती है। मिनरल्स के सेवन से शरीर की मांसपेशिया काफी सक्रिय रहती है और आप थकावट नहीं महसूस करते हैं।

दिन में एक बार पालक खाना थकावट को भगाने की सबसे पुराना घरेलू भलाज है। पालक में पोटाशियम के साथ आइरन और विटामिन बी ग्रुप के कई विटामिन पाए जाते हैं, जो शरीर को उर्जा और स्फूर्ति देती है।

चैन की नींद सेहत के लिए सबसे जरुरी है। मानसिक और शारीरिक थकावट की सबसे बड़ी वजह नींद में कमी ही है। कम से कम एक एक मनुष्य को आठ घंटा बेहतर स्वास्थ्य के लिए सोना चाहिए। नींद में कमी है या गड़बड़ी है तो ध्यान-योग करें और हमेशा सकारात्मक सोचें। योग में एक आसन है- शवासन, उसे आजमाएं। काफी फायदा होगा।

सप्लीमेंट के तौर पर मानसिक औऱ शारीरिक थकावट को भगाने के लिए गिनसेंग, मैग्नीशियम और गिन्कगो भी ले सकते हैं।

थकावट से लड़ने के लिए 10 टॉप फूड्स (10 Top Foods to fight fatigue)

  • केला
  • ग्रीन टी
  • सीताफल के बीज
  • ओटमील
  • योगर्ट
  • तरबूज
  • अखरोट
  • लाल शिमला मिर्च
  • हरी बींस
  • पालक

सीने में दर्द ( Chest Pain) की बात आते ही हम दिल के दौरे (Heart Attack) की बात सोचने लगते हैं, मगर सीने में दर्द कई कारणों से हो सकता है। फेफड़े, मांसपेशियाँ, पसली, या नसों में भी कोई समस्या उत्पन्न होने पर सीने में दर्द होता है। किसी-किसी परिस्थिति में यह दर्द भयानक रूप धारण कर लेता है जो मृत्यु तक का कारण बन जाता है। लेकिन एक बात ध्यान में रखें कि खुद ही रोग की पहचान न करें और सीने में दर्द को नजरअंदाज न करें, तुरन्त चिकित्सक के पास जायें। 
सीने में दर्द (Chest Pain)
सीने में दर्द (Chest Pain)

सीने में दर्द के लक्षण

सीने का दर्द स्वयं कई रोगों का लक्षण है।

सीने में दर्द के कारण (Chest Pain Causes)

एनजाइना (Angina) : हृदय (Heart) के कारण जब सीने में दर्द होता है तब चिकित्सा शास्त्र के अनुसार इसको एनजाइना कहते हैं। एनजाइना से ग्रस्त रोगी को सीने में दर्द कुछ ही देर तक होता है या परिस्थिति बिगड़ जाने पर दर्द की अवधि बढ़ जाती है। साधारणतः यह दर्द कंधे, बाँह, पीठ, पेट के ऊपरी भाग में होता है। एनजाइना में धमनियों के सिकुड़ जाने के कारण रक्त का हृदय में आवागमन बाधित हो जाता है। जब धमनियों में रक्त का थक्का जमने लगता है तब साँस लेने में मुश्किल होने लगती है और सीने में दर्द शुरू हो जाता है। अगर परिस्थिति को संभाला नहीं गया तो मृत्यु तक हो सकती है। एनजाइना का दर्द साधारणतः आनुवंशिकता के कारण, मधुमेह, हाई कोलेस्ट्रॉल, पहले से हृदय संबंधित रोग से ग्रस्त होने के कारण होता है।

उच्च रक्तचाप: जो धमनियाँ रक्त को फेफड़ों तक ले जाती है उसमें जब रक्त का चाप बढ़ जाता है तब सीने में दर्द होता है और इस अवस्था को उच्च रक्तचाप (Pulmonary Hypertension) कहते हैं। 

एसिडिटी (Acidity): यह साधारणत गैस्ट्रो इसोफेगल रिफ्ल्क्स डिज़ीज़ (गर्ड) (भाटा रोग) के कारण होता है।

फेफड़ों में रोग (Lung Disease) : जब रक्त धमनियों में थक्का जमने लगता है तब फेफड़ों के टिशु या ऊतकों में रक्त का प्रवाह रुकने लगता है, ऐसा होने से बेचैनी होने लगती है और साँस लेने में मुश्किल होता है, जो बाद में दर्द का कारण बनता है। 

डर के कारण (Fear Psycosis): कभी-कभी दिल में दर्द अत्यधिक डर, अचानक कोई सदमा, दिल की धड़कन के बढ़ने, अत्यधिक पसीना और साँस में तकलीफ के कारण भी होता है।

तनाव: तनाव के कारण दिल की धड़कन तेज हो जाती है, साँस लेने में तकलीफ होने लगती है और रक्त चाप बढ़ जाने के कारण भी हृदय में रक्त संचार की गति को नुकसान पहुँचता है, इन सब कारणों से भी सीने में दर्द होता है।

सामान्य उपचार

सीने में दर्द (Chest Pain) का सीधा संबंध हमारे अनियोजित और अस्वस्थ खान-पान से है। खान पान में सुधार के साथ साथ हमें नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए।
जो व्यायाम शरीर के लिए उपयुक्त हो उस व्यायाम को जरूर करें, जैसे- तेज कदमों से चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना, बैडमिंटन या टेनिस खेलना आदि।
आहार में फाइबर की मात्रा को बढ़ाएं और कैलोरी की मात्रा को कम करें।
खाने में नमक की मात्रा को कम करें और अगर हो सके तो बिलकुल छोड़ दें।
धूम्रपान हृदय संबंधी बीमारी को बढ़ाने में अहम् भूमिका निभाता है। अतः इसको छोड़ना फायदेमंद है।

सीने में दर्द के लिए घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies For Chest Pain)

सीने में दर्द (Chest Pain) हमेशा हार्ट अटैक का मामला नहीं होता। सीने या छाती में दर्द के और भी कई कारण हो सकते हैं। एसीडिटी, सर्दी, कफ, तनाव, गैस, बदहजमी और धूम्रपान से भी छाती में दर्द होती है। वैसे जब कभी भी छाती में दर्द हो तो तत्काल ड़ॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ताकि हार्ट अटैक की शंका को दूर किया जा सके।

हार्ट अटैक में छाती की दर्द को एंजाइना कहते हैं जो कोरोनरी आर्टरी में रक्त के प्रवाह की प्रक्रिया बाधित होने या बलगम की वजह से उत्पन्न अवरोध के कारण होता है। बहरहाल छाती के दर्द को कभी भी नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए भले ही वह गैस या एसिडिटी का दर्द ही क्यों न हो। अगर आप यह पता लगा लेते हैं कि दर्द हार्ट अटैक की नहीं बल्कि अन्य वजह से है तो इसके घरेलू इलाज आप कर सकते हैं। 

छाती दर्द के घरेलू इलाज (Home Remedies for Chest Pain)

लहसुन (Garlic) 

लहसुन को वंडर मेडिसीन कहा गया है जो हर तरह की बिमारियों में रामबाण का काम करता है। सेहत के लिए तो रामबाण है ही हार्ट के लिए तो सबसे ज्यादा लाभकारी है। लहसुन में कई तरह के विटामिन, मिनरल्स-कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, थियामिन, राइबोफ्लाविन, नियासिन और विटामिन सी का खजाना है। इसके अलावा इसमें सल्फर, आयोडीन और क्लोरीन की मात्रा भी पाई जाती है।

लहसुन के एक या दो कली अगर आप रोज सुबह खाली पेट खा रहे हैं तो यह न सिर्फ आपके कोलेस्ट्रोल को कम करेगा बल्कि हृदय की धमनी के दीवार पर फैट की परत को बनने से भी रोकेगा। नतीजा आपके हार्ट में ऑक्सीजन और रक्त का प्रवाह सुचारू रहेगा। अगर छाती में दर्द की शिकायत गैस से भी है तो यह काफी कारगर होती है। लहसून का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है। कच्चा लहसून खाना ज्यादा असरदार होता है।

अदरक (Ginger)

अदरक के कई औषधीय गुण हैं। अगर आपको गैस या एसीडिटी से हार्टबर्न हो रहा है, छाती में दर्द हो रहा हो तो अदऱक की चाय आजमा सकते हैं। यह छाती के दर्द के साथ , कफ, खांसी समेत कई बिमारियों के इलाज में काम आता है।

हल्दी (Turmeric)

हल्दी में दर्द निवारक गुण होते हैं। एंटी इंफ्लामेट्री दवा के रुप में इसे आयुर्वेद और चाइनीज मेडिसीन में भी इस्तेमाल किया जाता है। हल्दी में पाए जाने वाले खास कंपाउड Curcumin में दर्द को चूसने वाले गुण होते हैं। यह दिल की सेहत के लिए भी गुणकारी है। हल्दी को सबसे ज्यादा लोग गर्म दूध में डालकर पीते हैं। दर्द वाले स्थान पर हल्दी का लेप भी लगाया जाता है।

तुलसी (Holy Basil)

तुलसी में सिर्फ एंटी बैक्टीरियल गुण ही नहीं बल्कि एंटी इंफ्लामेट्री गुण भी होते हैं। इसके अलावा तुलसी में ऐसे कई कंपाउड पाए जाते हैं जो दिल के सेहत के लिए भी गुणकारी है। तुलसी में Eugenol पाया जाता है जो दिल के सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। तुलसी के पत्ते लोग चबा कर खाते हैं और कई लोग चाय और काढ़ा बना कर पीते हैं। अगर छाती में दर्द है तो तुलसी-अदरक का काढ़ा बना कर उसमें शहद की बूंदे डाल कर पी लीजिए काफी फायदा करेगा।

और भी हैं कई घरेलू इलाज (Some more home remedies)

गैस से हुए छाती दर्द में अल्फा-अल्फा (Alfa-alfa Sprouts) का जूस काफी फायदेमंद है।
अरहूल के पत्ते का काढ़ा भी छाती के दर्द में काफी काम करता है।
अनार के जूस से भी छाती दर्द कम होता है।
ओमेगा 3 फैटी एसिड मछली के तेल और सरसों के तेल में पाया जाता है, इसके सेवन करने से हार्ट की बीमारी कम होती है।

अखरोट का सेवन करें।

मुलैठी के जड़ का सेवन करें छाती के दर्द में काफी काम करता है।

मानव शरीर अपनी आवश्यकता अनुसार ही नई कोशिकाओं का निर्माण करता है। कुछ कोशिकाओं का एक ऐसा समूह होता है जो कि अनियंत्रित रूप से बढ़ता है और विकसित होता है। उनकी बढ़त नियंत्रित नहीं होती है। इन कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाएं कहते हैं। 

ये कोशिकाएं दो प्रकार की होती है जिसमें पहला बिनाइन ट्यूमर (Benign Tumour) जिसे कैंसर रहित कहा जाता है और दूसरा मेलिगनेन्ट ट्यूमर (Malignant Tumour) जिसे कैंसर वाला कहा जाता है। बिनाइन ट्यूमर कोशिकाओं की बढ़त बहुत धीमी होती है ये फैलती नहीं है। मेलिगनेंट ट्यूमर कोशिकाएं तेजी के साथ बढ़ती हैं और अपने पास के सामान्य ऊतकों (Tissues) को भी नष्ट करती है। ये संपूर्ण शरीर में फैल जाती हैं। 
लीवर कैंसर (Liver Cancer)
लीवर कैंसर (Liver Cancer)
कैंसर शब्द का उपयोग उस समय किया जाता है जब मेलिगनेन्ट ट्यूमर होता है जो अपनी असीमित बढ़त से मानवीय शरीर को प्रभावित करने लगता है और कैंसर कोशिकाओं को मानवीय ऊतकों (Tissues) में भेजने लगता है। लिवर या यकृत कैंसर लीवर की कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि होती है, लिवर के ऊतक में ट्यूमर की संरचनाओं को हिपैटोसेलुलर कार्सिनोमा (Hepatocellular carcinoma) कहा जाता है।

लीवर कैंसर के प्रकार (Types of Liver Cancer)

लिवर कैंसर के मुख्यतः दो प्रकार होते हैं: इनका नाम लिवर के उस हिस्से पर रखा जाता है जिसमें कैंसर सबसे पहले विकसित होता है। सामान्यतः होने वाला लिवर कैंसर, लिवर की प्रमुख कोशिकाओं में शुरू होता है। यह हीपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (Hepatocellular carcinoma) कहलाता है। कोलेंजियोकार्सिनोमा (Cholangiocarcinoma) पित्त नली (Bile Duct) को ढकने वाली कोशिकाओं में शुरू होता है।

लीवर कैंसर के लक्षण

  • अचानक से वजन में कमी आना।
  • असामान्य थकान महसूस होन।
  • पीठ के ऊपरी हिस्से में, दायें कंधे के जोड़ (शोल्डर ब्लेड) के आसपास पीड़ा होना।
  • पीलिया होना।
  • पेट (Abdomen) के ऊपरी दाएँ हिस्से में असहजता का अहसास (Uncomfortable Feeling) होना।
  • पेट के दाएँ हिस्से में, पंजर (Rib Cage) के नीचे एक कठोर गांठ का महसूस होना।
  • पेट में सूजन होना।
  • भूख की कमी और/या मितली आना।

लीवर कैंसर के कारण (Causes of liver Cancer)

  • ज्यादा व लगातार शराब पीना,
  • विशेष रूप से हैपेटाइटिस बी और डी के साथ वायरल हैपेटाइटिस,
  • परजीवी (Parasite) द्वारा संक्रमण जैसे लीवर फ्लूक,
  • चिरकालिक हैपेटाइटिस बी इंफ़ेक्शन,
  • चिरकालिक हैपेटाइटिस सी इंफ़ेक्शन,
  • हैपेटाइटिस बी और लीवर कैंसर दोनों का पारिवारिक इतिहास होना,
  • लीवर का सिरोसिस (Cirrhosis),
  • स्थूलता (Obesity),

सामान्य उपचार

कैंसर पाए जाने के बाद लोग अकसर परेशान हो जाते हैं। कैंसर के निदान और उपचार के दौरान एवं उसके बाद व्यावहारिक और भावनात्मक सहायता बहुत महत्वपूर्ण होती है।

लीवर कैंसर के घरेलू इलाज (Home Remedies For Liver Cancer)

भारत में जिन बीमारियों से सर्वाधिक मौतें हो रही हैं उसमें लीवर कैंसर का पांचवा स्थान है। आंकड़े बताते हैं कि दस में से दो लोग लीवर की बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। लीवर कैंसर को हेपाटोसेलुलर कारसिनोमा (hepatocellular carcinoma) कहा जाता है।

चालीस के बाद अगर जीवन शैली में सेहत की चिंता करते हुए बदलाव नहीं किया जाता है तो लीवर की बीमारी 60 के बाद गंभीर हो जाती है। क्रॉनिक हेपाटाइटिस सी और जॉंडिस में लीवर कैंसर होने का खतरा ज्यादा रहता है। प्रारंभिक अवस्था में ऐसे कोई खास लक्षण नहीं हैं जिससे लीवर कैंसर की पहचान की जा सके। 

हालांकि, पेट की उपरी और बांए भाग में अगर दर्द हो, पेट असमान्य ढंग से फूला हो, लीवर बड़ा हो गया हो, भूख नहीं लग रही हो, वजन कम हो रहा हो, उल्टी आ रही हो, आंख और त्वचा का रंग काफी पीला हो गया हो तो ये लीवर कैंसर के संकेत हो सकते हैं।

लीवर कैंसर जांच में पता चल जाने के बाद अगर वो प्रारंभिक अवस्था में हैं तो घरेलू उपचार से उसे नियंत्रित किया जा सकता है, मगर अगर मर्ज पुरानी है तो घरेलू उपचार से कुछ खास फर्क नहीं पड़ता है। परहेज और पथ्य से ही लीवर को सेहतमंद बनाया जाता है। डाइट या खान-पान ही इसके घरेलू उपचार हैं। आइए जानते हैं लीवर को सेहतमंद बनाने के घरेलू उपचार। 

लीवर कैंसर के घरेलू उपचार (Home Remedies for Liver Cancer)

डाइट या खान-पान की आदत (Diet and Food Habbit)

लीवर को स्वच्छ और शुद्ध पानी की जरुरत होती है। पानी लीवर को साफ और सेहतमंद रखता है। पानी खूब पीएं। रेड मीट और अल्कोहल लीवर का दुश्मन है इससे तौबा करें। ज्यादा कैलोरी वाले भोजन करें , क्योंकि लीवर कैंसर में भूख कम लगती है, इसलिए जब खाने का मन करे तो जिस भोजन में कैलोरी की मात्रा ज्यादा हो वही खाएं। लीवर कैंसर के मरीजों की डाइट में फल, सब्जी के साथ लहसुन, मौसमी, ग्रीन टी, एवाकाडो, हल्दी, अखरोट, पपीता समेत ऐसे सभी फल और सब्जी शामिल हो जो लीवर को सेहतमंद बनाती है।

लहसुन (Garlic)

लहसुन में काफी मात्रा में सल्फर कंपाउड पाया जाता है जो लीवर एंजाइम को सक्रिय करता है और शरीर से विषैले रस और पदार्थ को निकालने का काम करता है। यह लीवर को बचाने का काम करता है। रोज सुबह खाली पेट पानी के साथ अगर लहसुन खाया जाए तो यह लीवर के लिए काफी सेहतमंद होता है।

मौसमी (Grapefruit)

मौसमी में काफी मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। यह लीवर को साफ करता है। इसमें लीवर को साफ करने वाले एंजाइम होते हैं जो लीवर को विषैले पदार्थ से सुरक्षा करते हैं। इसमें एक खास केमिसल कंपाउड Flavonoid पाया जाता है जो लीवर में फैट जमा नहीं होने देता है और इसे जलाता रहता है।

ग्रीन टी (Green Tea)

ग्रीन टी में एक खास एंटी ऑक्सीडेंट Catechins पाया जाता है जो लीवर में फैट जमा नहीं होने देता है और इससे लीवर सही ढंग से काम करता रहता है।

एवाकाडो (Avocado)

एवाकाडो में केमिकल कंपाउंड Glutathione काफी मात्रा में पाया जाता है जो लीवर को सेहतमंद बनाती है और विषाक्त चीजों से सुरक्षा करती है। एक मेडिकल रिसर्च में बताया गया है कि लगातार 30 दिनों तक एक एवाकाडो खाने से फैटी और बीमार लीवर ठीक हो जाती है।

हल्दी (Tumeric)

लीवर के सेहत के लिए हल्दी का सेवन बहुत जरुरी है। यह न सिर्फ लीवर की विषाक्त चीजों से सुरक्षा करती है बल्कि लीवर की नष्ट हुई कोशिकाओं का निर्माण भी करती है।

काली तुलसी (Black Tulsi)

काली तुलसी के सेवन से लीवर कैंसर के वृद्धि रुक जाती है। आयुर्वेद में लीवर कैंसर की चिकित्सा में काली तुलसी की विशेष चर्चा की गई है। काली तुलसी के 30 पत्तों को दही में मथकर बनाए गए मठ्ठे के साथ पी जाएं। सुबह-शाम इसे आजमाने से बेहतर परिणाम आते हैं।

और भी हैं उपाय (Some more remedies)

  • दो संतरे का रस खाली पेट लेने से लीवर सुरक्षित रहता है। एक बैंगन कच्चा खाने से लीवर की बीमारियां ठीक होती है।
  • डाभ (नारियल) का पानी पीएं।
  • जौ का पानी पीएं।
  • छाछ का नियमित सेवन करें।
  • अंकुरित चना सुबह को नाश्ते में खाएं
  • अंकुरित दाना मेथी का रस पीएं
  • गाजर-टमाटर का सेवन नियमित करें।

हर्निया (Hernia) में पेट की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और उसी कमजोर जगह से आंतें बाहर निकल आती हैं। यह समस्या पुरुषों व महिलाओं दोनों में हो सकती है, किन्तु पुरुषों में अधिक पाई जाती है। अधिकाँश मामलों में पुरुषों में हर्निया कमर के भाग में होता है। यह कमर की मांसपेशियों में कमज़ोरी आने पर होता है।
हर्निया (Hernia)
हर्निया (Hernia)
पचास साल की आयु के बाद यह समस्या अधिक देखी गई है। डॉक्टरों के अनुसार शरीर के आंतरिक अंगों का विकास बाहरी तरफ की दीवार की ओर होने के कारण हर्निया होता है। हर्निया की समस्या जन्मजात भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में इसे जन्मजात हर्निया (Congenital Hernia) कहते हैं। 

हर्निया के लक्षण

  • किसी भारी वस्तु के उठाने पर पेट में सूजन का उभर आना,
  • पेट की चर्बी या आँतों का बाहर की ओर निकलना,
  • पेट के निचले भाग में उभार या सूजन महसूस होना
  • पेट में फुलावट, दर्द और भारीपन,
  • मल-मूत्र त्यागने में परेशानी
  • लंबे समय तक खड़े रहने या बैठने में दर्द महसूस होना,

हर्निया होने के कुछ संभावित कारण (Causes of Hernia)

  • पैदाइशी तौर पर
  • बढ़ती उम्र
  • चोट लगना
  • पुराना ऑपरेशन
  • भारी वजन उठाना
  • पुरानी खाँसी
  • मोटापा (Obesity)
  • कब्ज
  • पेशाब में रुकावट
  • गर्भावस्था
  • पेट की मांसपेशियों की कमजोरी
  • पेट की मांसपेशियों में विकार
  • आनुवंशिकता (Hereditiary)

सामान्य उपचार

हर्निया का इलाज (Treatment of Hernia)

हर्निया का एकमात्र सफल और कारगर उपाय ओपन और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के रूप में उपलब्ध है।
90 प्रतिशत मामलों में हर्निया दोबारा नहीं होता, लेकिन दस प्रतिशत लोगों में ऑपरेशन के बाद फिर से हर्निया की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसलिए डॉक्टर के निर्देशानुसार सावधानी बरतें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से मुलाकात करने में न हिचकें।

हर्निया के इलाज के लिए घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies For Hernia)

पेट की मांसपेशिया या कहें पेट की दीवार कमजोर हो जाने से जब आंत बाहर निकल आती है तो उसे हर्निया कहते हैं। वहां एक उभार हो जाता है, जिसे आसानी से देखा जा सकता है। लंबे समय से खांसते रहने या लगातार भारी सामान उठाने से भी पेट की मांसपेशिया कमजोर हो जाती है। ऐसी स्थिति में हर्निया की संभावना बढ़ जाती है। इसके कोई खास लक्षण नहीं होते हैं लेकिन कुछ लोग सूजन और दर्द का अनुभव करते हैं, जो खड़े होने पर और मांसपेशियों में खिंचाव होने या कुछ भारी सामान उठाने पर बढ़ सकता है।

हर्निया की समस्या जन्मजात भी हो सकती है। इसे कॉनजेनाइटल हर्निया कहते हैं। हर्निया एक वक्त के बाद किसी को भी हो सकता है और बिना सर्जरी के ठीक भी नहीं हो सकता। इसमें पेट की त्वचा के नीचे एक असामान्य उभार आ जाता है, जो नाभि के नीचे होता है। आंत का एक हिस्सा पेट की मांसपेशियों के एक कमजोर हिस्से से बाहर आ जाता है। इसके अलावा इंगुइंल हर्निया, फेमोरल हर्निया, एपिगास्त्रिक हर्निया, एम्ब्लाइकल हर्निया भी होता है, जो बहुत कम दिखता है। 

हर्निया के घरेलू इलाज (Home Remedies for Hernia)

अगर हर्निया बड़ी हो, उसमें सूजन हो और काफी दर्द हो रहा हो तो बिना सर्जरी के इसका इलाज संभव नहीं है। लोकिन हर्निया के लक्षण पता लगने पर आप उसे घरेलू इलाज से कम कर सकते हैं। हालांकि, इन घरेलू उपायों से सिर्फ प्राथमिक इलाज ही संभव है और इसे आजमाने पर कभी उल्टे परिणाम भी हो सकते हैं। इसलिए घरेलू इलाज आजमाने से पहले डॉक्टर से जरुर संपर्क कर लें। 

मुलैठी (Licorice)

कफ, खांसी में मुलैठी तो रामबाण की तरह काम करता है और आजमाय हुआ भी है। हर्निया के इलाज में भी अब यह कारगर साबित होने लगा है, खासकर पेट में जब हर्निया निकलने के बाद रेखाएं पड़ जाती है तब इसे आजमाएं।

अदरक के जड़ (Ginger Root)

अदरक की जड़ पेट में गैस्ट्रिक एसिड और बाइल जूस से हुए नुकसान से सुरक्षा करता है। यह हर्निया से हुए दर्द में भी काम करता है।

बबूने का फूल (Chamomile)

पेट में हर्निया आने से एसिडिटी और गैस काफी बनने लगती है। इस स्थिति मेंम बबूने के फूल के सेवन से काफी आराम मिलता है। यह पाचन तंत्र को ठीक करता है और एसिड बनने की प्रक्रिया को कम करता है।

मार्श मैलो (Marshmallow)

यह एक जंगली औषधि है जो काफी मीठी होती है। इसके जड़ के काफी औषधीय गुण हैं। यह पाचन को ठीक करता है और पेट-आंत में एसिड बनने की प्रक्रिया को कम करता है। हर्निया में भी यह काफी आराम पहुंचाता है।

हावथोर्निया (Hawthornia)

यह एक हर्बल सप्लीमेंट है जो पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है और पेट के अंदर के अंगों की सुरक्षा करती है। यह हर्निया को निकलने से रोकने में काफी कारगर है। हावथोर्निया में Citrus Seed, Hawthorn और Fennel मिली होती है।

एक्यूपंक्चर (Acupuncture)

हर्निया के दर्द में एक्यूपंक्चर काफी आराम पहुंचाता है। खास नर्व पर दबाव से हर्निया का दर्द कम होता है।

बर्फ (Ice)

बर्फ से हर्निया वाले जगह दबाने पर काफी आराम मिलता है और सूजन भी कम होती है। यह सबसे ज्यादा प्रचलन में है।

हर्निया में इन चीजों को नहीं करें (Don’ts in Hernia)

  • प्रभावित जगह को कभी भी गर्म कपड़े या किसी भी गर्म पदार्थ से सेंक नहीं दें।
  • हर्निया में कसरत करने से परहेज करें।
  • हर्निया में ज्यादा तंग और टाइट कपड़ें नहीं पहनें।
  • बेड पर अपने तकिए को 6 इंच उपर रखें, ताकि पेट में सोते समय एसिड और गैस नहीं बन पाए।
  • एक ही बार ज्यादा मत खाएं, थोड़ी-थोड़ी देर पर हल्का भोजन लें।
  • खाने के तुरंत बाद झुकें नहीं।
  • शराब पीना पूरी तरह बंद कर दें।

दर्द (Pain)
दर्द (Pain)
स्नायु तंत्र में वह सामान्य संवेदना (Sensation) है जिसकी शुरूआत आपको किसी भी संभावित चोट तथा अपनी देखभाल के प्रति सतर्क करने के लिये होती है। 

दर्द के प्रकार (Types of Pain)

दर्द को कई तरीकों से वर्गीकृत किया जा सकता है, दर्द के कारणों के अनुसार या लक्षणों के अनुसार। दर्द (dard) का मौलिक वर्गीकरण दर्द की अवधि के अनुसार होता है। दर्द के कुछ अहम वर्ग निम्न हैं:  

अल्पकालिक और भयंकर दर्द (Acute Pain)

आमतौर पर एक्यूट पेन (Acute Pain) अचानक बीमारी, जलने, या मांसपेशी के चोटिल होने से होता है। भयंकर दर्द के कारण का निदान एवं उपचार (Diagnosis and Treatment) प्राय: कर लिया जाता है और दर्द किसी समयावधि या भीषणता में सीमित (Limited) होता है। एक्यूट पेन सुरक्षात्मक होता है और रोग समाप्त होने के बाद इससे पूरी तरह मुक्ति मिल जाती है,

एक्यूट पेन की विशेषताएं (Facts of Acute Pain in Hindi)

* इसकी अवधि कम होती है।
* इसके रोग की पहचान एवं पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
* इसके उपचार (Treatment) के लिए प्रायः दर्द निवारक दवाओं (Painkillers) का उपयोग किया जाता है।
* सामान्यतः इलाज के बाद दर्द ठीक हो जाता है।

दीर्घकालिक दर्द (About Chronic Pain in Hindi)

दीर्घकालिक दर्द या क्रॉनिक पेन कभी समाप्त नहीं होता है- यह भयंकर दर्द की तुलना में लंबे समय तक रहता है और अधिकतर चिकित्सा उपचारों के प्रतिरोधी क्षमता (Resistant) वाला होता है। क्रॉनिक पेन के संकेत सप्ताहों, महीनों और वर्षों तक संकेत देते रहते हैं। क्रॉनिक पेन प्रायः रोग समाप्त होने के बाद भी नहीं जाता और इसके सामान्यतः कोई लाभ नहीं हैं। इसके अतिरिक्त क्रॉनिक पेन किसी व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता (Quality of life) को काफी हद तक प्रभावित करता है।

क्रॉनिक पेन  की विशेषताएं (Facts of Chronic Pain )

* दीर्घकालिक दर्द या क्रॉनिक पेन लगातार रह सकता है या बार-बार हो सकता है। (महीनों या सालों तक रह सकता है)।
* यह प्रायः किसी दीर्घकालिक बीमारी के कारण होता है और उस रोग के लक्षणों में एक हो सकता है।
* इसके पूर्वानुमान नहीं लगाए जा सकते और प्रायः रोग की पहचान सुनिश्चित नहीं होती।
* इलाज में सामान्यतः कई विधियां सम्मिलित रूप से प्रयोग में लाई जाती हैं।
* प्रायः रोग ठीक हो जाने या इलाज पूरा हो जाने के बाद दुबारा दर्द हो सकता है।

क्रॉनिक पेन के उदाहरण

  • कमर के निचले हिस्से में दर्द
  • आर्थ्राइटिस (गठिया) का दर्द
  • फाइब्रोमायल्जिया
  • माइग्रेन

दर्द का कारण (Causes and Reason of Pain in Hindi)

दर्द के कई कारण होते हैं जैसे  चोट लगना, पूरानी बीमारी आदि। दर्द (dard) के कुछ विशेष कारण निम्न हैं:  
कैंसर
  • कान में संक्रमण
  • अचानक बीमारी
  • मांसपेशी की चोट
  • जलना
  • पुराना दर्द पूर्व की किसी चोट या शारीरिक नुकसान में भी होता है

सामान्य उपचार

​दर्द होने पर सबसे आसान उपाय लोग दर्द निवारक लेना समझते हैं। कई बार दर्द निवारक भी पूर्ण रूप से दर्द खत्म नहीं कर पाता। दर्द की स्थिति में कुछ निम्न उपाय अपनाए जा सकते हैं। 

दर्द के उपाय (Treatment and Remedies of Pain in Hindi)

  • दर्द के निदान एवं उपचार (Diagnosis and Treatment) का उद्देश्य रोगी की कार्यप्रणाली में सुधार करना है जिससे वे अपने दैनिक काम कर सकें।
  • चोट या जोड़ों के दर्द में राहत के लिए ठंडा या गर्म सेंक करना आसान उपाय माना जाता है।
  • ठंडा सेंक - बर्फ हमारे शरीर की रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देती है। जिससे हमें दर्द व जलन से हमें छुटकारा मिलने के साथ ही चोट ठीक हो जाती है। ठंडा सेंक केवल ताजा चोट के समय ही करना चाहिए। यदि चोट लगे 6-7 घंटे हो चुके हैं तो ठंडे सेंक से बचना चाहिए। लील पड़ने से रोकने व जोड़ों में खून को इकट्ठा होने से रोकने के लिए ठंडा सेंक किया जाता है।
  • गर्म सेंक - गर्मी से नसों में रक्त प्रवाह तेज हो जाता है जिससे अकड़ी हुई मांसपेशियां ढीली होने लगती हैं और दर्द में आराम मिलता है।
  • गर्म पानी का सेंक बहुत अधिक सर्दी के मौसम में करना फायदेमंद होता है। गर्मी के मौसम में गर्म सेंक नहीं करना चाहिए। सर्दी के मौसम में जोड़ों पर स्थित नसें सिकुड़ने लगती हैं। ऐसे में गर्म पानी के सेंक से दर्द पैदा करने वाले ऊत्तक और नसें खुल जाती हैं।
  • गंभीर चोटों में गर्म सेंक न लें। यह चोट में हो रही जलन को और बढ़ा सकता है। ऐसे में उस चोट को ठीक होने में ज्यादा समय भी लग सकता है

दर्द से छुटकारा पाने के लिए घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies For Pain)

दर्द से निजात पाने के लिए हमेशा पेन किलर दवा खाना ठीक नहीं हैं। पेन किलर दवाओं के स्ट्रिप पर भी लिखा होता है कि इसके ओवरडोज सेहत के लिए नुकसानदेह होते हैं। दर्द निवारक दवाओं के ओवरडोज से लीवर और किडनी पर बुरा असर पड़ता है और अधिक सेवन से लीवर और किडनी खराब हो सकती है।

दर्द में ज्यादातर प्रयास करना चाहिए कि हम कुदरती और घरेलू उपाय से ही इसे कम करें। दर्द से निजात के लिए कुदरत में ऐसी नायाब जड़ी-बूटी और औषधियां है जो दर्द को न सिर्फ कम करती है बल्कि जड़ से ही खत्म कर देती हैं। 

दर्द के घरेलू इलाज (Home Remedies for Pain)

कमर दर्द (Pain in Waist)

रात में 60 ग्राम गेंहू के दाने पानी में भिगो दें। सुबह में भीगे हुए गेंहू के साथ 30 ग्राम खसखस तथा 30 ग्राम धनिया मिलाकर बारीक पीस लें। इस चटनी के दूध में पका ले और खीर बना लें। इस खीर को लगातार दो महीने तक खाने से कमर दर्द का नाश हो जाता है। केवल खसखस औऱ मिश्री को बराबर मात्रा में पीस कर चूर्ण बना लें और इसे रोज खाएं, कमर दर्द गायब हो जाएगी। 
कमर दर्द में तारपीन के तेल की मालिश भी बहुत लाभदायक होती है।
कमर दर्द और गठिया में नित्य सुबह अखरोट की गिरियों को अच्छी तरह चबाकर खाने से भी काफी लाभ होता है।

घुटनों का दर्द (Knee Pain)

सुबह के समय मेथीदाना का बारीक चूर्ण एक या दो चम्मच पानी के साथ लें, घुटनों का दर्द खत्म हो जाएगा।
मछली के तेल (क़ॉड लीवर ऑयल) भी घुटनों के दर्द में काफी असरदार है।
सुबह भूखे पेट अखरोट की गिरियां खाएं। दर्द से निजात मिलेगा।
घुटनों का दर्द, जोड़ों का दर्द हड्डियों को घिसने के काण होती है। इसमें विजयसार की लकड़ी के विधिवत इस्तेमाल से काफी आराम मिलता है।
एक कच्चा लहसुन खाली पेट पानी के साथ खाएं, दर्द से निजात मिलेगा।
अश्वगंधा और सौंठ को कूटकर इसके चूर्ण को खाएं, काफी आराम मिलेगा।

गठिया (Arthritis Pain)

बथुआ साग के ताजा पत्तों का रस 15 ग्राम प्रतिदिन पीने से गठिया दूर होता है। इस रस में नमक-चीनी आदि कुछ न मिलाएं। सुबह खाली पेट लें और शाम में भी।
बथुआ का साग बना के भी खा सकते हैं और इसके पराठे भी बना कर खा सकते हैं।
नागौरी असगंध की जड और खांड दोनों लगभग बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर कपड़े से छान कर बारीक चूर्ण बना लें । इसे सुबह-शाम गर्म दूध के साथ खाएं। गठिये के दर्द से राहत मिलेगी।
कच्चे लहसुन का सेवन करें।
बारीक असगंधा का चूर्ण दो भाग, सौंठ का चूर्ण एक भाग और पिसी हुई मिश्री तीन भाग मिला कर रख लें। इसे दो चम्मच सुबह-शाम गर्म दूध या पानी के साथ खाएं, दर्द गायब हो जाएगा।

हर प्रकार के बदन का दर्द (All type of Pain)

लहसुन की चार कलियां छीलकर तीस ग्राम सरसों के तेल में डाल दें। उसमें थोड़ी अजवायन मिला कर धीमी आंच पर पकाएं। लहसुन और अजवायन काली पड़ने पर तेल उतार कर थोड़ा ठंढा कर छान लें। इस हल्के गर्म तेल की मालिश से हर प्रकार का बदन दर्द छू-मंतर हो जाता है।

लगभग 10 ग्राम कपूर और 200 ग्राम सरसों का तेल- दोनों को शीशी में मिला कर कार्क से बंद कर दें। शीशी को धूप में रख दें। जब दोनों मिलकर एकरस हो जाएं तब इस तेल की मालिश से वात विकार, नसों का दर्द, पीठ और कमर का दर्द, हिप-शूल, मांसपेशियों का दर्द समेत बदन के सभी तरह के दर्द से छुटकारा मिल जाता है।

पेट दर्द (Abdominal Pain)

अजवायन का चूर्ण छह भाग और काला नमक (पिसा हुआ) एक भाग लेकर मिला लें। इसमें से दो ग्राम गर्म पानी के साथ लें तो पेट दर्द में तुरंत आराम मिलेगा।
अमृतधारा की दो-तीन बूंदे बताशे या खांड के पानी में डालकर पीने से पेट दर्द खत्म होता है।
दो-तीन चम्मच ठंढे पानी में दो-तीन बूंद अमृतधारा सुबह-शाम भोजन के बाद लेने से दस्त, आंव, मरोड़ और पेचिश के दर्द में आराम मिलता है।

गले का दर्द (Pain in Throat)

फूली फिटकरी दो ग्राम (आधा चम्मच) 250 मिली पानी में डाल कर दिन में दो-तीन बार गरारा करें। इससे गले की सूजन औऱ दर्द दूर होती है। यह संभव नहीं है तो केवल नमक और एख ग्लास गर्म पानी में डाल कर गरारे करने से भी दर्द कम होती है।

दांत का दर्द (Pain in Teeth and Gum)

सरसों के तेल की कुछ बूंदों में एक चुटकी सैंधा नमक के साथ एक चुटकी पिसी हुई हल्दी मिला ली जाए और गाढ़ा लेप (पेस्ट) बनाकर दांतो व मसूड़ों की मालिश रोजाना सबुह-शाम की जाए तो दांतो के दर्द के साथ कई तकलीफें दूर हो जाएंगी।

भीतरी चोट या हड्डी टूटने पर दर्द (Internal Pain and Inflamation)

200 ग्राम उबलते हुए दूध में आधा चम्मच हल्दी मिला कर दो-तीन बार उबाल दें। इस हल्दी और दूध के गुनगुने मिश्रण को पीने से चोट का दर्द व सूजन कम होती है।
यदि किसी जगह चोट के कारण सूजन हो या दर्द हो तो वहां पिसा हुआ सेंधा नमक या साधारण नमक की पोटली को गर्म कर सेंकने से सूजन और दर्द कम होती है।
जहां चोट लगी है, मोच आई है या सूजन है वहां हल्दी का चूर्ण और चूना मिला कर लगा दिया जाए तो फौरन दर्द ठीक हो जाती है और सूजन भी कम हो जाती  है।

निमोनिया (Pneumonia)
निमोनिया (Pneumonia)
किसी एक बीमारी से हमारे देश में इतनी मौतें नहीं होतीं जितनी निमोनिया (Pneumonia ) से होती हैं। निमोनिया से बचाव और इसका इलाज बेहद सुगम है लेकिन अकसर लोगों के पास इसके जुड़ी जानकारी नहीं होती। जानिए निमोनिया के विषय में सभी बातें। 

निमोनिया क्या है (About Pneumonia in Hindi)

निमोनिया मुख्यत: फेफड़े का संक्रमण होता है, जो किसी भी उम्र में हो सकता है। हवा में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस सांस के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंच जाता है। 

कई बार फंफूद की वजह से भी फेफड़े संक्रमित (इन्फेक्शंस) हो जाते है। अगर कोई व्यक्ति पहले से किसी बीमारी जैसे फेफड़ों के रोग, हृदय रोग (Lung disease, Heart disease) से पीड़ित है तो उन्हें गंभीर संक्रमण यानि गंभीर निमोनिया (Severe Pneumonia) होने का खतरा रहता है।

निमोनिया (Pneumonia) में जब एक या दोनों फेफड़े में तरल पदार्थ भर जाता है है तो फेफड़े को ऑक्सीजन लेने में कठिनाई होने लगती है। बैक्टीरिया से होने वाला निमोनिया दो से चार सप्ताह में ठीक हो सकता है, जबकि वायरस से होने वाले निमोनिया को ठीक होने में अधिक समय लग जाता है।

निमोनिया के लक्षण

  • छोटे या नवजात बच्चों में कोई विशेष लक्षण दिखाई नहीं देता है।
  • बच्चे देखने से बीमार लगें तो उन्हें निमोनिया हो सकता है।
  • सर्दी, हाई फीवर, कफ, कंपकपी, शरीर में दर्द, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द।
निमोनिया होने की मुख्य वजह सर्दी को माना जाता है लेकिन स्वास्थ्य विज्ञान के अनुसार निमोनिया होने के कुछ अन्य कारण भी हैं।  

निमोनिया होने के कुछ कारण (Causes of Pneumonia in Hindi) 

  • बैक्टीरिया
  • वायरस
  • फंगस
  • इसके अतिरिक्त कुछ रसायनों और फेफड़े में लगी चोट के कारण भी निमोनिया होता है।

सामान्य उपचार

निमोनिया से बचाव और रोकथाम (Treatment of Pneumonia in Hindi)

रोगी को एक स्वच्छ कमरे में रखें। इस बात का ध्यान रखे कि रोगी के कमरे में सूर्य का प्रकाश अवश्य आये।
शरीर, खासकर छाती और पैरों, को गर्म रखने के लिए कमरे को गर्म रखें तथा रोगी को अच्छी तरह से ढकें।
सीने में दर्द और बेचैनी से राहत पाने के लिए, एक चम्मच लहसुन का रस ले सकते हैं ।
तुलसी भी निमोनिया में बहुत उपयोगी है। तुलसी के कुछ ताजे पत्तों का रस लेकर उसमें काली मिर्च पीस कर मिला लें और यह रस हर छह घंटे के अंतराल पर दें ।
अधिकांशतः: निमोनिया (Pneumonia) का इलाज, डॉक्टर की देख रेख में, बिना अस्पताल में दाखिल हुए हो सकता है।
आमतौर पर, मौखिक एंटीबायोटिक दवाओं, आराम, तरल पेय पदार्थ, और घर पर देखभाल पूर्ण स्वास्थ्य लाभ के लिए पर्याप्त हैं। 

निमोनिया के घरेलू उपचार (Home Remedies Pneumonia)

भारत वर्ष में निमोनिया (Pneumonia), किसी अन्य बीमारी के मुकाबले, मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है।  

  • निमोनिया मूलतः फेफड़ो (Lungs) में संक्रमण होने से होता है। 
  • पहले से बीमार लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) पहले से ही कमजोर होती है इसलिए स्वस्थ लोगों के मुकाबले उन्हें निमोनिया होने की संभावना अधिक होती है।  

निमोनिया के घरेलू उपचार  (Home Remedies For Pneumonia)

  • हल्दी, काली मिर्च, मेथी और अदरक जैसे प्रतिदिन उपयोग में आने वाले खाद्य प्रदार्थ फेफड़ों के लिए फायदेमंद होते हैं। 
  • तिल के बीज भी निमोनिया के उपचार में सहायक होते हैं। 300 मिलीलीटर पानी में 15 ग्राम तिल के बीज, एक चुटकी साधारण नमक, एक चम्मच
  • अलसी और एक चम्मच शहद मिलकर प्रतिदिन उपयोग करने से फेफड़ों से कफ बाहर निकलता है। 
  • ताजा अदरक का रस लेने या अदरक को चूसने से भी निमोनिया में आराम मिलता है।        
  • थोड़े से गुनगुने पानी के साथ शहद लेना भी लाभदायक रहता है।  
  • गर्म तारपीन तेल का और कपूर के मिश्रण से छाती पर मालिश करने से निमोनिया से राहत मिलती है। 
  • रोगी का कमरा स्वच्छ, और गर्म होना चाहिए। कमरे में सूर्य की रौशनी अवश्य आनी चाहिये।  
  • रोगी के शरीर को गर्म रखें, विशेषकर छाती और पैरों को।  
  • तुलसी भी निमोनिया में बहुत उपयोगी है। तुलसी के कुछ ताजे पत्तों का रस, एक चुटकी काली मिर्च में मिलकर रख लें और हर छ घंटे के बाद दें। 

जापानी इन्सेफेलाइटिस (Japanese Encephalitis)
जापानी इन्सेफेलाइटिस (Japanese Encephalitis)
जापानी इन्सेफेलाइटिस एक प्रकार का दिमागी बुखार (Dimagi Bukhar) है जो वायरल संक्रमण की वजह से होता है। यह एक खास किस्म के वायरस के द्वारा होता है, जो मच्छर या सूअर के द्वारा फैलते हैं। इस बीमारी का मुख्य वाहक सुअर हैं।

बच्चें होते हैं अधिक शिकार (Dimagi Bukhar or Japanese Encephalitis in Kids) 

ज्यादातर 1 से 14 साल के बच्चे एवं 65 वर्ष से ऊपर के लोग इसकी चपेट में आते हैं। मस्तिष्क ज्वर, दिमागी बुखार (Dimagi Bukhar) और जापानी इन्सेफेलाइटिस के नाम से पहचानी जाने वाली इस जानलेवा बीमारी का शिकार अधिकांशतः बच्चे ही होते हैं। देश के 19 राज्यों के 171 जिलों में जापानी इन्सेफेलाइटिस का असर है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार सहित दूसरे राज्यों के 60 जिले इन्सेफेलाइटिस से ज्यादा प्रभावित हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2012 तक इन्सेफेलाइटिस से यूपी व बिहार में 422 बच्चों की मौत हुई थी। जापानी इन्सेफेलाइटिस का प्रकोप साल के तीन महीने अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में सबसे ज्यादा होता है। 

जापानी इन्सेफेलाइटिस के लक्षण

  • अतिसंवेदनशील होना
  • कमजोरी और उल्टी होना
  • गर्दन में अकड़न
  • बहुत छोटे बच्चों का ज्यादा देर तक रोना
  • बुखार, सिरदर्द
  • भूख कम लगना
  • लकवा मारना और स्थिति कोमा तक पहुंच सकती है
  • समय के साथ सिरदर्द में बढ़ोतरी होना

कारण 

जापानी इन्सेफेलाइटिस या दिमागी बुखार (Dimagi Bukhar) विषाणु यानि वायरस के कारण होता है। जापानी इन्सेफेलाइटिस फैलाने वाले कुछ संभावित विषाणु निम्न हैं:

जापानी इन्सेफेलाइटिस विषाणु (Japanese Encephalitis Virus) 

  • रेबिज वायरस
  • हरपीज सिंप्लेक्स
  • पोलियो वायरस
  • खसरे के विषाणु
  • छोटी चेचक विषाणु
  • जापानी इन्सेफेलाइटिस विषाणु
  • सेंट लुइस विषाणु
  • पश्चिमी नील विषाणु
  • शीतला मानइर विषाणु
  • शीतला मेजर विषाणु आदि 

कैसे फैलता है जापानी इन्सेफेलाइटिस या दिमागी बुखार (Japanese Encephalitis in Hindi)

सुअर के ही शरीर में इस बीमारी के वायरस पनपते और फलते फूलते हैं और उनसे मच्छर इस वायरस को मानव शरीर में पहुँचाने का काम करते हैं. एक बार यह हमारे शरीर के संपर्क आता है, फिर यह सीधा हमारे दिमाग की ओर चला जाता है। दिमाग में जाते ही यह हमारे सोचने, समझने, देखने और सुनने की क्षमता को प्रभावित करता है। यह वायरस सिर्फ छूने से नहीं फैलता।

सामान्य उपचार

दिमागी बुखार का उपचार (Treatment of Japanese Encephalitis or Dimagi Bukhar)

दिमागी बुखार से बचने के उपाय निम्न हैं: 
  • समय से टीकाकरण कराएं
  • साफ-सफाई से रहें
  • गंदे पानी के संपर्क में आने से बचना होगा
  • मच्छरों से बचाव
  • घरों के आस पास पानी न जमा होने पाए खासकर बारिश के मौसम में
  • बच्चों को बेहतर खान-पान
  • कोई भी लक्षण 

कुष्ठरोग (Leprosy)
कुष्ठरोग (Leprosy)
कुष्ठरोग (Leprosy) माइकोबैक्टेरियम लेप्री (Mycobacterium Leprae) और माइकोबैक्टेरियम लेप्रोमेटॉसिस (Mycobacterium Lepromatosis) जीवाणुओं के कारण होने वाली एक दीर्घकालिक बीमारी (Chronic Disease) है। यह मुख्य रूप से मानव त्वचा (Skin), ऊपरी श्वसन पथ की श्लेष्मिका (Mucous Membrane of Upper respiratory Track) , परिधीय तंत्रिकाओं (Peripheral Nerves), आंखों और शरीर के कुछ अन्य क्षेत्रों को प्रभावित करती है। यदि कुष्ठरोग (Kushth Rog) का उचित समय पर उपचार न किया जाये तो यह रोग बढ़ सकता है, जिससे त्वचा, नसों, हाथ-पैरों और आंखों में स्थायी क्षति हो सकती है। 

कुष्ठरोग के प्रकार (Types of Leprosy)

कुष्ठरोग सामान्यतः तीन प्रकार का होता है, जो निम्न हैं:  

तंत्रिका कुष्ठ (Nerve leprosy)-इसमें शरीर के प्रभावित अंगो की संवेदनशीलता समाप्त हो जाती है। उस स्थान पर सुई चुभने पर भी मनुष्य किसी प्रकार का कोई दर्द महसूस नहीं करता।

ग्रंथि कुष्ठ (Lapromatus leprosy)-इसमें शरीर के किसी भी भाग में त्वचा से भिन्न रंग के धब्बे या चकत्ते पड़ जाते हैं अथवा शरीर में गांठें निकल आती है।

मिश्रित कुष्ठ- इसमें शरीर के प्रभावित अंगों की संवेदनशीलता समाप्त होने के साथ-साथ त्वचा में चकत्ते भी पड़ते हैं और गांठें भी निकलती हैं।

कुष्ठरोग रोग न तो वंशानुगत होता है न हीं यौन-संपर्क के द्वारा फैलता है। वयस्कों की अपेक्षा बच्चों में इस रोग के होने का खतरा अधिक होता है। अतः: जो बच्चे कुष्ठ रोगियों के संपर्क में रहते हैं, उनको इस रोग से बचाव के लिए अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है।

केवल ऐसे संक्रमित कुष्ठ रोगी जिनका बहुत दिनों से उपचार न हुआ हो के संपर्क में आने से कुष्ठ फैल सकता है। इससे पीड़ित लोग भी उपचार के मात्र 2 सप्ताह बाद ही संक्रामक नहीं रह जाते।यदि कुष्ठ रोग अति संक्रामक स्थिति में है, तो परिचारक (Attendant), कुष्ठ रोग की दवाओं का सेवन करके रोग मुक्त रह सकता है। 

कुष्ठरोग एक वैश्विक समस्या (Leprosy in World)

1995 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन) (डब्ल्यूएचओ) (WHO) के अनुमान के अनुसार कुष्ठरोग के कारण स्थायी रूप से विकलांग हो चुके व्यक्तियों की संख्या 2 से 3 मिलियन के बीच थी। पिछले 20 वर्षों में, पूरे विश्व में 15 मिलियन लोगों को कुष्ठरोग से मुक्त किया जा चुका है। कुष्ठरोग और इसके पीड़ितों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिये विश्व कुष्ठरोग दिवस (वर्ल्ड लेप्रसी डे) की स्थापना की गई।

कुष्ठ रोग के संबंध में गलत तथ्य (Myths About Leprosy)

  • कुछ लोगों का विश्वास है कि वंशानुगत कारणों, अनैतिक आचरण, अशुद्ध रक्त, खान-पान की गलत आदतें जैसे सूखी मछली खाने, पूर्वपापकर्म आदि कारणों से कुष्ठ रोग होता है।
  • लोग मानते हैं कि कुष्ठ रोग केवल कुछ ही परिवारों में फैलता है। यह केवल स्पर्शमात्र से हो जाता है।
  • कुष्ठ रोग प्राय: कुरूपता के साथ जुड़ा हुआ होता है। कुरूपता आने के बाद ही कुष्ठ रोग का निदान किया जा सकता है।
  • कुष्ठ रोग अत्यंत संक्रमणशील है एवं यह संक्रमणशीलता कुरूपता से जुड़ी हुई है।
  • कुष्ठ रोग लाइलाज है।
  • जिन परिवारों में कुष्ठ रोगी हैं, उस परिवार के बच्चों को कुष्ठ रोग होगा ही।

कुष्ठरोग के लक्षण

  • चेहरे पर, नितंबों पर, शरीर के अन्‍य हिस्‍सों की दूसरी ओर बहुत सारे, नरम एवं जिनकी परिभाषा न बताई जाए ऐसे लाल व स्‍पर्शक्षम या स्‍पर्शहीन धब्‍बे हो जाना।
  • त्‍वचा के रंग तथा गठन में परिवर्तन दिखाई देना ।
  • त्‍वचा पर एक रंगहीन दाग जो थोड़ा या पूरी तरह स्‍पर्शहीन हो या उस दाग पर किसी चुभन का अनुभव नहीं होना।
  • समान्यत त्‍वचा पर पाये जाने वाले पीले या ताम्र रंग के धब्‍बे जो सुन्‍न हों या
  • हाथ और पैरों का सुन्‍न हो जाना।

कारण 

माइकोबैक्टेरियम लेप्री (Mycobacterium leprae) और माइकोबैक्टेरियम लेप्रोमेटॉसिस (Mycobacterium lepromatosis) जीवाणु

सामान्य उपचार

कुष्ठरोग का इलाज बेहद आसान और कई सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में किया जाता है। कुष्ठ रोग होने पर निम्न उपाय अपनाने चाहिए: 

कुष्ठरोग का इलाज (Treatment of Leprosy)

सरकारी अस्पताल द्वारा रिहाइशी इलाकों में मौजूद स्वास्थ केंद्रों में नि:शुल्क इलाज उपलब्ध है। 
अगर शरीर पर एक से पांच धब्बे हो तो छह माह तक दवाई लेनी चाहिए। 
6 से 12 धब्बे हो तो 12 माह या इससे अधिक समत तक दवाई लेने से यह रोग पूरी तरह से ठीक हो जाता है। 

कुष्ठ रोग के घरेलू उपचार (Home Remedies For Leprosy)

लेप्रेसी (Leprosy) यानि कुष्ठ रोग से व्यक्ति न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी प्रभावित होता है। कुष्ठ रोगियों के प्रति दूसरे लोगों के असामान्य रवैये से यह रोगी निराश हो जाते हैं। कुष्ठ रोग शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। जिस हिस्से पर भी कुष्ठ रोग का प्रभाव होता है वहां की त्वचा देखने में संकरी सी नजर आती है और वह हिस्सा सामान्य तरह से काम नहीं करता।

कई बार कुष्ठ रोग से प्रभावित त्वचा सूज जाती है और उस स्थान पर लाल चकत्ते भी पड़ सकते हैं। इसके अलावा प्रभावित हिस्से पर फफोले जैसी त्वचा भी उभर सकती है। कुल मिलाकर कुष्ठ रोगी बेहद परेशानी महसूस करते हैं। कुष्ठ रोग के उपचार के लिए कुछ घरेलू नुस्खे हैं, जिन्हें अपनाकर काफी हद तक कुष्ठ रोग को ठीक किया जा सकता है- 

हल्दी (Turmeric)

हल्दी में हाइडेकोटायल होता है। हल्दी को पट्टी पर लगाकर प्रभावी स्थान पर बांधा जा सकता है। हल्दी से त्वचा की सूजन, रंजकता आदि कम हो जाती है क्योंकि यह मरहम का काम करती है। 

नीम (Neem)

नीम की पत्तियों की पीसकर लेप के रूप में प्रयोग करें। नीम में बैक्टीरिया से छुटकारा पाने के लिए उत्तम एंटीसेप्टिक एजेंट होता है। पत्तियों के लेप को एक दिन में कम से कम दो बार प्रभावित स्थान पर लगाएं। बेहतर परिणाम के लिए नीम के पेस्ट में काली मिर्च का पाउडर मिलाएं। इसके अलावा नीम के पत्तों को पानी में उबालकर उस पानी से नहाने से भी आराम मिलता है।

एरोमाथेरेपी (Aromatherapy)

कुष्ठ रोग के इलाज के लिए एरोमाथेरेपी भी ली जा सकती है। इस थेरेपी में विभिन्न गुणकारी तेलों का इस्तेमाल होता है जो कि शरीर के लिए टॉनिक की तरह काम करता है और एंटसेप्टिक एजेंट के रूप में भी शरीर को फायदा पहुंचाते हैं।

मंडूकपर्णी या गोटू कोला (Gotu kola or Centella Asiatica)

मंडूकपर्णी या गोटू कोला को प्रयोग बहुत की त्वचा संबंधी बिमारियों से निजात के लिए प्रयोग किया जाता है। शरीर के घाव, जलन आदि के उपचार के लिए भी गोटू कोला का इस्तेमाल होता है। गोटू कोला को सिर दर्द और बुखार के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। गोटू कोला के पत्तों को पानी में तब तक उबालें जब तक पानी आधा न हो जाए। इसके बाद इस पानी को छानकर इसका तीन चौथाई हिस्सा रोजाना दिन में तीन बार पीएं। कुष्ठ रोग में लाभ होगा।

राइजोम्स (Risomes)

राइजोम्स में एंटीफंगल गुण होते हैं। राइजोम्स का स्वाद कड़वा और तेज होता है और बहुत तेज महक भी होती है। कच्ची राइजोम्स को कुष्ठ रोग के उपचार के लिए इस्तेमाल करें।

बाबची (Babchi)

कुष्ठ रोग के इलाज के लिए बाबची सबसे असरकारक जड़ी-बूटी मानी जाती है। बाबची के बीजों का पाउडर बनाकर कुष्ठ रोग के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा बाबची के पत्तों का पेस्ट बनाकर भी प्रभावित स्थान पर लगाने से कुष्ठ रोग में आराम मिलता है। इससे सूजन कम होती है और व्यक्ति का रोग ठीक होने की प्रक्रिया भी तेज होती है।

व्हीट ग्रास (Wheat Grass)

व्हीट ग्रास कुष्ठ रोग के इलाज के लिए एक चमत्कारी प्रॉडक्ट है। इसके इस्तेमाल से एक रात में ही रोग में आराम महसूस किया जा सकता है तथा तीन महीने के लगातार इस्तेमाल से लगभग कुष्ठ को ठीक किया जा सकता है। व्हीट ग्रास को पेस्ट बनाकर प्रभावित स्थान पर लगाया जा सकता है।

कालमोगरा का तेल (Kalmogra Oil)

यह तेल भी कुष्ठ रोग के इलाज में बेहद लाभकारी है। कालमोगरा के तेल में नींबू की कुछ बूंदे मिलाकर प्रभावित स्थान पर मालिश करने से बेहद लाभ होता है। इसके तेल में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो कि घाव को तेजी से भरते हैं और बैक्टीरिया को खत्म करते हैं।

अपच (Indigestion)
अपच (Indigestion)
खाना इंसान के लिए बेहद जरूरी है। खाने से हमें ताकत मिलती है। इंसान जो खाता है उसे पेट पचाता है। अगर पेट की पाचन क्रिया रुक जाए तो यह गंभीर समस्या का कारण बन जाती है। 

अपच (About Indigestion in Hindi)

पाचन तंत्र में किसी गड़बड़ी के कारण भोजन न पचने को अपच या अजीर्ण (Indigestion) कहते हैं। यह खुद में कोई रोग नहीं है परन्तु इसके कारण कई गंभीर रोग हो सकते है या यह किसी गंभीर रोग का लक्षण हो सकता है। यदि अपच वाली स्थिति काफी दिनों तक बराबर बनी रहती है तो शरीर में खून का बनना बंद हो जाता है और व्यक्ति धीरे-धीरे कमजोर होता जाता है। इसलिए इस रोग को साधारण नहीं समझना चाहिए। 

अपच के लक्षण

  • अपच होने पर भूख नहीं लगती
  • कभी-कभी रोगी को घबराहट भी हो जाती है
  • खट्टी-खट्टी डकारें आती हैं
  • छाती में तेज़ जलन होती है
  • जी मिचलाता है
  • जीभ पर मैल जम जाना, पेट फूलना आदि भी अजीर्ण रोग के प्रमुख लक्षण हैं
  • नींद भी नहीं आती और कभी-कभी दस्त भी होता है
  • पेट फूल जाता है, जी मिचलाता है और कब्ज की शिकायत हो जाती है
  • पेट में गैस बनना
  • पेट में भारीपन महसूस होता है
  • भोजन हजम नहीं होता
  • मुंह में बार बार पानी भर जाता है तथा पेट में हर समय हल्का-हल्का दर्द होता रहता है
  • रोगी को पसीना अधिक आता है
  • सांस में दुर्गंध निकलना

अपच की मुख्य वजहें (Main Causes of Indigestion in Hindi) 

कई बार समय-असमय भोजन करने से,कभी-भी,कहीं-भी,कुछ-भी खाने-पीने तथा बार-बार खाते रहने से पहले खाया हुआ भोजन ठीक से पच नहीं पाता है और दूसरा भोजन पेट में पहुँच जाता है। ऐसे में पाचन तंत्र भोजन को पूर्ण रूप से नहीं पचा पाता जो अजीर्ण का मुख्य कारण है। 

अपच पेट के कुछ खास रोगों के कारण भी हो हो सकता है जैसे कि : 

  • अल्सर (Ulcer)
  • गर्ड
  • पेट के कैंसर
  • गैस्ट्रोपॉरेसिस (Gastroparesis यह अक्सर मधुमेह रोगियों में होता है)
  • पेट का संक्रमण 
  • चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम
  • पुरानी अग्न्याशयशोथ (Chronic Pancreatitis)
  • थायराइड रोग (Thyroid)

 कुछ खास दवाएं भी अपच का कारण बन सकती हैं, जैसे कि

  • एस्पिरिन (Aspirin) और कई अन्य दर्द निवारक गोलियाँ
  • एस्ट्रोजन और मौखिक गर्भ निरोधक
  • स्टेरॉयड दवाएं (Steroids)
  • कुछ एंटीबायोटिक दवाएं (Antibiotic)
  • थायराइड दवाएं

कुछ जीवनशैली संबंधित आदतें भी अपच के लिए जिम्मेदार होती हैं जैसे:

  • उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थ खाने,  बहुत ज्यादा भोजन, या तनावपूर्ण स्थितियों के दौरान खाना खाना
  • बहुत ज्यादा शराब पीना
  • सिगरेट धूम्रपान
  • तनाव और थकान 

सामान्य उपचार

अपच से बचने का सबसे आसान तरीका है खान-पान संबंधित आदतों पर काबू रखना। इसके अलावा डॉक्टर जिन बातों पर ध्यान देने को कहते हैं वह बातें निम्न हैं: 

अपच से बचने के सरल उपाय (Treatment of Indigestion in Hindi)

  • मिर्च, मसाले, गरिष्ठ भोजन, मछली, शराब, अंडा, आदि का सेवन न करें। 
  • हरी सब्जियां जैसे - मूली, पालक, मेथी, लौकी, तोर, परवल आदि का सेवन करें। 
  • रेशे वाली चीजें अधिक मात्रा में खाएं। 
  • चोकर वाले आटे की रोटी खाएं। 
  • रात्रि के भोजन के बाद थोड़ा बहुत जरूर टहलें।
  • धूम्रपान छोड़ दें। 
  • मादक पेय पदार्थों से बचें। 
  • यदि अजीर्ण पुराना हो तो गेहूं की दलिया, मूंग की दाल, छाछ, पतली रोटी आदि के सिवाय और कुछ न खाएं।  
  • दिन में चार-पांच गिलास पानी जरूर पिएं|  जाड़े की ऋतु में गुनगुना पानी पी सकते हैं। 
  • फ्रिज में रखा भोजन, साग-सब्जी, दाल आदि न खाएं। सदैव ताजा तथा पौष्टिक भोजन करें। 
  • मन में क्रोध, ईर्ष्या, तनाव, आदि नकारात्मक विचारों को बिलकुल न आने दें। मन के विचारों का सीधा प्रभाव पेट पर पड़ता है। 

अपच से राहत के घरेलू उपाय (Home Remedies For Indigestion)

इनडाइजेशन या अपच की समस्या को चिकित्सीय भाषा में डायसेप्सिया (Dyspepsia) कहा जाता है। अपच की समस्या पेट में भोजन को पचाने वाले रसों के स्त्रवित न होने से होती है। यह समस्या खासकर बहुत तेज मसाले वाला खाना या बहुत तैलीय खाना खाने से होती है। यदि आप भूख से ज्यादा खा लेते हैं तब भी आपको अपच की समस्या हो सकती है। 

अपच के दौरान व्यक्ति को बहुत ज्यादा गैस, उल्टी, पेट में दर्द, सीने या पेट में जलन आदि समस्याएं हो सकती हैं। अपच से राहत के लिए कुछ घरेलू उपाय लाभकारी साबित होते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही प्रभावी घरेलू नुस्खों के बारे में- 

1. सेब का सिरका (Apple cider vinegar)

सेब के सिरके में यूं तो एसिडिक गुण होते हैं लेकिन यह एसिड से राहत देने में भी प्रभावी है। अपच से राहत के लिए एक चम्मच कच्चे और अनफिल्टर्ड सेब के सिरके को एक कप पानी में मिलाएं। इसके बाद इसमें एक चम्मच कच्चा शहद मिलाएं। इस पेय को दिन में दो से तीन बार पीएं। अपच से राहत मिलेगी।

2. सौंफ (Saunf)

अपच से बचाव के लिए सौंफ भी बेहद गुणकारी है। बहुत मसालेदार और वसा वाले खाने से होने वाली अपच को बेहद जल्दी ठीक कर देती है। अपच से बचाव के लिए सौंफ के दानों को तवे पर हल्का सा गर्म करें और उसका पाउडर बना लें। पानी के साथ इस पाउडर को दिन में दो बार लें। सौंफ के दानों से तैयार चाय या सौंफ को यूं ही मुंह में डालकर चबाने से भी अपच से राहत मिलती है। साथ ही यह माउथ फ्रेशनर की तरह काम भी करती है। 

3. अदरक (Ginger)

अदरक में मौजूद पाचन रस और एंजाइम खाने को पचाने में बेहद लाभकारी हैं। अपच से राहत के लिए अदरक के छोटे छाटे टुकड़ों पर नमक डालकर उन्हें यूं ही चबाया जा सकता है। इसके अलावा दो चम्मच अदरक के रस में नींबू का रस, थोड़ा सा काला और थोड़ा सा सफेद नमक मिलाकर बिना पानी के पीने से बेहद राहत मिलती है। 

इसके अलावा अदरक के रस और शहद को गुनगुने पानी के साथ भी लिया जा सकता है। अदरक की चाय भी बेहद लाभकारी होती है। इतना ही नहीं खाना बनाने में अदरक का प्रयोग मसाले के तौर पर करने से भी अदरक बेहद लाभ देता है।

4. बेकिंग सोडा (Baking Soda)

अपच से बचने के लिए बेकिंग सोडा सबसे आसान घरेलू उपाय है। आधे गिलास पानी में थोडा़ सा बेकिंग सोडा मिलाकर इस पानी को पीएं। इससे तुरंत राहत मिलती है।

5. अजवायन (Ajwain)

अजवायन पेट को दुरूस्त रखने और खाने को पचाने के साथ ही पेट दर्द से भी राहत देती है। सौंठ और अजवायन को मिलाकर पाउडर बनाएं। एक चम्मच पाउडर में काली मिर्च मिलाएं और गर्म पानी के साथ पीएं। इस पेय को दिन में एक या दो बार पी सकते हैं। अजवायन के दानों को मुंह में रखकर चबाने से भी आराम मिलता है।

6. हर्बल चाय (Herbal Tea)

पुदीना या कैमोमाइल की हर्बल या ग्रीन टी भी पाचन शक्ति को दुरूस्त रखती है। खाना खाने के बाद एक कप हर्बल टी पीने से खाना जल्दी पचता है और पेट में वसा भी जमा नहीं होती। ऐसे में आपका वजन भी ठीक रहता है। लेकिन खाने के बाद सामान्य चाय या कॉफी से बचना चाहिए। 

7. नमकीन छाछ (Salted Buttermilk)

खाने के साथ नमकीन छाछ का इस्तेमाल भी आपकी पाचन शक्ति को बढ़ाता है। रात के समय दही की जगह छाछ में काला नमक और भुना हुआ जीरा डालकर पीएं। पेट में जलन से भी राहत मिलेगी। इतना ही नहीं सुबह नाश्ते में और दोपहर के खाने में भी छाछ का इस्तेमाल सर्वोत्तम है। गर्मियों के दिनों में यह पेट के साथ ही पूरे शरीर के लिए भी फायदेमंद है।

पीला बुखार (Yellow Fever)
पीला बुखार (Yellow Fever)
पीतज्वर या पीला बुखार (Yellow fever) तेजी से होने वाला एक संक्रामक बुखार हैं, जो अचानक शुरू होता है। इस रोग का कारक एक सूक्ष्म विषाणु (Flavivirus) होता है, जिसका संवहन एडीस ईजिप्टिआई (Aedes Aegypti) जाति के मच्छरों द्वारा होता है।

क्या है पीला बुखार (About Yellow Fever in Hindi)

पीतज्वर में तेज बुखार के कारण जिगर और गुर्दे की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है| जिगर (Liver) के बीमार होने के कारण रोगी को पीलिया हो जाता है और उसकी त्वचा का रंग पीला पड़ जाता है। इसी कारण इस बुखार को यलो फीवर कहते है। 

पीत ज्वर या पीला बुखार के लक्षण (Symptoms of Yellow Fever)

पीतज्वर में अकसर मरीजों को तेज बुखार होता और शरीर पीला पड़ जाता है। साथ ही कई मामलों में तेज ठंड, कपकपी या पीठ दर्द की समस्या भी देखने को मिलती है। 

यह रोग दस दिन तक रहता है और घातक न हुआ तो रोगी धीरे-धीरे ठीक हो जाता है। अमूमन पीतज्वर दुबारा नहीं होता और अगर होता है तो यह घातक सिद्ध होता है।​ मच्छरों से बचाव इस रोग का सबसे उत्तम उपाय है। पीतज्वर के टीके का असर करीब चार वर्ष तक रहता है। रोग हो जाने पर केवल लक्षणों के अनुसार चिकित्सा संभव है।

यह रोग कर्क (Cancer Line) तथा मकर (Capricorn Line) रेखाओं के बीच स्थित अफ्रीका तथा अमरीका के भूभागों में अधिक होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार प्रतिवर्ष पूरी दुनिया में लगभग 200,000 लोग पीतज्वर या पीले बुखार की चपेट में आते हैं। 30,000 के आसपास लोग इस जानलेवा बीमारी से अपनी जान गँवा देते हैं।

पीला बुखार के लक्षण

  • अनिद्रा, काले दस्त, रक्तस्त्राव, पित्तयुक्त मूत्र, रक्तचाप की कमी और नाड़ी की शिथिलता,
  • कमजोरी महसूस होना
  • कॉफी के रंग की मितली आना,
  • घातक अवस्था में मूत्र आना बंद हो जाना।
  • ठंड के साथ बुखार आना,
  • पीलिया हो जाना,
  • शरीर में पीड़ा होना
  • सिर दर्द होना

कारण 

पीतज्वर या पीला बुखार अधिकांश रूप से संक्रमित स्थानों की यात्रा करने से फैलता है। साथ ही जिन इलाकों में यह मच्छर हो उन इलाकों में रहने या जाने से भी फैल सकता है। 

सामान्य उपचार

पीतज्वर का एक भी लक्षण नज़र आने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाए। अगर रोगी को तेज बुखार हो और उसका शरीर भी पीला पड़ रहा हो तो बिना समय गंवाएं डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। 

पीले बुखार के लिए घरेलू उपाय (Home Remedies For Yellow Fever)

यलो फीवर या पीत ज्वर संक्रमण से होने वाली खतरनाक बीमारी है, लेकिन इसके लिए बहुत से इलाज मौजूद हैं जो इस पर काबू पा सकते हैं। पीत ज्वर या पीला बुखार मादा मच्छर के काटने से होता है। पीले बुखार में रोगी का लीवर डैमेज होने या पीलिया होने का खतरा रहता है। साथ ही रोगी को उल्टियां भी हो सकती हैं। पीले बुखार से निजात के लिए बहुत से घरेलू नुस्खे भी हैं, जिससे प्राकृतिक तरीके से इसका उपचार किया जा सके।

1. तुलसी और काली मिर्च (Basil and Black Pepper)

काली मिर्च पीले बुखार के इलाज में बहुत कारगर साबित हो रही है। आधा लीटर डिस्टिलड पानी में कुछ तुलसी के पत्ते डालकर उबलने दें। इस पानी में आधा चम्मच काली मिर्च का पाउडर मिलाएं। इस पानी को रंग बदलने तक उबलने दें। यह पानी न केवल पीले बुखार को कम करता है बल्कि आपको तुरंत ऊर्जा भी देता है। इस पानी में तीन चम्मच शहद भी मिलाया जा सकता है। इसे दिन में दो बार पीएं। 

2. प्याज़ (Onion)

एक कच्चा प्याज लें और दो हिस्सों में काट लें। इसे ओवन में डालकर लगभग 15 मिनट के लिए 400 डिग्री पर सेंक लें। ऐसा करने से प्याज का रस आसानी से निकल जाता है। इस रस में कुछ बूंदे शहद की मिलाएं। इस मित्रण को पीले बुखार से निजात के लिए इस्तेमाल करें।

3. लहसुन (Garlic)

बार बार उल्टी होने से डिहाइड्रेशन हो जाता है जिससे शरीर आमतौर पर कमजोर हो जाता है और इससे शरीर की इम्यूनिटी भी घटती है। लहसुन अपने वायरल विरोधी, एंटी बैक्टीरियल और एंटी ऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाना जाता है। लहसुन प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के साथ साथ वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण से शरीर की रक्षा करने में सक्रिय भूमिका निभाता है। छह से दस लहसुन की कली लेकर उन्हें कुचल लें। इस लहसुन को आप यूं भी खा सकते हैं या फिर शहद मिलाकर सुबह सुबह खाएं।  

4. नारियल पानी (Coconut Water)

पीले बुखार में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए नारियल पानी बेहद लाभकारी है। यह शरीर को हाइड्रेट करके अन्य पोषक तत्वों की पूर्ति करता है। एक दिन में कम से कम तीन से चार बार नारियल पीएं।

5. गन्ने का रस (Sugarcane Juice)

डिहाइड्रेशन पीले बुखार का सबसे खतरनाक लक्षण है। ऐसे में गन्ने का रस कमजोर शरीर को स्फूर्ति देता है। गन्ने के रस से निर्जलित शरीर के लिए आवश्यक विटामिन और खनिज की आपूर्ति की जा सकती है। गन्ने का रस शरीर की मांसपेशियों में ग्लूकोज की आपूर्ति करता है। शरीर में आवश्यक प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए दिन में तीन बार गन्ने के रस का इस्तेमाल किया जा सकता है।यह भी पीले बुखार से पीड़ित मरीज की उच्च शरीर के तापमान को कम कर देता है।

6. जौ का पानी (Barley Water or Jau ka pani)

जौ एक संपूर्ण अनाज है जिसमें स्वस्थ जीवन शैली के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्व है मौजूद हैं। जौ में विटामिन बी 1, बी 2, बी 5, 9 और विटामिन ई होता है। यह पीले बुखार से पीड़ित मरीज की सूजन और शरीर के उच्च तापमान को कम करता है। एक दिन में तीन बार जौ का पानी पीने से पीले बुखार में आराम मिलता है।

7. नींबू और नमक (Lemon and Salt)

पीले बुखार से पीड़ित व्यक्ति को डिहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है। ऐसे में व्यक्ति और ज्यादा थका हुआ लगता है। एक गिलास पानी में नींबू के रस की कुछ बूंदे मिलाकर पीने से भी पीले बुखार में काफी आराम मिलता है। इस नींबू वाले पानी में एक चुटकी नमक भी मिलाएं। यह पानी डिहाइड्रेशन की कमी को पूरा करता है और रोगी को ऊर्जा देता है।

बदहज़मी (Gastric Problem)
बदहज़मी (Gastric Problem)
पाचनक्रिया के दौरान पेट में गैस का बनना एक सामान्य प्रक्रिया है। शरीर की अन्य प्रक्रियाओं की तरह पेट में गैस का बनना और बाहर निकल जाना भी एक सामान्य प्रक्रिया है।

कई बार पेट में गैस बनने की तीव्रता बढ़ जाती है और पेट के भीतर बनने वाली इस गैस के बाद पेट में तीव्र पीड़ा होने लगती है। अगर यह समस्या अकसर होने लगे तो यह गम्भीर बीमारी का रूप ले लेती है जिसे गैस्ट्रिक (Gastric Problem) के नाम से जाना जाता है।  

बदहजमी या गैस्ट्रिक की समस्या (Gastric Problem)  

मानव शरीर में गैस्ट्रिक म्यूकोसा (Gastric Mucosa) के द्वारा हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनता है जो मानव शरीर पर प्रभाव डालता है और गैस की समस्या से निजात दिलाता है। अगर हाइड्रोक्लोरिक एसिड सही प्रकार से नहीं बनता है तो भोजन भी सही से नहीं पच पाता है।

आधुनिक जीवन शैली ने इस समस्या को बढ़ावा दिया है। गैस्ट्रिक बीमारी का सीधा संबंध खानपान से है। जो लोग भोजन में चटपटा, तला, मिर्च मसालेदार, खट्टा, नींबू, संतरा आदि का सेवन अधिक करते हैं उन लोगों को यह समस्या जल्दी होती है।

इनके अलावा जो लोग चाय, काफी, चालकेट, शराब का अधिक सेवन करते हैं, वे भी इस रोग से ग्रसित हो जाते हैं। तनावग्रस्त रहने वाले लोगों को भी गैस की समस्या (Gastric Problem) अधिक होती है।

बदहज़मी के लक्षण

  • खट्टी डकारें आना,
  • खाना या खट्टा पानी (एसिड) मुंह में आ जाना,
  • गले से खरखराहट महसूस होना और सांस फूलने की भी शिकायत होना,
  • छाती के निचले भाग में दर्द का महसूस होना और उलटी करने का मन करना,
  • स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाना,

गैस्ट्रिक प्रॉब्लम के कुछ प्रमुख कारण (Main Causes of Gastric Problem):

  • अनियमित जीवनशैली
  • ज्यादा तनाव
  • ज्यादा तला- भुना भोजन
  • स्मोकिंग, ड्रिंकिंग
  • राजमा, काले चने, सफेद चने, लोबिया, सूखे हरे मटर, पॉपकॉर्न, सूखी मक्कई जैसे अनाज पेट में गैस पैदा कर सकते हैं।

सामान्य उपचार

बदहजमी या गैस्ट्रिक की समस्या से निजात पाने का सबसे अच्छा तरीका है खानपान का ध्यान रखना। डॉक्टरों के अनुसार गैस्ट्रिक से निजात पाने के आसान उपाय निम्न हैं: 

बदहजमी के उपाय (Treatment of Gastric Problem)

  • गैस की बीमारी में उपचार के साथ अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर इससे छुटकारा पाया जा सकता है।
  • गैस्ट्रिक रोगियों को बचाव के लिये कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए ताकि रोग ज्यादा न बढ़ पाये।
  • दिन भर में मुख्य आहार 2 बार के स्थान पर 3-4 बार थोड़ी मात्रा में करें।
  • तनाव न लें और जल्दबाजी से बचें, गुस्से पर काबू रखें।
  • व्यायाम और गरम पानी पीने से भी गैस्ट्रिक के रोगियों को आराम मिलता है। 

बदहजमी के लिए घरेलू उपाय (Home Remedies For Gastric Problem)

गैस को चिकित्सीय भाषा में अपच के रूप में जाना जाता है। गैस के लक्षण सूजन, डकार, जलन और मतली हो सकते है। गैस और अपच हमारे पेट में पाचक रस के स्राव से होने वाली समस्याएं हैं। पेट में मौजूद एसिड पेट के अंदर जलन पैदा करना शुरू कर देता है। इसमें व्यक्ति को बेचैनी, सीने और पेट में जलन महसूस होती है।

गैस की समस्या ज्यादा तैलीय या मसालेदार खाना खाने से होती है, साथ ही यदि पेट खाली है तब भी गैस की समस्या हो सकती है। बहुत ज्यादा चाय या कॉफ़ी पीने वालों को भी गैस की समस्या हो सकती है। गैस की समस्या यदि बढ़ जाए तो समस्या गंभीर हो सकती है इसलिए समय रहते इस पर काबू करना आवश्यक होता है। आइए आपको बताते हैं कुछ घरेलू उपाय जिन्हें अपनाकर आप गैस की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। 

1. धनिया (Dhaniya)

धनिया के इस्तेमाल से पेट में गैस के कारण होने वाली जलन में राहत महसूस कर सकते हैं। एक गिलास छाछ में भुना हुआ धनिया मिलाकर पीने से गैस से राहत मिलती है।

2. सौंफ के बीज (Saunf seeds)

मसालेदार या वसायुक्त भोजन करने के कारण गैस और अपच जैसी समस्याएं होती हैं, इसके लिए सौंफ के बीच से इसका इलाज संभव है। सौंफ के बीज में मौजूद तेल, मतली और पेट फूलना जैसी समस्याओं से राहत देता है। सौंफ को सुखाकर, भूनकर उसका पाउडर बना लें। दिन में दो बार इस पाउडर के इस्तेमाल से गैस से काफी हद तक राहत मिल जाती है। 

3. काली मिर्च (Black Peeper)

हमारे पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड की कमी को पूरा करने के लिए काली मिर्च का उपयोग बहुत कारगर हो सकता है। काली मिर्च से आमाशय रस का प्रवाह बढ़ता है, जिससे यह पाचन में मदद करती है। गुड़ में काली मिर्च का पाउडर मिलाकर अपच के दौरान छाछ के साथ लिया जा सकता है। इसके अलावा काली मिर्च, सूखे पुदीना के पत्ते, सौंठ पाउडर और धनिया बीज बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से भी अपच में फायदा होता है।

4. लौंग (Laung or Clove)

लौंग आंत गतिशीलता और जठरांत्र स्राव को बढ़ाती है जिससे गैस और अपच की समस्या खत्म हो जाती है। इसके लिए लौंग को चबाएं। पेट में जलन से छुटकारा पाने के लिए लौंग का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है।

5. सेब का सिरका (Apple cider vinegar)

सेब का सिरका गैस और अपच दोनों से राहत देता है। यह हमारे पेट को आवश्यक एसिड प्रदान करता है। गैस के इलाज के लिए इसे पानी और शहद के साथ लिया जा सकता है।

6. छाछ (Butter Milk)

अपच और गैस के इलाज के लिए छाछ बहुत फायदेमंद है। इसमें अधिक लैक्टिक एसिड होता है और यह दूध की तुलना में पचने में आसान होता है।

7. बेकिंग सोडा (Baking Soda)

बेकिंग सोडा में अतिरिक्त एसिड का मुकाबला करने के लिए एक प्रभावी और सामान्य रूप से एंटासिड उपलब्ध रहता है। सोडा का मूल स्वभाव नमक और पानी के गठन से पेट में अतिरिक्त हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनाना होता है। जिससे गैस से राहत मिलती है।

8. हर्बल चाय (Herbal Tea)

हर्बल चाय पाचन सहजता में प्रभावी ढंग से काम करती है। पुदीना, रैस्बेरी और ब्लैकबेरी चाय को अपच को कम करने के लिए खाना खाने के बाद लिया जा सकता है। पुदीना और कैमोमाइल (Mint and Camomile) तेज पेट दर्द होने पर फायदेमंद हैं।

9. लहसुन (Garlic)

लहसुन से मुँह में तेज गंध आ सकती है लेकिन इसकी छोटी सी कली में गैस की समस्या से राहत पाने के अभूतपूर्व गुण होते हैं। गैस को दूर करने में लहसुन बहुत फायदेमंद है। लहसुन का इस्तेमाल सूप में करने से यह पाचनशक्ति को और मजबूत करता है। इसके अलावा पानी में लहसुन को उबालकर उसमें काली मिर्च और जीरा डालें, इस घोल को ठंडा होने दें। इसे एक दिन में दो से तीन बार पीएं।

10. अदरक (Ginger)

अदरक खाने में न केवल सुगंध और चरपराहट जोड़ता है बल्कि खाने को पचाने में भी सहायक है। अदरक खाद्य पदार्थ के रूप में या अदरक की चाय में इस्तेमाल किया जाता है जिससे यह लार, पित्त रस और आमाशय रस में उत्तेजना पैदा करने में मदद करता है। कॉफी और सोडा की तुलना में अदरक की चाय पीना बहुत अधिक लाभदायक है।

11. इलायची (Elaichi)

इलायची पेट में गैस और में अपच में बहुत आरामदायक होता है। इसमें मौजूद वाष्पशील तेल पाचन विकार को दूर कर गैस और अपच से राहत देते हैं। इलायची के बीज का यूं ही सेवन किया जा सकता है या खाना पकाने, चाय आदि में भी इलायची या इलायची पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

12. नींबू (Lemon)

गैस की रोकथाम और अपच के इलाज करने वाले प्राकृतिक उपायों में से एक नींबू है। गर्म पानी के साथ नींबू का रस मिलाकर पीने से उल्टी, गैस और डकार से छुटकारा मिल सकता है। यह एक सफाई एजेंट के रूप में, एक रक्त शोधक के रूप में कार्य करता है और पित्त रस का उत्पादन करके शरीर में पाचन तेज करता है। सुबह एक गिलास ताजे पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से भी पाचनतंत्र मजबूत होता है।

13. हींग (Hing)

हींग से पेट फूलना, पेट दर्द और कब्ज जैसी कई पाचन संबंधी समस्याओं का इलाज कर सकते हैं। एक चुटकी हींग दिन में दो से तीन बार गर्म पानी के साथ ली जा सकती है।

14. अजवाइन (Ajwain)

गैस से छुटकारा पाने के लिए दादी-नानी का नुस्खा है। इसके इस्तेमाल से पेट की लगभग हर समस्या का इलाज कर सकते हैं। तत्काल राहत के लिए अजवाइन में नमक मिलाकर पानी के साथ लें।

15. गर्म पानी (Warm water)

अन्य जड़ी बूटियों और मसालों के साथ इस्तेमाल करने के अलावा सिर्फ गर्म पानी भी आपको गैस और अपच से तत्काल राहत दे सकता है। यह शरीर में मौजूद सभी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर हमारे शरीर की सफाई में मदद करता है। सुबह एक गिलास गर्म पानी और खाने के बाद गर्म पानी पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है।

वायरल बुखार (Viral Fever)
वायरल बुखार (Viral Fever)
वायरस के संक्रमण से होने वाले बुखार को वायरल फीवर (Viral Fever) कहते हैं। वायरल बुखार के वायरस गले में सुप्तावस्था में निष्क्रिय रहते हैं। ठंडे वातावरण के संपर्क में आने, फ्रिज का ठंडा पानी, शीतल पेय पीने आदि से ये वायरस सक्रिय होकर हमारे प्रतिरक्षा तंत्र को प्रभावित कर देते हैं।

वायरल बुखार की जानकारी (Details of Viral Fever)

यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत आसानी तथा बड़ी तेजी से पहुँचती है। इसके विषाणु साँस द्वारा एक से दूसरे में पहुँचते हैं। फैलने के बाद फ्लू एक-दो दिन तथा कभी-कभी कुछ घंटों में सक्रिय हो जाता है। 

बच्चों में वायरल बुखार (Viral Fever in Kids)

शिशुओं के लिए वायरल और अधिक कष्टदायी होता है। इससे वे पीले तथा सुस्त पड़ जाते हैं। उन्हें श्वसन तथा स्तनपान में कठिनाई के साथ ही उल्टी-दस्त भी हो सकते हैं। इसके अलावा शिशुओं में निमोनिया, कंठशोथ और कर्णशोथ जैसी जटिलताएँ भी पैदा हो जाती हैं।

किसी अन्य रोग के साथ मिलकर वायरल बुखार रोगी की हालत को और भी खराब कर देता है। उदाहरण के लिए यदि खाँसी के रोगी बच्चे को वायरल हो जाए तो उसका तंत्रिका तंत्र भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए पेचिश और क्षय रोग के मरीजों को इससे विशेष रूप से बचाना चाहिए।

वायरल बुखार के लक्षण

  • आँखें लाल होना
  • इस बुखार में शरीर का ताप 101 डिग्री से 103 डिग्री या और ज्यादा भी हो जाता है
  • खांसी और जुकाम होना
  • जोड़ों में दर्द और सूजन होना
  • थकान और गले में दर्द होना
  • नाक बहना होना
  • बदन दर्द होना
  • भूख न लगना
  • लेटने के बाद उठने में कमजोरी महसूस करना
  • सिरदर्द होना

कारण 

वायरल बुखार शरीर के कमज़ोर प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) की वजह से होता है। अगर शरीर की प्रतिरक्षण क्षमता या इम्यून सिस्टम मजबूत हो तो यह बीमारी जल्दी नहीं होती।  

सामान्य उपचार

वायरल बुखार का उपाय (Treatment of Viral Fever)

वायरल बुखार अकसर सामान्य बुखार ही लगता है इसलिए बुखार होने पर डॉक़्टर के पास जरूर जाना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि वायरल बुखार है या नहीं। वायरल बुखार (Viral Fever) होने पर निम्न उपाय अपनाने चाहिए: 
  • बुखार अगर 102 डिग्री तक है और कोई और खतरनाक लक्षण नहीं हैं तो मरीज की देखभाल घर पर ही कर सकते हैं।
  • मरीज के शरीर पर सामान्य पानी की पट्टियां रखें। पट्टियां तब तक रखें, जब तक शरीर का तापमान कम न हो जाए। पट्टी रखने के बाद वह गरम हो जाती है इसलिए उसे सिर्फ 1 मिनट तक ही रखें।
  • अगर माथे के साथ - साथ शरीर भी गर्म है तो नॉर्मल पानी में कपड़ा भिगोकर निचोड़ें और उससे पूरे शरीर को पोंछें।
  • मरीज को हर छह घंटे में पैरासिटामॉल (Paracetamol) की एक गोली दे सकते हैं। दूसरी कोई गोली डॉक्टर से पूछे बिना न दें।
  • बच्चों को हर चार घंटे में 10 मिली प्रति किलो वजन के अनुसार दवा दे सकते हैं।
  • दो दिन तक बुखार ठीक न हो तो मरीज को डॉक्टर के पास जरूर ले जाएं।
  • साफ - सफाई का पूरा ख्याल रखें। मरीज को वायरल है, तो उससे थोड़ी दूरी बनाए रखें और रोगी के द्वारा इस्तेमाल की गई चीजें इस्तेमाल न करें।
  • मरीज को पूरा आराम करने दें, खासकर तेज बुखार में। आराम भी बुखार में इलाज का काम करता है।
  • मरीज छींकने से पहले नाक और मुंह पर रुमाल रखें। इससे वायरल होने पर दूसरों में फैलेगा नहीं।
  • वायरल फीवर में एंटीबॉयटिक दवाओं की कोई भूमिका नहीं होती। वायरल फीवर 5 से 7 दिनों में ठीक हो जाता है। 
  • इस रोग का इलाज लक्षणों के आधार पर किया जाता है, रोगी को पर्याप्त मात्रा में ग्लूकोज और इलेक्ट्रोलाइट लेना चाहिए।

वायरल बुखार के लिए घरेलू उपचार (Home Remedies For Viral Fever)

तापमान में अचानक परिवर्तन होने या संक्रमण का दौर होने पर अधिकतर लोग बुखार से पीड़ित होते हैं। ऐसा ही एक मौसमी संक्रमण वाला बुखार होता है वायरल बुखार (Viral Fever)। इस बुखार से निपटने के लिए कुछ एंटीबायोटिक दवाओं या कुछ ओटीसी (ओवर-द-काउंटर) का सहारा लिया जाता है। आप चिकित्सक के पास जाएं उससे पहले कुछ घरेलू नुस्खे आजमाकर भी बुखार को कम या इससे पूरी तरह आराम पाया जा सका है। वायरल बुखार के के लिए प्राकृतिक इलाज सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध है। आइए आपको बताते वायरल बुखार के इलाज के लिए कुछ आसान घरेलू उपचार, जो कि निम्नलिखित हैं-

1. धनिया चाय (Coriander Tea)

धनिया के बीज में phytonutrients होते हैं जो कि शरीर को विटामिन देते हैं और अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी बढ़ाते हैं। धनिया में मौजूद एंटीबायोटिक यौगिक वायरल संक्रमण से लड़ने की शक्ति देते हैं। 

कैसे तैयार करें- एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्म्च धनिया के बीच डालकर उबाल लें। इसके बाद इसमें थोड़ा दूध और चीनी मिलाएं। धनिया की चाय तैयार है, इसे पीने से वायरल बुखार में बहुत आराम मिलता है।

2. डिल बीज का काढ़ा (Brew of Dill seed)

प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और शरीर को आराम देने के अलावा, डिल बीज शरीर के तापमान को कम करने में भी उपयोगी होते हैं। इसका कारण इनमें Flavonoids Osmond Pins उपस्थिति होते हैं। डिल बीज का काढ़ा वायरल बुखार में राहत देने के साथ ही शक्तिशाली रोगाणुरोधी एजेंट का कार्य करता है। 

कैसे तैयार करें- एक कप उबलते पानी में डिल बीज डालें और उबलनें दें इसके बाद इसमें एक चुटकी दालचीनी डालें। गर्म चाय की तरह पिएं।

3. तुलसी के पत्ते का काढ़ा (Brew of Basil leaves)

वायरल बुखार के लक्षण होने पर प्राकृतिक उपचार के लिए सबसे प्रभावी और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है तुलसी के पत्ते। बैक्टीरियल विरोधी, कीटाणुनाशक, जैविक विरोधी और कवकनाशी गुण तुलसी को वायरल बुखार के लिए सबसे उत्तम बनाते हैं। 

कैसे तैयार करें- आधे से एक चम्मच लौंग पाउडर को करीब 20 ताजा और साफ तुलसी के पत्तों के साथ एक लीटर पानी में डालकर उबाल लें। पानी को तब तक उबालें जब तक कि पानी घट कर आधा न रह जाए। इस काढ़े का हर दो घंटे में सेवन करें।

4. चावल स्टार्च (Rice starch)

वायरल बुखार के इलाज के लिए प्राचीन काल से आम घर उपाय है चावल स्टार्च (हिंदी में कांजी के रूप में जाना जाता है)। यह पारंपरिक उपाय प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा देता है। यह विशेष रूप से वायरल बुखार से पीड़ित बच्चों और बड़े लोगों के लिए, एक प्राकृतिक पौष्टिक पेय के रूप में कार्य करता है।

कैसे तैयार करें- एक भाग चावल और आधा भाग पानी डालकर चावल के आधा पकने तक पकाएं। इसके बाद पानी को निथार कर अलग कर लें और इसमें स्वादानुसार नमक मिलाकर, गर्म गर्म ही पिएं। इससे वायरल बुखार में बहुत आराम मिलता है। 

5. सूखी अदरक मिश्रण (Dry ginger mixture)

अदरक स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। इसमें एंटी फ्लेमेबल, एंटीऑक्सिडेंट और वायरल बुखार के लक्षणों को कम करने के लिए Analgesic गुण होते हैं। इसलिए, वायरल बुखार से पीड़ित लोगों को परेशानी को दूर करने के लिए शहद के साथ सूखी अदरक का उपयोग करना चाहिए।

कैसे करें तैयार- एक कप पानी में दो मध्यम आकार के सूखे टुकड़े अदरक या सौंठ पाउडर को डालकर उबालें। दूसरे उबाल में अदरक के साथ थोड़ी हल्दी, काली मिर्च, चीनी आदि को उबालें। इसे दिन में चार बार थोड़ा थोड़ा पिएं। इससे वायरल बुखार में आराम मिलता है। 

6. मेथी का पानी (Fenugreek Water)

रसोई घर में आसानी से उपलब्ध, मेथी के बीज में डायेसजेनिन, सपोनिन्स और एल्कलॉइड जैसे औषधीय गुण शामिल है। मेथी के बीजों का प्रयोग अन्य बहुत सी बीमारियों के इलाज में भी किया जाता है और यह वायरल बुखार के लिए बेहतरीन औषधि है।

कैसे तैयार करें- आधा कप पानी में में एक बड़ा चमचा मेथी के बीच भिगोएँ। सुबह में, वायरल बुखार के इलाज के लिए नियमित अंतराल पर इस पेय को पिएं। कुछ और राहत के लिए मेथी के बीज, नींबू और शहद का एक मिश्रण तैयार कर उसका प्रयोग भी किया जा सकता है। 

नोट- ये केवल घरेलू उपचार हैं, और इन्हें चिकित्सा सलाह के स्थान पर प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। यदि आपका बुखार नहीं उतर रहा है तो आपको डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए और उनके दिशा निर्देश का पालन करना चाहिए।

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Satish Kumar

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